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Iffat Zia
· Ramzan · 4 min read

Quran Khatam Karne Ka Tarika: रमज़ान में कुरान मुकम्मल कैसे करें?

Quran Khatam Karne Ka Tarika: रमज़ान में 1, 2 या 3 बार कुरान मुकम्मल करने का सबसे आसान तरीका और टाइम टेबल। जानिए हर नमाज़ के बाद कितने पेज पढ़ें।

Quran Khatam Karne Ka Tarika: रमज़ान में कुरान मुकम्मल कैसे करें?

Table of Contents

रमज़ान (Ramzan) कुरान का महीना है। हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है कि वह इस मुबारक महीने में कम से कम एक बार कुरान-ए-पाक ज़रूर मुकम्मल (Complete) करे।

लेकिन अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि Quran Khatam Karne Ka Tarika क्या हो? वो जोश में शुरू तो करते हैं लेकिन बीच में छूट जाता है।

आज हम आपको एक ऐसा आसान टाइम टेबल (Time Table) बताएंगे, जिससे आप बिना किसी बोझ के 1, 2 या 3 बार कुरान मुकम्मल कर सकेंगे।

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कुरान मुकम्मल करने का गणित (The Calculation)

कुरान मजीद में 30 पारे (Juz) होते हैं। ज्यादातर कुरान के नुस्खों (Prints) में एक पारे में 20 पेज होते हैं। दिन भर में 5 फ़र्ज़ नमाज़ें होती हैं।

अगर हम इन 20 पेजों को 5 नमाज़ों पर बांट दें, तो टारगेट बहुत आसान हो जाता है।


1. एक बार कुरान मुकम्मल करने का तरीका (1 Quran)

अगर आप रमज़ान में एक बार कुरान खत्म करना चाहते हैं, तो आपको हर रोज़ 1 पारा पढ़ना होगा।

फार्मूला: हर नमाज़ के बाद 4 पेज पढ़ें। (4 पेज x 5 नमाज़ = 20 पेज = 1 पारा)

नमाज़ (Salah)पेज की तादाद
फज्र (Fajr)4 पेज
ज़ोहर (Zohar)4 पेज
असर (Asr)4 पेज
मगरिब (Maghrib)4 पेज
ईशा (Isha)4 पेज
कुल (Total)20 पेज (1 पारा)

टिप: 4 पेज पढ़ने में मुश्किल से 10-15 मिनट लगते हैं।


2. दो बार कुरान मुकम्मल करने का तरीका (2 Qurans)

अगर आप दो बार कुरान खत्म करना चाहते हैं, तो आपको हर रोज़ 2 पारे पढ़ने होंगे।

फार्मूला: हर नमाज़ के बाद 8 पेज पढ़ें। (या 4 पेज नमाज़ से पहले और 4 पेज नमाज़ के बाद)।

नमाज़ (Salah)पेज की तादाद
फज्र8 पेज
ज़ोहर8 पेज
असर8 पेज
मगरिब8 पेज
ईशा8 पेज
कुल40 पेज (2 पारे)

ज़रूरी नसीहत: गिनती नहीं, क्वालिटी देखें

अक्सर देखा जाता है कि रमज़ान में लोग एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं कि “मैंने 5 कुरान खत्म किए” या “मैंने 10 किए”।

याद रखें, कुरान की तिलावत का मकसद अल्लाह को राज़ी करना है, लोगों को दिखाना नहीं।

  1. दिखावे (Riya) से बचें: अगर आप सिर्फ इसलिए जल्दी-जल्दी पढ़ रहे हैं ताकि दूसरों पर फख्र (Pride) कर सकें, तो यह सही नहीं है। ऐसी इबादत कुबूल नहीं होती।
  2. समझ कर पढ़ें: तोते की तरह रटने से बेहतर है कि आप कम पढ़ें लेकिन समझ कर और तर्जुमे (Translation) के साथ पढ़ें। कुरान हमारे लिए हिदायत की किताब है, सिर्फ सवाब की मशीन नहीं।
  3. आराम से पढ़ें (Tarteel): कुरान को इतनी तेज़ी से न पढ़ें कि अल्फाज़ कट जाएं या तजवीद खराब हो जाए। अल्लाह फरमाता है: “और कुरान को ठहर-ठहर कर (साफ़-साफ़) पढ़ो।” (सूरह मुज़म्मिल: 4)

तो अगर आप रमज़ान में सिर्फ एक बार भी कुरान मुकम्मल करें, लेकिन इत्मीनान और समझ के साथ, तो यह उन 10 बार से बेहतर है जो बिना समझे और दिखावे के लिए पढ़े गए हों।


तिलावत में दिल लगाने के बेहतरीन टिप्स

अक्सर शुरू के दिनों में जोश रहता है लेकिन धीरे-धीरे सुस्ती आने लगती है। इन टिप्स को अपनाएं:

  1. मोबाइल दूर रखें: तिलावत के वक़्त मोबाइल को ‘Do Not Disturb’ मोड पर डालें। नोटिफिकेशन की आवाज़ ध्यान भटका सकती है।
  2. फज्र के बाद का वक़्त: फज्र के बाद का वक़्त तिलावत के लिए सबसे बेहतरीन होता है क्योंकि दिमाग ताज़ा होता है और माहौल में सुकून होता है।
  3. तर्जुमा (Translation) पढ़ें: अगर आपको अरबी समझ नहीं आती, तो साथ में हिंदी या उर्दू तर्जुमा भी पढ़ें। जब आप अल्लाह का पैगाम समझेंगे, तो खुद-ब-खुद दिल लगेगा।
  4. दुआ करें: अल्लाह से दुआ करें कि वो आपके लिए कुरान पढ़ना आसान कर दे।

ख्वातीन (Women) के लिए ज़रूरी बात

औरतों को माहवारी (Periods) के दिनों में कुरान छूना या ज़बानी पढ़ना मना है (ज्यादातर उलेमा के नज़दीक)।

हल: इन दिनों में आप कुरान की तिलावत सुन सकती हैं या तफसीर/तर्जुमा पढ़ सकती हैं। जो दिन छूट जाएं, उनका बोझ न लें। अल्लाह आपकी मजबूरी जानता है और नीयत का सवाब पूरा देगा।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या मोबाइल से देखकर कुरान पढ़ने पर वज़ू ज़रूरी है?
A.

ज्यादातर उलेमा के नज़दीक मोबाइल स्क्रीन को बिना वज़ू छूना जायज़ है, लेकिन बा-वज़ू पढ़ना अफ़ज़ल (बेहतर) है।

Q. अगर किसी दिन कुरान न पढ़ पाएं तो क्या करें?
A.

अगर किसी वजह से एक दिन छूट जाए, तो अगले दिन थोड़ा-थोड़ा करके पिछला कोटा पूरा करने की कोशिश करें।

Q. क्या तरावीह में पूरा कुरान सुनने से मेरा कुरान खतम माना जाएगा?
A.

जी हाँ, तरावीह में पूरा कुरान सुनना भी कुरान मुकम्मल करने में शामिल है और इसका बहुत बड़ा सवाब है।

Q. क्या बिना समझे पढ़ने से भी सवाब मिलता है?
A.

बिल्कुल, कुरान के हर हर्फ पर नेकी है, चाहे समझ आए या न आए। लेकिन समझ कर पढ़ने का दर्जा और फायदा ज़्यादा है।


नतीजा (Conclusion)

अल्लाह तआला हम सबको रमज़ान में ज्यादा से ज्यादा कुरान पढ़ने और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए। इस टाइम टेबल को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करें ताकि उन्हें भी आसानी हो।

दुआओं में याद रखें।

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