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Nijasat Ki Kisme: इस्लाम में पाकीज़गी और निजासत के मसाइल

Nijasat Ki Kisme: जानिए निजासत-ए-गलीज़ा और निजासत-ए-खफीफा क्या हैं? इन्हें पाक करने का तरीका और नमाज़ के लिए पाकीज़गी की शर्तें।

Nijasat Ki Kisme: इस्लाम में पाकीज़गी और निजासत के मसाइल

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इस्लाम एक पाकीज़ा मज़हब है और पाक-साफ़ रहने का हुक्म देता है। अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है: “बेशक अल्लाह तौबा करने वालों और पाक रहने वालों को पसंद करता है।” (सूरह बकरा: 222)

कोई भी इबादत (जैसे नमाज़) हम बिना पाक-साफ़ हुए नहीं कर सकते। इसलिए हमें यह जानना ज़रूरी है कि निजासत (गंदगी) क्या है और इसकी कितनी किस्में हैं।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Nijasat Ki Kisme क्या हैं और कपड़ों या बदन को पाक करने का सही तरीका क्या है।

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निजासत की किस्में (Types of Nijasat)

इस्लाम में निजासत (गंदगी) दो तरह की होती है:

  1. निजासत-ए-गलीज़ा (Nijasat-e-Ghaliza): भारी/गाढ़ी गंदगी।
  2. निजासत-ए-खफीफा (Nijasat-e-Khafifa): हल्की गंदगी।

हमारे लिए ज़रूरी है कि हम दोनों तरह की गंदगी से अपने जिस्म और कपड़ों को बचाकर रखें। अगर कपड़े या बदन पर गंदगी लग जाए, तो उसे धोकर पाक करना ज़रूरी है, वरना नमाज़ नहीं होगी।

1. निजासत-ए-गलीज़ा (भारी गंदगी)

यह वो गंदगी है जिसका हुक्म सख़्त है। इसमें शामिल चीज़ें ये हैं:

  • इंसान के जिस्म से निकलने वाली गंदगी: पेशाब, पाखाना, बहता खून, पीप, मुंह भर उल्टी, मनी, मज़ी, वदी, हैज़ और निफ़ास का खून।
  • हराम जानवरों की गंदगी: कुत्ता, सुअर, शेर, भेड़िया वगैरह का पेशाब, पाखाना, और राल (Saliva)।
  • हलाल जानवरों की गंदगी: गाय, भैंस, बकरी, ऊंट का गोबर और मेंगनी (कुछ इमामों के नज़दीक)। मुर्गी और बत्तख की बीट।
  • शराब: और नशा लाने वाली चीज़ें।

पाक करने का हुक्म:

  • अगर यह गंदगी एक दिरहम (हथेली के गहराव या लगभग 3 ग्राम) से ज़्यादा लग जाए, तो उसे धोना फ़र्ज़ है। बिना धोए नमाज़ नहीं होगी।
  • अगर दिरहम के बराबर हो, तो धोना वाजिब है।
  • अगर दिरहम से कम हो, तो धोना सुन्नत है (नमाज़ हो जाएगी लेकिन मकरूह होगी)।

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2. निजासत-ए-खफीफा (हल्की गंदगी)

यह वो गंदगी है जिसका हुक्म थोड़ा हल्का है। इसमें शामिल चीज़ें ये हैं:

  • हलाल जानवरों का पेशाब: जैसे गाय, बैल, भैंस, बकरी, ऊंट।
  • हराम परिंदों की बीट: जैसे कौआ, चील, बाज़।

पाक करने का हुक्म:

  • अगर यह गंदगी कपड़े या बदन के किसी हिस्से (जैसे आस्तीन या दामन) के चौथाई (1/4) हिस्से से कम लगी हो, तो माफ़ है (नमाज़ हो जाएगी)।
  • अगर चौथाई हिस्से या उससे ज़्यादा हो, तो धोना ज़रूरी है।

पाक करने का तरीका

अगर बदन या कपड़े पर निजासत लग जाए, तो उसे पाक करने का तरीका यह है:

  1. अगर निजासत दिखाई देने वाली हो (जैसे खून, गोबर): उसे इतना धोएं कि गंदगी दूर हो जाए और उसका असर (रंग/धब्बा) खत्म हो जाए। अगर धोने के बाद भी हल्का धब्बा रह जाए तो कोई हर्ज नहीं।
  2. अगर निजासत दिखाई न देने वाली हो (जैसे पेशाब): उसे तीन बार धोएं और हर बार निचोड़ें। तीसरी बार इतनी जोर से निचोड़ें कि पानी टपकना बंद हो जाए।

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कुछ ज़रूरी मसाइल

  • नापाक कपड़े से पाक कपड़ा: अगर गीले नापाक कपड़े में सूखा पाक कपड़ा लपेटा और पाक कपड़ा इतना गीला हो गया कि निचोड़ने पर पानी टपके या रंग/बू आ जाए, तो वो भी नापाक हो जाएगा।
  • पसीना: अगर नापाक कपड़ा पहनकर पसीना आया और पसीने से कपड़ा भीग गया, तो बदन भी नापाक हो जाएगा।
  • बिस्तर: अगर बच्चे ने बिस्तर पर पेशाब कर दिया, तो सिर्फ वो हिस्सा धोना ज़रूरी है जहाँ पेशाब लगा है, पूरा बिस्तर धोना ज़रूरी नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या दूध पीते बच्चे का पेशाब पाक है?
A.

नहीं, दूध पीते बच्चे (लड़का या लड़की) का पेशाब भी निजासत-ए-गलीज़ा है। अगर कपड़े पर लग जाए तो उसे धोना ज़रूरी है। यह गलतफहमी है कि वो पाक होता है।

Q. क्या परफ्यूम या सेंट लगाना जायज़ है?
A.

हाँ, अगर परफ्यूम में अल्कोहल (Alcohol) है जो अंगूर या खजूर से नहीं बना (आजकल ज़्यादातर सिंथेटिक या गन्ने/आलू से बनते हैं), तो उसका इस्तेमाल जायज़ है और उससे नमाज़ हो जाती है। लेकिन एहतियात के तौर पर ‘अत्तर’ (Ittar) लगाना बेहतर है।

Q. अगर कपड़े पर खून का धब्बा रह जाए तो क्या नमाज़ होगी?
A.

अगर आपने कपड़े को अच्छी तरह धो लिया है और खून साफ हो गया है, लेकिन उसका हल्का निशान बाकी है जो छूट नहीं रहा, तो कपड़ा पाक माना जाएगा और नमाज़ हो जाएगी।


नतीजा (Conclusion)

दीन-ए-इस्लाम ने हमें पाकीज़गी का बहुत ऊँचा मकाम दिया है। “सफाई आधा ईमान है”। हमें चाहिए कि हम निजासत के मसाइल को सीखें और अपने जिस्म, कपड़ों और घर को पाक रखें ताकि हमारी इबादतें कबूल हों।

अल्लाह हमें पाकीज़गी इख्तियार करने की तौफीक दे। आमीन।

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