· Iffat Zia · Ramzan  · 3 min read

रमज़ान इतनी जल्दी जल्दी क्यू आ रहा है कहीं ये कयामत की निशानी तो नही।

अरे इतनी जल्दी रमजान आ गया अभी तो रमजान गया था फिर रमजान आ गया वक्त तो बहुत तेजी के साथ गुजर रहा है ऐसा लग रहा है एक महीना पहले ही रमजान गया है और इस महीना फिर रमजान आ गया। दोस्तों ऐसी बातें लोग आजकल आपस में कर रहे हैं। रमजान का आना यकीनन बहुत अच्छी बात है अल्लाह ने एक और रमजान हमें नसीब फरमाया अल्लाह का बहुत बड़ा इनाम है। लेकिन हैरानी इस बात पर है कि इतनी जल्दी-जल्दी वक्त गुजर रहा है।

रमज़ान इतनी जल्दी जल्दी क्यू आ रहा है कहीं ये कयामत की निशानी तो नही।

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अरे इतनी जल्दी रमजान आ गया अभी तो रमजान गया था फिर रमजान आ गया वक्त तो बहुत तेजी के साथ गुजर रहा है ऐसा लग रहा है एक महीना पहले ही रमजान गया है और इस महीना फिर रमजान आ गया।

दोस्तों ऐसी बातें लोग आजकल आपस में कर रहे हैं। रमजान का आना यकीनन बहुत अच्छी बात है अल्लाह ने एक और रमजान हमें नसीब फरमाया अल्लाह का बहुत बड़ा इनाम है। लेकिन हैरानी इस बात पर है कि इतनी जल्दी-जल्दी वक्त गुजर रहा है।

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दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको यह बताने वाले हैं कि इतनी जल्दी रमजान कैसे आ रहा है कहीं यह कयामत की निशानियां में से एक तो नहीं इसलिए आर्टिकल को बिना स्कीप किए आर्टिकल के एंड तक पढ़ें ।

दोस्तों रमजान का दिन इतनी जल्दी जल्दी आना कयामत की निशानियां में से एक निशानी है। वैसे तो कयामत की जितनी भी छोटी-छोटी निशानियां है वह जाहिर हो चुकी है लेकिन इतनी तेजी के साथ वक्त गुजर रहा है जैसे पूरा साल नहीं एक महीना गुजरा हो।

यह वक्त की बरकत का खत्म हो जाना है और वक्त की बरकत का खत्म हो जाना कयामत की निशानियां में से एक है।

तो दोस्तों आइए मैं दो हदीसे आपको बताती हूं तब तक आप आर्टिकल को जल्दी से लाइक कर दीजिए।

पहली हदीस यह है कि हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया की कयामत उस वक्त तक कायम नहीं होगी जब तक साल महीने की तरह ,महीना हफ्ते की तरह, हफ्ते दिन की तरह, दिन घंटो की तरह और हर घंटे एक माचिस की तीली जले जितना नहीं हो जाएगा।

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मतलब वक्त की बरकत खत्म हो जाएगी और ऐसा तब होगा जब गुनाह की कसरत बढ़ जाएंगे और आज हम वक्त को उसी तरह बीतते हुए देख रहे हैं जिस तरह इस हदीस में बताया गया है।

दोस्तों अगर आर्टिकल आपको पसंद आए तो आप आर्टिकल को शेयर कर दीजिए क्योंकि वक्त का जल्दी खत्म होना कयामत करीब है। इसलिए लोग अपने गुनाहों की माफी मांग लें और अपनी मगफिरत की दुआ करें।

आइए अब आपको दूसरी हदीस बताते हैं।

हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कयामत की निशानियां में से एक निशानी यह भी होगी कि कत्ल आम हो जाएगा और जमाना करीब होगा मतलब वक्त बहुत जल्दी गुजरेगा।

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तो दोस्तों अपने आमाल की फिक्र करें और मगफिरत की दुआ करें।

दोस्तों क्या आप यह कभी गवारा करेंगे कि एक मुसलमान को इतना बदनसीब शख्स माना जाए कि उसे रमजान की कोई भी बरकत हासिल ना हो। लेकिन ऐसे कौन से लोग हैं जिन्हें रमजान की बरकत हासिल नहीं होती जानने के लिए ये आर्टिकल अभी पढ़ें और शेयर करे।

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