इस्लामिक महीनों के नाम (हिजरी कैलेंडर) - Islamic Months Name
इस्लामिक कैलेंडर के 12 महीनों के नाम हिंदी और अरबी में जानें। मुहर्रम, सफ़र से ज़ुल हिज्जा तक, हर हिजरी महीने की अहमियत और जानकारी पाएं।

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हम में से ज़्यादातर लोगों को अंग्रेजी कैलेंडर के 12 महीनों (जनवरी, फरवरी) के नाम तो याद रहते हैं, लेकिन जब बात इस्लामी महीनों की आती है, तो रमज़ान और मुहर्रम के अलावा बाकी नाम याद नहीं रहते।
एक मुसलमान होने के नाते हमें हिजरी कैलेंडर और इस्लामी महीनों के नाम जानने चाहिए क्योंकि हमारे सभी त्यौहार, इबादतें और खास दिन इसी कैलेंडर से जुड़े हैं।
इस्लामिक कैलेंडर क्या है?
इस्लामिक कैलेंडर, जिसे हिजरी कैलेंडर भी कहते हैं, चाँद पर आधारित है। इसमें भी 12 महीने होते हैं। अल्लाह तआला ने कुरान में फरमाया है:
“बेशक महीनों की गिनती अल्लाह के नज़दीक बारह महीने है, अल्लाह की किताब में जब से उसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया।” (सूरह अत-तौबा: 36)
यह कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 10 से 11 दिन छोटा होता है, इसीलिए हर साल इस्लामी तारीखें पीछे खिसकती रहती हैं।
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इस्लामिक कैलेंडर के 12 महीनों के नाम
यहाँ हिजरी कैलेंडर के सभी 12 महीनों के नाम और उनके बारे में थोड़ी जानकारी दी गई है:
मुहर्रम (Muharram): यह इस्लामी साल का पहला महीना है। यह उन चार महीनों में से एक है जिन्हें हुरमत (सम्मान) वाला महीना कहा गया है।
सफ़र (Safar): यह इस्लामी कैलेंडर का दूसरा महीना है।
रबी-उल-अव्वल (Rabi al-Awwal): यह तीसरा महीना है। इसी महीने में हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) की पैदाइश हुई थी। (देखें: सीरत-उन-नबी)
रबी-उस-सानी (Rabi al-Thani): इसे रबी-उल-आखिर भी कहते हैं। यह चौथा महीना है।
जुमादा-अल-ऊला (Jumada al-Ula): यह हिजरी कैलेंडर का पांचवा महीना है।
जुमादा-अस-सानी (Jumada al-Thani): इसे जुमादा-अल-आखिर भी कहते हैं। यह छठा महीना है।
रजब (Rajab): यह भी हुरमत वाले चार महीनों में से एक है।
शाबान (Sha’ban): यह आठवां महीना है, जो रमज़ान से ठीक पहले आता है।
रमज़ान (Ramadan): यह नौवां और सबसे मुबारक महीना है, जिसमें मुसलमान रोज़े रखते हैं और कुरान नाज़िल हुआ। (देखें: रमज़ान की फजीलत)
शव्वाल (Shawwal): रमज़ान के बाद दसवां महीना। इसकी पहली तारीख को ईद-उल-फित्र मनाई जाती है।
ज़ुल-क़ादा (Dhul Qa’dah): यह ग्यारहवां महीना है और यह भी हुरमत वाले महीनों में शामिल है।
ज़ुल-हिज्जा (Dhul Hijjah): यह इस्लामी साल का आखिरी महीना है। इसी महीने में हज किया जाता है और इसकी 10 तारीख को ईद-उल-अज़हा मनाई जाती है।
हिजरी कैलेंडर की शुरुआत कैसे हुई?
इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत इस्लाम के दूसरे खलीफा हज़रत उमर फारूक (रजि.) के दौर में हुई। उन्होंने सहाबा से मशवरा करके नबी (ﷺ) के मक्का से मदीना हिजरत करने वाले साल को इस्लामी कैलेंडर का पहला साल तय किया। इसी वजह से इसे “हिजरी कैलेंडर” कहा जाता है।
इस्लामी दिन सूरज डूबने के बाद शुरू होता है
अंग्रेजी कैलेंडर में नया दिन रात 12 बजे शुरू होता है, लेकिन इस्लामी कैलेंडर में नया दिन सूरज डूबने (मगरिब की अज़ान) के साथ ही शुरू हो जाता है। इसका मतलब है कि जुमे की रात (Jummerat/Thursday) को सूरज डूबने के बाद शुरू हो जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. इस्लामी साल का पहला महीना कौन सा है?
Q. हिजरी कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से अलग क्यों है?
हिजरी कैलेंडर चाँद की चाल पर आधारित है और इसमें लगभग 354 दिन होते हैं, जबकि अंग्रेजी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर सूरज पर आधारित है और इसमें 365 दिन होते हैं। इसी वजह से दोनों में हर साल 10-11 दिन का फर्क आ जाता है।
Q. इस्लामी महीने में कितने दिन होते हैं?
नतीजा (Conclusion)
इस्लामी महीनों के नाम जानना सिर्फ जानकारी बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह हमारी दीनी पहचान का एक हिस्सा है। इससे हमें यह याद रहता है कि हमारी इबादतें और त्यौहार कब हैं। उम्मीद है कि इस आर्टिकल से आपको हिजरी कैलेंडर को समझने में मदद मिली होगी।





