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Parda in Islam in Hindi - इस्लाम में परदे की अहमियत और हुक्म
Parda in Islam (इस्लाम में पर्दा): जानिए कुरान और हदीस की रौशनी में परदे की क्या अहमियत है। पर्दा किस-किस से करना चाहिए और इसके क्या फायदे हैं?

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पर्दा (Parda/Hijab) इस्लाम का एक बहुत अहम हुक्म है। यह सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि हया (Modesty), इज़्ज़त और अल्लाह की इताअत (आज्ञापालन) की निशानी है।
अक्सर लोग समझते हैं कि पर्दे का हुक्म सिर्फ औरतों के लिए है, जबकि ऐसा नहीं है। इस्लाम में मर्द और औरत दोनों के लिए पर्दे के अलग-अलग अहकाम हैं।
इस आर्टिकल में हम कुरान और हदीस की रौशनी में Islam Me Parde Ki Ahmiyat को तफसील से जानेंगे।
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कुरान में पर्दे का हुक्म (Parda in Quran)
अल्लाह तआला ने कुरान मजीद में कई जगहों पर पर्दे का हुक्म दिया है।
1. मर्दों के लिए हुक्म
सबसे पहले अल्लाह ने मर्दों को अपनी निगाहें नीची रखने का हुक्म दिया:
“मुसलमान मर्दों से कह दो कि अपनी निगाहें कुछ नीची रखें और अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करें। यह उनके लिए ज़्यादा पाकीज़ा है। बेशक अल्लाह को उनके कामों की खबर है।” (सूरह अन-नूर: 30)
2. औरतों के लिए हुक्म
इसके फौरन बाद औरतों को हुक्म दिया गया:
“और मुसलमान औरतों से कह दो कि अपनी निगाहें कुछ नीची रखें और अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करें और अपना बनाव-सिंगार ज़ाहिर न करें, सिवाय उसके जो खुद ज़ाहिर हो जाए। और अपनी ओढ़नियों को अपने गिरेबानों (सीनों) पर डाले रहें।” (सूरह अन-नूर: 31)
एक और जगह इरशाद है:
“ऐ नबी! अपनी बीवियों और अपनी बेटियों और मुसलमानों की औरतों से कह दो कि अपने ऊपर अपनी चादरों का एक हिस्सा लटका लिया करें। यह ज़्यादा मुनासिब है ताकि वह पहचान ली जाएं और उन्हें सताया न जाए।” (सूरह अल-अहज़ाब: 59)
हदीस में पर्दे की अहमियत (Parda in Hadith)
नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “हया (शर्म) और ईमान दोनों साथी हैं, जब एक उठ जाता है तो दूसरा भी उठ जाता है।” (मिश्कात)
पर्दा हया का सबसे बड़ा इज़हार है। यह एक औरत को बुरी नज़रों और शैतानी ख्यालात से बचाता है।
पर्दा किस-किस से करना चाहिए? (महरम और गैर-महरम)
इस्लाम में एक औरत को सिर्फ अपने महरम (Mahram) मर्दों के सामने बिना पर्दे के आने की इजाज़त है। महरम वो मर्द हैं जिनसे खून, दूध या शादी के रिश्ते की वजह से निकाह हमेशा के लिए हराम होता है।
महरम मर्दों की लिस्ट:
- खून के रिश्ते: बाप, दादा, बेटा, पोता, भाई, भतीजा, भांजा, चाचा, मामू।
- दूध के रिश्ते: रज़ाई भाई (जिसने एक ही औरत का दूध पिया हो), रज़ाई बाप।
- शादी के रिश्ते: शौहर, ससुर, दामाद, सौतेला बेटा (जो शौहर की दूसरी बीवी से हो)।
इनके अलावा बाकी सभी मर्द गैर-महरम (Ghair-Mahram) हैं, जिनसे पर्दा करना फ़र्ज़ है। जैसे: चचेरे/ममेरे/खालेरे/फुफेरे भाई (Cousins), देवर, जेठ, बहनोई, फूफा, खाला का शौहर आदि।
पर्दे के फायदे (Benefits of Hijab)
- अल्लाह का हुक्म: पर्दा करना अल्लाह के हुक्म को मानना है, जो एक इबादत है।
- हिफाज़त: यह औरत को बुरी नज़रों और छेड़छाड़ से बचाता है।
- पहचान: हिजाब एक मुस्लिम औरत की पहचान है और उसकी इज़्ज़त को बढ़ाता है।
- समाज की पाकीज़गी: जब मर्द और औरत दोनों पर्दे के हुक्म पर अमल करते हैं, तो समाज गुनाहों और बेहयाई से पाक रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या इस्लाम में पर्दा करना फ़र्ज़ है?
जी हाँ, कुरान और हदीस की रौशनी में बालिग औरत के लिए गैर-महरम मर्दों से पर्दा करना फ़र्ज़ है।
Q. क्या पर्दा सिर्फ औरतों के लिए है?
नहीं, मर्दों के लिए भी पर्दे का हुक्म है, जो है अपनी निगाहें नीची रखना और अपने सतर (नाभि से घुटनों तक) को छुपाना।
Q. क्या चचेरे भाई (Cousin) से पर्दा है?
जी हाँ, चचेरे, ममेरे, फुफेरे और खालेरे भाई गैर-महरम होते हैं और उनसे पर्दा करना वाजिब है।
अल्लाह तआला तमाम मुस्लिम मर्दों और औरतों को पर्दे के अहकाम पर पूरी तरह अमल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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