Halal aur Haram Ki Kamai in Hindi - हलाल और हराम की कमाई और उसके असरात
Halal aur Haram Ki Kamai (हलाल और हराम की कमाई): जानिए इस्लाम में हलाल और हराम कमाई क्या है? हराम कमाई के नुकसान और हलाल कमाई की बरकतें कुरान और हदीस की रौशनी में।

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इस्लाम में हलाल कमाई (Halal Earning) की बहुत ज़्यादा अहमियत है। इबादत की कबूलियत के लिए पेट में हलाल निवाला होना पहली शर्त है। अगर कमाई हराम हो, तो न नमाज़ कबूल होती है और न दुआ।
नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “हलाल कमाई तलब करना (कमाना) दूसरे फराइज (नमाज़, रोज़ा) के बाद एक फ़र्ज़ है।” (बैहकी)
इस आर्टिकल में हम Halal Aur Haram Ki Kamai के फर्क, हलाल रिज़्क़ की बरकतों और हराम के नुकसान के बारे में जानेंगे।
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हलाल और हराम में फर्क
- हलाल (Halal): वो कमाई जो ईमानदारी, मेहनत और शरीयत के दायरे में रहकर कमाई जाए। जैसे: तिजारत (Business), नौकरी, खेती-बाड़ी।
- हराम (Haram): वो कमाई जो अल्लाह के नाफरमानी वाले कामों से आए। जैसे: सूद (Interest), जुआ (Gambling), चोरी, रिश्वत, धोखा, शराब बेचना।
हराम कमाई के नुकसान
हराम कमाई इंसान की दुनिया और आखिरत दोनों बर्बाद कर देती है:
- दुआ कबूल नहीं होती: हदीस में एक शख्स का ज़िक्र है जो लम्बे सफर में है, बाल बिखरे हुए हैं, और हाथ उठाकर कहता है “या रब! या रब!”, लेकिन उसका खाना हराम, पीना हराम और लिबास हराम है। तो उसकी दुआ कैसे कबूल होगी? (सहीह मुस्लिम)
- इबादत का सवाब नहीं: हराम कपड़े पहनकर या हराम खाकर की गई इबादत अल्लाह के यहाँ मकबूल नहीं होती।
- बरकत खत्म: हराम पैसे में बरकत नहीं होती। वो बीमारियों, मुकदमों और परेशानियों में निकल जाता है।
- जहन्नम की आग: नबी (ﷺ) ने फरमाया: “वो गोश्त जन्नत में दाखिल नहीं होगा जो हराम माल से पला-ब बढ़ा हो, उसके लिए आग (जहन्नम) ज़्यादा बेहतर है।“
हलाल कमाई की फजीलत
- अल्लाह की मोहब्बत: हलाल कमाने वाला अल्लाह का दोस्त है।
- नूर और सुकून: हलाल खाने से दिल में नूर पैदा होता है और इबादत में दिल लगता है।
- बरकत: हलाल कमाई चाहे कम हो, उसमें अल्लाह बरकत देता है और उससे घर में सुकून रहता है।
हलाल रिज़्क़ की दुआ
अल्लाह से हमेशा हलाल रिज़्क़ की दुआ मांगनी चाहिए:
“اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ، وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ”
“अल्लाहुम्मा-कफिनी बि-हलालिका अन हरामिका व अग-निनी बि-फज़लिका अम्मन सिवाक”
(ऐ अल्लाह! तू मुझे अपने हलाल के ज़रिए हराम से बचा ले और अपने फज़ल से अपने सिवा हर किसी से बे-नियाज़ कर दे।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या बैंक का इंटरेस्ट (सूद) हराम है?
जी हाँ, इस्लाम में सूद (Interest) लेना और देना दोनों सख्त हराम हैं। यह अल्लाह और उसके रसूल से जंग करने के बराबर है।
Q. अगर मजबूरी में हराम काम करना पड़े तो?
अगर जान जाने का खतरा हो (जैसे भूख से मरने की हालत), तो जान बचाने की हद तक गुंजाइश है। लेकिन आम हालात में “मजबूरी” का बहाना बनाकर हराम काम करना जायज़ नहीं।
Q. क्या हराम कमाई से सदका कर सकते हैं?
नहीं, अल्लाह पाक है और सिर्फ पाक चीज़ (हलाल माल) ही कबूल करता है। हराम माल से सदका करने का कोई सवाब नहीं मिलता, बल्कि गुनाह से बचने के लिए उसे बिना सवाब की नीयत के गरीबों को दे देना चाहिए।
नतीजा (Conclusion)
थोड़ा खाएं मगर हलाल खाएं। हराम की ढेर सारी दौलत से हलाल की थोड़ी सी कमाई बेहतर है। अल्लाह हमें हराम से बचाए और हलाल रिज़्क़ अता फरमाए। आमीन।
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