· Shikh Saba · Masail · 5 min read
ईद कैसे मनाएं: ईद की नमाज़ और सुन्नत तरीका
ईद कैसे मनाएं? जानिए ईद की नमाज़ का तरीका, ईद की सुन्नतें, सदक़ा-ए-फ़ित्र की अहमियत और ईद मनाने का मुकम्मल इस्लामी तरीका।

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रमज़ान के मुबारक महीने के बाद अल्लाह की तरफ से मिलने वाला इनाम ईद-उल-फित्र है। यह सिर्फ जश्न का दिन नहीं, बल्कि अल्लाह का शुक्र अदा करने, इबादत करने और खुशियाँ बांटने का दिन है।
बहुत से मुसलमान यह नहीं जानते कि ईद मनाने का सही सुन्नत तरीका क्या है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि ईद कैसे मनाई जाती है, ईद की नमाज़ का तरीका और वो सुन्नतें क्या हैं जिन पर अमल करके हम अपनी ईद को और भी मुबारक बना सकते हैं।
ईद क्यों मनाई जाती है?
ईद-उल-फित्र का दिन रमज़ान के 30 रोज़ों की क़बूलियत और अल्लाह की रहमतों का शुक्रिया अदा करने के लिए मनाया जाता है।
एक मशहूर वाकिये के मुताबिक, 624 ई. में जंग-ए-बद्र में मुसलमानों को मिली जीत की खुशी में भी पहली ईद मनाई गई थी। यह दिन खुशी और अल्लाह के शुक्र का दिन है।
ईद के चाँद से पहले 2 ज़रूरी काम
ईद की खुशियाँ शुरू करने से पहले दो काम करना बेहद ज़रूरी है:
- सदक़ा-ए-फ़ित्र (फितरा) अदा करना: यह हर साहिब-ए-हैसियत मुसलमान पर वाजिब है। ईद की नमाज़ से पहले इसे अदा करना ज़रूरी है ताकि गरीब भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। यह रोज़ों में हुई भूल-चूक की माफी का भी ज़रिया है।
- दिलों को साफ़ करना: ईद गिले-शिकवे मिटाने का दिन है। अगर किसी से कोई नाराज़गी है, तो उसे माफ़ करें और दिल साफ़ करके सबसे मिलें। यह अमल अल्लाह को बहुत पसंद है।
ईद के दिन की सुन्नतें
हमारे प्यारे नबी (ﷺ) ईद के दिन कुछ खास अमल किया करते थे, जिन्हें अपनाना सुन्नत है:
- सुबह जल्दी उठना: फज्र की नमाज़ के बाद ईद की तैयारी करना।
- गुस्ल करना: ईद के दिन नहाना सुन्नत है।
- मिस्वाक करना: दाँतों को साफ़ करना।
- सबसे अच्छे कपड़े पहनना: ज़रूरी नहीं कि कपड़े नए हों, लेकिन जो भी आपके पास सबसे अच्छे और साफ़ कपड़े हैं, उन्हें पहनें।
- इत्र लगाना (सिर्फ मर्दों के लिए): खुशबू लगाना सुन्नत है।
- नमाज़ से पहले कुछ मीठा खाना: ईद-उल-फित्र की नमाज़ के लिए जाने से पहले खजूर ( विषम संख्या में, जैसे 1, 3, या 5) या कोई और मीठी चीज़ खाना सुन्नत है।
- ईदगाह पैदल जाना: हो सके तो ईदगाह पैदल जाएं।
- रास्ता बदलना: ईदगाह जाने और वापस आने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करना सुन्नत है।
- तकबीर कहना: घर से ईदगाह तक रास्ते में बुलंद आवाज़ से तकबीर पढ़ना: “अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इला-ह इल्लल्लाहु, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, व लिल्लाहिल हम्द”
ईद की नमाज़ का तरीका
ईद की नमाज़ इस दिन की सबसे अहम इबादत है। यह 2 रकात वाजिब नमाज़ होती है जो आम नमाज़ों से थोड़ी अलग होती है क्योंकि इसमें 6 ज़ायद (अतिरिक्त) तकबीरें होती हैं।
यह नमाज़ ईदगाह या जामा मस्जिद में जमात के साथ अदा की जाती है और इसका खुत्बा नमाज़ के बाद होता है, जिसे सुनना वाजिब है।
ये भी पढ़ें: ईद की नमाज़ का मुकम्मल तरीका
- औरतों के लिए हुक्म: औरतों पर ईद की नमाज़ फ़र्ज़ नहीं है। वे घर पर नफिल नमाज़ (जैसे चाश्त की नमाज़) अदा कर सकती हैं।
चूंकि यह नमाज़ साल में सिर्फ दो बार पढ़ी जाती है, इसलिए अक्सर लोग इसका तरीका भूल जाते हैं। नमाज़ का मुकम्मल और तफसीली तरीका जानने के लिए हमारा यह आर्टिकल पढ़ें:
नमाज़ के बाद ईद कैसे मनाएं?
- खुत्बा सुनना: नमाज़ के बाद इमाम का खुत्बा सुनना वाजिब है। इसे खामोशी और ध्यान से सुनना चाहिए।
- दुआ करना: खुत्बे के बाद अपने लिए, अपने परिवार और पूरी उम्मत के लिए दुआ करें।
- मुबारकबाद देना: एक-दूसरे से गले मिलकर या हाथ मिलाकर “ईद मुबारक” या “तक़ब्बलल्लाहु मिन्ना वा मिन्कुम” (अल्लाह हमसे और आपसे क़बूल करे) कहें।
- रिश्तेदारों से मिलना: अपने दोस्तों, परिवार और रिश्तेदारों के घर जाएं और खुशियाँ बांटें।
- ईदी देना: बच्चों को प्यार से ईदी (तोहफा या कुछ रक़म) दें ताकि उनकी खुशी दोगुनी हो जाए।
ईद के दिन क्या न करें?
ईद खुशी का दिन है, लेकिन हमें अल्लाह की हदों को नहीं भूलना चाहिए।
- फिजूलखर्ची से बचें: खाने-पीने और सजावट में हद से ज़्यादा खर्च न करें।
- हराम कामों से दूर रहें: गाना-बजाना, गैर-महरमों से बेपर्दगी और दूसरे हराम कामों से बचें।
- गरीबों को न भूलें: सिर्फ फितरा देकर अपनी ज़िम्मेदारी खत्म न समझें, बल्कि दिन भर गरीबों और ज़रूरतमंदों का ख्याल रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. ईद में सेवइयां क्यों बनाई जाती हैं?
ईद के दिन कुछ मीठा खाना सुन्नत है। सेवइयां या शीर खुरमा एक पारंपरिक मीठा पकवान है, लेकिन इसे बनाना फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है। आप कोई भी मीठी चीज़ बना सकते हैं।
Q. क्या ईद पर नए कपड़े पहनना फ़र्ज़ है?
नहीं, ईद पर नए कपड़े पहनना फ़र्ज़ नहीं है। सुन्नत यह है कि आपके पास जो सबसे अच्छे और साफ़-सुथरे कपड़े हों, उन्हें पहनें। अगर हैसियत है तो नए कपड़े खरीदने में कोई हर्ज नहीं है।
Q. सदक़ा-ए-फ़ित्र (फितरा) कब तक अदा कर सकते हैं?
सबसे बेहतर है कि ईद की नमाज़ से पहले अदा कर दिया जाए ताकि गरीब भी ईद की तैयारी कर सकें। अगर किसी वजह से रह जाए तो बाद में भी अदा कर सकते हैं, लेकिन बिना वजह देर नहीं करनी चाहिए।
नतीजा (Conclusion)
ईद का दिन अल्लाह का शुक्र अदा करने, अपनी इबादतों की क़बूलियत की दुआ करने और सबके साथ मिलकर खुशियाँ मनाने का दिन है। इसे सुन्नत के मुताबिक मनाएं ताकि हमें इसका पूरा सवाब मिल सके।
आप सभी को TheIslah.com की तरफ से ईद मुबारक!





