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दुआ मांगने का मुकम्मल तरीका: आदाब, सही समय और कबूलियत के राज़

दुआ मांगने का मुकम्मल तरीका जानें। इस गाइड में हम दुआ के आदाब, कबूलियत का सही समय, क्या मांगना चाहिए, और किन गलतियों से बचना चाहिए, इन सब पर कुरान और हदीस की रौशनी में बात करेंगे।

दुआ मांगने का मुकम्मल तरीका: आदाब, सही समय और कबूलियत के राज़

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दुआ (Dua) मोमिन का हथियार है और इबादत का मगज़ (निचोड़) है। अल्लाह तआला को यह बात बहुत पसंद है कि उसका बंदा उससे मांगे। हदीस में आता है कि जो शख्स अल्लाह से नहीं मांगता, अल्लाह उससे नाराज़ होता है।

लेकिन अक्सर हमें दुआ मांगने का सही तरीका और उसके आदाब नहीं पता होते, जिस वजह से हम इसकी बरकतों से महरूम रह जाते हैं।

इस आर्टिकल में हम कुरान और हदीस की रौशनी में दुआ मांगने का मुकम्मल तरीका, दुआ के आदाब, कबूलियत के बेहतरीन औकात, क्या मांगना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए, ये सब जानेंगे।


दुआ मांगने का सही तरीका (आदाब)

दुआ मांगने के कुछ आदाब हैं जिनका ख्याल रखने से दुआ के कबूल होने की उम्मीद बढ़ जाती है:

  1. बा-वुज़ू होना: बेहतर है कि आप वुज़ू की हालत में हों।
  2. किबला रुख होना: काबा शरीफ की तरफ मुंह करके बैठना मुस्तहब है।
  3. हाथ उठाना: दोनों हाथों को सीने के सामने फैलाकर उठाएं, जैसे कोई भिखारी मांगता है।
  4. अल्लाह की हम्द-ओ-सना: दुआ की शुरुआत अल्लाह की तारीफ और बड़ाई बयान करने से करें (जैसे अल्हम्दुलिल्लाह, सुभानअल्लाह पढ़ें)।
  5. दरूद शरीफ: इसके बाद नबी करीम (ﷺ) पर दरूद शरीफ पढ़ें। शुरू में और आखिर में दरूद शरीफ पढ़ने से दुआ आसमानों के बीच रुकी नहीं रहती।
  6. गिड़गिड़ा कर दुआ मांगना: अपनी हाजत अल्लाह के सामने आजिज़ी, इनकेसारी और गिड़गिड़ा कर रखें। दिल में यकीन रखें कि अल्लाह सुन रहा है और ज़रूर देगा।
  7. आखिर में दरूद और आमीन: दुआ ख़त्म करने पर फिर से दरूद शरीफ पढ़ें और आखिर में ‘आमीन’ कहें और हाथों को चेहरे पर फेर लें।

दुआ कबूल होने के ख़ास औकात (Best Times for Dua)

कुछ ख़ास मौकों पर दुआएं बहुत जल्दी क़बूल होती हैं। रसूल अल्लाह (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया कि 3 आदमियों की दुआ कभी रद्द नहीं होती: रोज़ेदार की जब वह इफ्तार करे, इंसाफ करने वाले बादशाह की, और मजलूम की।

यहाँ कुछ बेहतरीन औकात दिए गए हैं:

  • तहज्जुद के वक़्त: रात के आखिरी हिस्से में अल्लाह दुनिया वाले आसमान पर आता है और पूछता है, “है कोई मांगने वाला जिसे मैं दूँ?”
  • अज़ान और इकामत के बीच: इस वक़्त की गई दुआ रद्द नहीं होती।
  • फ़र्ज़ नमाज़ के बाद: हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद मांगी गई दुआएं क़बूल होती हैं।
  • सज्दे की हालत में: बंदा अपने रब के सबसे करीब सज्दे में होता है, इसलिए सज्दे में खूब दुआ करें।
  • जुमा के दिन: जुमा के दिन एक घड़ी ऐसी आती है जिसमें हर जायज़ दुआ क़बूल होती है (अक्सर उलमा के नज़दीक यह असर और मगरिब के बीच का वक़्त है)।
  • रोज़ा खोलते वक़्त (इफ्तार के वक़्त): इफ्तार से कुछ मिनट पहले का वक़्त दुआ की कबूलियत के लिए बहुत ख़ास है।
  • बारिश के वक़्त: जब रहमत की बारिश हो रही हो।
  • सफर की हालत में: मुसाफिर की दुआ।

दुआ में क्या मांगें? (What to Ask in Dua)

हम अक्सर दुनिया की चीजें मांगते हैं, जैसे पैसा, घर, कारोबार। लेकिन सबसे बेहतरीन चीज़ जो हमें मांगनी चाहिए वो है आफियत

हज़रत अब्दुल्ला इब्ने उमर (र.अ.) कहते हैं कि रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: “अल्लाह के नज़दीक उससे आफियत मांगना हर चीज़ मांगने से ज़्यादा बेहतर है।”

आफियत का मतलब है: दुनिया और आखिरत की हर भलाई, हर खैर, हर तरह की परेशानियों और आज़माइशों से हिफाज़त।

जब आप आफियत मांगते हैं, तो आप अल्लाह से कहते हैं कि वो आपको दुनिया में भी सुकून दे और आखिरत में भी कामयाब करे। इसलिए हमेशा अपनी दुआ में यह कहें:

“اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالآخِرَةِ”

“या अल्लाह, मैं तुझसे दुनिया और आखिरत में आफियत का सवाल करता हूँ।“


दुआ मांगते वक़्त इन गलतियों से बचें

कभी-कभी कुछ गलतियों की वजह से हमारी दुआएं कबूल नहीं होतीं:

  1. हराम कमाई: अगर खाना-पीना, लिबास या कमाई हराम की हो, तो दुआ क़बूल नहीं होती।
  2. जल्दबाज़ी करना: यह सोचना कि “मैंने दुआ मांगी लेकिन क़बूल ही नहीं हुई” और फिर मायूस होकर दुआ छोड़ देना। सब्र रखें।
  3. अल्लाह पर यकीन न रखना: बेदिली से या सिर्फ रस्म के तौर पर दुआ मांगना। पूरे यकीन के साथ मांगें कि अल्लाह ज़रूर कबूल करेगा।
  4. नाजायज़ दुआ मांगना: किसी का बुरा चाहना या किसी गुनाह के काम के लिए दुआ करना।
  5. सिर्फ अपनी ज़रूरत के वक़्त मांगना: हमें सिर्फ मुश्किल में ही नहीं, बल्कि हर हाल में अल्लाह से दुआ करते रहना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या बिना वुज़ू के दुआ मांग सकते हैं?
A.

जी हाँ, दुआ बिना वुज़ू के भी मांग सकते हैं, लेकिन वुज़ू के साथ मांगना ज़्यादा बेहतर और अदब के करीब है।

Q. क्या दुआ सिर्फ अरबी में मांगनी चाहिए?
A.

नहीं, आप अपनी मादरी जुबान (Hindi, Urdu, English) में भी दिल से दुआ मांग सकते हैं। अल्लाह हर जुबान और दिलों का हाल जानता है।

Q. अगर दुआ फौरन कबूल न हो तो क्या करें?
A.

मायूस न हों। हो सकता है अल्लाह आपको उससे बेहतर कुछ देना चाहता हो, या उस दुआ के बदले आपके गुनाह माफ़ कर रहा हो, या उसे आखिरत के लिए ज़खीरा कर रहा हो।

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