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Dua e Masura in Hindi - दुआ ए मासुरा हिंदी, अरबी और इंग्लिश में

Dua e Masura in Hindi (दुआ ए मासुरा): नमाज़ में अत्तहियात और दरूद शरीफ के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ। जानिए इसका हिंदी तर्जुमा, सही उच्चारण और हदीस की रौशनी में इसकी अहमियत।

Dua e Masura in Hindi - दुआ ए मासुरा हिंदी, अरबी और इंग्लिश में

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दुआ ए मासुरा (Dua e Masura) वो दुआ है जो नमाज़ में अत्तहियात (Tashahhud) और दरूद शरीफ (Durood Sharif) पढ़ने के बाद, सलाम फेरने से पहले पढ़ी जाती है।

यह दुआ हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (र.अ.) को नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सिखाई थी। इसमें बंदा अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है और उसकी रहमत का तलबगार होता है।

इस आर्टिकल में हम Dua e Masura in Hindi, इसका हिंदी तर्जुमा, अरबी टेक्स्ट और इंग्लिश ट्रांसलेशन जानेंगे।

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Dua e Masura in Hindi (Translation)

यहाँ दुआ ए मासुरा का हिंदी उच्चारण (Transliteration) और आसान तर्जुमा दिया गया है।

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतु नफ़्सी ज़ुल्मन कसीरन, वला यग़फिरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अनता, फग़फिर ली मग़फिरतम् मिन ‘इन्दिका, वर ‘हमनी इन्नका अनतल ग़फ़ूरुर रहीम

हिंदी तर्जुमा (Meaning in Hindi)

(ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान पर बहुत जुल्म किया है और तेरे सिवा गुनाहों को कोई माफ़ नहीं कर सकता। लिहाज़ा तू अपनी तरफ से मेरी मगफिरत फरमा और मुझ पर रहम कर। बेशक तू बड़ा बख्शने वाला और निहायत रहम वाला है।)

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Dua e Masura in English

जो लोग हिंदी नहीं पढ़ सकते, उनके लिए यहाँ इंग्लिश ट्रांसलिट्रेशन और ट्रांसलेशन दिया गया है:

Allahumma innee zalamtu nafsee zulman katheeran, wa laa yaghfiruz-zunooba illaa anta, faghfir lee maghfiratam-min ‘indika war-hamnee innaka antal Ghafoorur-Raheem.

English Translation

(O Allah, I have greatly wronged myself, and no one forgives sins except You. So grant me forgiveness from You and have mercy on me. Indeed, You are the Forgiving, the Merciful.)

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Dua e Masura in Arabic

اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ، وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ


दुआ ए मासुरा की फजीलत और हदीस (Hadith)

सहीह बुखारी की हदीस है कि हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (र.अ.) ने रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से अर्ज़ किया:

“या रसूल अल्लाह! मुझे कोई ऐसी दुआ सिखाइये जो मैं अपनी नमाज़ में पढ़ा करूँ।”

तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन्हें यह दुआ (दुआ ए मासुरा) सिखाई।

इस दुआ में अल्लाह के सामने अपनी कोताहियों का इकरार है और उसी से माफ़ी की उम्मीद है। नमाज़ के आखिर में सलाम फेरने से पहले दुआ की क़बूलियत का वक़्त होता है, इसलिए यह दुआ बहुत अहम है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. दुआ ए मासुरा कब पढ़ी जाती है?
A.

यह नमाज़ की आखिरी रकअत में अत्तहियात और दरूद शरीफ पढ़ने के बाद, सलाम फेरने से पहले पढ़ी जाती है।

Q. अगर दुआ ए मासुरा याद न हो तो क्या करें?
A.

अगर यह दुआ याद न हो, तो आप कुरान या हदीस से साबित कोई और दुआ (जैसे ‘रब्बना आतिना…’) पढ़ सकते हैं। लेकिन इसे याद करना सुन्नत है।

Q. क्या दुआ ए मासुरा के बिना नमाज़ हो जाती है?
A.

जी हाँ, यह सुन्नत है। अगर कोई इसे न पढ़े या भूल जाए, तो भी नमाज़ हो जाती है, लेकिन सवाब कम हो जाता है।


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