Buri Nazar Se Bachne Ki Dua in Hindi - नज़र-ए-बद की दुआ और इलाज
Buri Nazar Se Bachne Ki Dua (बुरी नज़र से बचने की दुआ): जानिए नज़र-ए-बद क्या है? नज़र लगने की अलामतें, इससे बचने की मसनून दुआएं और इलाज हिंदी में।

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बुरी नज़र (Buri Nazar) या नज़र-ए-बद का लगना हक़ है। इस्लाम में इसकी हकीकत से इंकार नहीं किया जा सकता। हसद (Jealousy) भरी निगाहें किसी के लिए भी नुकसानदेह हो सकती हैं, चाहे वो बच्चा हो, बड़ा हो या कोई कीमती चीज़।
प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) ने फरमाया: “नज़र का लगना हक़ है।” (बुखारी)
इस आर्टिकल में हम Buri Nazar Se Bachne Ki Dua, नज़र उतारने का तरीका और इससे जुड़े वाकयात जानेंगे।
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बुरी नज़र से बचने की दुआ (Protection from Evil Eye)
नबी करीम (ﷺ) हज़रत हसन और हुसैन (रज़ि.) के लिए इन कलिमात के ज़रिए पनाह मांगते थे:
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لاَمَّةٍ
अऊज़ु बि-कलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन कुल्लि शैतानिन व हाम्-मतिन व मिन कुल्लि अइनिन लाम-मतिन
(मैं अल्लाह के पूरे-पूरे कलिमात के ज़रिए पनाह मांगता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर नुकसान पहुँचाने वाली नज़र-ए-बद से।)
नज़र लग जाए तो क्या पढ़ें? (Dua for Cure)
अगर किसी को नज़र लग गई हो, तो उस पर यह दुआ पढ़कर दम करें:
بِسْمِ اللهِ أَرْقِيكَ، مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ، مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ، اللهُ يَشْفِيكَ، بِسْمِ اللهِ أَرْقِيكَ
बिस्मिल्लाहि अर्क़ीक, मिन कुल्ले शैइन यू’ज़ीक, व मिन शर्रे कुल्ले नफ़्सिन् औ ऐ़निन्-ह़ासिदिन्, अल्लाहु यश्फ़ीक, बिस्मिल्लाहि अर्क़ीक
(मैं अल्लाह के नाम से तुझ पर दम करता हूँ हर उस चीज़ से जो तुझे तकलीफ दे, और हर नफ्स की बुराई से और हसद करने वाली आँख से। अल्लाह तुझे शिफा दे, मैं अल्लाह के नाम से तुझ पर दम करता हूँ।)
कुरान से नज़र का इलाज
इन सूरतों को पढ़कर अपने ऊपर या बच्चों पर दम करना बहुत फायदेमंद है:
- सूरह फलक (Surah Falaq)
- सूरह नास (Surah Naas)
- आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi)
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नज़र लगने का वाकिया (Story of Sahl bin Hunaif)
एक बार सहाबी हज़रत सहल बिन हुनैफ (रज़ि.) नहा रहे थे। वो बहुत गोरे और खूबसूरत थे। आमिर बिन रबीआ (रज़ि.) ने उन्हें देखा और कहा: “मैंने आज तक ऐसा खूबसूरत बदन नहीं देखा।”
इतना कहते ही हज़रत सहल (रज़ि.) बेहोश होकर गिर पड़े। जब नबी (ﷺ) को बताया गया, तो आपने फरमाया: “तुम में से कोई अपने भाई को क्यों मारना चाहता है? जब तुम्हें कोई चीज़ अच्छी लगे तो बरकत की दुआ (माशाअल्लाह/बारकल्लाह) क्यों नहीं देते?”
फिर आपने आमिर (रज़ि.) को हुक्म दिया कि वो वज़ू करें और उस पानी को सहल (रज़ि.) पर डाला गया, जिससे वो फौरन ठीक हो गए।
नज़र से बचने के लिए क्या करें?
- माशाअल्लाह कहें: जब भी कोई अच्छी चीज़ देखें, ‘माशाअल्लाह ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह’ कहें।
- सुबह-शाम के अज़कार: सुबह और शाम को ‘मुअव्वज़तैन’ (सूरह फलक और नास) पढ़कर दम करें।
- दुआ: घर से निकलते वक़्त और बच्चों के लिए पनाह की दुआ पढ़ें।
क्या हर परेशानी नज़र-ए-बद है? (Nazar vs Waham)
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हर बीमारी या परेशानी नज़र-ए-बद की वजह से नहीं होती। कभी-कभी यह सिर्फ हमारा वहम (Superstition) होता है।
मिसाल के तौर पर: अगर कोई बच्चा बहुत रो रहा है, तो ज़रूरी नहीं कि उसे नज़र लगी हो। हो सकता है उसे भूख लगी हो, पेट में दर्द हो या कोई और जिस्मानी तकलीफ हो। ऐसे में सिर्फ नज़र उतारने पर भरोसा न करें, बल्कि डॉक्टर को भी दिखाएं।
इसी तरह, अगर कारोबार में नुकसान हो जाए, तो यह हमारी अपनी कोताही या मार्किट के हालात की वजह से भी हो सकता है। हर चीज़ को नज़र पर डाल देना और अपनी गलतियों को नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।
इस्लाम हमें वहम से बचने और हकीकत को समझने की तालीम देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या नज़र सिर्फ इंसानों की लगती है?
नहीं, हदीस के मुताबिक नज़र जिन्नात की भी लग सकती है और इंसानों की भी। यहाँ तक कि इंसान की अपनी नज़र भी खुद को लग सकती है।
Q. नज़र लगने की अलामतें (Symptoms) क्या हैं?
अचानक तबीयत खराब होना, बिना वजह रोना (बच्चों में), सर में भारीपन, सुस्ती, चेहरे का रंग पीला पड़ना वगैरह नज़र लगने की निशानियाँ हो सकती हैं।
Q. क्या तावीज़ पहनना जायज़ है?
कुरान और हदीस की दुआओं वाला तावीज़ कुछ उलमा के नज़दीक जायज़ है, लेकिन शिर्किया अल्फाज़ या जंतर-मंतर वाला तावीज़ पहनना हराम है। सबसे बेहतर तरीका दुआ पढ़कर दम करना है।
अल्लाह हम सबको बुरी नज़र और हसद से महफूज़ रखे। आमीन।
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