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Islam Me Amanat Ki Ahmiyat Aur Khayanat Ka Anjam

Amanat Ki Ahmiyat: जानिए इस्लाम में अमानत की क्या अहमियत है? अमानत में खयानत करने का क्या अंजाम है और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में अमानतदारी कैसे निभाएं।

Islam Me Amanat Ki Ahmiyat Aur Khayanat Ka Anjam

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अमानत (Amanat) इस्लाम का एक बहुत ही अहम हिस्सा है। एक सच्चा मुसलमान वही है जो अमानतदार हो। आज के दौर में लोग सिर्फ पैसे के लेन-देन को ही अमानत समझते हैं, जबकि इस्लाम में इसका दायरा बहुत बड़ा है।

अक्सर हम देखते हैं कि लोग वादा करके मुकर जाते हैं या किसी की राज़ की बात दूसरों को बता देते हैं। यह सब अमानत में खयानत है।

इस आर्टिकल में हम आसान हिंदी में जानेंगे कि Islam Me Amanat Ki Ahmiyat क्या है, इसकी किस्में क्या हैं और खयानत करने वाले का क्या अंजाम होगा।

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इस्लाम में अमानत क्या है? (What is Amanat?)

अमानत का मतलब है “भरोसा” और “ईमानदारी”। अगर कोई शख्स आपके पास अपना माल, कोई बात या कोई ज़िम्मेदारी सौंपे, तो उसे पूरी ईमानदारी के साथ निभाना और वक्त पर वापस करना अमानत कहलाता है।

अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है:

“बेशक अल्लाह तुम्हें हुक्म देता है कि अमानतों को उनके हक़दारों तक पहुँचाओ।” (सूरह निसा: 58)

कुरान और हदीस में अमानत की फजीलत

अल्लाह के रसूल (ﷺ) नबुवत मिलने से पहले ही मक्का में “सादिक” (सच्चे) और “अमीन” (अमानतदार) के नाम से मशहूर थे। लोग अपने कीमती सामान आप (ﷺ) के पास अमानत के तौर पर रखते थे।

एक हदीस में आप (ﷺ) ने फरमाया:

“जिसमें अमानतदारी नहीं, उसका कोई ईमान नहीं। और जो वादा पूरा नहीं करता, उसका कोई दीन नहीं।” (मुसनद अहमद)

इससे पता चलता है कि अमानत का ताल्लुक सीधे हमारे ईमान से है।

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अमानत की किस्में (Types of Amanat)

अमानत सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कई शक्लें हैं:

  1. माल की अमानत: अगर किसी ने आपके पास पैसा या सामान रखा है, तो उसे हिफाज़त से रखना और मांगने पर वापस करना।
  2. राज़ (Secrets) की अमानत: अगर किसी ने आपसे कोई बात कही और कहा कि “यह राज़ है”, तो उसे किसी और को बताना खयानत है।
  3. नौकरी और काम: अगर आप कहीं नौकरी करते हैं, तो अपने काम को ईमानदारी से वक्त पर पूरा करना भी अमानत है। कामचोरी करना खयानत है।
  4. जिस्म और जान: हमारा शरीर अल्लाह की अमानत है। इसे गुनाहों (जैसे ज़िना, नशा) में इस्तेमाल करना अल्लाह की अमानत में खयानत है।
  5. वक्त (Time): ज़िन्दगी का हर लम्हा अल्लाह की अमानत है। इसे बेकार कामों में बर्बाद नहीं करना चाहिए।

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अमानत में खयानत का अंजाम

इस्लाम में खयानत (धोखाधड़ी) को मुनाफिक (Hypocrite) की निशानी बताया गया है।

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया, मुनाफिक की तीन निशानियाँ हैं:

  1. जब बोले तो झूठ बोले।
  2. जब वादा करे तो खिलाफ-वर्ज़ी करे।
  3. जब उसके पास अमानत रखी जाए तो खयानत करे। (सहीह बुखारी)

कयामत के दिन खयानत करने वाले को सख्त अज़ाब होगा और वह शर्मिंदा होगा।

रोज़मर्रा ज़िन्दगी में अमानतदारी (Real-Life Examples)

  1. उधार वापसी: अगर किसी से कर्ज़ लिया है, तो तय वक्त पर वापस करें।
  2. मशवरा: अगर कोई आपसे मशवरा मांगे, तो उसे सही राय देना भी अमानत है।
  3. वोट: सही उम्मीदवार को वोट देना भी एक कौमी अमानत है।
  4. दफ्तर का सामान: ऑफिस का पेन, कागज़ या इंटरनेट निजी काम के लिए इस्तेमाल करना (बिना इजाज़त) अमानत में खयानत हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या अमानत में खयानत करने वाले की तौबा कबूल होती है?
A.

अगर किसी ने माल में खयानत की है, तो सिर्फ तौबा काफी नहीं है। उसे वो माल मालिक को वापस करना होगा या माफ़ी मांगनी होगी। अगर माल वापस नहीं किया, तो तौबा मुकम्मल नहीं होगी।

Q. अगर कोई हमारे साथ खयानत करे, तो क्या हम भी उसके साथ ऐसा कर सकते हैं?
A.

नहीं, इस्लाम इसकी इजाज़त नहीं देता। हदीस में है: “जो तुम्हारे साथ अमानतदारी करे, तुम भी उसके साथ अमानतदारी करो। और जो तुम्हारे साथ खयानत करे, तुम उसके साथ खयानत न करो।” (तिर्मिज़ी)

Q. क्या बीवी के पास शौहर का माल अमानत है?
A.

हाँ, शौहर की गैर-मौजूदगी में उसके घर और माल की हिफाज़त करना बीवी पर अमानत है।


अल्लाह हम सबको अमानतदार बनाए और हर किस्म की खयानत से महफूज़ रखे। आमीन।

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