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99 Names of Allah in Hindi: अल्लाह के 99 नाम और उनके मतलब
99 Names of Allah in Hindi: अल्लाह के 99 नाम (Asma-ul-Husna) और उनके हिंदी मतलब। जानिए इन नामों को पढ़ने की फजीलत और बरकतें।

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अल्लाह के नाम (Asma-ul-Husna) बहुत बरकत वाले हैं। कुरान में अल्लाह फरमाता है: “और अच्छे नाम अल्लाह ही के लिए हैं, तो उसे उन्हीं नामों से पुकारो।” (सूरह आराफ: 180)
हदीस में आता है: “अल्लाह के 99 नाम हैं, जो उन्हें याद कर लेगा (और उन पर अमल करेगा), वह जन्नत में दाखिल होगा।” (सहीह बुखारी)
इस आर्टिकल में हम 99 Names of Allah in Hindi, उनका मतलब और फजीलत जानेंगे।
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अल्लाह के 99 नाम और उनके मतलब
यहाँ अल्लाह के 99 नाम (Asma-ul-Husna) हिंदी और इंग्लिश में दिए गए हैं:
Ar-Rahman (अर-रहमान): बहुत मेहरबान।
Ar-Raheem (अर-रहीम): निहायत रहम वाला।
Al-Malik (अल-मालिक): (हकीकी) बादशाह।
Al-Quddus (अल-कुद्दूस): निहायत पाक (हर ऐब से)।
As-Salam (अस-सलाम): सलामती वाला।
Al-Mumin (अल-मोमिन): अमन और ईमान देने वाला।
Al-Muhaymin (अल-मुहैमिन): निगेहबान (हिफाज़त करने वाला)।
Al-Aziz (अल-अज़ीज़): गालिब (सब पर भारी)।
Al-Jabbar (अल-जब्बार): ज़बरदस्त (बिगड़े काम बनाने वाला)।
Al-Mutakabbir (अल-मुतकब्बिर): बड़ाई वाला।
Al-Khaliq (अल-खालिक): पैदा करने वाला।
Al-Bari (अल-बारी): जान डालने वाला (ठीक-ठाक बनाने वाला)।
Al-Musawwir (अल-मुसव्विर): सूरतें (शक्ल) बनाने वाला।
Al-Ghaffar (अल-गफ्फार): बहुत बख्शने वाला।
Al-Qahhar (अल-कहार): सब को अपने काबू में रखने वाला।
Al-Wahhab (अल-वहाब): बहुत अता करने वाला।
Ar-Razzaq (अर-रज्जाक): रिज़्क देने वाला।
Al-Fattah (अल-फत्ताह): (रहमत के दरवाज़े) खोलने वाला।
Al-Alim (अल-अलीम): खूब जानने वाला।
Al-Qabid (अल-काबिज): (रोजी) तंग करने वाला / कब्ज़ करने वाला।
Al-Basit (अल-बासित): (रोजी) कुशादा (फैलाने) करने वाला।
Al-Khafid (अल-खाफिज): (दर्जा) घटाने वाला / पस्त करने वाला।
Ar-Rafi (अर-राफि): (दर्जा) बुलंद करने वाला।
Al-Muizz (अल-मुइज़): इज़्ज़त देने वाला।
Al-Muzil (अल-मुज़िल): ज़िल्लत देने वाला।
As-Sami (अस-समी): सब कुछ सुनने वाला।
Al-Basir (अल-बसीर): सब कुछ देखने वाला।
Al-Hakam (अल-हकम): फैसला करने वाला।
Al-Adl (अल-अदल): इन्साफ करने वाला।
Al-Latif (अल-लतीफ): मेहरबान / बारीकी जानने वाला।
Al-Khabir (अल-खबीर): खबर रखने वाला।
Al-Halim (अल-हलीम): बुर्दबार (सब्र वाला)।
Al-Azim (अल-अज़ीम): बहुत बज़ुर्ग (बड़ाई वाला)।
Al-Ghafoor (अल-गफूर): गुनाहों को बख्शने वाला।
Ash-Shakur (अश-शकूर): कद्रदान (थोड़े अमल पर ज़्यादा देने वाला)।
Al-Aliyy (अल-अली): बहुत बुलंद (ऊंचा)।
Al-Kabir (अल-कबीर): बहुत बड़ा।
Al-Hafiz (अल-हफीज़): हिफाज़त करने वाला।
Al-Muqit (अल-मुकीत): रोजी पहुँचाने वाला / कुव्वत देने वाला।
Al-Hasib (अल-हसीब): हिसाब लेने वाला / काफी।
Al-Jalil (अल-जलील): जलाल वाला (बुजुर्ग)।
Al-Karim (अल-करीम): करम करने वाला (सखी)।
Ar-Raqib (अर-रकीब): निगेहबान (ख्याल रखने वाला)।
Al-Mujib (अल-मुजीब): दुआ कबूल करने वाला।
Al-Wasi (अल-वासि): वुसअत वाला (कुशादा)।
Al-Hakim (अल-हकीम): हिकमत वाला।
Al-Wadud (अल-वदूद): मोहब्बत करने वाला।
Al-Majid (अल-मजीद): बुजुर्गी वाला।
Al-Baith (अल-बाइस): (मुर्दों को) उठाने वाला।
Ash-Shahid (अश-शहीद): हाज़िर / गवाह।
Al-Haqq (अल-हक़): सच्चा मालिक।
Al-Wakil (अल-वकील): काम बनाने वाला (कारसाज़)।
Al-Qawiyy (अल-कवी): ताकतवर (मज़बूत)।
Al-Matin (अल-मतीन): बहुत मज़बूत (कुव्वत वाला)।
Al-Waliyy (अल-वली): मददगार / दोस्त।
Al-Hamid (अल-हमीद): तारीफ के काबिल।
Al-Muhsi (अल-मुहसी): (अपने इल्म में) घेरने वाला / गिनने वाला।
Al-Mubdi (अल-मुब्दी): पहली बार पैदा करने वाला।
Al-Muid (अल-मुईद): दोबारा पैदा करने वाला।
Al-Muhyi (अल-मुहयी): ज़िंदा करने वाला।
Al-Mumit (अल-मुमीत): मारने वाला (मौत देने वाला)।
Al-Hayy (अल-हय्य): हमेशा ज़िंदा रहने वाला।
Al-Qayyum (अल-कय्यूम): सबको थामने वाला।
Al-Wajid (अल-वाजिद): पाने वाला (जिसे कोई कमी न हो)।
Al-Majid (अल-माजिद): बुजुर्गी वाला।
Al-Wahid (अल-वाहिद): अकेला।
Al-Ahad (अल-अहद): एक (जिसका कोई शरीक नहीं)।
As-Samad (अस-समद): बे-नियाज़ (जिसे किसी की हाजत नहीं)।
Al-Qadir (अल-कादिर): कुदरत वाला।
Al-Muqtadir (अल-मुक्तदिर): पूरी कुदरत रखने वाला।
Al-Muqaddim (अल-मुकद्दिम): आगे करने वाला।
Al-Muakhkhir (अल-मुअख्खिर): पीछे करने वाला।
Al-Awwal (अल-अव्वल): सबसे पहले।
Al-Akhir (अल-आखिर): सबसे बाद (आखिर)।
Az-Zahir (अज़-ज़ाहिर): ज़ाहिर (खुला हुआ)।
Al-Batin (अल-बातिन): छुपा हुआ (पोशीदा)।
Al-Wali (अल-वाली): मालिक / काम बनाने वाला।
Al-Mutaali (अल-मुताअली): सबसे बुलंद।
Al-Barr (अल-बर्र): अच्छा सुलूक करने वाला।
At-Tawwab (अत-तव्वाब): तौबा कबूल करने वाला।
Al-Muntaqim (अल-मुन्तक़िम): बदला लेने वाला।
Al-Afuww (अल-अफुव्व): माफ़ करने वाला।
Ar-Rauf (अर-रऊफ): बहुत शफकत (नरमी) करने वाला।
Malik-ul-Mulk (मालिक-उल-मुल्क): मुल्कों का मालिक।
Zul-Jalali-wal-Ikram (ज़ुल-जलालि-वल-इकराम): जलाल और करम वाला।
Al-Muqsit (अल-मुक्सित): इन्साफ करने वाला।
Al-Jami (अल-जामि): जमा करने वाला।
Al-Ghani (अल-गनी): बे-परवाह (गनी)।
Al-Mughni (अल-मुगनी): गनी (मालदार) बनाने वाला।
Al-Mani (अल-मानि): रोकने वाला।
Ad-Darr (अद-दार्र): नुकसान का मालिक (नुकसान पहुँचाने वाला)।
An-Nafi (अन-नाफि): नफा पहुँचाने वाला।
An-Nur (अन-नूर): नूर (रोशनी) देने वाला।
Al-Hadi (अल-हादी): हिदायत देने वाला।
Al-Badi (अल-बदी): (बगैर नमूने के) नई चीज़ पैदा करने वाला।
Al-Baqi (अल-बाकी): हमेशा रहने वाला।
Al-Warith (अल-वारिस): (सबके बाद) वारिस रहने वाला।
Ar-Rashid (अर-रशीद): सही राह दिखाने वाला।
As-Sabur (अस-सबूर): बहुत सब्र करने वाला।
कुछ खास नामों के वज़ीफ़े और फायदे (Benefits & Wazifa)
हर नाम की अपनी एक अलग तासीर और बरकत है। यहाँ कुछ नामों के खास वज़ीफ़े दिए गए हैं:
- रिज़्क (Rozi) के लिए: जो शख्स फज्र की नमाज़ से पहले घर के चारों कोनों में 10-10 बार “या रज्जाक” (Ya Razzaqu) पढ़ेगा, उसके घर में कभी रिज़्क की तंगी नहीं होगी।
- बीमारी से शिफा के लिए: “या सलाम” (Ya Salamu) को 111 बार पढ़कर पानी पर दम करके मरीज़ को पिलाने से शिफा मिलती है।
- इज्जत और रुतबा पाने के लिए: जुमा की रात को “या मुइज़्ज़” (Ya Muizzu) 140 बार पढ़ने से लोगों के दिलों में इज्जत पैदा होती है।
- मोहब्बत और इत्तेफाक के लिए: मियां-बीवी में मोहब्बत बढ़ाने के लिए “या वदूद” (Ya Wadudu) 100 बार पढ़कर किसी मीठी चीज़ पर दम करके खिलाएं।
- परेशानी दूर करने के लिए: मुश्किल वक़्त में “या हय्यु या कय्यूम” (Ya Hayyu Ya Qayyum) का विर्द करने से अल्लाह मदद फरमाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. अल्लाह के 99 नाम याद करने की क्या फजीलत है?
हदीस के मुताबिक, जो शख्स अल्लाह के 99 नामों को याद कर लेगा (और उनके मतलब को समझकर उन पर यकीन रखेगा), वह जन्नत में दाखिल होगा।
Q. क्या अल्लाह के सिर्फ 99 नाम हैं?
नहीं, अल्लाह के बेशुमार नाम हैं। लेकिन हदीस में इन 99 नामों (Asma-ul-Husna) का खास ज़िक्र है और इन्हें याद करने की फजीलत बताई गई है।
Q. दुआ में अल्लाह के नाम कैसे इस्तेमाल करें?
अल्लाह को उसके नामों का वास्ता देकर दुआ मांगना बहुत अच्छा है। जैसे रिज़्क के लिए “या रज्जाक”, माफ़ी के लिए “या गफ्फार” कहकर दुआ मांगें।
नतीजा (Conclusion)
अल्लाह के नाम सिर्फ रटने के लिए नहीं, बल्कि समझने और अपनी ज़िन्दगी में उतारने के लिए हैं। जब हम जानते हैं कि अल्लाह “अल-बसीर” (सब देखने वाला) है, तो हम गुनाह करने से डरेंगे। जब हम जानते हैं कि वह “अर-रज्जाक” है, तो हम रिज़्क की टेंशन नहीं लेंगे।
अल्लाह हमें अपने नामों की बरकत से मालामाल फरमाए। आमीन।
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