Surah Yunus in Hindi: सूरह यूनुस की फजीलत और पहली 50 आयतें
Surah Yunus in Hindi: जानिए सूरह यूनुस की फजीलत और पहली 50 आयतों का हिंदी तर्जुमा। यह मक्की सूरह तौहीद और अल्लाह की कुदरत पर रौशनी डालती है।

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सूरह यूनुस (Surah Yunus) कुरान मजीद की 10वीं सूरह है। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 109 आयतें हैं। इस सूरह का नाम हज़रत यूनुस (Jonah) अलैहिस्सलाम के नाम पर रखा गया है, जिनका ज़िक्र इस सूरह में आया है।
यह सूरह तौहीद, रिसालत और आखिरत के मज़बूत दलाइल पेश करती है। इसमें हज़रत नूह (अ.स.), हज़रत मूसा (अ.स.) और हज़रत यूनुस (अ.स.) के वाकयात के ज़रिए इब्रत (सबक) दिलाई गई है।
इस आर्टिकल में हम Surah Yunus in Hindi, इसकी अहमियत और पहली 50 आयतों का तर्जुमा जानेंगे।
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सूरह यूनुस की अहमियत (Importance of Surah Yunus)
- अल्लाह की कुदरत: यह सूरह आसमान, ज़मीन, सूरज, चाँद और रात-दिन के आने-जाने जैसी निशानियों के ज़रिए अल्लाह की कुदरत और वहदानियत (एक होने) को साबित करती है।
- फिरौन का अंजाम: इसमें उस वाकये का ज़िक्र है जब फिरौन डूबते वक़्त ईमान लाने की कोशिश करता है, लेकिन उसकी तौबा कबूल नहीं होती। यह हमें सिखाता है कि मौत के वक़्त की तौबा का कोई फायदा नहीं।
- यूनुस (अ.स.) की कौम: यह कुरान की वाहिद (अकेली) मिसाल है जहाँ एक पूरी कौम अज़ाब आने से ठीक पहले ईमान ले आई और अल्लाह ने उन्हें माफ़ कर दिया।
Surah Yunus Ayat 1-50 in Hindi
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अलिफ़-लाम-रा, तिल्का आयातुल् किताबिल् हकीम।
(अलिफ़-लाम-रा, ये हिकमत वाली किताब की आयतें हैं।)अ-काना लिन्नासि अजबन अन औहैना इला रजुलिम मिन्हुम अन अन्ज़िरिन नासा व बश्शिरिल लज़ीना आमनू अन्ना लहुम क़दमा सिद्क़िन इन्द रब्बिहिम, क़ालल काफिरूना इन्ना हाज़ा ल-साहिरुम मुबीन।
(क्या लोगों के लिए यह ताज्जुब की बात है कि हमने उन्हीं में से एक मर्द की तरफ वही भेजी कि लोगों को डराओ और ईमान वालों को खुशखबरी दो कि उनके लिए उनके रब के पास सच्चा मर्तबा है? काफिरों ने कहा: बेशक यह तो खुला जादूगर है।)इन्ना रब्बकुमुल्लाहुल लज़ी ख़लक़स समावाति वल अर्ज़ा फी सित्तति अय्यामिन सुम्मस्तवा अलल अर्शि युदब्बिरुल अम्र, मा मिन शफीइन इल्ला मिम बअ्दि इज़्निह, ज़ालिकुमुल्लाहु रब्बुकुम फअ्बुदूहु, अफला तज़क्करून।
(बेशक तुम्हारा रब अल्लाह है जिसने आसमानों और ज़मीन को छः दिन में पैदा किया, फिर अर्श पर कायम हुआ, वो हर काम की तदबीर करता है, कोई सिफारिश करने वाला नहीं मगर उसकी इजाज़त के बाद, यही अल्लाह तुम्हारा रब है तो उसी की इबादत करो, तो क्या तुम नसीहत नहीं पकड़ते?)इलैहि मरजिउकुम जमीआ, वअदल्लाहि हक़्क़ा, इन्नहू यब-द-उल खल्क़ा सुम्मा युईदुहू लि-यज्ज़ियल लज़ीना आमनू व अमिलुस सालिहाति बिल क़िस्त, वल्लज़ीना कफरू लहुम शराबुम मिन हमीमिंव व अज़ाबुन अलीमुम बिमा कानू यकफुरून।
(उसी की तरफ तुम सबको लौटना है, अल्लाह का वादा सच्चा है, बेशक वही मखलूक को पहली बार पैदा करता है फिर उसे दोबारा पैदा करेगा ताकि उन लोगों को इंसाफ के साथ बदला दे जो ईमान लाए और नेक अमल किए, और जिन लोगों ने कुफ्र किया उनके लिए खौलता हुआ पानी पीने को है और दर्दनाक अज़ाब है उस वजह से जो वो कुफ्र करते थे।)हुवल लज़ी ज-अ-लश शम्सा ज़िया-अंव वल क़मरा नूरंव व क़द्दरहू मनाज़िला लि-तअ्लमू अददस सिनीना वल हिसाब, मा ख़लक़ल्लाहु ज़ालिका इल्ला बिल हक़्क़, युफस्सिलुल आयाति लि-क़ौमिय यअ्लमून।
(वही है जिसने सूरज को रोशन बनाया और चाँद को नूर (चमक) दी और उसकी मंज़िलें मुकर्रर कीं ताकि तुम सालों की गिनती और हिसाब जान लो, अल्लाह ने यह सब नहीं बनाया मगर हक़ के साथ, वो आयतें खोलकर बयान करता है उन लोगों के लिए जो इल्म रखते हैं।)इन्ना फिख्तिलाफिल लैलि वन नहारि वमा ख़लक़ल्लाहु फिस समावाति वल अर्ज़ि ल-आयातिल लि-क़ौमिय यत्तक़ून।
(बेशक रात और दिन के आने-जाने में और जो कुछ अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन में पैदा किया है, उन लोगों के लिए निशानियां हैं जो डरते हैं।)इन्नल लज़ीना ला यरजूना लिक़ा-अना व रज़ू बिल हयातिद दुनिया वत्म-अन्नू बिहा वल्लज़ीना हुम अन आयातिना गाफिलून।
(बेशक जो लोग हमसे मिलने की उम्मीद नहीं रखते और दुनिया की ज़िन्दगी पर राज़ी हो गए और उससे मुतमइन हो गए और वो लोग जो हमारी आयतों से गाफिल हैं।)उलाइका मअ्वाहुमुन नारु बिमा कानू यक्सिबून।
(यही वो लोग हैं जिनका ठिकाना आग है उस वजह से जो वो कमाते थे।)इन्नल लज़ीना आमनू व अमिलुस सालिहाति यहदीहिम रब्बुहुम बि-ईमानिहिम, तजरी मिन तहतिहिमुल अनहारु फी जन्नातिन नईम।
(बेशक जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनका रब उनके ईमान की वजह से उन्हें हिदायत देगा, उनके नीचे नेमतों वाली जन्नतों में नहरें बह रही होंगी।)दअ्वाहुम फीहा सुब्हानकल्लाहुम्मा व तहिय्यतुहुम फीहा सलाम, व आखिरु दअ्वाहुम अनिल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
(वहां उनकी पुकार यह होगी: ऐ अल्लाह! तू पाक है, और वहां उनका आपस का सलाम “सलाम” होगा, और उनकी पुकार का खात्मा इस पर होगा कि सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जो तमाम जहानों का रब है।)व लौ युअज्जिलुल्लाहु लिन्नासिश शर्रस तिअ्जा लहुम बिल खैरि ल-कुज़िया इलैहिम अजलुहुम, फ-नज़रुल लज़ीना ला यरजूना लिक़ा-अना फी तुग्यानिहिम यअ्महून।
(और अगर अल्लाह लोगों के लिए नुकसान (लाने) में ऐसी जल्दी करता जैसे वो भलाई के लिए जल्दी मचाते हैं तो उनकी मुद्दत पूरी कर दी जाती, तो हम उन लोगों को जो हमसे मिलने की उम्मीद नहीं रखते, उनकी सरकशी में भटकता हुआ छोड़ देते हैं।)व इज़ा मस्सल इंसानज़ ज़ुर्रु दआना लि-जम्बिही औ क़ाइदन औ क़ाइमा, फ-लम्मा कशफ्ना अन्हु ज़ुर्रहू मर्रा क-अल्लम् यदउना इला ज़ुर्रिम मस्सह, कज़ालिका ज़ुय्यिना लिल मुसरिफीना मा कानू यअ्मलून।
(और जब इंसान को कोई तकलीफ पहुँचती है तो हमें पुकारता है लेटे हुए या बैठे हुए या खड़े हुए, फिर जब हम उससे उसकी तकलीफ दूर कर देते हैं तो (ऐसे) गुज़र जाता है जैसे उसने हमें किसी तकलीफ के लिए पुकारा ही न था जो उसे पहुँची थी, इसी तरह हद से गुज़रने वालों के लिए वो काम खुश-नुमा बना दिए गए हैं जो वो करते थे।)व लक़द अहलक्नल कुरूना मिन क़ब्लिकुम लम्मा ज़लमू व जा-अत्हुम रुसुलुहुम बिल बय्यिनाति वमा कानू लि-युअ्मिनू, कज़ालिका नज्ज़िल कौमल मुजरिमीन।
(और हमने तुमसे पहले कई कौमों को हलाक कर दिया जब उन्होंने ज़ुल्म किया, और उनके पास उनके रसूल खुली निशानियां लेकर आए और वो ऐसे न थे कि ईमान लाते, हम मुजरिम कौम को ऐसा ही बदला देते हैं।)सुम्मा ज-अल्नाकुम खलाइफा फिल अर्ज़ि मिम बअ्दिहिम लि-नन्ज़ुरा कैफा तअ्मलून।
(फिर हमने उनके बाद तुम्हें ज़मीन में जानशीन (वारिस) बनाया ताकि हम देखें कि तुम कैसे अमल करते हो।)व इज़ा तुत्ला अलैहिम आयातुना बय्यिनातिन क़ालल लज़ीना ला यरजूना लिक़ा-अना अअ्ति बि-क़ुरआनिन गैरि हाज़ा औ बद्दिल्ह, कुल मा यकूनु ली अन उबद्दिलहू मिन तिलक़ाइ नफ्सी, इन अत्तबिउ इल्ला मा यूहा इलय्य, इन्नी अख़ाफु इन असैतु रब्बी अज़ाबा यौमिन अज़ीम।
(और जब उन पर हमारी साफ़ आयतें पढ़ी जाती हैं तो वो लोग जो हमसे मिलने की उम्मीद नहीं रखते, कहते हैं: इसके अलावा कोई और कुरान लाओ या इसे बदल दो। कह दीजिए: मेरा काम नहीं कि मैं इसे अपनी तरफ से बदल दूँ, मैं तो बस उसकी पैरवी करता हूँ जो मेरी तरफ वही (Wahi) की जाती है, अगर मैं अपने रब की नाफरमानी करूँ तो मैं एक बड़े दिन के अज़ाब से डरता हूँ।)कुल लौ शाअल्लाहु मा तलौतुहू अलैकुम वला अदराकुम बिही फक़द लबिस्तु फीकुम उमुरम मिन क़ब्लिह, अफला तअ्क़िलून।
(कह दीजिए: अगर अल्लाह चाहता तो मैं इसे तुम पर न पढ़ता और न वो तुम्हें इससे आगाह करता, मैं तो इससे पहले (भी) तुममें एक उम्र गुज़ार चुका हूँ, तो क्या तुम अक्ल नहीं रखते?)फ-मन अज़लमु मिम्मानिफ्तरा अलल्लाहि कज़िबन औ कज़्ज़बा बि-आयातिह, इन्नहू ला युफलिहुल मुजरिमून।
(तो उससे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे या उसकी आयतों को झुठलाए? बेशक मुजरिम कामयाब नहीं होंगे।)व यअ्बुदूना मिन दूनिल्लाहि मा ला यज़ुर्रुहुम वला यन्फउहुम व यकूलूना हा-उलाइ शुफ-आउना इन्दल्लाह, कुल अ-तुनब्बिऊनल्लाहा बिमा ला यअ्लमु फिस समावाति वला फिल अर्ज़, सुब्हानहू व तआला अम्मा युशरिकून।
(और वो अल्लाह के सिवा उसकी इबादत करते हैं जो न उन्हें नुकसान पहुँचा सकता है और न उन्हें नफा दे सकता है, और कहते हैं: ये अल्लाह के यहाँ हमारे सिफारिशी हैं। कह दीजिए: क्या तुम अल्लाह को वो बताते हो जो वो न आसमानों में जानता है और न ज़मीन में? वो पाक है और उससे बुलंद है जो वो शरीक ठहराते हैं।)व मा कानन नासु इल्ला उम्मतंव वाहिदतन फख्-तलफू, व लौला कलिमतुन सबक़त मिर रब्बिका ल-कुज़िया बैनहुम फीमा फीहि यख्-तलिफून।
(और लोग एक ही उम्मत थे फिर उन्होंने इख्तिलाफ किया, और अगर तेरे रब की तरफ से एक बात पहले तय न हो चुकी होती तो उनके दरमियान फैसला कर दिया जाता जिसमें वो इख्तिलाफ करते हैं।)व यकूलूना लौला उनज़िला अलैहि आयतुम मिर रब्बिह, फ-कुल इन्नमल गैबु लिल्लाहि फन्तज़िरू, इन्नी म-अकुम मिनल मुन्तज़िरीन।
(और वो कहते हैं: उस पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? तो कह दीजिए: गैब तो सिर्फ अल्लाह के लिए है, तो इंतज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करने वालों में से हूँ।)व इज़ा अज़क़नन नासा रहमतम मिम बअ्दि ज़र्रा-अ मस्सत्हुम इज़ा लहुम मक्रुन फी आयातिना, कुलिल्लाहु असरउ मक्रा, इन्ना रुसुलना यक्तुबूना मा तम्कुरून।
(और जब हम लोगों को तकलीफ पहुँचने के बाद रहमत का मज़ा चखाते हैं तो फौरन वो हमारी आयतों के बारे में चालें चलने लगते हैं। कह दीजिए: अल्लाह चाल चलने में ज़्यादा तेज़ है, बेशक हमारे फरिश्ते लिख रहे हैं जो तुम चालें चलते हो।)हुवल लज़ी युसय्यिरुकुम फिल बर्रि वल बह्र, हत्ता इज़ा कुन्तुम फिल फुल्कि व जरैना बिहिम बि-रीहिन तय्यिबतितं व फरिहू बिहा जा-अत्हा रीहुन आसिफुंव व जा-अहुमुल मौजु मिन कुल्लि मकानिंव व ज़न्नू अन्नहुम उहीता बिहिम द-अवुल्लाहा मुखलिसीना लहुद दीना ल-इन अन्जैतना मिन हाज़िही ल-नकूनन्ना मिनश शाकिरीन।
(वही है जो तुम्हें खुश्की और तरी (समंदर) में चलाता है, यहाँ तक कि जब तुम कश्तियों में होते हो और वो उन्हें लेकर अच्छी हवा के साथ चलती हैं और वो उससे खुश होते हैं तो उन पर एक तेज़ हवा आती है और हर तरफ से उन पर लहरें आती हैं और वो समझते हैं कि वो घिर गए हैं, (तब) वो अल्लाह को पुकारते हैं दीन को उसके लिए खालिस करके कि अगर तूने हमें इससे बचा लिया तो हम ज़रूर शुक्रगुज़ारों में से हो जाएंगे।)फ-लम्मा अन्जाहुम इज़ा हुम यbgूना फिल अर्ज़ि बिगैरिल हक़्क़, या अय्युहन नासु इन्नमा बग्युकुम अला अनफुसिकुम, मताअल् हयातिद दुनिया, सुम्मा इलैना मरजिउकुम फ-नुनब्बिउकुम बिमा कुन्तुम तअ्मलून।
(फिर जब वो उन्हें बचा लेता है तो फौरन वो ज़मीन में नाहक सरकशी करने लगते हैं। ऐ लोगो! तुम्हारी सरकशी तुम्हारे ही खिलाफ है, दुनिया की ज़िन्दगी का (थोड़ा) फायदा है, फिर हमारी तरफ तुम्हें लौटना है तो हम तुम्हें बता देंगे जो तुम करते थे।)इन्नमा मसलुल हयातिद दुनिया कमा-इन अन्ज़ल्नाहु मिनस समा-इ फख्-तलता बिही नबातुल अर्ज़ि मिम्मा याअ्कुलुन नासु वल अनआमु हत्ता इज़ा अख़ज़तिल अर्ज़ु ज़ुख्रुफहा वज़्ज़य्यनत व ज़न्ना अहलुहा अन्नहुम क़ादिरूना अलैहा अताहा अमरुना लैलन औ नहारन फ-जअल्नाहा हसीदन क-अल्लम् तग्न बिल-अम्स, कज़ालिका नुफस्सिलुल आयाति लि-क़ौमिय यतफक्करून।
(दुनिया की ज़िन्दगी की मिसाल तो बस पानी जैसी है जिसे हमने आसमान से उतारा तो उससे ज़मीन की वो पैदावार घनी हो गई जिसे लोग और चौपाए खाते हैं, यहाँ तक कि जब ज़मीन ने अपनी रौनक ले ली और वो सज गई और उसके मालिकों ने समझा कि वो उस पर काबू पा गए हैं तो उस पर रात या दिन में हमारा हुक्म आ गया तो हमने उसे कटी हुई खेती बना दिया जैसे वो कल मौजूद ही न थी, इसी तरह हम आयतें खोलकर बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो गौर करते हैं।)वल्लाहु यदऊ इला दारिस सलामि व यहदी मंय यशाउ इला सिरातिम मुस्तक़ीम।
(और अल्लाह सलामती के घर (जन्नत) की तरफ बुलाता है और जिसे चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत देता है।)लिल्लज़ीना अहसनुल हुस्ना व ज़ियादह, वला यर-हक़ु वुजूहहुम क़तरुंव वला ज़िल्लह, उलाइका अस्हाबुल जन्नति हुम फीहा खालिदून।
(जिन लोगों ने भलाई की उनके लिए भलाई है और ज़्यादा भी, और उनके चेहरों पर न कालिख छाएगी और न रुसवाई, यही जन्नत वाले हैं, वो उसमें हमेशा रहेंगे।)वल्लज़ीना कस-बुस सय्यि-आति जज़ाउ सय्यि-अतिम् बि-मिस्लिहा व तर-हक़ुहुम ज़िल्लह, मा लहुम मिनल्लाहि मिन आसिमिन क-अन्नमा उगशियत वुजूहुहुम क़ित-अम मिनल लैलि मुज़लिमा, उलाइका अस्हाबुन नारि हुम फीहा खालिदून।
(और जिन्होंने बुराइयां कमाईं तो बुराई का बदला उसी जैसा होगा और उन पर रुसवाई छाएगी, उन्हें अल्लाह से बचाने वाला कोई न होगा, गोया उनके चेहरों पर अंधेरी रात के टुकड़े ओढ़ा दिए गए हों, यही आग वाले हैं, वो उसमें हमेशा रहेंगे।)व यौमा नहशुरुहुम जमीअन सुम्मा नकूलु लिल्लज़ीना अशरकू मकानकुम अन्तुम व शुरकाउकुम, फ-ज़य्यल्ना बैनहुम व क़ाला शुरकाउहुम मा कुन्तुम इय्याना तअ्बुदून।
(और जिस दिन हम उन सबको जमा करेंगे फिर मुशरिकों से कहेंगे: अपनी जगह ठहरो तुम और तुम्हारे शरीक, फिर हम उनके दरमियान फूट डाल देंगे और उनके शरीक कहेंगे: तुम हमारी इबादत नहीं करते थे।)फ-कफा बिल्लाहि शहीदम बैनना व बैनकुम इन कुन्ना अन इबादतिकुम ल-गाफिलीन।
(तो हमारे और तुम्हारे दरमियान अल्लाह गवाह काफी है कि हम तुम्हारी इबादत से बेखबर थे।)हुनालिका तब्लू कुल्लु नफसिम मा अस्लफत व रुद्दू इलल्लाहि मौलाहुमुल हक़्क़ि व ज़ल्ला अन्हुम मा कानू यफ्तरून।
(वहां हर जान उसे जांच लेगी जो उसने आगे भेजा था, और वो अल्लाह की तरफ लौटाए जाएंगे जो उनका सच्चा मौला है, और जो वो झूठ घड़ते थे उनसे खो जाएगा।)कुल मंय यरज़ुकुकुम मिनस समा-इ वल अर्ज़ि अम्मन यम्लिकुस सम-अ वल अबसारा व मंय युख्रिजुल हय्या मिनल मय्यिति व युख्रिजुल मय्यिता मिनल हय्यि व मंय युदब्बिरुल अम्र, फ-स-यकूलूनल्लाह, फ-कुल अफला तत्तक़ून।
(कह दीजिए: तुम्हें आसमान और ज़मीन से कौन रोज़ी देता है? या कान और आँखों का मालिक कौन है? और कौन ज़िंदा को मुर्दा से निकालता है और मुर्दा को ज़िंदा से निकालता है? और कौन हर काम की तदबीर करता है? तो वो ज़रूर कहेंगे: अल्लाह। तो कह दीजिए: फिर तुम डरते क्यों नहीं?)फ-ज़ालिकुमुल्लाहु रब्बुकुमुल हक़्क़, फमाज़ा बअ्दल हक़्क़ि इल्लज़ ज़लाल, फ-अन्ना तुस्रफून।
(तो यही अल्लाह तुम्हारा सच्चा रब है, फिर हक़ के बाद गुमराही के सिवा क्या है? तो तुम कहाँ फिरे जाते हो?)कज़ालिका हक़्क़त कलिमतु रब्बिका अलल लज़ीना फसकू अन्नहुम ला युअ्मिनून।
(इसी तरह आपके रब की बात नाफरमानों पर साबित हो गई कि वो ईमान नहीं लाएंगे।)कुल हल मिन शुरका-इकुम मंय यब-द-उल खल्क़ा सुम्मा युईदुह, कुलिल्लाहु यब-द-उल खल्क़ा सुम्मा युईदुहू फ-अन्ना तुअ्फकून।
(कह दीजिए: क्या तुम्हारे शरीकों में कोई है जो पैदाइश की शुरुआत करता हो फिर उसे दोबारा पैदा करे? कह दीजिए: अल्लाह ही पैदाइश की शुरुआत करता है फिर उसे दोबारा पैदा करेगा, तो तुम कहाँ औंधे फिरे जाते हो?)कुल हल मिन शुरका-इकुम मंय यहदी इलल हक़्क़, कुलिल्लाहु यहदी लिल हक़्क़, अ-फ-मंय यहदी इलल हक़्क़ि अ-हक़्क़ु अंय युत्तब-अ अम्मन ला यहिद्दी इल्ला अंय युहदा, फमा लकुम कैफा तहकुमून।
(कह दीजिए: क्या तुम्हारे शरीकों में कोई है जो हक़ की तरफ हिदायत दे? कह दीजिए: अल्लाह ही हक़ की तरफ हिदायत देता है। तो क्या वो जो हक़ की तरफ हिदायत देता है ज़्यादा हक़दार है कि उसकी पैरवी की जाए या वो जिसे खुद हिदायत न मिले जब तक उसे रास्ता न दिखाया जाए? तो तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसे फैसले करते हो?)व मा यत्तबिउ अकसरुहुम इल्ला ज़न्ना, इन्नज़ ज़न्ना ला युग्नी मिनल हक़्क़ि शैया, इन्नल्लाहा अलीमुम बिमा यफअ्लून।
(और उनमें से अक्सर सिर्फ गुमान (अंदाज़े) के पीछे चलते हैं, बेशक गुमान हक़ के मुकाबले में कुछ काम नहीं देता, बेशक अल्लाह उसे खूब जानता है जो वो करते हैं।)व मा काना हाज़ल क़ुरआनु अंय युफ्तरा मिन दूनिल्लाहि व लाकिन तस्दीक़ल लज़ी बैना यदैहि व तफ्सीलल किताबि ला रैबा फीहि मिर रब्बिल आलमीन।
(और यह कुरान ऐसा नहीं कि अल्लाह के सिवा कोई इसे घड़ ले, लेकिन यह तस्दीक है उसकी जो इससे पहले है और किताब की तफसील है, इसमें कोई शक नहीं, (यह) तमाम जहानों के रब की तरफ से है।)अम यकूलूनफ्तराह, कुल फअ्तू बि-सूरतित मिस्लिही वदऊ मनिस ततअ्तुम मिन दूनिल्लाहि इन कुन्तुम सादिक़ीन।
(क्या वो कहते हैं कि उसने इसे घड़ लिया है? कह दीजिए: तो तुम इसके जैसी एक सूरह ले आओ और अल्लाह के सिवा जिसे चाहो बुला लो अगर तुम सच्चे हो।)बल कज़्ज़बू बिमा लम युहीतू बि-इल्मिही व लम्मा यअ्तिहिम तावीलुह, कज़ालिका कज़्ज़बल लज़ीना मिन क़ब्लिहिम फन्ज़ुर कैफा काना आक़िबतुज़ ज़ालिमीन।
(बल्कि उन्होंने उसे झुठलाया जिसके इल्म का वो अहाता न कर सके और अभी उनके पास उसकी असल हकीकत नहीं आई, इसी तरह उन लोगों ने झुठलाया जो उनसे पहले थे, तो देखिए ज़ालिमों का अंजाम कैसा हुआ।)व मिन्हुम मंय युअ्मिनु बिही व मिन्हुम मल्ला युअ्मिनु बिह, व रब्बुका अअ्लमु बिल मुफसिदीन।
(और उनमें से कोई है जो इस पर ईमान लाता है और उनमें से कोई है जो इस पर ईमान नहीं लाता, और आपका रब फसादियों को खूब जानता है।)व इन कज़्ज़बूका फ-कुल ली अमली व लकुम अमलुकुम, अन्तुम बरीऊना मिम्मा अअ्मलु व अना बरीउम मिम्मा तअ्मलून।
(और अगर वो आपको झुठलाएं तो कह दीजिए: मेरे लिए मेरा अमल है और तुम्हारे लिए तुम्हारा अमल, तुम उससे बरी (अलग) हो जो मैं करता हूँ और मैं उससे बरी हूँ जो तुम करते हो।)व मिन्हुम मंय यस्तमिऊना इलैक, अफ-अन्ता तुस्मिउस सुम्मा व लौ कानू ला यअ्क़िलून।
(और उनमें से कुछ हैं जो आपकी तरफ कान लगाते हैं, तो क्या आप बहरों को सुनाएंगे चाहे वो अक्ल न रखते हों?)व मिन्हुम मंय यन्ज़ुरु इलैक, अफ-अन्ता तहदिल उम्या व लौ कानू ला युब्सिरून।
(और उनमें से कोई है जो आपकी तरफ देखता है, तो क्या आप अंधों को रास्ता दिखाएंगे चाहे उन्हें सूझता न हो?)इन्नल्लाहा ला यज़लिमुन नासा शै-अंव व लाकिन्नन नासा अनफुसहुम यज़लिमून।
(बेशक अल्लाह लोगों पर कुछ ज़ुल्म नहीं करता लेकिन लोग खुद अपनी जानों पर ज़ुल्म करते हैं।)व यौमा यहशुरुहुम क-अल्लम् यल्बसू इल्ला सा-अतम मिनन नहारि यत-आरफूना बैनहुम, क़द खसिरल लज़ीना कज़्ज़बू बि-लिक़ा-इल्लाहि व मा कानू मुहतदीन।
(और जिस दिन वो उन्हें जमा करेगा (तो लगेगा) जैसे वो (दुनिया में) दिन की एक घड़ी के सिवा नहीं रहे, वो आपस में एक-दूसरे को पहचानेंगे, बेशक वो लोग घाटे में रहे जिन्होंने अल्लाह की मुलाकात को झुठलाया और वो हिदायत पाने वाले न थे।)व इम्मा नुरियन्नका बअ्ज़ल लज़ी न-इदुहुम औ नतवफ्फयन्नका फ-इलैना मरजिउहुम सुम्मल्लाहु शहीदुन अला मा यफअ्लून।
(और अगर हम आपको उसमें से कुछ दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं या हम आपको (पहले) उठा लें, तो हमारी ही तरफ उनका लौटना है, फिर अल्लाह गवाह है उस पर जो वो करते हैं।)व लि-कुल्लि उम्मतिर् रसूल, फ-इज़ा जा-अ रसूलुहुम कुज़िया बैनहुम बिल क़िस्ति व हुम ला युज़लमून।
(और हर उम्मत के लिए एक रसूल है, फिर जब उनका रसूल आ जाता है तो उनके दरमियान इंसाफ से फैसला कर दिया जाता है और उन पर ज़ुल्म नहीं किया जाता।)व यकूलूना मता हाज़ल वअ्दु इन कुन्तुम सादिक़ीन।
(और वो कहते हैं: यह वादा कब (पूरा) होगा अगर तुम सच्चे हो?)कुल ला अमलिकु लि-नफ्सी ज़र्रंव वला नफ-अन इल्ला मा शा-अल्लाह, लि-कुल्लि उम्मतिन अजल, इज़ा जा-अ अजलुहुम फला यस्तअ्खिरूना सा-अतंव वला यस्तक़दिमून।
(कह दीजिए: मैं अपनी जान के लिए किसी नुकसान और नफे का मालिक नहीं मगर जो अल्लाह चाहे, हर उम्मत के लिए एक मुद्दत है, जब उनकी मुद्दत आ जाती है तो वो एक घड़ी न पीछे हो सकते हैं और न आगे।)कुल अ-र-अय्तुम इन अताकुम अज़ाबुहू बयातन औ नहारम माज़ा यस्तअ्जिलु मिन्हुल मुजरिमून।
(कह दीजिए: देखो तो अगर तुम पर उसका अज़ाब रात को या दिन को आ जाए (तो तुम क्या कर लोगे)? मुजरिम किस चीज़ की जल्दी मचा रहे हैं?)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह यूनुस मक्की है या मदनी?
Q. इस सूरह का नाम यूनुस क्यों है?
इस सूरह में हज़रत यूनुस (अ.स.) और उनकी कौम का ज़िक्र है, जो अज़ाब आने से पहले ईमान ले आई थी। इसी मुनासिबत से इसका नाम सूरह यूनुस है।
Q. डूबते वक़्त फिरौन के ईमान का क्या हुआ?
कुरान के मुताबिक, फिरौन का ईमान कबूल नहीं किया गया क्योंकि वो मौत को देखकर ईमान लाया था। अल्लाह ने उसके जिस्म को बाद वालों के लिए निशानी बना दिया।
नतीजा (Conclusion)
सूरह यूनुस हमें अल्लाह की कुदरत पर गौर करने, नबियों के किस्सों से सबक सीखने और मौत आने से पहले तौबा करने की दावत देती है। यह हमें बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बहुत वसीअ (विशाल) है।
अल्लाह हमें कुरान से हिदायत हासिल करने की तौफीक दे। आमीन।





