Surah Tin in Hindi: सूरह तीन की फजीलत और तर्जुमा
Surah Tin in Hindi: जानिए सूरह तीन (वत्तीन) का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। अल्लाह ने इसमें अंजीर, जैतून और तूर-ए-सीना की कसम क्यों खाई?

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सूरह तीन (Surah At-Tin) कुरान मजीद की 95वीं सूरह है। “तीन” (Tin) का मतलब है “अंजीर” (Fig)। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 8 आयतें हैं।
इस सूरह की शुरुआत में अल्लाह तआला ने चार मुकद्दस (पवित्र) चीज़ों और जगहों की कसम खाई है: अंजीर, जैतून, तूर-ए-सीना पहाड़ और मक्का शहर। इसके बाद इंसान की बेहतरीन बनावट (Structure) और उसके अंजाम का ज़िक्र किया गया है।
इस आर्टिकल में हम Surah Tin in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह तीन की अहमियत (Importance of Surah At-Tin)
- इंसान का मकाम: यह सूरह बताती है कि अल्लाह ने इंसान को “अहसन-ए-तक्वीम” यानी सबसे बेहतरीन सांचे में पैदा किया है।
- चार कसमें: इसमें अल्लाह ने अंजीर और जैतून (जो फायदेमंद फल हैं) और तूर-ए-सीना (जहाँ मूसा अ.स. से बात हुई) और मक्का (अमन वाला शहर) की कसम खाकर बात की अहमियत बताई है।
- ईमान और अमल: यह सूरह बताती है कि जो लोग ईमान लाते हैं और अच्छे काम करते हैं, उनके लिए कभी न खत्म होने वाला इनाम है।
Surah Tin in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
वत्तीनि वज़-ज़ैतून।
(कसम है अंजीर की और जैतून की।)व तूरि सीनीन।
(और कसम है तूर-ए-सीना (पहाड़) की।)व हाज़ल-बलदिल-अमीन।
(और कसम है इस अमन वाले शहर (मक्का) की।)लक़द ख़लक़नल-इंसाना फी अहसनि तक़वीम।
(बेशक हमने इंसान को सबसे बेहतरीन सांचे (सूरत) में पैदा किया है।)सुम्मा रददनाहु असफला साफिलीन।
(फिर हमने उसे पस्त (नीचे) से पस्त कर दिया (बुढ़ापे या जहन्नम में)।)इल्लल-लज़ीना आमनू व अमिलुस-सालिहाति फ-लहुम अजरुन गैरू ममनून।
(सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल किए, तो उनके लिए कभी न खत्म होने वाला बदला (सवाब) है।)फमा युकज़्ज़िबुका बअ्दु बिद-दीन।
(तो (ऐ इंसान!) इसके बाद तुझे जज़ा-सज़ा (कयामत) के दिन को झुठलाने पर कौन सी चीज़ उभारती है?)अ-लैसल्लाहु बि-अहकमिल-हाकिमीन।
(क्या अल्लाह सब हाकिमों (फैसला करने वालों) से बड़ा हाकिम नहीं है?)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह तीन का मतलब क्या है?
“तीन” (Tin) अरबी में अंजीर (Fig) को कहते हैं। चूँकि इस सूरह की शुरुआत अंजीर की कसम से हुई है, इसलिए इसका नाम सूरह तीन है।
Q. अहसन-ए-तक्वीम (Ahsan-e-Taqweem) का क्या मतलब है?
इसका मतलब है “सबसे बेहतरीन बनावट”। अल्लाह ने इंसान को तमाम मखलूकात में सबसे खूबसूरत और अक्लमंद बनाया है।
नतीजा (Conclusion)
सूरह तीन हमें याद दिलाती है कि अल्लाह ने हमें कितना बेहतरीन बनाया है। अगर हम ईमान और नेक अमल के साथ ज़िंदगी गुज़ारें, तो हमारा मकाम बहुत ऊँचा है। लेकिन अगर हम अल्लाह की नाफरमानी करें, तो हम जानवरों से भी बदतर हो सकते हैं।
अल्लाह हमें अपनी बेहतरीन बनावट का हक़ अदा करने और नेक अमल करने की तौफीक दे। आमीन।





