Surah Taubah in Hindi: सूरह तौबा की फजीलत और पहली 50 आयतें
Surah Taubah in Hindi: जानिए सूरह तौबा की फजीलत और पहली 50 आयतों का हिंदी तर्जुमा। यह सूरह मुनाफिकों और जंग के अहकाम पर रौशनी डालती है।

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सूरह तौबा (Surah At-Tawbah) कुरान मजीद की 9वीं सूरह है। इसे “अल-बरात” (Al-Bara’ah) भी कहा जाता है। यह मदीना में नाज़िल हुई (मदनी सूरह) और इसमें 129 आयतें हैं।
यह कुरान की वाहिद (अकेली) सूरह है जिसके शुरू में “बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम” नहीं लिखी जाती। इसमें अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) की तरफ से मुशरिकों (मूर्तिपूजकों) से बरी-उज़-ज़िम्मा (अलग) होने का ऐलान है और मुनाफिकों (Hypocrites) की पोल खोली गई है।
इस आर्टिकल में हम Surah Taubah in Hindi, इसकी अहमियत और पहली 50 आयतों का तर्जुमा जानेंगे।
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सूरह तौबा की अहमियत (Importance of Surah At-Tawbah)
- बिस्मिल्लाह क्यों नहीं? हज़रत अली (रज़ि.) फरमाते हैं कि “बिस्मिल्लाह” अमन और रहमत की निशानी है, जबकि इस सूरह में मुशरिकों के लिए तलवार और अज़ाब का ज़िक्र है, इसलिए इसके शुरू में बिस्मिल्लाह नहीं लिखी गई।
- मुनाफिकों का पर्दाफाश: यह सूरह मुनाफिकों के दिलों के भेद खोलती है और उनकी साज़िशों को बेनकाब करती है।
- जंग-ए-तबूक: इसमें जंग-ए-तबूक के वाकयात और उन लोगों का ज़िक्र है जिन्होंने जंग में जाने से बहाने बनाए।
Surah Taubah Ayat 1-50 in Hindi
(नोट: इस सूरह की तिलावत शुरू करते वक़्त “बिस्मिल्लाह” नहीं पढ़ी जाती, सिर्फ “अऊज़ु बिल्लाह” पढ़कर शुरू करें।)
बरा-अतुम मिनल्लाहि व रसूलिही इलल लज़ीना आहत्तुम मिनल मुश्रिकीन।
(अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से बे-ज़ारी (अलग होने) का ऐलान है उन मुशरिकों के लिए जिनसे तुमने अहद (समझौता) किया था।)फ-सीहू फिल अर्ज़ि अर-ब-अता अश्हुरिंव वअ्लमू अन्नकुम गैरू मुअ्जिज़िल्लाहि व अन्नल्लाहा मुख्ज़िल काफ़िरीन।
(तो (ऐ मुशरिको!) तुम ज़मीन में चार महीने चल-फिर लो, और जान लो कि तुम अल्लाह को आजिज़ (बेबस) नहीं कर सकते, और यह कि अल्लाह काफिरों को रुसवा करने वाला है।)व अज़ानुम मिनल्लाहि व रसूलिही इलन नासि यौमल हज्जिल अकबरि अन्नल्लाहा बरी-उम मिनल मुश्रिकीन, व रसूलुह, फ-इन तुब्तुम फ-हुवा खैरुल लकुम, व इन तवल्लैतुम फअ्लमू अन्नकुम गैरू मुअ्जिज़िल्लाह, व बश्शिरिल लज़ीना कफरू बि-अज़ाबिन अलीम।
(और बड़े हज के दिन अल्लाह और उसके रसूल की तरफ से लोगों में ऐलान है कि अल्लाह मुशरिकों से बरी (अलग) है और उसका रसूल भी, तो अगर तुम तौबा कर लो तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है, और अगर तुम मुँह फेरो तो जान लो कि तुम अल्लाह को आजिज़ नहीं कर सकते, और (ऐ नबी!) काफिरों को दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दीजिए।)इल्लल लज़ीना आहत्तुम मिनल मुश्रिकीना सुम्मा लम यन्कुसूकुम शै-अंव वलम युज़ाहिरू अलैकुम अहदन फ-अतिम्मू इलैहिम अहदहुम इला मुद्दतिहिम, इन्नल्लाहा युहिब्बुल मुत्तक़ीन।
(सिवाय उन मुशरिकों के जिनसे तुमने अहद किया फिर उन्होंने तुम्हारे साथ कोई कमी नहीं की और तुम्हारे खिलाफ किसी की मदद नहीं की, तो उनका अहद उनकी मुद्दत तक पूरा करो, बेशक अल्लाह परहेज़गारों को पसंद करता है।)फ-इज़न स-ल-खल अश्हुरुल हुरुमु फक़्तुलुल मुश्रिकीना हैसु वजत्तुमूहुम व खुज़ूहुम वहसुरूहूम वक़-उदू लहुम कुल्ला मरसद, फ-इन ताबू व अक़ामुस सलाता व आ-तवुज़ ज़काता फ-खल्लू सबीलहुम, इन्नल्लाहा गफूरुर रहीम।
(फिर जब हुरमत (आदर) वाले महीने गुज़र जाएं तो मुशरिकों को मारो जहाँ भी उन्हें पाओ और उन्हें पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो, फिर अगर वो तौबा कर लें और नमाज़ कायम करें और ज़कात दें तो उनका रास्ता छोड़ दो, बेशक अल्लाह बख्शने वाला, निहायत रहम वाला है।)व इन अहदुम मिनल मुश्रिकीनस्तजारका फ-अजिरहु हत्ता यस्म-अ कलामल्लाहि सुम्मा अब्लिगहु मामनह, ज़ालिका बि-अन्नहुम कौमुल ला यअ्लमून।
(और अगर मुशरिकों में से कोई आपसे पनाह मांगे तो उसे पनाह दें यहाँ तक कि वो अल्लाह का कलाम सुन ले, फिर उसे उसकी अमन की जगह पहुँचा दें, यह इसलिए कि वो ऐसे लोग हैं जो इल्म नहीं रखते।)कैफा यकूनु लिल-मुश्रिकीना अहदुन इन्दल्लाहि व इन्द रसूलिही इल्लल लज़ीना आहत्तुम इन्दल मस्जिदिल हराम, फ-मस्तक़ामू लकुम फस्तक़ीमू लहुम, इन्नल्लाहा युहिब्बुल मुत्तक़ीन।
(मुशरिकों के लिए अल्लाह और उसके रसूल के नज़दीक कोई अहद कैसे हो सकता है? सिवाय उन लोगों के जिनसे तुमने मस्जिदे हराम के पास अहद किया था, तो जब तक वो तुम्हारे लिए सीधे रहें तुम भी उनके लिए सीधे रहो, बेशक अल्लाह परहेज़गारों को पसंद करता है।)कैफा व इंय यज़-हरू अलैकुम ला यरक़ुबू फीकुम इल्लंव वला ज़िम्मह, युरज़ूनकुम बि-अफ्वाहिहिम व ताबा कुलूबुहुम, व अकसरुहुम फासिक़ून।
(कैसे (अहद हो सकता है)? जबकि अगर वो तुम पर गालिब आ जाएं तो तुम्हारे बारे में न किसी रिश्तेदारी का ख्याल रखें और न किसी ज़िम्मे का, वो अपने मुँह से तुम्हें राज़ी करते हैं और उनके दिल इनकार करते हैं, और उनमें से अक्सर नाफरमान हैं।)इश्तरौ बि-आयातिल्लाहि समनन क़लीलन फ-सद्दू अन सबीलिह, इन्नहुम सा-अ मा कानू यअ्मलून।
(उन्होंने अल्लाह की आयतों के बदले थोड़ी कीमत खरीद ली, फिर (लोगों को) उसके रास्ते से रोका, बेशक वो बहुत बुरा है जो वो करते थे।)ला यरक़ुबूना फी मुअ्मिनिन इल्लंव वला ज़िम्मह, व उलाइका हुमुल मुअ्तदून।
(वो किसी मोमिन के बारे में न रिश्तेदारी का ख्याल रखते हैं और न ज़िम्मे का, और यही लोग हद से बढ़ने वाले हैं।)फ-इन ताबू व अक़ामुस सलाता व आ-तवुज़ ज़काता फ-इख्वानुकुम फिद दीन, व नुफस्सिलुल आयाति लि-कौमिय यअ्लमून।
(फिर अगर वो तौबा कर लें और नमाज़ कायम करें और ज़कात दें तो वो दीन में तुम्हारे भाई हैं, और हम आयतें खोलकर बयान करते हैं उन लोगों के लिए जो जानते हैं।)व इन न-कसू ऐमानहुम मिम बअ्दि अहदिहिम व त-अनू फी दीनिकुम फ-क़ातिलू अइम्मतल कुफ्रि इन्नहुम ला ऐमाना लहुम ल-अल्लहुम यन्तहून।
(और अगर वो अपने अहद के बाद अपनी कसमें तोड़ दें और तुम्हारे दीन में तानाज़नी (बुराई) करें तो कुफ्र के सरदारों से लड़ो, बेशक उनकी कसमों का कोई एतबार नहीं, ताकि वो बाज़ आ जाएं।)अला तुक़ातिलूना कौमन न-कसू ऐमानहुम व हम्मू बि-इखराजिर रसूलि व हुम ब-द-ऊकुम अव्वला मर्रह, अ-तख्शौनहुम, फल्लाहु अ-हक्कु अन तख्शौहु इन कुन्तुम मुअ्मिनीन।
(क्या तुम उस कौम से नहीं लड़ोगे जिन्होंने अपनी कसमें तोड़ दीं और रसूल को निकालने का इरादा किया और उन्होंने ही तुमसे (छेड़छाड़) पहली बार शुरू की? क्या तुम उनसे डरते हो? तो अल्लाह ज़्यादा हक़दार है कि तुम उससे डरो अगर तुम मोमिन हो।)क़ातिलूहुम युअज़्ज़िबहुमुल्लाहु बि-ऐदीकुम व युख्ज़िहिम व यन्सुरकुम अलैहिम व यश्फि सुदूरा कौमिम मुअ्मिनीन।
(उनसे लड़ो, अल्लाह उन्हें तुम्हारे हाथों से अज़ाब देगा और उन्हें रुसवा करेगा और उनके खिलाफ तुम्हारी मदद करेगा और मोमिन कौम के सीनों को शिफा (ठंडक) देगा।)व युज़हिब गैज़ा कुलूबिहिम, व यतूबुल्लाहु अला मंय यशा, वल्लाहु अलीमुन हकीम।
(और उनके दिलों का गुस्सा दूर करेगा, और अल्लाह जिसकी चाहता है तौबा कबूल करता है, और अल्लाह जानने वाला, हिकमत वाला है।)अम हसिब्तुम अन तुत्रकू व लम्मा यअ्लमिल्लाहुल लज़ीना जाहदू मिन्कुम वलम यत्तखिज़ू मिन दूनिल्लाहि वला रसूलिही वलल मुअ्मिनीना वलीजह, वल्लाहु खबीरूम बिमा तअ्मलून।
(क्या तुम समझते हो कि तुम (ऐसे ही) छोड़ दिए जाओगे हालांकि अभी अल्लाह ने उन लोगों को (परख कर) अलग नहीं किया जिन्होंने तुममें से जिहाद किया और अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनों के सिवा किसी को राज़दार दोस्त नहीं बनाया? और अल्लाह उससे खबरदार है जो तुम करते हो।)मा काना लिल-मुश्रिकीना अंय यअ्मुरू मसाजिदल्लाहि शाहिदीना अला अनफुसिहिम बिल-कुफ्र, उलाइका हबितत अअ्मालुहुम व फिन नारि हुम खालिदून।
(मुशरिकों का काम नहीं कि वो अल्लाह की मस्जिदों को आबाद करें जबकि वो खुद अपने ऊपर कुफ्र की गवाही दे रहे हों, ये वो लोग हैं जिनके आमाल बर्बाद हो गए और वो आग में हमेशा रहेंगे।)इन्नमा यअ्मुरु मसाजिदल्लाहि मन आमना बिल्लाहि वल यौमिल आखिरि व अक़ामस सलाता व आताज़ ज़काता वलम यख्शा इल्लल्लाह, फ-असा उलाइका अंय यकूनू मिनल मुहतदीन।
(अल्लाह की मस्जिदों को तो वही आबाद करता है जो अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान लाया और नमाज़ कायम की और ज़कात दी और अल्लाह के सिवा किसी से न डरा, तो उम्मीद है कि यही लोग हिदायत पाने वालों में से होंगे।)अ-जअल्तुम सिक़ायतल हाज्जि व इमारतल मस्जिदिल हरामि कमन आमना बिल्लाहि वल यौमिल आखिरि व जाहदा फी सबीलिल्लाह, ला यस्तवूना इन्दल्लाह, वल्लाहु ला यहदिल कौमज़ ज़ालिमीन।
(क्या तुमने हाजियों को पानी पिलाना और मस्जिदे हराम को आबाद करना उस शख्स (के अमल) जैसा बना लिया जो अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान लाया और अल्लाह की राह में जिहाद किया? वो अल्लाह के नज़दीक बराबर नहीं, और अल्लाह ज़ालिम कौम को हिदायत नहीं देता।)अल्लज़ीना आमनू व हाजरू व जाहदू फी सबीलिल्लाहि बि-अमवालिहिम व अनफुसिहिम अअ्ज़मु दरजतन इन्दल्लाह, व उलाइका हुमुल फाइज़ून।
(जो लोग ईमान लाए और हिजरत की और अल्लाह की राह में अपने मालों और अपनी जानों से जिहाद किया, वो अल्लाह के नज़दीक दर्जे में बहुत बड़े हैं, और यही लोग कामयाब हैं।)युबश्शिरुहुम रब्बुहुम बि-रहमतुम मिन्हु व रिज़वानिंव व जन्नातिल लहुम फीहा नईमुम मुक़ीम।
(उनका रब उन्हें अपनी तरफ से रहमत और रज़ामंदी और ऐसी जन्नतों की खुशखबरी देता है जिनमें उनके लिए हमेशा रहने वाली नेमतें हैं।)खालिदीना फीहा अबदा, इन्नल्लाहा इन्दहू अजरुन अज़ीम।
(वो उनमें हमेशा हमेशा रहेंगे, बेशक अल्लाह के पास बड़ा अज्र है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू ला तत्तखिज़ू आबा-अकुम व इख्वानकुम औलिया-अ इनिस्तहब्बुल कुफ्रा अलल ईमान, व मंय यतवल्लहुम मिन्कुम फ-उलाइका हुमुज़ ज़ालिमून।
(ऐ ईमान वालो! अपने बाप-दादा और अपने भाइयों को दोस्त न बनाओ अगर वो ईमान के मुकाबले में कुफ्र को पसंद करें, और तुममें से जो उन्हें दोस्त बनाएगा तो वही लोग ज़ालिम हैं।)कुल इन काना आबाउकुम व अबनाउकुम व इख्वानुकुम व अज़वाजुकुम व अशीरतुकुम व अमवालुनिक तरफ्तुमूहा व तिजारतुन तख्शौना कसा-दहा व मसाकिनु तरज़ौनहा अहब्बा इलैकुम मिनल्लाहि व रसूलिही व जिहादिन फी सबीलिही फ-तरब्बसू हत्ता यअ्तियल्लाहु बि-अम्रिह, वल्लाहु ला यहदिल कौमल फासिक़ीन।
(कह दीजिए: अगर तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे और तुम्हारे भाई और तुम्हारी बीवियां और तुम्हारा कुनबा और वो माल जो तुमने कमाए हैं और वो तिजारत जिसके मंदा होने का तुम्हें डर है और वो घर जिन्हें तुम पसंद करते हो, तुम्हें अल्लाह और उसके रसूल और उसकी राह में जिहाद करने से ज़्यादा प्यारे हैं तो इंतज़ार करो यहाँ तक कि अल्लाह अपना हुक्म (अज़ाब) ले आए, और अल्लाह नाफरमान कौम को हिदायत नहीं देता।)लक़द नसरकुमुल्लाहु फी मवाटिना कसीरतिंव व यौमा हुनैनिन इज़ अअ्जबत्कुम कस-रतुकुम फलम तुग्नि अन्कुम शै-अंव व ज़ाक़त अलैकुमुल अर्ज़ु बिमा रहुबत सुम्मा वल्लैतुम मुदबिरीन।
(बेशक अल्लाह ने बहुत से मौकों पर तुम्हारी मदद की और हुनैन के दिन (भी), जब तुम्हें अपनी कसरत (ज़्यादा तादाद) पर नाज़ था तो वो तुम्हारे कुछ काम न आई और ज़मीन अपनी कुशादगी (फैलाव) के बावजूद तुम पर तंग हो गई, फिर तुम पीठ फेर कर भाग निकले।)सुम्मा अन्ज़लल्लाहु सकी-नतहू अला रसूलिही व अलल मुअ्मिनीना व अन्ज़ला जुनूदल लम तरौहा व अज़्ज़बल लज़ीना कफरू, व ज़ालिका जज़ाउल काफ़िरीन।
(फिर अल्लाह ने अपनी तसल्ली (सकीना) अपने रसूल पर और मोमिनों पर उतारी और ऐसे लश्कर (फरिश्ते) उतारे जिन्हें तुमने नहीं देखा और काफिरों को अज़ाब दिया, और काफिरों का यही बदला है।)सुम्मा यतूबुल्लाहु मिम बअ्दि ज़ालिका अला मंय यशा, वल्लाहु गफूरुर रहीम।
(फिर अल्लाह इसके बाद जिसकी चाहेगा तौबा कबूल करेगा, और अल्लाह बख्शने वाला, निहायत रहम वाला है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू इन्नमल मुश्रिकूना नजसुन फला यक़रबुल मस्जिदल हरामा बअ्दा आमिहिम हाज़ा, व इन ख़िफ़्तुम ऐलतन फ-सौफा युग्निकुमुल्लाहु मिन फज़लिही इन शा-अ, इन्नल्लाहा अलीमुन हकीम।
(ऐ ईमान वालो! मुशरिक तो बस नापाक ही हैं, तो वो इस साल के बाद मस्जिदे हराम के करीब न आएं, और अगर तुम्हें तंगदस्ती (गरीबी) का डर हो तो अगर अल्लाह चाहेगा तो तुम्हें अपने फज़ल से गनी (मालदार) कर देगा, बेशक अल्लाह जानने वाला, हिकमत वाला है।)क़ातिलुल लज़ीना ला युअ्मिनूना बिल्लाहि वला बिल यौमिल आखिरि वला युहर्रिमूना मा हर्रमल्लाहु व रसूलुहू वला यदी नूना दीनल हक़्क़ि मिनल लज़ीना ऊतुल किताबा हत्ता युअ्तुल जिज़्यता अंय यदिंव व हुम सागिरून।
(उन लोगों से लड़ो जो न अल्लाह पर ईमान लाते हैं और न आखिरत के दिन पर और न उसे हराम मानते हैं जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम किया और न सच्चे दीन को कबूल करते हैं, उन लोगों में से जिन्हें किताब दी गई (अहले किताब), यहाँ तक कि वो अपने हाथ से जिज़्या (टेक्स) दें और वो छोटे बनकर रहें।)व क़ालतिय यहूदु उज़ैरुनिब्नुल्लाहि व क़ालतिन नसारा मसीहुब्नुल्लाह, ज़ालिका कौलुहुम बि-अफ्वाहिहिम, युज़ाहिऊना कौलल लज़ीना कफरू मिन क़ब्ल, क़ातलहुमुल्लाहु अन्ना युअ्फकून।
(और यहूदियों ने कहा: उज़ैर अल्लाह के बेटे हैं, और ईसाइयों ने कहा: मसीह (ईसा) अल्लाह के बेटे हैं, यह उनकी अपने मुँह की बात है, वो उन लोगों की बात की नक़ल करते हैं जिन्होंने पहले कुफ्र किया, अल्लाह उन्हें मार डाले, वो कहाँ औंधे फिरे जाते हैं।)इत्तखज़ू अहबारहुम व रुहबानहुम अरबाबम मिन दूनिल्लाहि वल मसीहब्न मरयम, व मा उमिरू इल्ला लि-यअ्बुदू इलाहंव वाहिदा, ला इलाहा इल्ला हू, सुब्हानहू अम्मा युशरिकून।
(उन्होंने अपने आलिमों और दरवेशों को अल्लाह के सिवा रब बना लिया और मसीह इब्ने मरियम को भी, हालांकि उन्हें हुक्म नहीं दिया गया था मगर ये कि वो एक माबूद की इबादत करें, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वो पाक है उससे जो वो शरीक ठहराते हैं।)युरीदूना अंय युत्फिऊ नूरल्लाहि बि-अफ्वाहिहिम व याबल्लाहु इल्ला अंय युतिम्मा नूरहू व लौ करिहल काफिरून।
(वो चाहते हैं कि अल्लाह के नूर को अपने मुँह (की फूंकों) से बुझा दें और अल्लाह नहीं मानता मगर ये कि अपने नूर को पूरा करे, चाहे काफिरों को नागवार हो।)हुवल लज़ी अर्सला रसूलहू बिल हुदा व दीनिल हक़्क़ि लि-युज़हिरहू अलद दीनि कुल्लिही व लौ करिहल मुश्रिकून।
(वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा ताकि उसे सब दीनों पर गालिब कर दे, चाहे मुशरिकों को नागवार हो।)या अय्युहल लज़ीना आमनू इन्ना कसीरम मिनल अहबारि वर्-रुहबानि ल-याअ्कुलूना अमवालन नासि बिल बातिलि व यसुद्दूना अन सबीलिल्लाह, वल्लज़ीना यकनिज़ूनज़ ज़हबा वल फिद्दता वला युन्फ़िक़ूनहा फी सबीलिल्लाहि फ-बश्शिरहुम बि-अज़ाबिन अलीम।
(ऐ ईमान वालो! बेशक बहुत से आलिम और दरवेश लोगों का माल नाहक खाते हैं और अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं, और जो लोग सोना और चांदी जमा करते हैं और उसे अल्लाह के रास्ते में खर्च नहीं करते तो उन्हें दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दीजिए।)यौमा युहमा अलैहा फी नारि जहन्नमा फ-तुकवा बिहा जिबाहुहुम व जुनूबुहुम व जुहूरुहुम, हाज़ा मा कनज़्तुम लि-अनफुसिकुम फ-ज़ूकू मा कुन्तुम तकनिज़ून।
(जिस दिन उसे (सोने-चांदी को) जहन्नम की आग में तपाया जाएगा फिर उससे उनकी पेशानियां और उनके पहलू और उनकी पीठें दाग़ी जाएंगी, (कहा जाएगा) यह वही है जो तुमने अपने लिए जमा किया था, तो चखो जो तुम जमा करते थे।)इन्ना इद्दतश शुहूरी इन्दल्लाहिस्ना अशरा शहरन फी किताबिल्लाहि यौमा ख़-ल-क़स समावाति वल अर्ज़ा मिन्हा अर-ब-अतुन हुरुम, ज़ालिकद दीहुल क़य्यिमु फला तज़लिमू फीहिन्ना अनफुसकुम, व क़ातिलुल मुश्रिकीना काफ्फतन कमा युक़ातिलूनकुम काफ्फह, वअ्लमू अन्नल्लाहा म-अल मुत्तक़ीन।
(बेशक महीनों की गिनती अल्लाह के नज़दीक बारह महीने है अल्लाह की किताब में, जिस दिन उसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, उनमें से चार हुरमत (आदर) वाले हैं, यही सीधा दीन है, तो उनमें अपनी जानों पर ज़ुल्म न करो, और मुशरिकों से सब मिलकर लड़ो जैसे वो तुमसे सब मिलकर लड़ते हैं, और जान लो कि अल्लाह परहेज़गारों के साथ है।)इन्नमन नसी-उ ज़ियादतुन फिल कुफ्रि युज़ल्लु बिहिल लज़ीना कफरू युहिल्लूनहू आमंव व युहर्रिमूनहू आमल लि-युवातिऊ इद्दता मा हर्रमल्लाहु फ-युहिल्लू मा हर्रमल्लाह, ज़ुय्यिना लहुम सू-उ अअ्मालिहिम, वल्लाहु ला यहदिल कौमल काफ़िरीन।
(बेशक (महीनों का) पीछे हटाना कुफ्र में बढ़ना है, इससे काफिर गुमराह किए जाते हैं, वो उसे एक साल हलाल कर लेते हैं और एक साल हराम कर लेते हैं ताकि उस गिनती को पूरा कर लें जो अल्लाह ने हराम की है, फिर उसे हलाल कर लेते हैं जिसे अल्लाह ने हराम किया, उनके बुरे आमाल उनके लिए खुश-नुमा बना दिए गए हैं, और अल्लाह काफिर कौम को हिदायत नहीं देता।)या अय्युहल लज़ीना आमनू मा लकुम इज़ा कीला लकुमुन्फिरू फी सबीलिल्लाहिस्साक़ल्तुम इलल अर्ज़, अ-रज़ीतुम बिल हयातिद दुनिया मिनल आखिरह, फमा मताउल हयातिद दुनिया फिल आखिरति इल्ला क़लील।
(ऐ ईमान वालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि अल्लाह की राह में निकलो तो तुम ज़मीन से बोझल होकर लग जाते हो? क्या तुम आखिरत के बदले दुनिया की ज़िन्दगी पर राज़ी हो गए हो? तो आखिरत के मुकाबले में दुनिया की ज़िन्दगी का सामान बहुत थोड़ा है।)इल्ला तन्फिरू युअज़्ज़िब्कुम अज़ाबन अलीमंव व यस्तब्दिल कौमन गैरकुम वला तज़ुर्रूहू शैया, वल्लाहु अला कुल्लि शैइन क़दीर।
(अगर तुम नहीं निकलोगे तो वो तुम्हें दर्दनाक अज़ाब देगा और तुम्हारे बदले दूसरी कौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकोगे, और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है।)इल्ला तन्सुरूहू फक़द नसरहुल्लाहु इज़ अख़-रजहुल लज़ीना कफरू सानियस्नैनि इज़ हुमा फिल गारि इज़ यकूलु लि-साहिबिही ला तहज़न इन्नल्लाहा म-अना, फ-अन्ज़लल्लाहु सकी-नतहू अलैहि व अय्यदहू बि-जुनूदिल लम तरौहा व ज-अ-ला कलिमतल लज़ीना कफरुस सुफ्ला, व कलिमतुल्लाहि हियल उल्या, वल्लाहु अज़ीज़ुन हकीम।
(अगर तुम उस (रसूल) की मदद नहीं करोगे तो बेशक अल्लाह ने उसकी मदद की जब काफिरों ने उसे निकाल दिया था, वो दो में से दूसरा था जब वो दोनों गार (गुफा) में थे, जब वो अपने साथी (अबू बक्र) से कह रहा था: गम न कर, बेशक अल्लाह हमारे साथ है, तो अल्लाह ने अपनी तसल्ली उस पर उतारी और उसकी मदद ऐसे लश्करों से की जिन्हें तुमने नहीं देखा और काफिरों की बात नीची कर दी, और अल्लाह का बोल ही ऊँचा है, और अल्लाह ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।)इन्फिरू ख़िफ़ाफंव व सिक़ालंव व जाहिदू बि-अमवालिकुम व अनफुसिकुम फी सबीलिल्लाह, ज़ालिकुम खैरुल लकुम इन कुन्तुम तअ्लमून।
(हल्के हो या बोझल (हर हाल में) निकलो और अल्लाह की राह में अपने मालों और अपनी जानों से जिहाद करो, यह तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम जानते हो।)लौ काना अ-र-ज़न क़रीबंव व सफरन क़ासिदल लत्तबऊका व लाकिम्ब-उदत अलैहिमुश शुक़्क़ह, व स-यहलिफूना बिल्लाहि लविस्ततअ्ना ल-खरज्ना म-अकुम, युहलिकूना अनफुसहुम, वल्लाहु यअ्लमु इन्नहुम ल-काज़िबून।
(अगर माल नकद होता और सफर हल्का होता तो वो ज़रूर आपके पीछे चलते लेकिन उन पर मुसाफत (दूरी) लंबी हो गई, और अब वो अल्लाह की कसमें खाएंगे कि अगर हम ताकत रखते तो ज़रूर तुम्हारे साथ निकलते, वो अपनी जानों को हलाक कर रहे हैं, और अल्लाह जानता है कि बेशक वो झूठे हैं।)अफल्लाहु अन्क, लिमा अज़िन्ता लहुम हत्ता यत-बय्यना लकल लज़ीना सदक़ू व तअ्लमल काज़िबीन।
(अल्लाह आपको माफ़ करे, आपने उन्हें इजाज़त क्यों दी यहाँ तक कि आप पर वो लोग जाहिर हो जाते जो सच्चे हैं और आप झूठों को जान लेते?)ला यस्तअ्ज़िनुकल लज़ीना युअ्मिनूना बिल्लाहि वल यौमिल आखिरि अंय युजाहिदू बि-अमवालिहिम व अनफुसिहिम, वल्लाहु अलीमुम बिल मुत्तक़ीन।
(जो लोग अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान रखते हैं वो आपसे इजाज़त नहीं मांगते कि अपने मालों और अपनी जानों से जिहाद (न) करें, और अल्लाह परहेज़गारों को खूब जानता है।)इन्नमा यस्तअ्ज़िनुकल लज़ीना ला युअ्मिनूना बिल्लाहि वल यौमिल आखिरि वर्ताबत कुलूबुहुम फहुम फी रैबिहिम यतरद्ददून।
(आपसे इजाज़त तो वही मांगते हैं जो अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान नहीं रखते और उनके दिल शक में पड़े हैं तो वो अपने शक में डांवाडोल हो रहे हैं।)व लौ अरादुल खुरूजा ल-अ-अद्दू लहू उद्दतंव व लाकिन करिहल्लाहुम्बियासहुम फ-सब्बतहुम व कीलक़-उदू म-अल क़ाइदीन।
(और अगर वो निकलने का इरादा करते तो उसके लिए कोई सामान ज़रूर तैयार करते लेकिन अल्लाह ने उनके उठने को नापसंद किया तो उन्हें रोक दिया और कहा गया कि बैठने वालों के साथ बैठे रहो।)लौ खरजू फीकुम मा ज़ादूकुम इल्ला ख़बालंव व ल-औ-दऊ खिलालकुम यबगूनकुमूल फितनता व फीकुम सम्माऊना लहुम, वल्लाहु अलीमुम बिज़ ज़ालिमीन।
(अगर वो तुममें निकलते तो तुम्हारे अंदर फसाद के सिवा कुछ न बढ़ाते और तुम्हारे दरमियान फितना तलाश करने के लिए घोड़े दौड़ाते, और तुममें उनके जासूस मौजूद हैं, और अल्लाह ज़ालिमों को खूब जानता है।)लक़दिब्तगवुल फितनता मिन क़ब्लु व क़ल्लबू लकल उमूरा हत्ता जा-अल हक़्क़ु व ज़हरा अमरुल्लाहि व हुम कारिहून।
(बेशक उन्होंने पहले भी फितना तलाश किया था और आपके लिए मामलों को उलट-पुलट करते रहे यहाँ तक कि हक़ आ गया और अल्लाह का हुक्म गालिब हो गया और वो नापसंद कर रहे थे।)व मिन्हुम मंय यकूलुअ्ज़ल ली वला तफ़तिन्नी, अला फिल फितनति सक़तू, व इन्ना जहन्नमा ल-मुहीततुम बिल काफ़िरीन।
(और उनमें से कोई है जो कहता है: मुझे इजाज़त दीजिए और मुझे फितने में न डालिए। सुन लो! वो फितने में पड़ चुके हैं, और बेशक जहन्नम काफिरों को घेरने वाली है।)इन तुसिब्का हसनतुन तसूअ्हुम, व इन तुसिब्का मुसीबतुंय यकूलू क़द अख़ज़ना अमराना मिन क़ब्लु व यतवल्लौ व हुम फरिहून।
(अगर आपको कोई भलाई पहुँचे तो उन्हें बुरा लगता है, और अगर आपको कोई मुसीबत पहुँचे तो कहते हैं: हमने तो अपना मामला पहले ही ठीक कर लिया था, और वो खुश होकर लौटते हैं।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह तौबा के शुरू में बिस्मिल्लाह क्यों नहीं है?
हज़रत अली (रज़ि.) के मुताबिक, “बिस्मिल्लाह” में अमन और रहमत है, जबकि सूरह तौबा मुशरिकों से जंग और बे-ज़ारी (Disassociation) का ऐलान है, इसलिए इसमें बिस्मिल्लाह नहीं लिखी गई।
Q. सूरह तौबा का दूसरा नाम क्या है?
इसे “अल-बरात” (Al-Bara’ah) भी कहा जाता है, जिसका मतलब है “बरी होना” या “अलग होना”।
Q. सूरह तौबा का खास मौज़ू (Topic) क्या है?
इस सूरह का मुख्य विषय मुनाफिकों (Hypocrites) की पहचान, मुशरिकों से ताल्लुकात खत्म करना, और जंग-ए-तबूक के अहकाम हैं।
नतीजा (Conclusion)
सूरह तौबा इस्लाम की गैरत और मुनाफिकों के खिलाफ सख्ती का दर्स देती है। यह हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) की मोहब्बत हर रिश्ते और दुनियावी फायदे से बढ़कर होनी चाहिए।
अल्लाह हमें निफाक (Hypocrisy) से बचाए और सच्चे ईमान पर कायम रखे। आमीन।





