Surah Quraysh in Hindi: सूरह कुरैश की फजीलत और तर्जुमा
Surah Quraysh in Hindi: जानिए सूरह कुरैश का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह कुरैश कबीले पर अल्लाह के एहसानों का ज़िक्र करती है।

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सूरह कुरैश (Surah Quraysh) कुरान मजीद की 106वीं सूरह है। “कुरैश” मक्का के उस मशहूर कबीले का नाम है जिसमें हमारे प्यारे नबी (ﷺ) पैदा हुए थे। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 4 आयतें हैं।
यह सूरह, सूरह फील से जुड़ी हुई है। सूरह फील में बताया गया कि अल्लाह ने काबा को हाथियों वालों से कैसे बचाया, और इस सूरह में बताया गया है कि उस हिफाज़त की वजह से कुरैश कबीले को क्या फायदे हुए।
इस आर्टिकल में हम Surah Quraysh in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह कुरैश की अहमियत (Importance of Surah Quraysh)
- अल्लाह के एहसान: यह सूरह कुरैश कबीले पर अल्लाह के दो बड़े एहसानों का ज़िक्र करती है: उन्हें सफर में अमन दिया और भूख में खाना खिलाया।
- शुक्रगुज़ारी का पैगाम: अल्लाह ने कुरैश को याद दिलाया कि जब उसने इतनी नेमतें दी हैं, तो उन्हें सिर्फ उसी एक रब की इबादत करनी चाहिए।
- अमन और रिज़्क़: यह सूरह बताती है कि अमन और रिज़्क़ (रोज़ी) अल्लाह की बहुत बड़ी नेमतें हैं, जिनका हमें शुक्र अदा करना चाहिए।
Surah Quraysh in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
लि-ईलाफि कुरैश।
(कुरैश को आदी (अभ्यस्त) बनाने के सबब।)ईलाफिहिम रिहल-तश-शिता-इ वस-सैफ।
(यानी उन्हें सर्दी और गर्मी के सफर का आदी बनाने के सबब।)फल-यअ्बुदू रब्बा हाज़ल-बैत।
(तो उन्हें चाहिए कि वो इस घर (काबा) के रब की इबादत करें।)अल्लज़ी अत्-अ-महुम-मिन जू-इंव-व आ-म-नहुम-मिन खौफ।
(जिसने उन्हें भूख में खाना खिलाया और खौफ (डर) से अमन दिया।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. कुरैश (Quraysh) कौन थे?
कुरैश मक्का का सबसे इज़्ज़तदार और ताकतवर कबीला था। हमारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) भी इसी कबीले से थे। काबा की देख-रेख की ज़िम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी।
Q. सूरह कुरैश और सूरह फील में क्या ताल्लुक है?
सूरह फील में अल्लाह ने बताया कि उसने काबा की हिफाज़त की। उस हिफाज़त की वजह से पूरे अरब में कुरैश की इज़्ज़त बढ़ गई और उनके तिजारती (व्यापारिक) काफिले महफूज़ हो गए। सूरह कुरैश में इसी एहसान का ज़िक्र है।
Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
इस सूरह का असल पैगाम यह है कि इंसान को अल्लाह की नेमतों (जैसे अमन और रोज़ी) को याद करके उसका शुक्र अदा करना चाहिए और सिर्फ उसी की इबादत करनी चाहिए।
नतीजा (Conclusion)
सूरह कुरैश हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी में जो भी अमन, सुकून और रिज़्क़ है, वो सब अल्लाह की तरफ से है। इसलिए हमें हर हाल में सिर्फ उसी एक अल्लाह का शुक्रगुज़ार बंदा बनकर रहना चाहिए और किसी और को उसकी इबादत में शरीक नहीं करना चाहिए।
अल्लाह हमें अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफीक दे। आमीन।





