Surah Qiyamah in Hindi: सूरह कियामह की फजीलत और तर्जुमा
Surah Qiyamah in Hindi: जानिए सूरह कियामह का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह कयामत के दिन, मौत की सख्ती और हिसाब-किताब के खौफनाक मंज़र को बयान करती है।

Table of Contents
सूरह कियामह (Surah Al-Qiyamah) कुरान मजीद की 75वीं सूरह है। “अल-कियामह” का मतलब है “कयामत का दिन” (The Day of Resurrection)। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 40 आयतें हैं।
इस सूरह में अल्लाह तआला ने कयामत के दिन की कसम खाकर उसके आने की हकीकत को बयान किया है। इसमें बताया गया है कि उस दिन इंसान का क्या हाल होगा, जब आँखें पथरा जाएंगी, चाँद बे-नूर हो जाएगा और सूरज और चाँद को मिला दिया जाएगा।
इस आर्टिकल में हम Surah Qiyamah in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
ये भी पढ़े: Surah Muddassir in Hindi | सूरह मुद्दस्सिर का तर्जुमा
सूरह कियामह की अहमियत (Importance of Surah Al-Qiyamah)
- कयामत का यकीन: यह सूरह कयामत के दिन पर ईमान को मज़बूत करती है और इंसान को उसकी हकीकत से आगाह करती है।
- इंसान की बेबसी: इसमें बताया गया है कि उस दिन इंसान कहेगा “कहाँ भागूँ?”, लेकिन भागने का कोई रास्ता नहीं होगा।
- मौत की सख्ती: इसमें मौत के वक़्त की सख्ती का भी ज़िक्र है जब रूह हलक तक पहुँच जाती है।
Surah Qiyamah in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
ला उक़सिमु बि-यौमिल-क़ियामह।
(मैं कसम खाता हूँ कयामत के दिन की।)व ला उक़सिमु बिन-नफ्सिल-लव्वामह।
(और मैं कसम खाता हूँ मलामत करने वाले नफ़्स की।)अ-यहसबुल-इंसानु अल-लन-नज्म-अ इज़ामह।
(क्या इंसान यह समझता है कि हम उसकी हड्डियों को हरगिज़ जमा नहीं करेंगे?)बला क़ादिरीना अला अन-नुसव्विया बनानाह।
(क्यों नहीं! हम तो इस पर भी कादिर हैं कि उसकी उंगलियों के पोर-पोर को दुरुस्त कर दें।)बल युरीदुल-इंसानु लि-यफजुरा अमामहु।
(बल्कि इंसान चाहता है कि आगे भी गुनाह करता रहे।)यस-अलु अय्याना यौमुल-क़ियामह।
(पूछता है: कयामत का दिन कब आएगा?)फ-इज़ा बरिक़ल-बसर।
(तो जब आँखें पथरा जाएंगी।)व ख-स-फल-क़मर।
(और चाँद बे-नूर हो जाएगा।)व जुमिअश-शम्सु वल-क़मर।
(और सूरज और चाँद मिला दिए जाएंगे।)यक़ूलुल-इंसानु यौम-इज़िन ऐनल-मफर्र।
(उस दिन इंसान कहेगा: भागने की जगह कहाँ है?)कल्ला ला वज़र।
(हरगिज़ नहीं! कोई पनाह की जगह नहीं।)इला रब्बिका यौम-इज़िनिल-मुस्तक़र्र।
(उस दिन तेरे रब ही के पास ठिकाना है।)युनब्ब-उल-इंसानु यौम-इज़िम-बिमा क़द्दमा व अख्खर।
(उस दिन इंसान को बता दिया जाएगा जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।)बलिल-इंसानु अला नफ्सिही बसीरह।
(बल्कि इंसान खुद अपने ऊपर एक दलील है।)व लौ अल्क़ा मआज़ीरह।
(चाहे वो कितने ही बहाने पेश करे।)ला तुहर्रिक बिही लिसानका लि-तअ्जला बिह।
(आप (कुरान को) जल्दी-जल्दी याद करने के लिए अपनी ज़बान को हरकत न दें।)इन्ना अलैना जम-अहू व क़ुरआनाह।
(बेशक उसे जमा करना और पढ़वाना हमारे ज़िम्मे है।)फ-इज़ा क़रअ्नाहु फत्तबिअ् क़ुरआनाह।
(तो जब हम उसे पढ़ें तो आप उसके पढ़ने की पैरवी करें।)सुम्मा इन्ना अलैना बयानाह।
(फिर बेशक उसका मतलब समझाना भी हमारे ज़िम्मे है।)कल्ला बल तुहिब्बूनल-आजिलह।
(हरगिज़ नहीं! बल्कि तुम जल्दी मिलने वाली (दुनिया) से मोहब्बत रखते हो।)व त-ज़रूनल-आखिरह।
(और आखिरत को छोड़ देते हो।)वुजूहुंय-यौम-इज़िन-नाज़िरह।
(उस दिन बहुत से चेहरे तरो-ताज़ा होंगे।)इला रब्बिहा नाज़िरह।
(अपने रब की तरफ देख रहे होंगे।)व वुजूहुंय-यौम-इज़िम-बासिराह।
(और बहुत से चेहरे उस दिन उदास होंगे।)तज़ुन्नु अंय-युफ-अला बिहा फाक़िरह।
(समझ रहे होंगे कि उनके साथ कमर तोड़ने वाला मामला किया जाएगा।)कल्ला इज़ा ब-ल-गति-त-तराक़िय।
(हरगिज़ नहीं! जब जान हलक तक पहुँच जाएगी।)व कीला मन राक़।
(और कहा जाएगा: है कोई झाड़-फूँक करने वाला?)व ज़न्ना अन्नहुल-फिराक़।
(और उसने समझ लिया कि यह जुदाई का वक़्त है।)वल्-तफ-फतिस-साक़ु बिस-साक़।
(और पिंडली से पिंडली लिपट जाएगी।)इला रब्बिका यौम-इज़िनिल-मसाक़।
(उस दिन तेरे रब ही की तरफ चलना है।)फला सद्दक़ा व ला सल्ला।
(तो उसने न सच माना और न नमाज़ पढ़ी।)व लाकिन कज़्ज़बा व तवल्ला।
(बल्कि झुठलाया और मुँह फेर लिया।)सुम्मा ज़-ह-बा इला अहलिही य-त-मत्ता।
(फिर अपने घर वालों की तरफ इतराता हुआ चला गया।)औला लका फ-औला।
(खराबी है तेरे लिए, बस खराबी है।)सुम्मा औला लका फ-औला।
(फिर खराबी है तेरे लिए, बस खराबी है।)अ-यहसबुल-इंसानु अंय-युतरका सुदा।
(क्या इंसान यह समझता है कि उसे यूँ ही बेकार छोड़ दिया जाएगा?)अलम यकु नुत्फतम-मिम-मनियिंय-युम्ना।
(क्या वो मनी का एक कतरा नहीं था जो (रहम में) टपकाया जाता है?)सुम्मा काना अल-क़-तन फ-ख-ल-क़ फ-सव्वा।
(फिर वो खून का लोथड़ा बना, फिर (अल्लाह ने) उसे बनाया और दुरुस्त किया।)फ-ज-अला मिन्हुज़-ज़ौजैनिज़-ज़-क-र वल-उंसा।
(फिर उससे दो किस्म (जोड़े) बनाए, मर्द और औरत।)अ-लैसा ज़ालिका बि-क़ादिरिन अला अंय-युहयियल-मौता।
(क्या वो (अल्लाह) इस पर कादिर नहीं कि मुर्दों को ज़िंदा कर दे?)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. कियामह (Qiyamah) का क्या मतलब है?
“कियामह” का मतलब है “खड़े होना”। इस दिन तमाम इंसान अपने रब के सामने हिसाब के लिए खड़े होंगे, इसलिए इसे यौम-उल-कियामह कहते हैं।
Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
इस सूरह का असल पैगाम यह है कि कयामत का आना हक़ है और इंसान को दुनिया की ज़िन्दगी में मगन होकर आखिरत को नहीं भूलना चाहिए।
नतीजा (Conclusion)
सूरह कियामह हमें गफलत की नींद से जगाती है और याद दिलाती है कि एक दिन हमें अपने हर अमल का हिसाब देना है। यह हमें दुनिया की हकीकत और आखिरत की तैयारी की फिक्र दिलाती है।
अल्लाह हमें कयामत के दिन की रुसवाई से बचाए। आमीन।





