Surah Muddassir in Hindi: सूरह मुद्दस्सिर की फजीलत और तर्जुमा
Surah Muddassir in Hindi: जानिए सूरह मुद्दस्सिर का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह नबी (ﷺ) को दावत का हुक्म देती है और जहन्नम (सक़र) का बयान करती है।

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सूरह मुद्दस्सिर (Surah Al-Muddassir) कुरान मजीद की 74वीं सूरह है। “अल-मुद्दस्सिर” का मतलब है “चादर ओढ़ने वाले” (The Cloaked One)। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 56 आयतें हैं।
यह सूरह उस वक़्त नाज़िल हुई जब पहली वही (इक़रा) के बाद कुछ वक़्त के लिए वही का सिलसिला रुक गया था। जब दोबारा जिब्रील (अ.स.) आए तो नबी (ﷺ) घबराकर घर आए और कहा, “मुझे चादर ओढ़ा दो।” इसी मौके पर अल्लाह ने आपको “या अय्युहल मुद्दस्सिर” कहकर पुकारा और दीन की दावत देने का हुक्म दिया।
इस आर्टिकल में हम Surah Muddassir in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह मुद्दस्सिर की अहमियत (Importance of Surah Al-Muddassir)
- दावत का हुक्म: यह सूरह नबी (ﷺ) को हुक्म देती है कि अब उठें और लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराएं।
- जहन्नम का बयान: इसमें जहन्नम के एक तबके “सक़र” (Saqar) का खौफनाक बयान है, जो कुरान को झुठलाने वालों का ठिकाना है।
- अमल का हिसाब: यह बताती है कि हर इंसान अपने आमाल के बदले गिरवी है।
Surah Muddassir in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
या अय्युहल-मुद्दस्सिर।
(ऐ चादर ओढ़ने वाले!)क़ुम फ-अन्ज़िर।
(उठो और (लोगों को) डराओ।)व रब्बका फ-कब्बिर।
(और अपने रब की बड़ाई बयान करो।)व सियाबका फ-तह्हिर।
(और अपने कपड़ों को पाक रखो।)वर-रुज्ज़ा फहजुर।
(और गंदगी से दूर रहो।)व ला तम्नुन तस्तकसिर।
(और एहसान करके ज़्यादा न चाहो।)व लि-रब्बिका फसबिर।
(और अपने रब के लिए सब्र करो।)फ-इज़ा नुक़िरा फिन-नाक़ूर।
(तो जब सूर में फूँक मारी जाएगी।)फ-ज़ालिका यौम-इज़िंय-यौमुन असीर।
(तो वो दिन बड़ा सख्त दिन होगा।)अलल-काफिरीना गैरु यसीर।
(काफिरों पर आसान नहीं होगा।)ज़रनी व मन ख़लक़तु वहीदा।
(मुझे और उसे छोड़ दो जिसे मैंने अकेला पैदा किया।)व ज-अल्तु लहू मालम-ममदूदा।
(और उसे बहुत सा माल दिया।)व बनीना शुहूदा।
(और (आँखों के सामने) हाज़िर रहने वाले बेटे दिए।)व मह्हत्तु लहू तम्हीदा।
(और उसके लिए हर तरह का सामान तैयार किया।)सुम्मा यत्मउ अन अज़ीद।
(फिर भी वो लालच करता है कि मैं और दूँ।)कल्ला, इन्नहू काना लि-आयातिना अनीदा।
(हरगिज़ नहीं! बेशक वो हमारी आयतों का दुश्मन है।)स-उर्हिक़ुहू सऊदा।
(मैं जल्द ही उसे एक सख्त चढ़ाई पर चढ़ाऊंगा।)इन्नहू फक्करा व क़द्दरा।
(उसने सोचा और एक बात बनाई।)फ-क़ुतिला कैफा क़द्दरा।
(तो वो हलाक हो, कैसी बात बनाई!)सुम्मा क़ुतिला कैफा क़द्दरा।
(फिर हलाक हो, कैसी बात बनाई!)सुम्मा नज़रा।
(फिर उसने देखा।)सुम्मा अबसा व बसरा।
(फिर मुँह बनाया और त्योरियां चढ़ाईं।)सुम्मा अदबरा वस्तक्बरा।
(फिर पीठ फेरी और तकब्बुर किया।)फ-क़ाला इन हाज़ा इल्ला सिहरुंय-युअ्सर।
(तो कहने लगा: यह तो बस जादू है जो पहले से चला आ रहा है।)इन हाज़ा इल्ला क़ौलुल-बशर।
(यह तो बस इंसान का कलाम है।)स-उस्लीहि सक़र।
(मैं जल्द ही उसे “सक़र” (जहन्नम) में डालूँगा।)व मा अदराका मा सक़र।
(और तुम क्या जानो कि सक़र क्या है?)ला तुब्क़ी व ला तज़र।
(न वो बाकी रखती है और न छोड़ती है।)लव्वा-हतुल-लिल-बशर।
(खाल को झुलसा देने वाली।)अलैहा तिस-अता अशर।
(उस पर उन्नीस (फरिश्ते) मुकर्रर हैं।)व मा ज-अल्ना अस्हाबन्-नारि इल्ला मला-इकतंव-व मा ज-अल्ना इद्दतहुम इल्ला फितनतल-लिल्लज़ीना कफरू…
(और हमने जहन्नम के दारोगा सिर्फ फरिश्ते ही बनाए हैं, और हमने उनकी गिनती को काफिरों के लिए आज़माइश बनाया है…)\nकल्ला वल-क़मर।
(हरगिज़ नहीं! चाँद की कसम।)वल-लैलि इज़ अदबर।
(और रात की जब वो पीठ फेरे।)वस-सुब्हि इज़ा असफर।
(और सुबह की जब वो रौशन हो।)इन्नहा ल-इहदल्-कुबर।
(बेशक वो (जहन्नम) बड़ी चीज़ों में से एक है।)नज़ीरल-लिल-बशर।
(इंसानों के लिए डराने वाली।)लिमन शा-अ मिन्कुम अंय-यतक़द्दमा औ यत-अख्खर।
(तुम में से जो चाहे आगे बढ़े या पीछे रह जाए।)कुल्लु नफ्सिम-बिमा क-स-बत रहीना।
(हर जान अपने किए के बदले गिरवी है।)इल्ला अस्हाबल-यमीन।
(सिवाय दाहिने हाथ वालों के।)फी जन्नातिंय-यतसा-अ-लून।
(वो जन्नतों में होंगे, सवाल करते हुए।)अनिल-मुजरिमीन।
(मुजरिमों के बारे में।)मा स-ल-ककुम फी सक़र।
(तुम्हें सक़र में किस चीज़ ने डाला?)क़ालू लम नकु मिनल-मुसल्लीन।
(वो कहेंगे: हम नमाज़ पढ़ने वालों में से नहीं थे।)व लम नकु नुत्-इमुल-मिस्कीन।
(और हम मिस्कीन को खाना नहीं खिलाते थे।)व कुन्ना नखूज़ु म-अल्-खाइज़ीन।
(और हम (बेकार) बहस करने वालों के साथ बहस करते थे।)व कुन्ना नुकज़्ज़िबु बि-यौमिद-दीन।
(और हम बदले के दिन को झुठलाते थे।)हत्ता अतानल-यक़ीन।
(यहाँ तक कि हमें मौत आ गई।)फ-मा तन्फ-उहुम शफा-अतुश-शाफिईन।
(तो उन्हें सिफारिश करने वालों की सिफारिश फायदा नहीं देगी।)फ-मा लहुम अनित-तज़किरति मुअ्रिज़ीन।
(तो उन्हें क्या हो गया है कि वो नसीहत से मुँह फेरते हैं?)क-अन्नहुम हुमुरुम-मुस्तन्फिरह।
(गोया वो बिदके हुए गधे हैं।)फर्रत मिन क़स्वरह।
(जो शेर से भागे हों।)बल युरीदु कुल्लुम्-रि-इम-मिन्हुम अंय-युअ्ता सुहुफम-मुनश्शरह।
(बल्कि उनमें से हर शख्स चाहता है कि उसे खुली हुई किताबें दी जाएं।)कल्ला, बल-ला यख़ाफूनल-आखिरह।
(हरगिज़ नहीं! बल्कि वो आखिरत से नहीं डरते।)कल्ला इन्नहू तज़्किरह।
(हरगिज़ नहीं! बेशक यह तो एक नसीहत है।)फ-मन शा-अ ज़-क-रह।
(तो जो चाहे इसे याद करे।)व मा यज़्कुरूना इल्ला अंय-यशा-अल्लाह, हुवा अहलुत-तक़वा व अहलुल-मगफिरह।
(और वो याद नहीं करेंगे मगर जब अल्लाह चाहे, वही डरने के लायक है और बख्शिश का मालिक है।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. मुद्दस्सिर (Muddassir) का क्या मतलब है?
“मुद्दस्सिर” का मतलब है “चादर ओढ़ने वाला” या “कपड़ों में लिपटने वाला”।
Q. सक़र (Saqar) क्या है?
“सक़र” जहन्नम के एक तबके (Level) का नाम है जो बहुत ही खौफनाक है। यह उन लोगों का ठिकाना होगा जो नमाज़ नहीं पढ़ते थे, गरीबों को खाना नहीं खिलाते थे और आखिरत को झुठलाते थे।
नतीजा (Conclusion)
सूरह मुद्दस्सिर हमें दावत की ज़िम्मेदारी, आखिरत की फिक्र और जहन्नम के अज़ाब की याद दिलाती है। यह हमें सिखाती है कि नमाज़ और गरीबों का हक़ अदा करना जहन्नम से बचने के लिए कितना ज़रूरी है।
अल्लाह हमें इन बातों पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन।





