Surah Maun in Hindi - सूरह माऊन हिंदी तर्जुमा और तफसीर
Surah Maun in Hindi (सूरह माऊन): पढ़िए सूरह माऊन का हिंदी तर्जुमा, इंग्लिश ट्रांसलेशन और इसकी तफसीर। जानिए इस सूरह में यतीमों और दिखावे की नमाज़ पढ़ने वालों के बारे में क्या कहा गया है।

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सूरह माऊन (Surah Maun) कुरान मजीद की 107वीं सूरह है। यह सूरह मक्का में नाज़िल हुई (कुछ मुफस्सिरीन के मुताबिक इसका आखिरी हिस्सा मदीना में नाज़िल हुआ)। इसमें 7 आयतें हैं।
इस सूरह में अल्लाह तआला ने उन लोगों की सख्त मजम्मत (निंदा) की है जो आखिरत के दिन को झुठलाते हैं, यतीमों के साथ बुरा सुलूक करते हैं और नमाज़ में सुस्ती करते हैं या सिर्फ दिखावे के लिए पढ़ते हैं।
इस आर्टिकल में हम Surah Maun in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह माऊन की अहमियत (Importance of Surah Al-Ma’un)
- दीन की असल रूह: यह सूरह बताती है कि दीन सिर्फ इबादतों का नाम नहीं, बल्कि गरीबों और ज़रूरतमंदों का ख्याल रखना भी दीन का एक अहम हिस्सा है।
- दिखावे से मनाही: इसमें उन नमाज़ियों के लिए “खराबी” का लफ्ज़ इस्तेमाल हुआ है जो अपनी नमाज़ों से गाफिल रहते हैं और सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए पढ़ते हैं।
- हम्दर्दी का पैगाम: यह हमें यतीमों, गरीबों और पड़ोसियों के हक़ अदा करने की तालीम देती है।
Surah Maun in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
(शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है)
अ-र-ऐतल-लज़ी युकज़्ज़िबु बिद-दीन।
(क्या तुमने उस शख्स को देखा जो जज़ा-सज़ा (दीन) को झुठलाता है?)फ-ज़ालिकल-लज़ी यदुअ्-उल-यतीम।
(तो यह वही है जो यतीम को धक्का देता है।)व ला यहुज़्ज़ु अला त-आमिल-मिस्कीन।
(और मिस्कीन (गरीब) को खाना खिलाने की तरगीब (प्रोत्साहन) नहीं देता।)फ-वैलुल-लिल-मुसल्लीन।
(तो खराबी है उन नमाज़ियों के लिए।)अल्लज़ी-न हुम अन सलातिहिम साहून।
(जो अपनी नमाज़ से गाफिल (बेखबर) रहते हैं।)अल्लज़ी-न हुम युरा-ऊन।
(जो लोग दिखावा करते हैं।)व यम्-न-ऊनल्-माऊन।
(और आम इस्तेमाल की चीज़ें (देने से) मना करते हैं।)
सूरह माऊन की तफसीर (Tafseer of Surah Maun)
इस सूरह में दो तरह के लोगों का ज़िक्र किया गया है:
1. आखिरत का इनकार करने वाले (काफिर)
शुरुआती आयतों में उन लोगों का ज़िक्र है जो कयामत के दिन को नहीं मानते। उनकी निशानी यह है कि वो यतीमों के साथ सख्ती करते हैं, उन्हें धक्के देते हैं और गरीबों को खाना खिलाने का जज़्बा नहीं रखते।
2. मुनाफिक (Hypocrites)
बाद की आयतों में उन नमाज़ियों का ज़िक्र है जो अपनी नमाज़ों से गाफिल हैं।
- नमाज़ से गाफिल: जो नमाज़ को वक़्त पर नहीं पढ़ते, या पढ़ते हैं तो बिना ध्यान के, या कभी पढ़ी कभी छोड़ दी।
- दिखावा: जो सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए नमाज़ पढ़ते हैं ताकि लोग उन्हें नेक समझें।
- माऊन रोकना: ‘माऊन’ का मतलब है रोज़मर्रा की छोटी-मोटी चीज़ें (जैसे नमक, पानी, बर्तन, सुई-धागा) जो लोग एक-दूसरे से मांग लेते हैं। ये लोग इतने कंजूस हैं कि ये मामूली मदद भी नहीं करते।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. माऊन (Ma'un) का क्या मतलब है?
“माऊन” का मतलब है आम इस्तेमाल की छोटी-छोटी चीज़ें, जैसे नमक, पानी, बर्तन, या कोई और ऐसी चीज़ जो पड़ोसी एक-दूसरे से मांग लेते हैं। इस सूरह में ऐसे लोगों की बुराई की गई है जो इतनी मामूली चीज़ देने में भी कंजूसी करते हैं।
Q. यह सूरह किन लोगों के बारे में है?
यह सूरह उन मुनाफिकों (hypocrites) और काफिरों के बारे में है जो आखिरत के दिन को नहीं मानते। उनके अमल, जैसे यतीमों से बुरा सुलूक करना और गरीबों की मदद न करना, उनके इनकार का सबूत हैं। यह उन मुसलमानों के लिए भी चेतावनी है जो अपनी नमाज़ों में सुस्ती और दिखावा करते हैं।
नतीजा (Conclusion)
सूरह माऊन हमें एक बहुत बड़ा सबक सिखाती है कि अल्लाह के नज़दीक सिर्फ दिखावे की इबादत की कोई कीमत नहीं है। असल दीनदारी यह है कि इंसान का दिल अल्लाह के खौफ और उसकी मखलूक की हमदर्दी से भरा हो।
अल्लाह हमें दिखावे से बचाए और यतीमों और गरीबों का हक़ अदा करने की तौफीक दे। आमीन।





