· Iffat Zia · Quran · 3 min read
Surah Maryam in Hindi: सूरह मरियम का तर्जुमा और फजीलत
Surah Maryam in Hindi: सूरह मरियम कुरान की 19वीं सूरह है। जानिए इसका हिंदी तर्जुमा, मरियम (अ.स.) का वाकिया और इसे पढ़ने की बरकतें।

Table of Contents
सूरह मरियम (Surah Maryam) कुरान मजीद की 19वीं सूरह है और यह 16वें पारे में है। यह मक्की सूरह है।
इस सूरह में अल्लाह तआला ने हज़रत मरियम (अ.स.) और उनके बेटे हज़रत ईसा (अ.स.) का वाकिया बहुत खूबसूरती से बयान किया है। साथ ही हज़रत ज़करिया (अ.स.) की दुआ और हज़रत यह्या (अ.स.) की पैदाइश का भी ज़िक्र है।
ये भी पढ़े: Bacha Hone Ki Dua | औलाद पाने की दुआ
Surah Maryam in Hindi (First 10 Verses)
यहाँ सूरह मरियम की शुरुआती आयतों का तर्जुमा दिया गया है जो हज़रत ज़करिया (अ.स.) की दुआ के बारे में हैं:
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
काफ़-हा-या-ऐन-साद।
(ये हुरूफे मुक़त्तआत हैं, इनका मतलब अल्लाह ही बेहतर जानता है।)ज़िक्रु रहमति रब्बिका अब्दहू ज़करिय्या।
(यह तेरे रब की उस रहमत का ज़िक्र है जो उसने अपने बंदे ज़करिया पर की।)इज़ नादा रब्बहू निदा-अन ख़फिय्या।
(जब उन्होंने अपने रब को चुपके-चुपके पुकारा।)क़ाला रब्बि इन्नी वहन-अल-अज़मु मिन्नी वश्त-अलर-रअ्सु शैबंव-व लम अकुम्-बि-दुआ-इका रब्बि शक़िय्या।
(कहा: ऐ मेरे रब! मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई हैं और सर बुढ़ापे से चमक उठा है, और ऐ मेरे रब! मैं तुझसे मांगकर कभी नामुराद नहीं रहा।)व इन्नी ख़िफतुल-मवालिया मिंव-वरा-ई व कानतिम्-र-अती आक़िरन फ-हब ली मिल-लदुनका वलिय्या।
(और मुझे अपने बाद अपने भाई-बंदों का डर है और मेरी बीवी बांझ है, सो तू मुझे अपने पास से एक वारिस अता कर।)यरिसुनी व यरिसु मिन आलि यअ्क़ूब, वज-अल्हु रब्बि रज़िय्या।
(जो मेरा वारिस हो और याकूब की औलाद का वारिस हो, और ऐ मेरे रब! उसे पसंदीदा बना।)या ज़करिय्या इन्ना नुबश्शिरुका बि-गुलामिनिस्मुहू यह्या लम नज-अल्-लहू मिन क़ब्लु समिय्या।
((अल्लाह ने फरमाया) ऐ ज़करिया! हम तुझे एक लड़के की खुशखबरी देते हैं जिसका नाम “यह्या” होगा, इससे पहले हमने इस नाम का कोई पैदा नहीं किया।)
सूरह मरियम की फजीलत
- औलाद के लिए: जो लोग औलाद की नेमत से महरूम हैं, उनके लिए इस सूरह की तिलावत और हज़रत ज़करिया (अ.स.) की दुआ बहुत मुजर्रब है।
- प्रेगनेंसी में: हामिला (Pregnant) औरतों के लिए इसकी तिलावत करना सुकून और आसानी का बाइस बनता है।
- रहमत: इसमें अल्लाह की रहमत का बार-बार ज़िक्र है, जिससे पढ़ने वाले के दिल में अल्लाह की मोहब्बत बढ़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या प्रेगनेंसी में सूरह मरियम पढ़ने से डिलीवरी आसान होती है?
कुरान की हर सूरह में बरकत है। बुजुर्गों के तजुर्बे के मुताबिक सूरह मरियम पढ़ने से जच्चा और बच्चा की हिफाज़त रहती है और डिलीवरी में आसानी होती है।
नतीजा (Conclusion):
सूरह मरियम हमें सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत से कभी मायूस नहीं होना चाहिए। जैसे उसने बुढ़ापे में ज़करिया (अ.स.) को और बिना बाप के मरियम (अ.स.) को बेटा दिया, वो हर चीज़ पर कादिर है।
अल्लाह हमें कुरान समझने की तौफीक दे।





