Surah Kahf in Hindi: सूरह कहफ़ की फजीलत, वाक़ियात और तर्जुमा
Surah Kahf in Hindi: जानिए सूरह कहफ़ की फजीलत, इसके 4 वाकयात और हिंदी तर्जुमा। जुम्मा के दिन इसे पढ़ने से दज्जाल के फितने से हिफाज़त होती है।

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सूरह अल-कहफ़ (Surah Al-Kahf) कुरान मजीद की 18वीं सूरह है। “कहफ़” का मतलब है “गुफा” (The Cave)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 110 आयतें हैं। यह 15वें और 16वें पारे में मौजूद है।
यह सूरह बहुत ही खास है क्योंकि इसमें 4 बड़े वाकयात (Stories) बयान किए गए हैं जो हमें ईमान, दौलत, इल्म और ताकत के फितनों से बचने का सबक देते हैं। हमारे प्यारे नबी (स.अ.व.) ने जुम्मा के दिन इस सूरह को पढ़ने की बहुत ताकीद की है।
इस आर्टिकल में हम Surah Kahf in Hindi, इसकी फजीलत, इसके वाकयात और अहम आयतों का हिंदी तर्जुमा आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।
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सूरह कहफ़ की फजीलत (Benefits of Surah Kahf)
जुम्मा के दिन नूर: हदीस में आता है कि जो शख्स जुम्मा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ता है, उसके लिए दो जुम्मों के दरमियान एक नूर रोशन रहता है।
दज्जाल से हिफाज़त: नबी करीम (स.अ.व.) ने फरमाया: “जो शख्स सूरह कहफ़ की शुरुआती 10 आयतें (और एक रिवायत में आखिरी 10 आयतें) याद कर ले, वो दज्जाल के फितने से महफूज़ रहेगा।” (सहीह मुस्लिम)
घर में सुकून: जिस घर में यह सूरह पढ़ी जाए, वहां शैतान दाखिल नहीं होता और सुकून (सकीना) नाज़िल होता है।
4 कहानियों का सबक:
- अस्हाब-ए-कहफ़: ईमान की हिफाज़त (गुफा वाले नौजवान)।
- दो बाग़ वाला: दौलत का फितना।
- मूसा और खिज़्र (अ.स.): इल्म का फितना।
- ज़ुलक़र्नैन: ताकत का फितना।
Surah Kahf in Hindi (Transliteration & Translation)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अल्हम्दु लिल्लाहिल-लज़ी अनज़ला अला अब्दिहिल-किताबा व लम यज-अल्-लहू इवजा।
(सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने अपने बंदे पर किताब नाज़िल की और उसमें कोई टेढ़ (कमी) नहीं रखी।)क़य्यि-मल-लि-युनज़िरा बअ्सन शदीदम-मिल-लदुनहु व युबश्शिरल-मुअ्मिनीनल-लज़ीना यअ्मलूनस-सालिहाति अन्ना लहुम अजरन हसना।
(ताकि वो (अल्लाह) अपनी तरफ से सख्त अज़ाब से डराए और उन ईमान वालों को खुशखबरी दे जो नेक अमल करते हैं कि उनके लिए अच्छा बदला है।)माकिसीना फीहि अबदा।
(जिसमें वो हमेशा रहेंगे।)व युनज़िरल-लज़ीना क़ालुत-तख़ज़ल्लाहु वलदा।
(और उन लोगों को डराए जो कहते हैं कि अल्लाह ने बेटा बना लिया है।)मा लहुम बिही मिन इल्मिंव-व ला लि-आबा-इहिम, कबुरत कलि-मतन तख़रुजु मिन अफ्वाहिहिम, इंय-यक़ूलूना इल्ला कज़िबा।
(उन्हें इस बात का कोई इल्म नहीं और न उनके बाप-दादाओं को था, बड़ी भारी बात है जो उनके मुँह से निकलती है, वो सरासर झूठ बकते हैं।)फ-ल-अल्लका बाख़िअुन-नफ्सका अला आसारिहिम इल्लम युअ्मिनू बि-हाज़ल हदीसि असफा।
(तो (ऐ नबी!) शायद आप उनके पीछे अपनी जान हलाक कर देंगे अगर वो इस बात पर ईमान न लाए, अफ़सोस करते हुए।)इन्ना ज-अल्ना मा अलल-अर्ज़ि ज़ीनतल-लहा लि-नब्लुवहुम अय्युहुम अहसनु अमला।
(बेशक हमने ज़मीन पर जो कुछ है उसे इसकी रौनक बनाया है ताकि हम उन्हें आज़माएं कि उनमें से कौन अमल में ज्यादा अच्छा है।)व इन्ना ल-जा-इलूना मा अलैहा सईदन जुरुज़ा।
(और बेशक जो कुछ इस (ज़मीन) पर है हम उसे एक दिन चटियल मैदान बना देंगे।)अम हसिब्ता अन्ना अस्हाबल-कहफि वर-रक़ीमि कानू मिन आयातिना अजबा।
(क्या तुम ख्याल करते हो कि गुफा और रक़ीम वाले हमारी निशानियों में से कोई अजीब चीज़ थे?)इज़ अवल-फितयतु इलल-कहफि फ-क़ालू रब्बना आतिना मिल-लदुनका रहमतंव-व हय्यिअ् लना मिन अम्रिना रशदा।
(जब उन नौजवानों ने गुफा में पनाह ली तो कहा: ऐ हमारे रब! हमें अपनी तरफ से रहमत अता फरमा और हमारे मामले में हमारी सही रहनुमाई फरमा।)फ-ज़रब्ना अला आज़ानिहिम फिल-कहफि सिनीना अददा।
(फिर हमने गुफा में कई सालों तक उनके कानों पर (नींद का) पर्दा डाल दिया।)सुम्मा ब-अस्नाहुम लि-नअ्लमा अय्युल-हिज़बैनि अह्सा लिमा लबिसू अमदा।
(फिर हमने उन्हें उठाया ताकि हम देखें कि दोनों गिरोहों में से कौन याद रखता है कि वो कितनी मुद्दत रहे।)नह्नु न-कुस्सु अलैका नब-अहुम बिल-हक्क़; इन्नहुम फितयतुन आमनू बि-रब्बिहिम व ज़िदनाहुम हुदा।
(हम आपको उनका सच्चा किस्सा सुनाते हैं; बेशक वो चंद नौजवान थे जो अपने रब पर ईमान लाए और हमने उनकी हिदायत बढ़ा दी।)व रबत्ना अला क़ुलूबिहिम इज़ क़ामू फ-क़ालू रब्बुना रब्बुस-समावाति वल-अर्ज़ि लन नद-उवा मिन दूनिही इलाहल-लक़द क़ुल्ना इज़न शतता।
(और हमने उनके दिलों को मज़बूत कर दिया जब वो खड़े हुए और बोले: हमारा रब वही है जो आसमानों और ज़मीन का रब है, हम उसके सिवा किसी और माबूद को नहीं पुकारेंगे, अगर ऐसा किया तो हमने बड़ी बेजा बात कही।)हा-उला-इ क़ौमुनत्तख़ज़ू मिन दूनिही आलिहतल-लौ ला यअ्तूना अलैहिम बि-सुल्तानिम-बय्यिन; फ-मन अज़लमु मिम्मनिफ्तरा अलल्लाहि कज़िबा।
(ये हमारी क़ौम है जिसने अल्लाह के सिवा और माबूद बना लिए हैं, ये उन पर कोई खुली दलील क्यों नहीं लाते? तो उससे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे?)व इज़िअ्तज़ल्तुमुहुम व मा यअ्बुदूना इल्लल्लाहा फ-अवू इलल-कहफि यनशुर लकुम रब्बुकुम मिर-रह-मतिही व युहय्यिअ् लकुम मिन अम्रिकुम मिरफक़ा।
(और जब तुम उनसे और अल्लाह के सिवा जिनकी वो इबादत करते हैं उनसे अलग हो गए हो, तो गुफा में पनाह लो, तुम्हारा रब तुम्हारे लिए अपनी रहमत फैला देगा और तुम्हारे मामले में आसानी का सामान मुहैया कर देगा।)व तरश-शम्सा इज़ा तल-अत तज़ावरु अन कहफिहिम ज़ातल-यमीनि व इज़ा गरबत तक़रिज़ुहुम ज़ातश-शिमालि व हुम फी फज्वतिम-मिन्ह; ज़ालिका मिन आयातिल्लाह; मंय-यहदिल्लाहु फ-हुवल-मुह्तद; व मंय-युज़लिल फ-लन तजिदा लहू वलिय्यम-मुरशिदा।
(और तुम सूरज को देखोगे कि जब निकलता है तो उनकी गुफा से दाहिनी तरफ बचकर गुज़र जाता है और जब डूबता है तो उनसे बाईं तरफ कतरा जाता है, और वो उस (गुफा) के कुशादा हिस्से में हैं; ये अल्लाह की निशानियों में से है; जिसे अल्लाह हिदायत दे वही हिदायत पाने वाला है, और जिसे वो गुमराह कर दे तो तुम उसके लिए कोई हिदायत देने वाला दोस्त नहीं पाओगे।)व तहसबुहुम अयक़ाज़ंव-व हुम रुक़ूद; व नुक़ल्लिबुहुम ज़ातल-यमीनि व ज़ातश-शिमाल; व कलबुहुम बासितुन ज़िरा-ऐहि बिल-वसीद; लवित्तलअ्ता अलैहिम ल-वल्लैता मिन्हुम फिरारंव-व ल-मुलिअ्ता मिन्हुम रुअ्बा।
(और तुम उन्हें जागता हुआ ख्याल करते हालांकि वो सो रहे थे; और हम उन्हें दाहिनी और बाईं करवट बदलते रहते थे; और उनका कुत्ता चौखट पर अपने दोनों हाथ फैलाए बैठा था; अगर तुम उन्हें झांक कर देखते तो उनसे पीठ फेर कर भागते और तुम पर उनकी हैबत (डर) छा जाती।)व कज़ालिका ब-अस्नाहुम लि-यतसा-अलू बैनहुम; क़ाला क़ा-इलुम-मिन्हुम कम लबिस्तुम; क़ालू लबिस्ना यौमन औ बअ्ज़ा यौम; क़ालू रब्बुकुम अअ्लमु बिमा लबिस्तुम फब्-असू अहदकुम बि-वरिक़िकुम हाज़िही इलल-मदीनति फल-यन्ज़ुर अय्युहा अज़का त-आमन फल-यअ्तिकुम बि-रिज़्क़िम-मिन्हु वल-यतलत्तफ व ला युश-इरन्ना बिकुम अहदा।
(और इसी तरह हमने उन्हें जगाया ताकि वो आपस में एक-दूसरे से पूछें; उनमें से एक कहने वाले ने कहा: तुम कितनी देर रहे? उन्होंने कहा: हम एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा रहे; (फिर) बोले: तुम्हारा रब खूब जानता है कि तुम कितनी देर रहे; अब अपने में से किसी को ये चांदी का सिक्का देकर शहर भेजो, फिर वो देखे कि कौन सा खाना ज्यादा सुथरा है, तो उसमें से तुम्हारे लिए कुछ खाना लाए और नरमी से काम ले और किसी को तुम्हारी खबर न होने दे।)इन्नहुम इंय-यज़हरू अलैकुम यरजुमूकुम औ यु-ईदूकुम फी मिल्लतिहिम व लन तुफ्लिहू इज़न अबदा।
(अगर वो तुम पर काबू पा लेंगे तो तुम्हें संगसार (पत्थरों से मार) कर देंगे या तुम्हें अपने दीन में लौटा लेंगे और तब तुम कभी कामयाब नहीं हो सकोगे।)व कज़ालिका अअ्सरना अलैहिम लि-यअ्लमू अन्ना वअ्दल्लाहि हक्कुंव-व अन्नस-सा-अता ला रैबा फीहा इज़ यतनाज़-ऊना बैनहुम अम्रहुम फ-क़ालुब्नू अलैहिम बुनयाना; रब्बुहुम अअ्लमु बिहिम; क़ालल-लज़ीना गलबू अला अम्रिहिम ल-नत्तख़िज़न्ना अलैहिम मस्जिदा।
(और इसी तरह हमने (लोगों को) उन पर मुत्तला (खबरदार) कर दिया ताकि वो जान लें कि अल्लाह का वादा सच्चा है और कयामत में कोई शक नहीं; जब वो आपस में उनके मामले में झगड़ रहे थे तो उन्होंने कहा: उन पर एक इमारत बना दो; उनका रब उन्हें खूब जानता है; जो लोग उनके मामले पर गालिब आए उन्होंने कहा: हम उन पर ज़रूर एक मस्जिद बनाएंगे।)स-यक़ूलूना सलासतुन राबि-उहुम कलबुहुम व यक़ूलूना खम्सतुन सादिसुहुम कलबुहुम रज्मम-बिल-गैब; व यक़ूलूना सब-अतुंव-व सामिनुहुम कलबुहुम; कुर-रब्बी अअ्लमु बि-अिद्दतिहिम मा यअ्लमुहुम इल्ला क़लील; फला तुमारि फीहिम इल्ला मिरा-अन ज़ाहिरंव-व ला तस्तफ्ति फीहिम मिन्हुम अहदा।
(अब वो कहेंगे कि वो तीन थे, चौथा उनका कुत्ता था; और कहेंगे कि पांच थे, छठा उनका कुत्ता था, बिन देखे अंदाज़े (तीर) चलाते हुए; और कहेंगे कि सात थे और आठवां उनका कुत्ता था; कह दीजिए: मेरा रब उनकी गिनती खूब जानता है, उन्हें बहुत कम लोग जानते हैं; तो आप उनके बारे में सरसरी बहस के सिवा झगड़ा न करें और न उनके बारे में उनमें से किसी से पूछें।)व ला तक़ूलन्ना लि-शय-इन इन्नी फा-इलुन ज़ालिका गदा।
(और किसी काम के बारे में हरगिज़ न कहना कि मैं इसे कल करूंगा।)इल्ला अंय-यशा-अल्लाह; वज़कुर-रब्बका इज़ा नसीता व क़ुल असा अंय-यहदियनि रब्बी लि-अक़रबा मिन हाज़ा रशदा।
(मगर ये कि अल्लाह चाहे (इन्शाअल्लाह कहकर); और अपने रब को याद करो जब तुम भूल जाओ और कहो: उम्मीद है कि मेरा रब मुझे इससे भी ज्यादा हिदायत के करीब कर दे।)व लबिसू फी कहफिहिम सलासा मि-अतिन सिनीना वज़दादू तिस-आ।
(और वो अपनी गुफा में तीन सौ साल रहे और नौ (साल) ज्यादा।)क़ुलिल्लाहु अअ्लमु बिमा लबिसू; लहू गैबुस-समावाति वल-अर्ज़; अबसिर बिही व अस्मिअ्; मा लहुम मिन दूनिही मिंव-वलिय्यिंव-व ला युशरिकु फी हुक्मिही अहदा।
(कह दीजिए: अल्लाह खूब जानता है जितना वो रहे; उसी के पास है आसमानों और ज़मीन का गैब; वो क्या ही देखने वाला और क्या ही सुनने वाला है; उसके सिवा उनका कोई मददगार नहीं और वो अपने हुक्म में किसी को शरीक नहीं करता।)वत्लु मा ऊहिया इलौका मिन किताबि रब्बिक; ला मुबद्दिला लि-कलिमातिह; व लन तजिदा मिन दूनिही मुल्तहदा।
(और अपने रब की किताब में से जो आप पर वही (Wahi) की गई है उसे पढ़िए; उसकी बातों को कोई बदलने वाला नहीं; और आप उसके सिवा कोई पनाह की जगह नहीं पाएंगे।)वसबिर नफ्सका म-अल्लज़ीना यद-ऊना रब्बहुम बिल-गदाति वल-अशिय्यि युरीदूना वज्हहू व ला तअ्दु अयनाका अन्हुम; तुरीदु ज़ीनतल-हयातिद-दुन्या; व ला तुतिअ् मन अगफल्ना क़ल्बहू अन ज़िक्रिना वत्तब-अ हवाहु व काना अम्रुहू फुरुता।
(और अपने आप को उन लोगों के साथ रोके रखिए जो सुबह-शाम अपने रब को पुकारते हैं, उसकी रज़ा चाहते हैं; और आपकी आँखें उनसे न हटें कि आप दुनिया की ज़िंदगी की रौनक चाहने लगें; और उसका कहना न मानिए जिसके दिल को हमने अपनी याद से गाफिल कर दिया और वो अपनी ख्वाहिश के पीछे चला और उसका मामला हद से गुज़रा हुआ है।)व क़ुलिल-हक्कु मिर-रब्बिकुम; फ-मन शा-अ फल-युअ्मिन व मन शा-अ फल-यकफुर; इन्ना अअ्तदना लिज़-ज़ालिमीना नारन अहाता बिहिम सुरादिक़ुहा; व इंय-यस्तगीसू युगासू बि-मा-इन कल-मुहलि यश्विल-वुजूह; बिअ्सश-शराबु व सा-अत मुर्तफक़ा।
(और कह दीजिए: हक़ तुम्हारे रब की तरफ से है; तो जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे कुफ्र करे; बेशक हमने ज़ालिमों के लिए आग तैयार कर रखी है जिसकी कनातों (दीवारों) ने उन्हें घेर लिया है; और अगर वो फरियाद करेंगे तो उनकी फरियाद ऐसे पानी से सुनी जाएगी जो पिघले हुए तांबे जैसा होगा, जो चेहरों को भून डालेगा; क्या ही बुरा पीना है और क्या ही बुरा ठिकाना है।)इन्नल-लज़ीना आमनू व अमिलुस-सालिहाति इन्ना ला नुज़ी-उ अजरा मन अहसना अमला।
(बेशक जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, हम यकीनन उसका अजर ज़ाया नहीं करते जिसने अच्छे अमल किए।)उलाइका लहुम जन्नातु अद्निन तजरी मिन तहतिहिमुल-अन्हारु युहल्लौना फीहा मिन असाविरा मिन ज़हबिंव-व यल्बसूना सियाबन खुज़रम-मिन सुन्दुसिंव-व इस्तब्रक़िम-मुत्तकि-ईना फीहा अलल-अरा-इक; निअ्मस-सवाबु व हसुनत मुर्तफक़ा।
(यही वो लोग हैं जिनके लिए हमेशा रहने वाले बाग़ हैं, उनके नीचे नहरें बहती हैं, वहां उन्हें सोने के कंगन पहनाए जाएंगे और वो बारीक और मोटे रेशम के हरे कपड़े पहनेंगे, वहां तख्तों पर तकिया लगाए होंगे; क्या ही अच्छा बदला है और क्या ही अच्छी आरामगाह है।)वज़रिब लहुम मसलर-रजुलैनि ज-अल्ना लि-अहदिहिमा जन्नतैनि मिन अअ्नाबिंव-व हफफ्नाहुमा बि-नख्लिंव-व ज-अल्ना बैनहुमा ज़र-आ।
(और उनके लिए दो आदमियों की मिसाल बयान कीजिए: हमने उनमें से एक को अंगूरों के दो बाग़ दिए और हमने उन्हें खजूरों से घेर दिया और उन दोनों के बीच खेती पैदा की।)किल्तल-जन्नतैनि आतत उकुलहा व लम तज़लिम मिन्हु शय-अंव-व फज्जरना खिलालहुमा नहरा।
(दोनों बाग़ अपना फल लाए और उसमें कोई कमी नहीं की और हमने उन दोनों के बीच एक नहर जारी कर दी।)व काना लहू समर; फ-क़ाला लि-साहिबिही व हुवा युहाविरुहू अना अक्सरु मिन्का मालंव-व अ-अज्जु नफरा।
(और उसके पास बहुत फल थे; तो उसने अपने साथी से बात करते हुए कहा: मैं तुझसे माल में ज्यादा हूँ और जत्थे (आदमी/ताकत) में ज्यादा इज़्ज़त वाला हूँ।)व दखला जन्नतहू व हुवा ज़ालिमुल-लि-नफ्सिह; क़ाला मा अज़ुन्नु अन तबीदा हाज़िही अबदा।
(और वो अपने बाग़ में दाखिल हुआ और वो अपनी जान पर जुल्म करने वाला था; उसने कहा: मैं नहीं ख्याल करता कि ये कभी बर्बाद होगा।)व मा अज़ुन्नुस-सा-अता का-इमतंव-व ल-इर-रुदित्तु इला रब्बी ल-अजिदन्ना खैराम-मिन्हा मुनक़लबा।
(और मैं नहीं ख्याल करता कि कयामत कायम होगी, और अगर मैं अपने रब की तरफ लौटाया भी गया तो मैं ज़रूर इससे बेहतर लौटने की जगह पाऊंगा।)क़ाला लहू साहिबुहू व हुवा युहाविरुहू अकफर्ता बिल्लज़ी ख़लक़का मिन तुराबिन सुम्मा मिन नुत्फतिन सुम्मा सव्वाका रजुला।
(उसके साथी ने उससे बात करते हुए कहा: क्या तूने उस ज़ात के साथ कुफ्र किया जिसने तुझे मिट्टी से पैदा किया, फिर नुत्फे (बूंद) से, फिर तुझे पूरा मर्द बनाया?)लाकिन्ना हुवल्लाहु रब्बी व ला उशरिकु बि-रब्बी अहदा।
(लेकिन मैं तो (ये कहता हूँ कि) वही अल्लाह मेरा रब है और मैं अपने रब के साथ किसी को शरीक नहीं करता।)व लौ ला इज़ दखल्ता जन्नतका क़ुल्ता मा शा-अल्लाहु ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह; इन तरनि अना अक़ल्ला मिन्का मालंव-व वलदा।
(और जब तू अपने बाग़ में दाखिल हुआ तो तूने क्यों न कहा: जो अल्लाह ने चाहा, अल्लाह की मदद के बिना कोई ताकत नहीं; अगर तू मुझे देखता है कि मैं तुझसे माल और औलाद में कम हूँ।)फ-असा रब्बी अंय-युअ्तियनि खैराम-मिन जन्नतिका व युरसिला अलैहा हुस्बानम-मिनस-समा-इ फ-तुस्बिहा स-ईदन ज़लक़ा।
(तो करीब है कि मेरा रब मुझे तेरे बाग़ से बेहतर दे दे और उस (तेरे बाग़) पर आसमान से कोई आफत भेज दे तो वो चिकना मैदान हो जाए।)औ युस्बिहा मा-उहा गौरन फ-लन तस्तती-अ लहू तलबा।
(या उसका पानी गहरा उतर जाए तो तू उसे तलाश न कर सके।)व उहीता बि-समरिही फ-अस्बहा युकल्लिबु कफ्फैहि अला मा अनफक़ा फीहा व हिया खावियतुन अला उरूशिहा व यक़ूलु या लैतनी लम उशरिक बि-रब्बी अहदा।
(और उसके फलों को घेर लिया गया (बर्बाद कर दिया गया), तो वो अपने हाथों को मलता रह गया उस पर जो उसने उसमें खर्च किया था और वो अपनी छतों पर गिरी पड़ी थी और वो कहता था: काश! मैंने अपने रब के साथ किसी को शरीक न किया होता।)व लम तकुल-लहू फि-अतुंय-यन्सुरूनहू मिन दूनिल्लाहि व मा काना मुन्तसिरा।
(और उसके लिए कोई जमात न थी जो अल्लाह के सिवा उसकी मदद करती और न वो खुद बदला लेने वाला था।)हुनालिकल-वलायतु लिल्लाहिल-हक्क़; हुवा खैरुन् सवाबंव-व खैरुन् उक़्बा।
(यहाँ सब इख्तियार सच्चे अल्लाह का है; वही सवाब देने में बेहतर है और अंजाम के लिहाज़ से बेहतर है।)वज़रिब लहुम मसलल-हयातिद-दुन्या कमा-इन अनज़ल्नाहु मिनस-समा-इ फख्तलता बिही नबातुल-अर्ज़ि फ-अस्बहा हशीमन तज़रूहुर-रियाह; व कानल्लाहु अला कुल्लि शय-इम-मुक़्तदिरा।
(और उनके लिए दुनिया की ज़िंदगी की मिसाल बयान कीजिए जैसे पानी जिसे हमने आसमान से उतारा तो उससे ज़मीन की वनस्पति (पौधे) घनी हो गई, फिर वो चूरा-चूरा हो गई जिसे हवाएं उड़ाती हैं; और अल्लाह हर चीज़ पर कुदरत रखने वाला है।)अल-मालु वल-बनूना ज़ीनतुल-हयातिद-दुन्या; वल-बाक़ियातस-सालिहातु खैरुन् इन्दा रब्बिका सवाबंव-व खैरुन् अमला।
(माल और बेटे दुनिया की ज़िंदगी की रौनक हैं; और बाकी रहने वाली नेकियां तेरे रब के नज़दीक सवाब में बेहतर हैं और उम्मीद में बेहतर हैं।)व यौमा नुसय्यिरुल-जिबाला व तरल-अर्ज़ा बारिज़तंव-व हशरनाहुम फ-लम नुगादिर मिन्हुम अहदा।
(और जिस दिन हम पहाड़ों को चलाएंगे और तुम ज़मीन को साफ खुला हुआ देखोगे और हम उन्हें इकट्ठा करेंगे तो उनमें से किसी को नहीं छोड़ेंगे।)व उरिज़ू अला रब्बिका सफ्फा; लक़द जिअ्तुमूना कमा ख़लक़नाकुम अव्वला मर्रतिम्-बल ज़-अम्तुम अल्लन नज-अला लकुम मौ-इदा।
(और वो तेरे रब के सामने सफ बांधकर पेश किए जाएंगे; (कहा जाएगा:) तुम हमारे पास आ गए जैसा हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था, बल्कि तुमने गुमान किया था कि हम तुम्हारे लिए कोई वादा (का वक़्त) मुकर्रर नहीं करेंगे।)व वुज़ि-अल-किताबु फ-तरल-मुजरिमीना मुशफिक़ीना मिम्मा फीहि व यक़ूलूना या वैलतना मा लि-हाज़ल-किताबि ला युगादिरु सगीरतंव-व ला कबीरतन इल्ला अह्साहा; व वजदू मा अमिलू हाज़िरा; व ला यज़लिमु रब्बुका अहदा।
(और नाम-ए-आमाल (किताब) रखा जाएगा तो तुम मुजरिमों को देखोगे कि जो कुछ उसमें है उससे डर रहे हैं और कहेंगे: हाय हमारी कमबख्ती! इस किताब को क्या हुआ है, इसने न कोई छोटी बात छोड़ी है और न बड़ी मगर उसे गिन रखा है; और जो उन्होंने किया था उसे मौजूद पाएंगे; और तेरा रब किसी पर जुल्म नहीं करता।)व इज़ क़ुल्ना लिल-मला-इकतिस्जुदू लि-आदमा फ-सजदू इल्ला इब्लीस; काना मिनल-जिन्नि फ-फसक़ा अन अम्रि रब्बिह; अ-फ-तत्तख़िज़ूनहू व ज़ुर्रिय्यतहू औलिया-अ मिन दूनी व हुम लकुम अदुव्व; बिअ्सा लिज़-ज़ालिमीना बदला।
(और जब हमने फरिश्तों से कहा: आदम को सजदा करो, तो उन्होंने सजदा किया सिवाय इब्लीस के; वो जिन्नों में से था तो उसने अपने रब के हुक्म की नाफरमानी की; तो क्या तुम उसे और उसकी औलाद को मेरे सिवा दोस्त बनाते हो हालांकि वो तुम्हारे दुश्मन हैं? ज़ालिमों के लिए क्या ही बुरा बदला है।)मा अश-हत्तुहुम खल्क़स-समावाति वल-अर्ज़ि व ला खल्क़ा अनफुसिहिम व मा कुन्तु मुत्तख़िज़ल-मुज़िल्लीना अज़ुदा।
(मैंने उन्हें न आसमानों और ज़मीन के पैदा करने के वक़्त बुलाया था और न खुद उनके पैदा करने के वक़्त, और मैं गुमराह करने वालों को मददगार बनाने वाला नहीं हूँ।)व यौमा यक़ूलु नादू शुरका-इयल-लज़ीना ज़-अम्तुम फ-द-औहुम फ-लम यस्तजीबू लहुम व ज-अल्ना बैनहुम मौबिक़ा।
(और जिस दिन वो (अल्लाह) फरमाएगा: मेरे उन शरीकों को पुकारो जिन्हें तुम (शरीक) समझते थे, तो वो उन्हें पुकारेंगे तो वो उनकी बात नहीं सुनेंगे और हम उनके बीच एक हलाकत की जगह (आड़) बना देंगे।)व र-अल-मुजरिमूनन-नारा फ-ज़न्नू अन्नहुम मुवाक़ि-ऊहा व लम यजिदू अन्हा मसरिफा।
(और मुजरिम आग को देखेंगे तो यकीन कर लेंगे कि वो उसमें गिरने वाले हैं और उससे फिरने की जगह नहीं पाएंगे।)व लक़द सर्रफ्ना फी हाज़ल-क़ुरआनि लिन्-नासि मिन कुल्लि मसल; व कानल-इन्सानु अक्सर शय-इन जदला।
(और हमने इस कुरान में लोगों के लिए हर तरह की मिसाल बयान कर दी है; और इंसान सबसे ज्यादा झगड़ालू है।)व मा मन-अन्-नासा अंय-युअ्मिनू इज़ जा-अहुमुल-हुदा व यस्तगफिरू रब्बहुम इल्ला अन तअ्तियहुम सुन्नतुल-अव्वलीना औ यअ्तियहुमुल-अज़ाबु क़ुबुला।
(और लोगों को ईमान लाने से जब उनके पास हिदायत आ गई और अपने रब से माफी मांगने से किसी चीज़ ने नहीं रोका मगर ये कि उनके पास पहलों का तरीका (अज़ाब) आए या उनके सामने अज़ाब आ खड़ा हो।)व मा नुरसिलुल-मुर्सलीना इल्ला मुबश्शिरीना व मुन्ज़िरीन; व युजादिलुल-लज़ीना कफरू बिल-बातिलि लि-युदहिज़ू बिहिल-हक्क़ा वत्तखज़ू आयाती व मा उनज़िरू हुज़ुवा।
(और हम रसूलों को सिर्फ खुशखबरी देने वाले और डराने वाले बनाकर भेजते हैं; और काफिर झूठ के सहारे झगड़ते हैं ताकि उससे हक़ को फिसला दें (मिटा दें) और उन्होंने मेरी आयतों को और जिससे उन्हें डराया गया मज़ाक बना लिया।)व मन अज़लमु मिम्मन ज़ुक्किरा बि-आयाति रब्बिही फ-अअ्रज़ा अन्हा व नसिया मा क़द्दमत यदाह; इन्ना ज-अल्ना अला क़ुलूबिहिम अकिन्नतन अंय-यफक़हूहु व फी आज़ानिहिम वक़्रा; व इन तद-उहुम इलल-हुदा फ-लंय-यह-तदू इज़न अबदा।
(और उससे बड़ा ज़ालिम कौन है जिसे उसके रब की आयतों के ज़रिए नसीहत की गई तो उसने उनसे मुँह फेर लिया और भूल गया जो उसके हाथों ने आगे भेजा; बेशक हमने उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं कि वो उसे समझें और उनके कानों में बोझ (बहरापन); और अगर आप उन्हें हिदायत की तरफ बुलाएं तो वो कभी हिदायत नहीं पाएंगे।)व रब्बुकल-गफूरु ज़ुर-रह-मह; लौ यु-आख़िज़ुहुम बिमा कसबू ल-अज्जल लहुमुल-अज़ाब; बल लहुम मौ-इदुल-लंय-यजिदू मिन दूनिही मौ-इला।
(और आपका रब बख्शने वाला, रहमत वाला है; अगर वो उन्हें उनकी कमाई (गुनाहों) पर पकड़ता तो उन पर जल्दी अज़ाब भेज देता; बल्कि उनके लिए एक वादा (का वक़्त) है जिससे वो पनाह की जगह नहीं पाएंगे।)व तिल्कल-क़ुरा अहलक्नाहुम लम्मा ज़लमू व ज-अल्ना लि-महलिकिहिम मौ-इदा।
(और ये बस्तियां हैं जिन्हें हमने हलाक कर दिया जब उन्होंने जुल्म किया और हमने उनकी हलाकत के लिए एक वक़्त मुकर्रर किया था।)व इज़ क़ाला मूसा लि-फताहु ला अबरहु हत्ता अबलुगा मजम-अल-बह-रैनि औ अमज़िया हुक़ुबा।
(और जब मूसा ने अपने नौजवान (साथी) से कहा: मैं चलता रहूँगा यहाँ तक कि दो समंदरों के मिलने की जगह पहुँच जाऊं या मुद्दतों चलता रहूँ।)फ-लम्मा ब-लगा मजम-अ बैनिहिमा नसिया हूतहुमा फत्तखज़ा सबीलहू फिल-बह्रि सरबा।
(फिर जब वो उन दोनों के मिलने की जगह पहुँचे तो अपनी मछली भूल गए, तो उसने (मछली ने) समंदर में अपना रास्ता सुरंग जैसा बना लिया।)फ-लम्मा जावज़ा क़ाला लि-फताहु आतिना गदा-अना लक़द लक़ीना मिन सफरिना हाज़ा नसबा।
(फिर जब वो आगे बढ़ गए तो मूसा ने अपने साथी से कहा: हमारा खाना लाओ, बेशक हमने अपने इस सफर में बहुत थकान उठाई है।)क़ाला अ-र-ऐता इज़ अवौना इलस-सखरति फ-इन्नी नसीतुल-हूत; व मा अनसानीहु इल्लश-शैतानु अन अज़कुरह; वत्तखज़ा सबीलहू फिल-बह्रि अजबा।
(उसने कहा: क्या आपने देखा जब हमने चट्टान के पास पनाह ली थी तो मैं मछली भूल गया; और मुझे शैतान ही ने भुलाया कि मैं उसका ज़िक्र करूँ; और उसने समंदर में अपना रास्ता अजीब तरह से बना लिया।)क़ाला ज़ालिका मा कुन्ना नबगि; फर्तद्दा अला आसारिहिमा क़ससा।
(मूसा ने कहा: यही तो वो था जिसे हम तलाश कर रहे थे; तो वो अपने कदमों के निशान देखते हुए वापस लौटे।)फ-वजदा अब्दम-मिन इबादिना आतैनाहु रहमतम-मिन इन्दिना व अल्लमनाहु मिल-लदुन्ना इल्मा।
(तो उन्होंने हमारे बंदों में से एक बंदे (खिज़्र) को पाया जिसे हमने अपने पास से रहमत दी थी और उसे अपने पास से (खास) इल्म सिखाया था।)क़ाला लहू मूसा हल अत्तबि-उका अला अन तु-अल्लि-मनि मिम्मा उल्लिम्ता रुशदा।
(मूसा ने उनसे कहा: क्या मैं आपके साथ रहूँ इस शर्त पर कि आप मुझे उस भलाई (इल्म) में से सिखाएं जो आपको सिखाया गया है?)क़ाला इन्नका लन तस्तती-अ म-इया सब्रा।
(उन्होंने कहा: आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकेंगे।)व कैफा तस्बिरु अला मा लम तुहित बिही खुब्रा।
(और आप उस बात पर कैसे सब्र करेंगे जिसकी हकीकत को आप (अपने इल्म के घेरे में) नहीं लाए?)क़ाला स-तजिदुनी इन शा-अल्लाहु साबिरंव-व ला अअ्सी लका अम्रा।
(मूसा ने कहा: इन्शाअल्लाह आप मुझे सब्र करने वाला पाएंगे और मैं आपके किसी हुक्म की नाफरमानी नहीं करूँगा।)क़ाला फ-इनित्तबअ्तनी फला तस्-अल्नी अन शय-इन हत्ता उहदिसा लका मिन्हु ज़िक्रा।
(उन्होंने कहा: अगर आप मेरे साथ रहें तो मुझसे किसी चीज़ के बारे में न पूछना यहाँ तक कि मैं खुद आपसे उसका ज़िक्र करूँ।)फन-तलक़ा हत्ता इज़ा रकिबा फिस-सफीनति खरक़हा; क़ाला अ-खरक़्तहा लि-तुगरिक़ा अहलहा; लक़द जिअ्ता शय-अन इम्रा।
(तो दोनों चले यहाँ तक कि जब कश्ती में सवार हुए तो उसने (खिज़्र ने) उसे फाड़ दिया (सुराख कर दिया); मूसा ने कहा: क्या आपने इसे फाड़ दिया ताकि इसके लोगों को डुबो दें? बेशक आपने बहुत भारी (बुरा) काम किया।)क़ाला अलम अक़ुल इन्नका लन तस्तती-अ म-इया सब्रा।
(उन्होंने कहा: क्या मैंने नहीं कहा था कि आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकेंगे?)क़ाला ला तु-आख़िज़नी बिमा नसीतु व ला तुरहिक़नी मिन अम्री उस्रा।
(मूसा ने कहा: मेरी भूल पर मुझे न पकड़िए और मेरे मामले में मुझ पर तंगी न डालिए।)फन-तलक़ा हत्ता इज़ा लक़िया गुलामन फ-क़तलहू क़ाला अ-क़तल्ता नफ्सन ज़किय्यतम-बि-गैरि नफ्सिन लक़द जिअ्ता शय-अन नुक्रा।
(फिर दोनों चले यहाँ तक कि एक लड़के से मिले तो उसने उसे कत्ल कर दिया; मूसा ने कहा: क्या आपने एक पाक जान को बिना किसी जान (के बदले) के कत्ल कर दिया? बेशक आपने बहुत नापसंद काम किया।)क़ाला अलम अक़ुल लका इन्नका लन तस्तती-अ म-इया सब्रा।
(उन्होंने कहा: क्या मैंने आपसे नहीं कहा था कि आप मेरे साथ सब्र नहीं कर सकेंगे?)क़ाला इन स-अल्तुका अन शय-इम-बअ्दहा फला तुसाहिब्नी; क़द बलगता मिल-लदुन्नी उज़्रा।
(मूसा ने कहा: अगर इसके बाद मैं आपसे किसी चीज़ के बारे में पूछूँ तो मुझे साथ न रखिएगा; बेशक आप मेरी तरफ से उज़्र (हद) को पहुँच चुके।)फन-तलक़ा हत्ता इज़ा अतया अह्ला क़र्यति-निस्तत-अमा अहलहा फ-अबौ अंय-युज़य्यिफूहुमा फ-वजदा फीहा जिदारंय-युरीदु अंय-यन्क़ज़्ज़ा फ-अक़ामह; क़ाला लौ शिअ्ता लत्तखज़्ता अलैहि अज्रा।
(फिर दोनों चले यहाँ तक कि एक बस्ती वालों के पास आए, उनसे खाना मांगा तो उन्होंने उनकी मेहमानी करने से इनकार कर दिया, फिर उन्होंने वहां एक दीवार पाई जो गिरना चाहती थी तो उसने उसे सीधा कर दिया; मूसा ने कहा: अगर आप चाहते तो इस पर मज़दूरी ले लेते।)क़ाला हाज़ा फिराक़ु बैनी व बैनिक; स-उनब्बि-उका बि-तअ्वीलि मा लम तस्ततिअ् अलैहि सब्रा।
(उन्होंने कहा: ये मेरे और आपके दरमियान जुदाई है; अब मैं आपको उन बातों की हकीकत बताऊंगा जिन पर आप सब्र न कर सके।)अम्मस-सफीनतु फ-कानत लि-मसाकीना यअ्मलूना फिल-बह्रि फ-अरत्तु अन अअ्ईबहा व काना वरा-अहुम मलिकुंय-यअ्खुज़ु कुल्ला सफीनतिन गस्बा।
(कश्ती का मामला ये था कि वो कुछ गरीबों की थी जो समंदर में काम करते थे, तो मैंने चाहा कि उसे ऐबदार कर दूँ क्योंकि उनके आगे एक बादशाह था जो हर (सही) कश्ती को ज़बरदस्ती छीन लेता था।)व अम्मल-गुलामु फ-काना अबवाहु मुअ्मिनैनि फ-खशीना अंय-युरहिक़हुमा तुग्यानंव-व कुफ्रा।
(और लड़के का मामला ये था कि उसके माँ-बाप मोमिन थे, तो हमें डर हुआ कि वो उन्हें सरकशी और कुफ्र से तंग करेगा।)फ-अरदना अंय-युब्दिलहुमा रब्बुहुमा खैराम-मिन्हु ज़कातंव-व अक़रबा रुह्मा।
(तो हमने चाहा कि उनका रब उन्हें उसके बदले उससे बेहतर पाकीज़गी वाला और रहम (मोहब्बत) में उससे करीब (बेटा) दे।)व अम्मल-जिदारु फ-काना लि-गुलामैनि यतीमैनि फिल-मदीनति व काना तह्तहू कन्ज़ुल-लहुमा व काना अबूहुमा सालिहा; फ-अरादा रब्बुका अंय-यब्लुगा अशुद्दहुमा व यस्तख्रिजा कन्ज़हुमा रहमतम-मिर-रब्बिक; व मा फ-अल्तुहू अन अम्री; ज़ालिका तअ्वीलु मा लम तस्तिअ् अलैहि सब्रा।
(और दीवार का मामला ये था कि वो शहर में दो यतीम लड़कों की थी और उसके नीचे उनका खज़ाना था और उनका बाप नेक था; तो आपके रब ने चाहा कि वो अपनी जवानी को पहुँचें और अपना खज़ाना निकालें, आपके रब की रहमत से; और मैंने ये अपने इख्तियार से नहीं किया; ये है उन बातों की हकीकत जिन पर आप सब्र न कर सके।)व यस्-अलूनाका अन ज़िल-क़र्नैन; क़ुल स-अत्लू अलैकुम मिन्हु ज़िक्रा।
(और वो आपसे ज़ुलक़र्नैन के बारे में पूछते हैं; कह दीजिए: मैं जल्द ही उनका कुछ हाल तुम्हें पढ़कर सुनाऊंगा।)इन्ना मक्कन्ना लहू फिल-अर्ज़ि व आतैनाहु मिन कुल्लि शय-इन सबबा।
(बेशक हमने उसे ज़मीन में कुदरत (ताकत) दी थी और हमने उसे हर चीज़ का सामान (ज़रिया) दिया था।)फ-अत्ब-अ सबबा।
(तो वो एक रास्ते के पीछे चला।)हत्ता इज़ा ब-लगा मगरिबश-शम्सि वजदहा तग्रुबु फी अइनिन हमि-अतिंव-व वजदा इन्दहा क़ौमा; क़ुल्ना या ज़ल-क़र्नैनि इम्मा अन तु-अज्ज़िबा व इम्मा अन तत्तखिज़ा फीहिम हुस्ना।
(यहाँ तक कि जब वो सूरज डूबने की जगह पहुँचा तो उसे काले कीचड़ वाले चश्मे में डूबते हुए पाया और उसके पास एक क़ौम को पाया; हमने कहा: ऐ ज़ुलक़र्नैन! या तो तुम उन्हें सज़ा दो या उनके साथ भलाई का मामला करो।)क़ाला अम्मा मन ज़लमा फ-सौफा नु-अज्ज़िबुहू सुम्मा युरद्दु इला रब्बिही फ-यु-अज्ज़िबुहू अज़ाबन नुक्रा।
(उसने कहा: जो जुल्म करेगा हम उसे सज़ा देंगे, फिर वो अपने रब की तरफ लौटाया जाएगा तो वो उसे सख्त अज़ाब देगा।)व अम्मा मन आमना व अमिला सालिहन फ-लहू जज़ा-अनिल-हुस्ना; व स-नक़ूलु लहू मिन अम्रिना युस्रा।
(और जो ईमान लाया और नेक अमल किया तो उसके लिए अच्छा बदला है; और हम उसे अपने मामले में आसान बात कहेंगे।)सुम्मा अत्ब-अ सबबा।
(फिर वो एक (और) रास्ते के पीछे चला।)हत्ता इज़ा ब-लगा मतलि-अश-शम्सि वजदहा तत्लु-उ अला क़ौमिल-लम नज-अल्-लहुम मिन दूनिहा सित्रा।
(यहाँ तक कि जब वो सूरज निकलने की जगह पहुँचा तो उसे एक ऐसी क़ौम पर निकलते पाया जिनके लिए हमने सूरज के सामने कोई आड़ नहीं बनाई थी।)कज़ालिक; व क़द अहतना बिमा लदौहि खुब्रा।
(बात ऐसी ही है; और जो कुछ उसके पास था हमने उसे अपने इल्म के घेरे में ले रखा था।)सुम्मा अत्ब-अ सबबा।
(फिर वो एक (और) रास्ते के पीछे चला।)हत्ता इज़ा ब-लगा बैनस-सद्दैनि वजदा मिन दूनिहिमा क़ौमल-ला यकादूना यफक़हूना क़ौला।
(यहाँ तक कि जब वो दो दीवारों (पहाड़ों) के बीच पहुँचा तो उनके उस तरफ एक ऐसी क़ौम को पाया जो कोई बात समझती हुई मालूम नहीं होती थी।)क़ालू या ज़ल-क़र्नैनि इन्ना याजूजा व माजूजा मुफसिदूना फिल-अर्ज़ि फ-हल नज-अलु लका खर्जन अला अन तज-अला बैनना व बैनहुम सद्दा।
(उन्होंने कहा: ऐ ज़ुलक़र्नैन! बेशक याजूज और माजूज ज़मीन में फसाद करने वाले हैं, तो क्या हम आपके लिए कुछ माल (खर्च) मुकर्रर कर दें इस शर्त पर कि आप हमारे और उनके बीच एक दीवार बना दें?)क़ाला मा मक्कन्नी फीहि रब्बी खैरुन् फ-अ-ई नूनी बि-कुव्वतिन अज-अल बैनकुम व बैनहुम रद्मा।
(उसने कहा: जो इख्तियार मेरे रब ने मुझे दिया है वो बेहतर है, तुम ताकत (मेहनत) से मेरी मदद करो, मैं तुम्हारे और उनके बीच एक मज़बूत दीवार बना दूँगा।)आतूनी ज़ुबरल-हदीद; हत्ता इज़ा सावा बैनस-सदफैनि क़ालन-फुखू; हत्ता इज़ा ज-अलहू नारन क़ाला आतूनी उफ्रिग अलैहि क़ित्रा।
(मुझे लोहे के तख्ते (टुकड़े) ला दो; यहाँ तक कि जब उसने दोनों पहाड़ों के बीच (खाली जगह) को बराबर कर दिया तो कहा: (आग) धौंको; यहाँ तक कि जब उसे आग (जैसा लाल) कर दिया तो कहा: मेरे पास लाओ कि मैं उस पर पिघला हुआ तांबा डाल दूँ।)फमिस-ता-ऊ अंय-यज़हरूहु व मस्तता-ऊ लहू नक़्बा।
(तो न वो (याजूज-माजूज) उस पर चढ़ सके और न उसमें सुराख कर सके।)क़ाला हाज़ा रहमतुम-मिर-रब्बी; फ-इज़ा जा-अ वअ्दु रब्बी ज-अलहू दक्का-अ; व काना वअ्दु रब्बी हक्क़ा।
(उसने कहा: ये मेरे रब की रहमत है; फिर जब मेरे रब का वादा आएगा तो वो उसे रेज़ा-रेज़ा (चूरा) कर देगा; और मेरे रब का वादा सच्चा है।)व तरकना बअ्ज़हुम यौमइज़िंय-यमूजु फी बअ्ज़िंव-व नुफिखा फिस-सूरि फ-ज-अ्नाहुम जम्-आ।
(और उस दिन हम उन्हें छोड़ देंगे कि एक-दूसरे में मौजें मारेंगे (गड्ड-मड्ड होंगे) और सूर फूंका जाएगा तो हम उन सबको इकट्ठा करेंगे।)व अरज़ना जहन्नमा यौमइज़िल-लिल-काफिरीना अर्ज़ा।
(और उस दिन हम जहन्नम को काफिरों के सामने पेश करेंगे।)अल्लज़ीना कानत अअ्यु-नुहुम फी गिता-इन अन ज़िक्री व कानू ला यस्तती-ऊना सम-आ।
(वो लोग जिनकी आँखों पर मेरी याद से पर्दा पड़ा था और वो सुन नहीं सकते थे।)अ-फ़-हसिबल-लज़ीना कफ़रू अंय-यत्तख़िज़ू इबादी मिन दूनी औलिया; इन्ना अअ्तदना जहन्नमा लिल-काफिरीना नुज़ुला।
(क्या काफिर ये समझते हैं कि वो मेरे सिवा मेरे बंदों को अपना कारसाज़ (मददगार) बना लेंगे? बेशक हमने काफिरों की मेहमानी के लिए जहन्नम तैयार कर रखी है।)कुल हल नुनब्बि-उकुम बिल-अख़्सरीना अअ्माला।
(कह दीजिए: क्या हम तुम्हें वो लोग बताएं जो अमल के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा घाटे में हैं?)अल्लज़ीना ज़ल्ला सअ्-युहुम फिल-हयातिद-दुन्या व हुम यहसबूना अन्नहुम युहसिनूना सुन-आ।
(वो लोग जिनकी कोशिश दुनिया की ज़िंदगी में बर्बाद हो गई और वो समझते रहे कि वो अच्छा काम कर रहे हैं।)उलाइकल-लज़ीना कफ़रू बि-आयाति रब्बिहिम व लिक़ा-इही फ़-हबितत अअ्मालुहुम फ़ला नुक़ीमु लहुम यौमल-क़ियामति वज़्ना।
(यही वो लोग हैं जिन्होंने अपने रब की आयतों और उससे मुलाकात का इनकार किया, तो उनके आमाल अकारत (बर्बाद) गए, तो हम कयामत के दिन उनका कोई वज़न कायम नहीं करेंगे।)ज़ालिका जज़ा-उहुम जहन्नमु बिमा कफ़रू वत्तख़ज़ू आयाती व रुसुली हुज़ुवा।
(यह जहन्नम उनकी सज़ा है क्योंकि उन्होंने कुफ्र किया और मेरी आयतों और मेरे रसूलों का मज़ाक उड़ाया।)इन्नल-लज़ीना आमनू व अमिलुस-सालिहाति कानत लहुम जन्नातुल-फिरदौसि नुज़ुला।
(बेशक जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, उनकी मेहमानी के लिए फिरदौस (जन्नत) के बाग़ होंगे।)ख़ालिदीना फीहा ला यबग़ूना अन्हा हिवला।
(वो उनमें हमेशा रहेंगे, वहां से जगह बदलना नहीं चाहेंगे।)कुल लौ कानल-बह्रु मिदादल-लि-कलिमाति रब्बी ल-नफिदल-बह्रु क़ब्ला अन तनफ़दा कलिमातु रब्बी व लौ जिअ्ना बि-मिस्लिही मददा।
(कह दीजिए: अगर समंदर मेरे रब की बातों (तारीफ/इल्म) के लिए स्याही बन जाए, तो समंदर खत्म हो जाएगा इससे पहले कि मेरे रब की बातें खत्म हों, चाहे हम उसकी मदद के लिए वैसा ही और समंदर ले आएं।)कुल इन्नमा अना बशरुम-मिस्लुकुम यूहा इलय्या अन्नमा इलाहुकुम इलाहुंव-वाहिद; फ़-मन काना यरजू लिक़ा-अ रब्बिही फ़ल-यअ्मल अमलन सालिहंव-व ला युशरिक बि-इबादति रब्बिही अहदा।
(कह दीजिए: मैं तो तुम जैसा ही एक इंसान हूँ, मेरी तरफ वही (Wahi) की जाती है कि तुम्हारा माबूद बस एक ही माबूद है; तो जो अपने रब से मुलाकात की उम्मीद रखता हो, उसे चाहिए कि नेक अमल करे और अपने रब की इबादत में किसी को शरीक न करे।)
अस्हाब-ए-कहफ़ का वाकया (आयत 11-26)
यह उन चंद नौजवानों का किस्सा है जो अपने ईमान को बचाने के लिए एक जालिम बादशाह से भागकर गुफा में छुप गए थे। अल्लाह ने उन्हें 309 साल तक सुलाए रखा और फिर जगाया। यह कयामत के दिन दोबारा ज़िंदा होने की दलील है।
दो बाग़ वाले का किस्सा (आयत 32-44)
यह एक अमीर और घमंडी शख्स का किस्सा है जिसके पास दो हरे-भरे बाग़ थे। उसने अल्लाह का शुक्र अदा नहीं किया और आखिरत का इनकार किया। उसके गरीब दोस्त ने उसे समझाया, लेकिन वो नहीं माना। आखिर में अल्लाह ने उसके बाग़ तबाह कर दिए।
मूसा और खिज़्र (अ.स.) का किस्सा (आयत 60-82)
हज़रत मूसा (अ.स.) इल्म की तलाश में हज़रत खिज़्र (अ.स.) के पास गए। इस सफर में तीन अजीब वाकयात हुए (कश्ती में सुराख करना, लड़के को कत्ल करना, गिरती दीवार सीधी करना)। इससे सबक मिलता है कि अल्लाह की हिकमत हमारी समझ से परे है।
ज़ुलक़र्नैन का किस्सा (आयत 83-98)
ज़ुलक़र्नैन एक न्यायप्रिय बादशाह थे जिन्होंने दुनिया का सफर किया। उन्होंने याजूज और माजूज (Gog and Magog) को रोकने के लिए एक लोहे की दीवार बनाई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या पूरी सूरह कहफ़ पढ़ना ज़रूरी है?
जुम्मा की फजीलत पाने के लिए पूरी सूरह पढ़ना अफ़ज़ल (Best) है। लेकिन अगर वक़्त कम हो, तो कम से कम पहली 10 और आखिरी 10 आयतें ज़रूर पढ़ लें।
Q. सूरह कहफ़ कब पढ़नी चाहिए?
जुम्मा की रात (जुमेरात को मगरिब के बाद) से लेकर जुम्मा के दिन सूरज डूबने तक किसी भी वक़्त पढ़ सकते हैं।
Q. दज्जाल से बचने के लिए कौन सी आयतें याद करनी चाहिए?
सहीह हदीस के मुताबिक, सूरह कहफ़ की शुरुआती 10 आयतें याद करने वाला दज्जाल के फितने से महफूज़ रहेगा।
नतीजा (Conclusion)
सूरह कहफ़ हमारे ईमान की हिफाज़त के लिए एक ढाल है। यह हमें सिखाती है कि दुनिया की चमक-धमक (दौलत, ताकत) आरज़ी है और असली कामयाबी अल्लाह पर ईमान रखने में है।
कोशिश करें कि हर जुम्मा को इसकी तिलावत का मामूल बनाएं। अगर पूरी नहीं पढ़ सकते, तो कम से कम पहली और आखिरी 10 आयतें ज़रूर पढ़ें और सुनें।
अल्लाह हमें दज्जाल के फितने से बचाए और सूरह कहफ़ की बरकतें नसीब फरमाए। आमीन।





