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Surah Kahf in Hindi: सूरह कहफ़ की फजीलत और पहली 10 आयतें
Surah Kahf in Hindi: जुम्मा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ने की बहुत फजीलत है। जानिए इसकी पहली 10 आयतों का हिंदी तर्जुमा और दज्जाल से हिफाज़त का वज़ीफ़ा।

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सूरह कहफ़ (Surah Kahf) कुरान मजीद की 18वीं सूरह है जो 15वें और 16वें पारे में मौजूद है। यह मक्का में नाज़िल हुई।
इस सूरह की सबसे खास बात यह है कि इसे जुम्मा (Friday) के दिन पढ़ने की बहुत ताकीद आई है और यह दज्जाल (Dajjal) के फितने से बचाने वाली है।
इस आर्टिकल में हम Surah Kahf in Hindi, इसकी फजीलत और इसकी पहली 10 आयतों का तर्जुमा जानेंगे जो याद करना सुन्नत है।
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सूरह कहफ़ की फजीलत (Benefits)
- जुम्मा के दिन नूर: हदीस में है कि जो शख्स जुम्मा के दिन सूरह कहफ़ पढ़ता है, उसके लिए दो जुम्मों के दरमियान एक नूर रोशन रहता है।
- दज्जाल से हिफाज़त: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “जो शख्स सूरह कहफ़ की शुरुआती 10 आयतें याद कर ले, वो दज्जाल के फितने से महफूज़ रहेगा।” (सहीह मुस्लिम)
- घर में सुकून: जिस घर में यह सूरह पढ़ी जाए, वहां शैतान दाखिल नहीं होता और सुकून रहता है।
Surah Kahf First 10 Verses in Hindi (पहली 10 आयतें)
यहाँ सूरह कहफ़ की पहली 10 आयतों का हिंदी उच्चारण और तर्जुमा दिया गया है:
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अल्हम्दु लिल्लाहिल-लज़ी अनज़ला अला अब्दिहिल-किताबा व लम यज-अल्-लहू इवजा।
(सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने अपने बंदे पर किताब नाज़िल की और उसमें कोई टेढ़ (कमी) नहीं रखी।)क़य्यि-मल-लि-युनज़िरा बअ्सन शदीदम-मिल-लदुनहु व युबश्शिरल-मुअ्मिनीनल-लज़ीना यअ्मलूनस-सालिहाति अन्ना लहुम अजरन हसना।
(ताकि वो (अल्लाह) अपनी तरफ से सख्त अज़ाब से डराए और उन ईमान वालों को खुशखबरी दे जो नेक अमल करते हैं कि उनके लिए अच्छा बदला है।)माकिसीना फीहि अबदा।
(जिसमें वो हमेशा रहेंगे।)व युनज़िरल-लज़ीना क़ालुत-तख़ज़ल्लाहु वलदा।
(और उन लोगों को डराए जो कहते हैं कि अल्लाह ने बेटा बना लिया है।)मा लहुम बिही मिन इल्मिंव-व ला लि-आबा-इहिम, कबुरत कलि-मतन तख़रुजु मिन अफ्वाहिहिम, इंय-यक़ूलूना इल्ला कज़िबा।
(उन्हें इस बात का कोई इल्म नहीं और न उनके बाप-दादाओं को था, बड़ी भारी बात है जो उनके मुँह से निकलती है, वो सरासर झूठ बकते हैं।)फ-ल-अल्लका बाख़िअुन-नफ्सका अला आसारिहिम इल्लम युअ्मिनू बि-हाज़ल हदीसि असफा।
(तो (ऐ नबी!) शायद आप उनके पीछे अपनी जान हलाक कर देंगे अगर वो इस बात पर ईमान न लाए, अफ़सोस करते हुए।)इन्ना ज-अल्ना मा अलल-अर्ज़ि ज़ीनतल-लहा लि-नब्लुवहुम अय्युहुम अहसनु अमला।
(बेशक हमने ज़मीन पर जो कुछ है उसे इसकी रौनक बनाया है ताकि हम उन्हें आज़माएं कि उनमें से कौन अमल में ज्यादा अच्छा है।)व इन्ना ल-जा-इलूना मा अलैहा सईदन जुरुज़ा।
(और बेशक जो कुछ इस (ज़मीन) पर है हम उसे एक दिन चटियल मैदान बना देंगे।)अम हसिब्ता अन्ना अस्हाबल-कहफि वर-रक़ीमि कानू मिन आयातिना अजबा।
(क्या तुम ख्याल करते हो कि गुफा और रक़ीम वाले हमारी निशानियों में से कोई अजीब चीज़ थे?)इज़ अवल-फितयतु इलल-कहफि फ-क़ालू रब्बना आतिना मिल-लदुनका रहमतंव-व हय्यिअ् लना मिन अम्रिना रशदा।
(जब उन नौजवानों ने गुफा में पनाह ली तो कहा: ऐ हमारे रब! हमें अपनी तरफ से रहमत अता फरमा और हमारे मामले में हमारी सही रहनुमाई फरमा।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या पूरी सूरह कहफ़ पढ़ना ज़रूरी है?
जुम्मा की फजीलत पाने के लिए पूरी सूरह पढ़ना अफ़ज़ल है। लेकिन अगर वक़्त कम हो, तो कम से कम पहली और आखिरी 10 आयतें ज़रूर पढ़ लें।
Q. सूरह कहफ़ कब पढ़नी चाहिए?
जुम्मा की रात (जुमेरात को मगरिब के बाद) से लेकर जुम्मा के दिन सूरज डूबने तक किसी भी वक़्त पढ़ सकते हैं।
नतीजा (Conclusion):
सूरह कहफ़ हमारे ईमान की हिफाज़त के लिए एक ढाल है। कोशिश करें कि हर जुम्मा को इसकी तिलावत का मामूल बनाएं और इसकी पहली 10 आयतें ज़बानी याद कर लें।





