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Surah Dahr (Al-Insan) in Hindi: सूरह दहर की फजीलत और तर्जुमा

Surah Dahr (Al-Insan) in Hindi: जानिए सूरह दहर का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह इंसान की पैदाइश, नेक लोगों के इनाम और जन्नत की नेमतों को बयान करती है।

Surah Dahr (Al-Insan) in Hindi: सूरह दहर की फजीलत और तर्जुमा

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सूरह दहर (Surah Ad-Dahr), जिसे सूरह अल-इंसान (Surah Al-Insan) भी कहा जाता है, कुरान मजीद की 76वीं सूरह है। “दहर” का मतलब है “ज़माना” (Time) और “इंसान” का मतलब है “इंसान” (Man)। यह मदीना में नाज़िल हुई और इसमें 31 आयतें हैं।

इस सूरह में अल्लाह तआला ने इंसान की पैदाइश, उसे दी गई हिदायत और फिर नेक लोगों (अबरार) को जन्नत में मिलने वाली नेमतों का बहुत ही खूबसूरत बयान किया है।

इस आर्टिकल में हम Surah Dahr in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।

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सूरह दहर की अहमियत (Importance of Surah Ad-Dahr)

  1. इंसान की हकीकत: यह सूरह हमें याद दिलाती है कि इंसान एक वक़्त कुछ भी नहीं था, फिर अल्लाह ने उसे एक मामूली कतरे से बनाया और सुनने-देखने वाला बनाया।
  2. जन्नत की नेमतें: इसमें जन्नत की नहरों, रेशमी लिबास, चांदी के बर्तनों और खूबसूरत हूरों का तफसीली ज़िक्र है, जो इंसान को नेकी करने पर उभारता है।
  3. नेक लोगों की सिफात: इसमें बताया गया है कि नेक लोग (अबरार) अल्लाह की मोहब्बत में यतीम, मिस्कीन और कैदी को खाना खिलाते हैं और सिर्फ अल्लाह की रज़ा चाहते हैं।

Surah Dahr in Hindi (Hindi Mein)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. हल अता अलल-इंसानि हीनुम-मिनद-दहरि लम यकुन शैअम-मज़कूरा।
    (बेशक इंसान पर ज़माने में एक ऐसा वक़्त भी आया है जब वो कोई काबिले-ज़िक्र चीज़ नहीं था।)

  2. इन्ना ख़लक़नल-इंसाना मिन-नुत्फतिन अम्शाजिन-नब्तलीहि फ-ज-अल्नाहु समीअम-बसीरा।
    (बेशक हमने इंसान को मिले-जुले नुत्फे से पैदा किया ताकि हम उसे आज़माएं, तो हमने उसे सुनने वाला, देखने वाला बनाया।)

  3. इन्ना हदैनाहुस-सबीला इम्मा शाकिरंव-व इम्मा कफूरा।
    (बेशक हमने उसे रास्ता दिखा दिया, चाहे वो शुक्रगुज़ार बने या ना-शुक्रा।)

  4. इन्ना अअ्तदना लिल-काफिरीना सलासिला व अग्लालंव-व सईरा।
    (बेशक हमने काफिरों के लिए ज़ंजीरें और तौक और भड़कती हुई आग तैयार कर रखी है।)

  5. इन्नल-अबरारा यशरबूना मिन कअ्सिन काना मिज़ाजुहा काफ़ूरा।
    (बेशक नेक लोग ऐसे जाम से पिएंगे जिसमें काफ़ूर की मिलावट होगी।)

  6. अैनंय-यशरबु बिहा इबादुल्लाहि युफज्जिरूनहा तफजीरा।
    (यह एक चश्मा है जिससे अल्लाह के बंदे पिएंगे और उसे जहाँ चाहेंगे बहाकर ले जाएंगे।)

  7. यूफ़ूना बिन-नज़रि व यख़ाफ़ूना यौमन काना शर्रुहू मुस्ततीरा।
    (वो अपनी मन्नतें पूरी करते हैं और उस दिन से डरते हैं जिसकी बुराई फैली हुई होगी।)

  8. व युत्इमूनत-तआमा अला हुब्बिही मिस्कीनंव-व यतीमंव-व असीरा।
    (और वो उसकी (अल्लाह की) मोहब्बत में मिस्कीन, यतीम और कैदी को खाना खिलाते हैं।)

  9. इन्नमा नुत्इमुकुम लि-वजहिल्लाहि ला नूरीदु मिन्कुम जज़ा-अंव-व ला शुकूरा।
    ((और कहते हैं) हम तो तुम्हें सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए खिलाते हैं, हम तुमसे न कोई बदला चाहते हैं और न शुक्रगुज़ारी।)

  10. इन्ना नख़ाफु मिर-रब्बिना यौमन अबूसन क़म्तरीरा।
    (हम तो अपने रब से उस दिन का खौफ करते हैं जो बहुत तल्ख़ और सख्त होगा।)

  11. फ-वक़ाहुमुल्लाहु शर्रा ज़ालिकल-यौमि व लक़्क़ाहुम नज़रतंव-व सुरूर।
    (तो अल्लाह उन्हें उस दिन की सख्ती से बचा लेगा और उन्हें ताज़गी और खुशी अता करेगा।)

  12. व जज़ाहुम बिमा सबरू जन्नतंव-व हरीरा।
    (और उनके सब्र के बदले उन्हें जन्नत और रेशमी लिबास अता करेगा।)

  13. मुत्तकि-ईना फीहा अलल-अरा-इक, ला यरौना फीहा शम्संव-व ला ज़म्हरीरा।
    (वो उसमें तख्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे, न वहां सूरज की (तेज़) गर्मी देखेंगे और न कड़ाके की सर्दी।)

  14. व दानियतन अलैहिम ज़िलालुहा व ज़ुल्लिलत क़ुतूफुहा तज़लीला।
    (और (जन्नत के) साये उन पर झुके होंगे और उसके फल उनके लिए बिल्कुल नीचे कर दिए जाएंगे।)

  15. व युताफु अलैहिम बि-आ नियतिम-मिन फिज़्ज़तिंव-व अक्वाबिन कानत क़वारीरा।
    (और उन पर चांदी के बर्तन और शीशे के प्याले गर्दिश में होंगे।)

  16. क़वारीरा मिन फिज़्ज़तिन क़द्दरूहा तक़दीरा।
    (शीशे भी चांदी के, जिन्हें उन्होंने ठीक अंदाज़े से बनाया होगा।)

  17. व युस्क़ौना फीहा कअ्सन काना मिज़ाजुहा ज़न्जबीला।
    (और उन्हें वहां ऐसा जाम पिलाया जाएगा जिसमें सोंठ (Ginger) की मिलावट होगी।)

  18. अैनन फीहा तुसम्मा सल-सबीला।
    (यह जन्नत का एक चश्मा है जिसका नाम “सलसबील” है।)

  19. व यतूफु अलैहिम विल्दानुम-मुखल्लदून, इज़ा र-ऐतहुम हसिब्तहुम लुअ्लुअम-मन्सूरा।
    (और उनके पास हमेशा रहने वाले लड़के आते-जाते रहेंगे, जब तुम उन्हें देखोगे तो समझोगे कि बिखरे हुए मोती हैं।)

  20. व इज़ा र-ऐता सम्मा र-ऐता नईमंव-व मुल्कन कबीरा।
    (और जब तुम वहां देखोगे तो नेमतें ही नेमतें और एक बड़ी सल्तनत देखोगे।)

  21. आलियहुम सियाबु सुन्दुसिन खुज़रुंव-व इस्तबरक़, व हुल्लू असाविरा मिन फिज़्ज़तिंव-व सक़ाहुम रब्बुहुम शराबन तहुरा।
    (उनके ऊपर बारीक रेशम के सब्ज़ लिबास और मोटे रेशम होंगे, और उन्हें चांदी के कंगन पहनाए जाएंगे, और उनका रब उन्हें पाकीज़ा शराब पिलाएगा।)

  22. इन्ना हाज़ा काना लकुम जज़ा-अंव-व काना सअ्युकुम-मश्कूरा।
    (बेशक यह तुम्हारे लिए बदला है और तुम्हारी कोशिश कुबूल की गई।)

  23. इन्ना नहनु नज़्ज़ल्ना अलैकल-क़ुरआना तन्ज़ीला।
    (बेशक हमने ही तुम पर यह कुरान थोड़ा-थोड़ा करके नाज़िल किया है।)

  24. फस्बिर लि-हुक्मि रब्बिका व ला तुतिअ् मिन्हुम आसिमन औ कफूरा।
    (तो अपने रब के हुक्म पर सब्र करो और उनमें से किसी गुनहगार या ना-शुकरे की बात न मानो।)

  25. वज़कुरिस्-म रब्बिका बुकरतंव-व असीला।
    (और सुबह और शाम अपने रब का नाम याद करो।)

  26. व मिनल-लैलि फस्जुद लहू व सब्बिहहु लैलन तवीला।
    (और रात के कुछ हिस्से में उसे सज्दा करो और रात में देर तक उसकी तस्बीह करो।)

  27. इन्ना हा-उला-इ युहिब्बूनल-आजिलता व यज़रूना वरा-अहुम यौमन सक़ीला।
    (बेशक ये लोग जल्दी मिलने वाली (दुनिया) से मोहब्बत रखते हैं और अपने पीछे एक भारी दिन को छोड़ देते हैं।)

  28. नहनु ख़लक़नाहुम व शददना असरहुम, व इज़ा शिअ्ना बद्दल्ना अम्सालहुम तब्दीला।
    (हमने ही उन्हें पैदा किया और उनके जोड़ों को मज़बूत किया, और जब हम चाहेंगे तो उनके जैसे और बदल लाएंगे।)

  29. इन्ना हाज़िही तज़्किरह, फ-मन शा-अत्तख़ज़ा इला रब्बिही सबीला।
    (बेशक यह एक नसीहत है, तो जो चाहे अपने रब की तरफ रास्ता पकड़ ले।)

  30. व मा तशा-ऊना इल्ला अंय-यशा-अल्लाह, इन्नल्लाहा काना अलीमन हकीमा।
    (और तुम नहीं चाह सकते मगर जब अल्लाह चाहे, बेशक अल्लाह बड़ा इल्म वाला, हिकमत वाला है।)

  31. युदखिलु मंय-यशा-उ फी रहमतिह, वज़-ज़ालिमीना अ-अद्दा लहुम अज़ाबन अलीमा।
    (वो जिसे चाहता है अपनी रहमत में दाखिल करता है, और ज़ालिमों के लिए उसने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह दहर का दूसरा नाम क्या है?
A.

सूरह दहर को सूरह अल-इंसान भी कहा जाता है क्योंकि इसमें इंसान की पैदाइश का ज़िक्र है।

Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
A.

इस सूरह का असल पैगाम यह है कि अल्लाह ने इंसान को पैदा करके उसे सही और गलत का रास्ता दिखा दिया है। अब यह इंसान की मर्ज़ी है कि वो शुक्रगुज़ार बनकर जन्नत कमाए या ना-शुक्रा बनकर जहन्नम का हक़दार बने।


नतीजा (Conclusion)

सूरह दहर हमें याद दिलाती है कि हमारी असल कामयाबी आखिरत की कामयाबी है। दुनिया की ज़िन्दगी एक इम्तिहान है। हमें चाहिए कि हम नेक लोगों की तरह अल्लाह की रज़ा के लिए काम करें और जन्नत की उन नेमतों के हक़दार बनें जिनका वादा किया गया है।

अल्लाह हमें नेक अमल करने की तौफीक दे। आमीन।

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