Surah Bayyinah in Hindi: सूरह बय्यिनह की फजीलत और तर्जुमा
Surah Bayyinah in Hindi: जानिए सूरह बय्यिनह का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह अहले किताब (यहूदी और ईसाई) और दीन की हकीकत पर रौशनी डालती है।

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सूरह बय्यिनह (Surah Al-Bayyinah) कुरान मजीद की 98वीं सूरह है। “अल-बय्यिनह” का मतलब है “खुली दलील” (The Clear Proof)। यह मदीना में नाज़िल हुई (मदनी सूरह) और इसमें 8 आयतें हैं।
इस सूरह में अल्लाह तआला ने बताया है कि नबी करीम (ﷺ) का आना ही सबसे बड़ी और खुली दलील है। इसमें यह भी बताया गया है कि इस्लाम का असल हुक्म सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करना, नमाज़ कायम करना और ज़कात देना है।
इस आर्टिकल में हम Surah Bayyinah in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह बय्यिनह की अहमियत (Importance of Surah Al-Bayyinah)
- खुली दलील: यह सूरह बताती है कि नबी (ﷺ) और कुरान का आना एक ऐसी खुली दलील है जिसके बाद किसी के पास कुफ्र पर कायम रहने का कोई बहाना नहीं बचता।
- दीन की हकीकत: यह सूरह दीन की बुनियाद को सिर्फ तीन चीज़ों में समेट देती है: शिर्क से पाक होकर सिर्फ अल्लाह की इबादत, नमाज़ और ज़कात।
- अहले किताब का ज़िक्र: इसमें अहले किताब (यहूदी और ईसाई) और मुशरिकों का ज़िक्र है जो नबी (ﷺ) के आने के बाद भी अपने पुराने दीन पर अड़े रहे।
Surah Bayyinah in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
लम यकुनिल-लज़ीना कफरू मिन अहलिल-किताबि वल-मुशरिकीना मुन्फक्कीना हत्ता तअ्तियहुमुल-बय्यिनह।
(अहले किताब और मुशरिकों में से जो लोग काफिर थे, वो (अपने कुफ्र से) बाज़ आने वाले नहीं थे जब तक कि उनके पास खुली दलील न आ जाती।)रसूलुम-मिनल्लाहि यत्लू सुहुफम्-मुतह-हरह।
((वो दलील) अल्लाह की तरफ से एक रसूल (मुहम्मद ﷺ) हैं जो पाक सहीफे (कुरान) पढ़कर सुनाते हैं।)फीहा कुतुबुन क़य्यिमह।
(जिनमें सीधी और मज़बूत बातें लिखी हैं।)व मा तफर्रक़ल-लज़ीना ऊतुल-किताबा इल्ला मिम-बअ्दि मा जा-अत्हुमुल-बय्यिनह।
(और अहले किताब में फूट नहीं पड़ी मगर इसके बाद कि उनके पास खुली दलील आ चुकी थी।)व मा उमिरू इल्ला लि-यअ्बुदुल्लाहा मुखलिसीना लहुद-दीना हुनफा-अ व युक़ीमुस-सलाता व युअ्तुज़-ज़काता व ज़ालिका दीनुल-क़य्यिमह।
(और उन्हें इसके सिवा कोई हुक्म नहीं दिया गया था कि वो अल्लाह की इबादत करें, दीन को उसी के लिए खालिस करके, बिल्कुल यकसू होकर, और नमाज़ कायम करें और ज़कात दें, और यही सीधा दीन है।)इन्नल-लज़ीना कफरू मिन अहलिल-किताबि वल-मुशरिकीना फी नारि जहन्नमा खालिदीना फीहा, उलाइका हुम शर्रुल-बरिय्यह।
(बेशक अहले किताब और मुशरिकों में से जिन लोगों ने कुफ्र किया, वो जहन्नम की आग में होंगे, हमेशा उसमें रहेंगे, यही लोग मखलूक में सबसे बुरे हैं।)इन्नल-लज़ीना आमनू व अमिलुस-सालिहाति उलाइका हुम खैरुल-बरिय्यह।
(बेशक जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए, वही लोग मखलूक में सबसे बेहतर हैं।)जज़ाउहुम इन्द रब्बिहिम जन्नातु अद्निन तजरी मिन तहतिहल-अन्हारु खालिदीना फीहा अबदा, रज़ियल्लाहु अन्हुम व रज़ू अन्ह, ज़ालिका लिमन खशिया रब्बाह।
(उनका बदला उनके रब के पास हमेशा रहने वाली जन्नतें हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, वो उनमें हमेशा-हमेशा रहेंगे, अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वो उससे राज़ी हुए, यह (इनाम) उसके लिए है जो अपने रब से डरा।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. बय्यिनह (Bayyinah) का क्या मतलब है?
“बय्यिनह” का मतलब है “खुली दलील” या “वाज़ेह निशानी”। इस सूरह में नबी (ﷺ) और कुरान को ही सबसे बड़ी दलील कहा गया है।
Q. यह सूरह मक्की है या मदनी?
यह एक मदनी सूरह है, जो हिजरत के बाद मदीना में नाज़िल हुई। इसमें अहले किताब (यहूदी और ईसाई) का ज़िक्र है, जिनसे मुसलमानों का सामना मदीना में हुआ था।
नतीजा (Conclusion)
सूरह बय्यिनह हमें सिखाती है कि दीन की असल रूह इखलास (Sincerity) है। यानी हर इबादत सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह को राज़ी करने के लिए हो। जो लोग इस सीधी राह पर चलेंगे, वही दुनिया और आखिरत में कामयाब होंगे और अल्लाह की रज़ा पाएंगे।
अल्लाह हमें इखलास के साथ इबादत करने की तौफीक दे। आमीन।





