Surah At-Tariq in Hindi: सूरह तारिक की फजीलत और तर्जुमा
Surah At-Tariq in Hindi: जानिए सूरह तारिक की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। इस सूरह में आसमान के रात में आने वाले तारे और इंसान की पैदाइश का ज़िक्र है।

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सूरह अत-तारिक (Surah At-Tariq) कुरान मजीद की 86वीं सूरह है। “तारिक” का मतलब है “रात को आने वाला” (The Night Comer), और यहाँ इससे मुराद एक चमकता हुआ सितारा है। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 17 आयतें हैं।
इस सूरह में अल्लाह तआला ने आसमान और रात के तारे की कसम खाकर बताया है कि हर इंसान पर एक निगराान (Guardian) मुकर्रर है। इसके बाद इंसान को अपनी पैदाइश पर गौर करने की दावत दी गई है कि वह कैसे एक मामूली पानी की बूंद से बना है। अगर अल्लाह उसे पहली बार पैदा कर सकता है, तो मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करना उसके लिए क्या मुश्किल है?
इस आर्टिकल में हम Surah At-Tariq in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।
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सूरह तारिक की फजीलत (Benefits of Surah At-Tariq)
हिफाजत का यकीन: यह सूरह हमें बताती है कि हम अकेले नहीं हैं। अल्लाह ने हर जान पर हिफाजत करने वाले फरिश्ते मुकर्रर किए हैं जो हमारे आमाल (कामों) को लिख रहे हैं।
आखिरत की तैयारी: इसमें बताया गया है कि कयामत के दिन सारे “राज़” (Secrets) खुल जाएंगे। जो बातें हम दुनिया से छुपाते हैं, वो सब अल्लाह के सामने ज़ाहिर हो जाएंगी।
इंसान की हकीकत: अल्लाह ने इंसान को याद दिलाया है कि उसका वजूद क्या है - सिर्फ एक उछलते हुए पानी की बूंद। तो फिर वह किस बात पर घमंड करता है?
कुरान की सच्चाई: आखिर में अल्लाह ने फरमाया कि यह कुरान कोई हंसी-मज़ाक नहीं है, बल्कि एक फैसलाकुन (Decisive) किताब है जो हक और बातिल में फर्क करती है।
Surah At-Tariq in Hindi (Transliteration & Translation)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
वस्समा-इ वत-तारिक़।
(कसम है आसमान की और रात को आने वाले की।)व मा अद्राका मत-तारिक़।
(और तुम्हें क्या मालूम कि वह रात को आने वाला क्या है?)अन-नज्मुस-साक़िब।
(वह चमकता हुआ तारा है।)इन कुल्लु नफ़्सिन लम्मा अलैहा हाफ़िज़।
(कोई जान ऐसी नहीं जिस पर कोई निगराान (हिफाजत करने वाला) न हो।)फ़ल-यन्ज़ुरिल-इन्सानु मिम्मा खुलिक़।
(तो इंसान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है।)खुलिक़ा मिम-मा-इन दाफ़िक़।
(वह एक उछलते हुए पानी से पैदा किया गया है।)यख़्रुजु मिम-बैनिस-सुल्बि वत-तरा-इब।
(जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच से निकलता है।)इन्नहू अला रज्-इही ल-क़ादिर।
(बेशक वह (अल्लाह) उसे दोबारा लौटाने पर ज़रूर क़ादिर है।)यौमा तुब्लस-सरा-इर।
(जिस दिन भेद (दिलों के राज़) जांचे जाएंगे।)फ़मा लहू मिन कुव्वतिंव-व ला नासिर।
(तो न उसके पास कोई खुद की ताकत होगी और न कोई मददगार।)वस्समा-इ ज़ातिर्-रज्अ।
(कसम है आसमान की जो बारिश बरसाता है।)वल-अर्ज़ि ज़ातिस-सद्अ।
(और ज़मीन की जो (पौधों के उगने से) फट जाती है।)इन्नहू ल-क़ौलुन फ़स्ल।
(बेशक यह (कुरान) दो-टूक फैसला करने वाली बात है।)व मा हुवा बिल-हज़्ल।
(और यह कोई हंसी-मज़ाक नहीं है।)इन्नहुम यकीदूना कैदा।
(बेशक वो (काफिर) एक चाल चल रहे हैं।)व अकीदु कैदा।
(और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ (उनकी चाल का तोड़)।)फ़-मह्-हिलिल-काफ़िरीना अम-हिलहुम रुवैदा।
(तो (ऐ नबी!) इन काफिरों को मोहलत दो, इन्हें थोड़ी देर छोड़ दो।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह तारिक का मतलब क्या है?
“तारिक” का मतलब है “रात को आने वाला”। अरब में मुसाफिर अक्सर रात को सफर करते थे और रात को आने वाले को तारिक कहते थे। यहाँ अल्लाह ने इससे मुराद “सितारा” लिया है जो रात के अंधेरे में चमकता है।
Q. 'नज्मुस-साक़िब' क्या है?
“नज्मुस-साक़िब” का मतलब है “छेद करने वाला तारा” या “बहुत तेज़ चमकने वाला तारा”। इसकी रोशनी इतनी तेज़ होती है जैसे अंधेरे को चीर रही हो।
Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
इस सूरह का असल पैगाम यह है कि अल्लाह हर चीज़ पर नज़र रखे हुए है। इंसान को अपनी मामूली शुरुआत (पानी की बूंद) को याद रखना चाहिए और यह यकीन रखना चाहिए कि अल्लाह उसे मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा और उसके छुपे हुए राज़ों का हिसाब लेगा।
नतीजा (Conclusion)
सूरह तारिक हमें अपनी औकात याद दिलाती है और अल्लाह की ताकत का अहसास कराती है। हम अक्सर अपनी ताकत और दौलत पर घमंड करते हैं, लेकिन हम बने किस चीज़ से हैं? एक मामूली बूंद से।
अल्लाह ने हमें पैदा किया है और वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा। उस दिन कोई सिफारिश या ताकत काम नहीं आएगी, सिर्फ हमारे नेक आमाल काम आएंगे।
अल्लाह हमें उस दिन की रुसवाई से बचाए जब सारे राज़ खुल जाएंगे। आमीन।





