Surah Ash-Shams in Hindi: सूरह शम्स की फजीलत और तर्जुमा
Surah Ash-Shams in Hindi: जानिए सूरह शम्स की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। इस सूरह में अल्लाह ने 11 कसमों के साथ इंसान की कामयाबी का राज़ बताया है।

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सूरह अश-शम्स (Surah Ash-Shams) कुरान मजीद की 91वीं सूरह है। “शम्स” का मतलब है “सूरज” (The Sun)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 15 आयतें हैं।
यह सूरह बहुत खास है क्योंकि इसमें अल्लाह तआला ने एक के बाद एक 11 चीज़ों की कसम खाई है - जो कुरान की किसी भी सूरह में सबसे ज़्यादा है। इतनी कसमें खाने के बाद अल्लाह ने एक बहुत बड़ी सच्चाई बताई है: इंसान की कामयाबी सिर्फ इस बात में है कि वह अपने दिल और रूह (Nafs) को गुनाहों से पाक रखे।
इस आर्टिकल में हम Surah Ash-Shams in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।
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सूरह शम्स की फजीलत (Benefits of Surah Ash-Shams)
दिल की सफाई (Tazkiyah): यह सूरह हमें सिखाती है कि असली कामयाबी दौलत या ताकत में नहीं, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करने और दिल को साफ़ रखने में है।
अल्लाह का डर: इसमें कौम-ए-समूद का किस्सा बयान किया गया है, जिससे हमें सबक मिलता है कि अल्लाह के हुक्म को मानने में ही भलाई है और नाफरमानी का अंजाम बहुत बुरा होता है।
सूरज और चाँद की अहमियत: अल्लाह ने सूरज, चाँद, दिन और रात की कसम खाकर हमें कायनात (Universe) की इन बड़ी निशानियों पर गौर करने की दावत दी है।
गुनाहों से बचना: यह सूरह हमें बताती है कि जो लोग गुनाहों में डूब जाते हैं और अपने जमीर (Conscience) को दबा देते हैं, वो दुनिया और आखिरत दोनों में नाकाम होते हैं।
Surah Ash-Shams in Hindi (Transliteration & Translation)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
वश-शम्सि व दुहाहा।
(कसम है सूरज की और उसकी धूप की।)वल-क़मरि इज़ा तलाहा।
(और चाँद की जब वह उसके पीछे निकले।)वन-नहारि इज़ा जल्लाहा।
(और दिन की जब वह उसे (दुनिया को) रोशन कर दे।)वल-लैलि इज़ा यग़्शाहा।
(और रात की जब वह उसे ढक ले।)वस-समा-इ व मा बनाहा।
(और आसमान की और जिसने उसे बनाया।)वल-अर्ज़ि व मा तहाहा।
(और ज़मीन की और जिसने उसे बिछाया।)व नफ़्सिन व मा सव्वाहा।
(और जान (नफ़्स) की और जिसने उसे ठीक-ठाक बनाया।)फ़-अल्हमहा फ़ुजू-रहा व तक़्वाहा।
(फिर उसे उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (अच्छाई) की समझ दी।)क़द अफ़्लहा मन ज़क्काहा।
(बेशक वह कामयाब हो गया जिसने अपने नफ़्स (दिल) को पाक कर लिया।)व क़द ख़ाबा मन दस्साहा।
(और वह नाकाम हुआ जिसने उसे (गुनाहों में) दबा दिया।)कज़्ज़बत समूदु बि-तग़्वाहा।
(समूद (क़ौम) ने अपनी सरकशी की वजह से झुठलाया।)इज़िम-बअसा अश्क़ाहा।
(जब उनका सबसे बड़ा बदबख़्त (बदनसीब) खड़ा हुआ।)फ़-क़ाला लहुम रसूलुल्लाहि नाक़तल्लाहि व सुक़्याहा।
(तो उनसे अल्लाह के रसूल (सालेह अलैहिस्सलाम) ने कहा: “अल्लाह की ऊँटनी और उसके पानी पीने की बारी का ख्याल रखो।”)फ़-कज़्ज़बूहू फ़-अक़रूहा फ़-दमदमा अलैहिम रब्बुहुम बि-ज़म्बिकिम फ़-सव्वाहा।
(तो उन्होंने उसे झुठलाया और ऊँटनी की कूंचे काट दीं (उसे मार डाला), तो उनके रब ने उनके गुनाह की वजह से उन पर तबाही डाल दी और सबको बराबर कर दिया।)व ला यख़ाफ़ु उक़्बाहा।
(और उसे (अल्लाह को) इसके अंजाम का कोई डर नहीं।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह शम्स का मतलब क्या है?
“शम्स” अरबी शब्द है जिसका मतलब “सूरज” होता है। इस सूरह की शुरुआत सूरज की कसम से होती है, इसलिए इसका नाम सूरह शम्स है।
Q. इस सूरह में अल्लाह ने कितनी कसमें खाई हैं?
इस सूरह में अल्लाह ने कुल 11 कसमें खाई हैं (सूरज, धूप, चाँद, दिन, रात, आसमान, ज़मीन, नफ़्स वगैरह)। यह कुरान की किसी भी सूरह में सबसे ज़्यादा कसमें हैं, जो यह बताती हैं कि आगे कही गई बात कितनी अहम है।
Q. नफ़्स को पाक करने (Tazkiyah) का क्या मतलब है?
नफ़्स को पाक करने का मतलब है अपने दिल को बुरे ख्यालों, लालच, जलन और गुनाहों से साफ़ करना और अल्लाह की ताबेदारी करना। यही कामयाबी की चाबी है।
Q. कौम-ए-समूद कौन थी?
कौम-ए-समूद एक बहुत ताकतवर कौम थी। अल्लाह ने उनकी तरफ हज़रत सालेह (अ.स.) को नबी बनाकर भेजा था। उन्होंने अल्लाह की निशानी (ऊँटनी) को मार डाला, जिसकी वजह से उन पर अल्लाह का अज़ाब आया और वो तबाह हो गए।
नतीजा (Conclusion)
सूरह शम्स हमें ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक देती है: इंसान की जीत और हार उसके दिल की हालत पर निर्भर है।
अल्लाह ने हमें अच्छाई और बुराई दोनों की समझ दी है। अब यह हमारे हाथ में है कि हम अपने नफ़्स को गुनाहों की गंदगी से बचाकर जन्नत के हकदार बनते हैं, या उसे बुराइयों में दबाकर अपना नुकसान करते हैं।
हमें चाहिए कि हम अल्लाह से डरें, अपने गुनाहों की माफी मांगें और अपने दिल को साफ़ रखने की कोशिश करें।
अल्लाह हमें अपने नफ़्स को पाक रखने और सही रास्ते पर चलने की तौफीक दे। आमीन।





