Surah Anfal in Hindi: सूरह अनफ़ाल की फजीलत और पहली 50 आयतें
Surah Anfal in Hindi: जानिए सूरह अनफ़ाल की फजीलत और पहली 50 आयतों का हिंदी तर्जुमा। यह सूरह बद्र की जंग और माले गनीमत के मसाइल पर रौशनी डालती है।

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सूरह अनफ़ाल (Surah Al-Anfal) कुरान मजीद की आठवीं सूरह है। “अनफ़ाल” का मतलब है “माले गनीमत” (The Spoils of War)। यह सूरह मदीना में नाज़िल हुई (मदनी सूरह) और इसमें 75 आयतें हैं।
यह सूरह इस्लाम की पहली और सबसे अहम जंग, “जंग-ए-बद्र” (Battle of Badr) के बाद नाज़िल हुई। इसमें जंग से हासिल हुए माल की तकसीम, अल्लाह पर तवक्कुल, और मोमिनों की निशानियों का ज़िक्र है।
इस आर्टिकल में हम Surah Anfal in Hindi, इसकी अहमियत और पहली 50 आयतों का तर्जुमा जानेंगे।
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सूरह अनफ़ाल की अहमियत (Importance of Surah Al-Anfal)
- जंग-ए-बद्र का ज़िक्र: यह सूरह बद्र की जंग के वाकयात को बयान करती है, जहाँ 313 मुसलमानों ने 1000 काफिरों पर अल्लाह की मदद से फतह हासिल की।
- माले गनीमत के कानून: इसमें पहली बार जंग में मिले माल (माले गनीमत) की तकसीम के कानून बताए गए।
- ईमान की निशानियाँ: यह सूरह सच्चे मोमिनों की सिफात (गुण) बयान करती है, जैसे अल्लाह का ज़िक्र सुनकर उनके दिल कांप उठते हैं और उनका ईमान बढ़ जाता है।
Surah Anfal Ayat 1-50 in Hindi
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
यस-अलू-नका अनिल-अन्फाल, कुलिल-अन्फालु लिल्लाहि वर-रसूल, फत्तकुल्लाहा व अस्लिहू ज़ाता बैनिकुम, व अतीउल्लाहा व रसूलहू इन कुन्तुम मुअ्मिनीन।
(आपसे माले गनीमत के बारे में पूछते हैं। कह दीजिए: माले गनीमत अल्लाह और रसूल के लिए हैं, तो अल्लाह से डरो और अपने आपसी ताल्लुकात दुरुस्त करो, और अल्लाह और उसके रसूल की तात करो अगर तुम मोमिन हो।)इन्नमल मुअ्मिनूनल लज़ीना इज़ा ज़ुकिरल्लाहु वजिलत कुलूबुहुम व इज़ा तुलियत अलैहिम आयातुहू ज़ादत्हुम ईमानंव व अला रब्बिहिम य-त-वक्कनून।
(मोमिन तो बस वो हैं कि जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल कांप उठते हैं और जब उन पर उसकी आयतें पढ़ी जाती हैं तो उनका ईमान बढ़ जाता है और वो अपने रब पर ही भरोसा रखते हैं।)अल्लज़ीना युक़ीमूनस सलाता व मिम्मा रज़क़नाहुम युन्फ़िक़ून।
(जो नमाज़ कायम करते हैं और जो हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं।)उलाइका हुमुल मुअ्मिनूना हक़्क़ा, लहुम दरजातुन इन्द रब्बिहिम व मगफिरतुंव व रिज़्कुन करीम।
(यही सच्चे मोमिन हैं, उनके लिए उनके रब के पास दरजात हैं और बख्शिश और इज़्ज़त की रोज़ी है।)कमा अख़-रजका रब्बुका मिम बैतिका बिल-हक़्क़ि व इन्ना फरीक़म मिनल मुअ्मिनीना ल-कारिहून।
(जैसे आपके रब ने आपको आपके घर से हक़ के साथ निकाला और बेशक मोमिनों का एक गिरोह नापसंद कर रहा था।)युजादिलूनका फिल-हक़्क़ि बअ्-दमा त-बय्यना क-अन्नमा युसाकूना इलल मौति व हुम यन्ज़ुरून।
(वो आपसे हक़ के बारे में झगड़ते थे उसके वाज़ेह हो जाने के बाद, गोया वो मौत की तरफ हांके जा रहे हैं और वो देख रहे हैं।)व इज़ य-इ-दुकुमुल्लाहु इहदत ता-इ-फतैनि अन्नहा लकुम व तवद्दूना अन्ना गैर ज़ातिश शौ-कति तकूनु लकुम व युरीदुल्लाहु अंय युहिक़्क़ल हक़्क़ा बि-कलिमातिही व यक़-त-अ दाबिरल काफ़िरीन।
(और जब अल्लाह तुमसे दो गिरोहों में से एक का वादा कर रहा था कि वो तुम्हारे लिए है और तुम चाहते थे कि गैर-हथियारबंद (काफिला) तुम्हारे हाथ लगे और अल्लाह चाहता था कि अपने कलिमात से हक़ को साबित कर दे और काफिरों की जड़ काट दे।)लि-युहिक़्क़ल हक़्क़ा व युब्तिलल बातिला व लौ करिहल मुजरिमून।
(ताकि वो हक़ को हक़ साबित करे और बातिल को बातिल, चाहे मुजरिमों को कितना ही नागवार हो।)इज़ तस्तगीसूना रब्बकुम फस्तजाबा लकुम अन्नी मुमिद्दुकुम बि-अल्फिम मिनल मलाइकति मुरदिफीन।
(जब तुम अपने रब से फरियाद कर रहे थे तो उसने तुम्हारी सुन ली (और फरमाया) कि मैं एक हज़ार फरिश्तों से तुम्हारी मदद करूंगा जो एक के बाद एक आएंगे।)व मा ज-अ-लहुल्लाहु इल्ला बुशरा व लि-तत्-म-इन्ना बिही कुलूबुकुम, व मन नसरु इल्ला मिन इन्दिल्लाह, इन्नल्लाहा अज़ीज़ुन हकीम।
(और अल्लाह ने इसे नहीं बनाया मगर खुशखबरी और ताकि तुम्हारे दिल इससे मुतमइन हो जाएं, और मदद तो सिर्फ अल्लाह के पास से है, बेशक अल्लाह ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।)इज़ युगश्शीकुमुन नुआसा अ-म-नतम मिन्हु व युनज़्ज़िलु अलैकुम मिनस समा-इ मा-अल् लि-युतह्हिरकुम बिही व युज़हिबा अन्कुम रिज्ज़श शैतानि व लि-यर्बिता अला कुलूबिकुम व युसब्बित बिहिल अक़दाम।
(जब वो अपनी तरफ से तसल्ली के लिए तुम पर ऊंघ तारी कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरसा रहा था ताकि तुम्हें उससे पाक करे और तुमसे शैतान की गंदगी दूर करे और तुम्हारे दिलों को मज़बूत करे और उससे तुम्हारे कदम जमा दे।)इज़ यूही रब्बुका इलल मलाइकति अन्नी म-अकुम फ-सब्बितुल लज़ीना आमनू, स-उल्क़ी फी कुलूबिल लज़ीना कफरुर् रुअ्बा फज़रिबू फौक़ल अअ्नाक़ि वज़रिबू मिन्हुम कुल्ला बनाम।
(जब आपका रब फरिश्तों की तरफ वही कर रहा था कि मैं तुम्हारे साथ हूँ, तो ईमान वालों को साबित-कदम रखो, मैं जल्द ही काफिरों के दिलों में रौब डाल दूंगा, तो (उनकी) गर्दनों के ऊपर मारो और उनके हर पोर-पोर पर मारो।)ज़ालिका बि-अन्नहुम शाक़्क़ुल्लाहा व रसूलह, व मंय युशाक़िक़िल्लाहा व रसूलहू फ-इन्नल्लाहा शदीदुल इक़ाब।
(यह इसलिए कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल की मुखालफत की, और जो अल्लाह और उसके रसूल की मुखालफत करता है तो बेशक अल्लाह सख्त अज़ाब देने वाला है।)ज़ालिकुम फ-ज़ूकूहु व अन्ना लिल-काफ़िरीना अज़ाबन नार।
(यह (अज़ाब) है, तो इसे चखो, और (जान लो कि) काफिरों के लिए आग का अज़ाब है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू इज़ा लक़ीतुमुल लज़ीना कफरू ज़हफन फला तुवल्लूहुमुल अदबार।
(ऐ ईमान वालो! जब तुम काफिरों से लड़ाई में भिड़ो तो उनसे पीठ न फेरना।)व मंय युवलिहिम यौमइज़िन दुबुरहू इल्ला मु-त-हर्रिफल् लि-क़ितालिन औ मु-त-हय्यिज़न इला फि-अतिन फक़द बा-अ बि-ग-ज़बिम मिनल्लाहि व मअ्वाहू जहन्नम, व बिअ्सल मसीर।
(और जो उस दिन उनसे अपनी पीठ फेरेगा, सिवाय इसके कि लड़ाई के लिए एक तरफ हटे या किसी (और) जमात से जा मिले, तो वो अल्लाह के गज़ब के साथ लौटा और उसका ठिकाना जहन्नम है, और वो बहुत बुरा ठिकाना है।)फ-लम तक़्तुलूहुम व लाकिन्नल्लाहा क़-त-लहुम, व मा रमैता इज़ रमैता व लाकिन्नल्लाहा रमा, व लि-युब्लियल मुअ्मिनीना मिन्हु बला-अन हसना, इन्नल्लाहा समीउन अलीम।
(तो तुमने उन्हें कत्ल नहीं किया बल्कि अल्लाह ने उन्हें कत्ल किया, और (ऐ नबी!) जब आपने (कंकड़) फेंके तो आपने नहीं फेंके बल्कि अल्लाह ने फेंके, और ताकि वो मोमिनों को अपनी तरफ से एक अच्छी आज़माइश में आज़माए, बेशक अल्लाह सुनने वाला, जानने वाला है।)ज़ालिकुम व अन्नल्लाहा मुहिनु कैदिल काफ़िरीन।
(यह (हुआ), और (जान लो कि) अल्लाह काफिरों की चाल को कमज़ोर करने वाला है।)इन तस्तफ्तिहू फक़द जा-अकुमूल फत्ह, व इन तन्तहू फ-हुवा खैरुल लकुम, व इन तऊदू नउद, व लन तुगनिया अन्कुम फि-अतुकुम शै-अंव व लौ कसुरत व अन्नल्लाहा म-अल मुअ्मिनीन।
(अगर तुम फैसला चाहते थे तो तुम्हारे पास फैसला आ चुका, और अगर तुम बाज़ आ जाओ तो यह तुम्हारे लिए बेहतर है, और अगर तुम फिर (लड़ोगे) तो हम भी फिर (मदद करेंगे), और तुम्हारी जमात तुम्हारे कुछ काम न आएगी चाहे कितनी ही ज़्यादा हो, और (जान लो कि) अल्लाह मोमिनों के साथ है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू अतीउल्लाहा व रसूलहू वला तवल्लौ अन्हु व अन्तुम तस्मऊन।
(ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल की तात करो और उससे मुँह न फेरो जबकि तुम सुन रहे हो।)वला तकूनू कल्लज़ीना क़ालू समिअ्ना व हुम ला यस्मऊन।
(और उन लोगों की तरह न हो जाओ जिन्होंने कहा: हमने सुना, हालांकि वो नहीं सुनते।)इन्ना शर्रद दवाब्बि इन्दल्लाहिस सुम्मुल बुक्मुल लज़ीना ला यअ्क़िलून।
(बेशक अल्लाह के नज़दीक सबसे बुरे जानवर वो बहरे, गूंगे हैं जो अक्ल नहीं रखते।)व लौ अलिमल्लाहु फीहिम खैरल् ल-अस्म-अहुम, व लौ अस्म-अहुम ल-तवल्लौ व हुम मुअ्रिज़ून।
(और अगर अल्लाह उनमें कोई भलाई जानता तो उन्हें ज़रूर सुनाता, और अगर वो उन्हें सुना भी देता तो वो ज़रूर मुँह फेर लेते और वो बेरुखी करने वाले हैं।)या अय्युहल लज़ीना आमनुस्तजीबू लिल्लाहि व लिर-रसूलि इज़ा दआकुम लिमा युहयीकुम, वअ्लमू अन्नल्लाहा यहूलु बैनल मर-इ व क़ल्बिही व अन्नहू इलैहि तुहशरून।
(ऐ ईमान वालो! अल्लाह और रसूल की पुकार पर लब्बैक कहो जब वो तुम्हें उस चीज़ की तरफ बुलाएं जो तुम्हें ज़िन्दगी देती है, और जान लो कि अल्लाह आदमी और उसके दिल के दरमियान हाइल (आड़) हो जाता है और यह कि तुम उसी की तरफ जमा किए जाओगे।)वत्तकू फितनतल ला तुसीबन्नल लज़ीना ज़लमू मिन्कुम ख़ास्सह, वअ्लमू अन्नल्लाहा शदीदुल इक़ाब।
(और उस फितने से डरो जो तुममें से सिर्फ ज़ालिमों पर ही नहीं पड़ेगा, और जान लो कि अल्लाह सख्त अज़ाब देने वाला है।)वज़कुरु इज़ अन्तुम क़लीलूम मुस्तज़-अफूना फिल अर्ज़ि तख़ाफूना अंय य-त-खत्त-फकुमुन नासु फ-आवाकुम व अय्य-दकुम बि-नस्रिही व र-ज़-क़कुम मिनत तय्यिबाति ल-अल्लकुम तश्कुरून।
(और याद करो जब तुम थोड़े थे, ज़मीन में कमज़ोर समझे जाते थे, डरते थे कि लोग तुम्हें उचक न ले जाएं, तो उसने तुम्हें ठिकाना दिया और अपनी मदद से तुम्हें कुव्वत दी और तुम्हें पाकीज़ा चीज़ों से रोज़ी दी ताकि तुम शुक्र करो।)या अय्युहल लज़ीना आमनू ला तख़ूनुल्लाहा वर-रसूला व तख़ूनू अमानातिकुम व अन्तुम तअ्लमून।
(ऐ ईमान वालो! अल्लाह और रसूल से खयानत न करो और अपनी अमानतों में खयानत न करो जबकि तुम जानते हो।)वअ्लमू अन्नमा अमवालुकुम व औलादुकुम फितनतुंव व अन्नल्लाहा इन्दहू अजरुन अज़ीम।
(और जान लो कि तुम्हारे माल और तुम्हारी औलाद एक आज़माइश हैं और यह कि अल्लाह के पास बड़ा अज्र है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू इन तत्तकुल्लाहा यज-अल् लकुम फुरक़ानंव व युकफ्फिर अन्कुम सय्यि-आतिकुम व यगफिर लकुम, वल्लाहु ज़ुल-फज़लिल अज़ीम।
(ऐ ईमान वालो! अगर तुम अल्लाह से डरोगे तो वो तुम्हारे लिए (हक़ और बातिल में) फर्क करने वाली चीज़ पैदा कर देगा और तुम्हारी बुराइयां तुमसे दूर कर देगा और तुम्हें बख्श देगा, और अल्लाह बड़े फज़ल वाला है।)व इज़ यम्कुरु बिकल्लज़ीना कफरू लि-युस्बितूका औ यक़्तुलूका औ युख्रिजूक, व यम्कुरूना व यम्कुरुल्लाह, वल्लाहु खैरुल माकिरीन।
(और जब काफिर आपके खिलाफ साज़िश कर रहे थे कि आपको कैद कर दें या आपको कत्ल कर दें या आपको निकाल दें, और वो साज़िश कर रहे थे और अल्लाह भी तदबीर कर रहा था, और अल्लाह सबसे बेहतर तदबीर करने वाला है।)व इज़ा तुत्ला अलैहिम आयातुना क़ालू क़द समिअ्ना लौ नशाउ ल-कुल्ना मिस्ला हाज़ा इन हाज़ा इल्ला असातीरुल अव्वलीन।
(और जब उन पर हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो कहते हैं: हमने सुन लिया, अगर हम चाहें तो हम भी ऐसा ही कह सकते हैं, यह तो बस पहले लोगों की कहानियां हैं।)व इज़ क़ालुल्लाहुम्मा इन काना हाज़ा हुवल हक़्क़ा मिन इन्दिका फ-अम्तिर अलैना हिजारतम मिनस समा-इ अविअ्तिना बि-अज़ाबिन अलीम।
(और जब उन्होंने कहा: ऐ अल्लाह! अगर यह तेरी तरफ से हक़ है तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा या हम पर दर्दनाक अज़ाब ले आ।)व मा कानल्लाहु लि-युअज़्ज़िबहुम व अन्ता फीहिम, व मा कानल्लाहु मुअज़्ज़िबहुम व हुम यस्तगफिरून।
(और अल्लाह ऐसा नहीं कि उन्हें अज़ाब दे जबकि आप उनमें मौजूद हों, और अल्लाह उन्हें अज़ाब देने वाला नहीं जबकि वो माफी मांग रहे हों।)व मा लहुम अल्ला युअज़्ज़िबहुमुल्लाहु व हुम यसुद्दूना अनिल मस्जिदिल हरामि व मा कानू औलिया-अह, इन औलियाउहू इल्लल मुत्तक़ूना व लाकिन्ना अकसरहुम ला यअ्लमून।
(और उनके लिए क्या (वजह) है कि अल्लाह उन्हें अज़ाब न दे जबकि वो मस्जिदे हराम से रोकते हैं और वो उसके मुतवल्ली (संरक्षक) नहीं हैं, उसके मुतवल्ली तो सिर्फ परहेज़गार हैं लेकिन उनमें से अक्सर नहीं जानते।)व मा काना सलातुहुम इन्दल बैति इल्ला मुका-अंव व तस्दियह, फ-ज़ूक़ुल अज़ाबा बिमा कुन्तुम तकफुरून।
(और बैतुल्लाह के पास उनकी नमाज़ सीटी बजाने और तालियां पीटने के सिवा कुछ न थी, तो अज़ाब चखो उस कुफ्र की वजह से जो तुम करते थे।)इन्नल लज़ीना कफरू युन्फ़िक़ूना अमवालहुम लि-यसुद्दू अन सबीलिल्लाह, फ-स-युन्फ़िक़ूनहा सुम्मा तकूनु अलैहिम हसरतन सुम्मा युगलबून, वल्लज़ीना कफरू इला जहन्नमा युहशरून।
(बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया वो अपने माल खर्च करते हैं ताकि अल्लाह के रास्ते से रोकें, तो वो उन्हें खर्च करते रहेंगे फिर वो उन पर हसरत (पछतावा) बन जाएंगे फिर वो मगलूब होंगे, और जिन लोगों ने कुफ्र किया वो जहन्नम की तरफ जमा किए जाएंगे।)लि-यमीज़ल्लाहुल ख़बीसा मिनत तय्यिबि व यज-अलल ख़बीसा बअ्ज़हू अला बअ्ज़िन फ-यर्कुमहू जमीअन फ-यज-अ-लहू फी जहन्नम, उलाइका हुमुल खासिरून।
(ताकि अल्लाह नापाक को पाक से अलग कर दे और नापाक को एक-दूसरे पर रख दे, फिर उन सबको ढेर कर दे, फिर उसे जहन्नम में डाल दे, यही लोग घाटा उठाने वाले हैं।)क़ुल लिल्लज़ीना कफरू इंय यन्तहू युगफर लहुम मा क़द सलफा व इंय यऊदू फक़द मज़त सुन्नुतुल अव्वलीन।
(काफिरों से कह दीजिए: अगर वो बाज़ आ जाएं तो जो गुज़र चुका वो उन्हें माफ़ कर दिया जाएगा, और अगर वो फिर वही करेंगे तो पहले लोगों का तरीका गुज़र चुका है।)व क़ातिलूहुम हत्ता ला तकूना फितनतुंव व यकूनद दीनु कुल्लूहु लिल्लाह, फ-इनिन्तहौ फ-इन्नल्लाहा बिमा यअ्मलूना बसीर।
(और उनसे लड़ो यहाँ तक कि फितना बाकी न रहे और दीन पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए, फिर अगर वो बाज़ आ जाएं तो बेशक अल्लाह उसे देख रहा है जो वो करते हैं।)व इन तवल्लौ फअ्लमू अन्नल्लाहा मौलाकुम, निअ्मल मौला व निअ्मन नसीर।
(और अगर वो मुँह फेरें तो जान लो कि अल्लाह तुम्हारा मौला (मालिक) है, क्या ही अच्छा मौला और क्या ही अच्छा मददगार।)वअ्लमू अन्नमा गनिम्तुम मिन शैइन फ-अन्ना लिल्लाहि खुमुसहू व लिर-रसूलि व लिज़िल क़ुर्बा वल यतामा वल मसाकीनि वब्निस सबीलि इन कुन्तुम आमन्तुम बिल्लाहि व मा अन्ज़ल्ना अला अब्दिना यौमल फुरक़ानि यौमल् तक़ल जमआन, वल्लाहु अला कुल्लि शैइन क़दीर।
(और जान लो कि जो कुछ तुम माले गनीमत में से हासिल करो तो उसका पांचवां हिस्सा अल्लाह के लिए और रसूल के लिए और रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनों और मुसाफिर के लिए है, अगर तुम अल्लाह पर और उस पर ईमान लाए हो जो हमने अपने बंदे पर फैसले के दिन उतारा, जिस दिन दो जमातें भिड़ी थीं, और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है।)इज़ अन्तुम बिल-उद्वतिद दुन्या व हुम बिल-उद्वतिल क़ुस्वा वर्-रक्बु अस्फ़ला मिन्कुम, व लौ तवाअत्तुम लख्-तलफ्तुम फिल मीआद, व लाकिल लि-यक़्ज़ियल्लाहु अमरन काना मफऊलल लि-यहलिका मन हलका अम बय्यिनतिंव व यहया मन हय्या अम बय्यिनह, व इन्नल्लाहा ल-समीउन अलीम।
(जब तुम (वादी के) करीबी किनारे पर थे और वो दूर के किनारे पर थे और काफिला तुमसे नीचे था, और अगर तुम आपस में वादा करते तो ज़रूर वादे में इख्तिलाफ करते, लेकिन (ये इसलिए हुआ) ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे जो होकर रहना था, ताकि जो हलाक हो वो दलील के साथ हलाक हो और जो ज़िंदा रहे वो दलील के साथ ज़िंदा रहे, और बेशक अल्लाह ज़रूर सुनने वाला, जानने वाला है।)इज़ युरीकहुमुल्लाहु फी मनामिका क़लीलंव व लौ अरा-कहुम कसीरल ल-फशिल्तुम व ल-तना-ज़अ्तुम फिल अमरि व लाकिन्नल्लाहा सल्लम, इन्नहू अलीमुम बि-ज़ातिस सुदूर।
(जब अल्लाह आपको आपके ख्वाब में उन्हें थोड़ा दिखा रहा था, और अगर वो उन्हें ज़्यादा दिखाता तो तुम ज़रूर बुज़दिली दिखाते और मामले में झगड़ते, लेकिन अल्लाह ने बचा लिया, बेशक वो सीनों की बातों को जानने वाला है।)व इज़ युरीकुमूहुम इज़िल्-तक़ैतुम फी अअ्युनिकुम क़लीलंव व युक़ल्लिलुकुम फी अअ्युनिहिम लि-यक़्ज़ियल्लाहु अमरन काना मफऊला, व इलल्लाहि तुरजउल उमूर।
(और जब उसने तुम्हें उन्हें दिखाया जब तुम भिड़े, तुम्हारी नज़रों में थोड़ा करके और तुम्हें उनकी नज़रों में थोड़ा करके दिखाया ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे जो होकर रहना था, और सब मामले अल्लाह ही की तरफ लौटाए जाते हैं।)या अय्युहल लज़ीना आमनू इज़ा लक़ीतुम फि-अतन फस्बुतू वज़कुरुल्लाहा कसीरल ल-अल्लकुम तुफ़लिहून।
(ऐ ईमान वालो! जब तुम किसी जमात से भिड़ो तो साबित-कदम रहो और अल्लाह को कसरत से याद करो ताकि तुम कामयाब हो जाओ।)व अतीउल्लाहा व रसूलहू वला तना-ज़ऊ फ-तफ़शलू व तज़हबा रीहुकुम वसबिरू, इन्नल्लाहा म-अस साबिरीन।
(और अल्लाह और उसके रसूल की तात करो और आपस में झगड़ा न करो वरना तुम बुज़दिल हो जाओगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी, और सब्र करो, बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।)वला तकूनू कल्लज़ीना खरजू मिन दियारिहिम ब-त-रंव व रिआ-अन नासि व यसुद्दूना अन सबीलिल्लाह, वल्लाहु बिमा यअ्मलूना मुहीत।
(और उन लोगों की तरह न हो जाओ जो अपने घरों से इतराते हुए और लोगों को दिखाते हुए निकले और अल्लाह के रास्ते से रोकते हैं, और अल्लाह उसे घेरे हुए है जो वो करते हैं।)व इज़ ज़य्यना लहुमुश शैतानु अअ्मालहुम व क़ाला ला गालिबा लकुमुल यौमा मिनन नासि व इन्नी जारुल लकुम, फ-लम्मा तरा-अतिल फि-अतानि नकसा अला अक़िबैहि व क़ाला इन्नी बरीउम मिन्कुम इन्नी अरा मा ला तरौना इन्नी अख़ाफुल्लाह, वल्लाहु शदीदुल इक़ाब।
(और जब शैतान ने उनके लिए उनके आमाल खुश-नुमा बना दिए और कहा: आज लोगों में से कोई तुम पर गालिब आने वाला नहीं और मैं तुम्हारा हिमायती हूँ, फिर जब दोनों जमातें आमने-सामने हुईं तो वो अपनी एड़ियों के बल पीछे हट गया और कहा: बेशक मैं तुमसे बरी हूँ, मैं वो देख रहा हूँ जो तुम नहीं देखते, मैं अल्लाह से डरता हूँ, और अल्लाह सख्त अज़ाब देने वाला है।)इज़ यकूलुल मुनाफ़िक़ूना वल्लज़ीना फी कुलूबिहिम मरदुन गर्रा हा-उलाइ दीनुहुम, व मंय य-त-वक्कल अलल्लाहि फ-इन्नल्लाहा अज़ीज़ुन हकीम।
(जब मुनाफिक और वो लोग जिनके दिलों में बीमारी है कह रहे थे: इन लोगों को इनके दीन ने धोखे में डाल दिया है। और जो अल्लाह पर भरोसा करे तो बेशक अल्लाह ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।)व लौ तरा इज़ य-त-वफ्फल लज़ीना कफरुल मलाइकतु यज़रिबूना वुजूहहुम व अदबारहुम व ज़ूकू अज़ाबल हरीक़।
(और अगर आप देखें जब फरिश्ते काफिरों की जान निकालते हैं, उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारते हुए (और कहते हैं): जलने का अज़ाब चखो।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह अनफ़ाल कब नाज़िल हुई?
Q. अनफ़ाल (Anfal) का क्या मतलब है?
अनफ़ाल का मतलब है “माले गनीमत” यानी जंग में दुश्मन से हासिल होने वाला माल।
Q. सूरह अनफ़ाल का खास मौज़ू (Topic) क्या है?
इस सूरह का मुख्य विषय जंग-ए-बद्र, माले गनीमत के अहकाम, अल्लाह पर भरोसा और मोमिनों की सिफात हैं।
नतीजा (Conclusion)
सूरह अनफ़ाल हमें सिखाती है कि कामयाबी तादाद से नहीं, बल्कि अल्लाह पर यकीन और उसकी मदद से मिलती है। यह सूरह ईमान वालों के दिल में अल्लाह पर तवक्कुल को मज़बूत करती है।
अल्लाह हमें कुरान से सबक हासिल करने और उस पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन।





