·
Iffat Zia
· Quran · 14 min read

Surah Anam in Hindi: सूरह अनआम की फजीलत और पहली 50 आयतें

Surah Anam in Hindi: जानिए सूरह अनआम की फजीलत और पहली 50 आयतों का हिंदी तर्जुमा। यह मक्की सूरह तौहीद और रिसालत पर जोर देती है।

Surah Anam in Hindi: सूरह अनआम की फजीलत और पहली 50 आयतें

Table of Contents

सूरह अनआम (Surah Al-An’am) कुरान मजीद की छठी सूरह है। “अनआम” का मतलब है “मवेशी” (Cattle)। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 165 आयतें हैं।

यह सूरह इस्लाम के बुनियादी अकीदों, खास तौर पर तौहीद (एकेश्वरवाद), रिसालत और आखिरत पर जोर देती है। इसमें शिर्क (बहुदेववाद) का सख्ती से रद्द किया गया है।

इस आर्टिकल में हम Surah Anam in Hindi, इसकी फजीलत और पहली 50 आयतों का तर्जुमा जानेंगे।

ये भी पढ़े: Surah Maidah in Hindi | सूरह माइदा का तर्जुमा

सूरह अनआम की फजीलत (Benefits of Surah Al-An’am)

  1. एक साथ नुज़ूल: हदीस में आता है कि यह पूरी सूरह एक ही बार में नाज़िल हुई और इसके साथ 70,000 फरिश्ते थे जो अल्लाह की तस्बीह बयान कर रहे थे।
  2. शिर्क से हिफाज़त: यह सूरह शिर्क की जड़ों को काटती है और अल्लाह की वहदानियत (एक होने) को दलीलों के साथ साबित करती है।
  3. दुआ की कुबूलियत: बुजुर्गों का कहना है कि अगर कोई मुश्किल पेश आए तो इस सूरह की तिलावत करके दुआ मांगने से अल्लाह मुश्किल आसान फरमाता है।

Surah Anam Ayat 1-50 in Hindi

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. अल्हम्दु लिल्लाहिल लज़ी ख़लक़स समावाति वल अर्ज़ा व ज-अ-लज़ ज़ुलुमाति वन-नूर, सुम्मल लज़ीना कफरू बि-रब्बिहिम यअ्दिलून।
    (सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया और अंधेरे और उजाले बनाए, फिर भी काफिर (दूसरों को) अपने रब के बराबर ठहराते हैं।)

  2. हुवल लज़ी ख़लक़कुम मिन तीनिन सुम्मा क़ज़ा अजला, व अजलुम मुसम्मन इन्दहू सुम्मा अन्तुम तमतरून।
    (वही है जिसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया, फिर एक मुद्दत (मौत की) मुकर्रर की, और एक मुकर्रर मुद्दत (कयामत की) उसके पास है, फिर भी तुम शक करते हो।)

  3. व हुवल्लाहु फिस समावाति व फिल अर्ज़, यअ्लमु सिर्रकुम व जह-रकुम व यअ्लमु मा तकसिबून।
    (और वही अल्लाह है आसमानों में और ज़मीन में, वो तुम्हारे छुपे और खुले को जानता है और जो तुम करते हो उसे भी जानता है।)

  4. व मा तातीहिम मिन आयतिम मिन आयाति रब्बिहिम इल्ला कानू अनहा मुअरिजिन।
    (और उनके पास उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी नहीं आती मगर वो उससे मुँह फेर लेते हैं।)

  5. फक़द कज़्ज़बू बिल हक़्क़ि लम्मा जा-अहुम, फ-सौफा यअ्तीहिम अम्बाउ मा कानू बिही यस्तहज़िऊन।
    (तो उन्होंने हक़ को झुठला दिया जब वो उनके पास आया, तो अब जल्द ही उनके पास उस चीज़ की खबरें आ जाएंगी जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे।)

  6. अलम यरौ कम अहलकना मिन क़ब्लिहिम मिन क़र्निम मक्कन्नाहुम फिल अर्ज़ि मा लम नुमक्किल लकुम व अर्सल्नस समा-अ अलैहिम मिदरारंव व जअल्नल अनहारा तजरी मिन तहतिहिम फ-अहलकनाहुम बि-ज़ुनूबिहिम व अनशअना मिम बादिहिम क़र्नन आख़िरीन।
    (क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने उनसे पहले कितनी ही कौमों को हलाक कर दिया जिन्हें हमने ज़मीन में वो जमाव (ताकत) दिया था जो तुम्हें नहीं दिया, और हमने उन पर आसमान से खूब बारिश बरसाई और उनके नीचे नहरें जारी कीं, फिर हमने उन्हें उनके गुनाहों की वजह से हलाक कर दिया और उनके बाद दूसरी कौम पैदा की।)

  7. व लौ नज़्ज़लना अलौका किताबन फी किरतासिन फ-ल-मसूहु बि-ऐदीहिम ल-क़ालल लज़ीना कफरू इन हाज़ा इल्ला सिहरुम मुबीन।
    (और अगर हम आप पर कागज़ में लिखी हुई किताब उतारते और वो उसे अपने हाथों से छू भी लेते, तब भी काफिर यही कहते कि ये तो बस खुला जादू है।)

  8. व क़ालू लौला उनज़िला अलैहि मलक, व लौ अनज़लना मलकल ल-क़ुज़ियल अमरु सुम्मा ला युन्ज़रून।
    (और वो कहते हैं कि इस (नबी) पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं उतारा गया? और अगर हम फरिश्ता उतारते तो काम तमाम कर दिया जाता, फिर उन्हें मोहलत न दी जाती।)

  9. व लौ जअल्नाहु मलकल ल-जअल्नाहु रजुलंव व ल-लबस्ना अलैहिम मा यल्बिसून।
    (और अगर हम उसे (रसूल को) फरिश्ता बनाते तो उसे भी मर्द (की शक्ल में) ही बनाते और उन पर वही शक डाल देते जो (अब) शक करते हैं।)

  10. व लक़दिस्तुहज़ि-अ बि-रुसुलिम मिन क़ब्लिका फ-हाक़ बिल्लज़ीना सखिरू मिन्हुम मा कानू बिही यस्तहज़िऊन।
    (और आपसे पहले भी रसूलों का मज़ाक उड़ाया गया है, तो मज़ाक उड़ाने वालों को उसी चीज़ ने घेर लिया जिसका वो मज़ाक उड़ाते थे।)

  11. क़ुल सीरू फिल अर्ज़ि सुम्मनज़ुरू कैफा काना आक़िबतुल मुकज़्ज़िबीन।
    (कह दीजिए: ज़मीन में चलो-फिरो, फिर देखो कि झुठलाने वालों का अंजाम कैसा हुआ।)

  12. क़ुल लिमम मा फिस समावाति वल अर्ज़, कुल लिल्लाह, कतबा अला नफ्सिहिर रहमह, ल-यज-म-अन्नकुम इला यौमिल क़ियामति ला रैबा फीह, अल्लज़ीना खसिरू अनफुसहुम फहुम ला युअ्मिनून।
    (पूछिए: आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है वो किसका है? कह दीजिए: अल्लाह का है। उसने अपनी ज़ात पर रहमत को लाज़िम कर लिया है। वो तुम्हें कयामत के दिन ज़रूर जमा करेगा जिसमें कोई शक नहीं। जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला वो ईमान नहीं लाएंगे।)

  13. व लहू मा सकना फिल लइलि वन नहार, व हुवस समीउल अलीम।
    (और उसी का है जो कुछ रात और दिन में ठहरता है, और वो सुनने वाला, जानने वाला है।)

  14. क़ुल अ-गैरल्लाहि अत्तखिज़ु वलिय्यन फातिरिस समावाति वल अर्ज़ि व हुवा युतइमु व ला युतअम, कुल इन्नी उमिर्तु अन अकूना अव्वला मन अस्लमा व ला तकूनन्न मिनल मुश्रिकीन।
    (कह दीजिए: क्या मैं अल्लाह के सिवा किसी और को मददगार बनाऊं जो आसमानों और ज़मीन का पैदा करने वाला है? और वो खिलाता है और उसे खिलाया नहीं जाता। कह दीजिए: मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं सबसे पहले इस्लाम लाने वाला बनूँ और (मुझसे कहा गया है कि) तुम मुशरिकों में से न होना।)

  15. क़ुल इन्नी अख़ाफु इन असैतु रब्बी अज़ाबा यौमिन अज़ीम।
    (कह दीजिए: अगर मैं अपने रब की नाफरमानी करूँ तो मैं एक बड़े दिन के अज़ाब से डरता हूँ।)

  16. मय्य युसरफ अन्हु यौमइज़िन फक़द रहिमह, व ज़ालिकल फौज़ुल मुबीन।
    (उस दिन जिससे वो (अज़ाब) फेर दिया गया तो उस पर अल्लाह ने रहम किया, और यही खुली कामयाबी है।)

  17. व इंय यम्सस्कल्लाहु बि-दुर्रिन फला काशिफा लहू इल्ला हू, व इंय यम्सस्का बि-खैरिन फ-हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।
    (और अगर अल्लाह तुझे कोई तकलीफ पहुँचाए तो उसके सिवा उसे कोई दूर करने वाला नहीं, और अगर वो तुझे कोई भलाई पहुँचाए तो वो हर चीज़ पर कादिर है।)

  18. व हुवल क़ाहिरु फौक़ा इबादिह, व हुवल हकीमुल खबीर।
    (और वही अपने बंदों पर गालिब (काबू रखने वाला) है, और वही हिकमत वाला, खबरदार है।)

  19. क़ुल अय्यु शैइन अकबरु शहादह, कुलिल्लाहु शहीदुम बैनी व बैनकुम, व ऊहिया इलय्या हाज़ल क़ुरआनु लि-उनज़िरकुम बिही व मन बलग, अ-इन्नकुम ल-तशहदूना अन्ना मअल्लाहि आलिह-तन उखरा, कुल ला अशहद, कुल इन्नमा हुवा इलाहुंव वाहिदुंव व इन्नी बरीउम मिम्मा तुशरिकून।
    (पूछिए: गवाही में सबसे बड़ी चीज़ क्या है? कह दीजिए: अल्लाह मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाह है, और मेरी तरफ यह कुरान वही (Wahi) किया गया है ताकि मैं इसके ज़रिए तुम्हें डराऊं और उसे (भी) जिस तक यह पहुंचे। क्या तुम गवाही देते हो कि अल्लाह के साथ दूसरे माबूद भी हैं? कह दीजिए: मैं गवाही नहीं देता। कह दीजिए: वो तो बस एक ही माबूद है और मैं उससे बरी (अलग) हूँ जो तुम शरीक ठहराते हो।)

  20. अल्लज़ीना आतैनाहुमुल किताबा यअ्रिफूनहू कमा यअ्रिफूना अबनाअहुम, अल्लज़ीना खसिरू अनफुसहुम फहुम ला युअ्मिनून।
    (जिन्हें हमने किताब दी है वो उसे (रसूल को) ऐसे पहचानते हैं जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला वो ईमान नहीं लाएंगे।)

  21. व मन अज़लमु मिम्मानिफ्तरा अलल्लाहि कज़िबन औ कज़्ज़बा बि-आयातिह, इन्नहू ला युफलिहुज़ ज़ालिमून।
    (और उससे बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ बांधे या उसकी आयतों को झुठलाए? बेशक ज़ालिम कामयाब नहीं होंगे।)

  22. व यौमा नहशुरुहुम जमीअन सुम्मा नकूलु लिल्लज़ीना अशरकू अइन शुरकाउकुमुल लज़ीना कुन्तुम तज़अुमून।
    (और जिस दिन हम उन सबको जमा करेंगे, फिर मुशरिकों से कहेंगे: कहाँ हैं तुम्हारे वो शरीक जिनका तुम दावा करते थे?)

  23. सुम्मा लम तकुन फितनतुहुम इल्ला अन कालू वल्लाहि रब्बिना मा कुन्ना मुश्रिकीन।
    (फिर उनका कोई फरेब न रहेगा सिवाय इसके कि वो कहेंगे: अल्लाह की कसम जो हमारा रब है, हम मुशरिक नहीं थे।)

  24. उन्ज़ुर कैफा कज़बू अला अनफुसिहिम व ज़ल्ला अन्हुम मा कानू यफ्तरून।
    (देखो उन्होंने अपनी जानों पर कैसा झूठ बोला, और जो वो घड़ते थे वो उनसे खो गया।)

  25. व मिन्हुम मंय यस्तमिउ इलैक, व जअल्ना अला कुलूबिहिम अकिन्नतन अंय यफक़हूहू व फी आज़ानिहिम वक़रा, व इंय यरौ कुल्ला आयतिल ला युअ्मिनू बिहा, हत्ता इज़ा जाउका युजादिलूनका यकूलुल लज़ीना कफरू इन हाज़ा इल्ला असातीरुल अव्वलीन।
    (और उनमें से कोई ऐसा है जो आपकी तरफ कान लगाता है, और हमने उनके दिलों पर परदे डाल दिए हैं कि वो उसे समझें और उनके कानों में बोझ (बहरापन) है, और अगर वो हर निशानी देख लें (तब भी) उस पर ईमान नहीं लाएंगे, यहाँ तक कि जब वो आपके पास आते हैं तो आपसे झगड़ते हैं, काफिर कहते हैं कि ये तो बस पहले लोगों की कहानियां हैं।)

  26. व हुम यन्हौना अन्हु व यनअौना अन्ह, व इंय युहलिकूना इल्ला अनफुसहुम व मा यशअुरून।
    (और वो (दूसरों को) इससे रोकते हैं और (खुद भी) इससे दूर रहते हैं, और वो अपनी ही जानों को हलाक कर रहे हैं और उन्हें शऊर नहीं।)

  27. व लौ तरा इज़ वुक़िफू अलान नारि फक़ालू या लैतना नुरद्दु व ला नुकज़्ज़िबा बि-आयाति रब्बिना व नकून मिनल मुअ्मिनीन।
    (और अगर आप देखें जब वो आग पर खड़े किए जाएंगे तो कहेंगे: काश! हम वापस लौटा दिए जाएं और अपने रब की आयतों को न झुठलाएं और हम मोमिनों में से हो जाएं।)

  28. बल बदा लहुम मा कानू युखफूना मिन क़ब्ल, व लौ रुद्दू ल-आदू लिमा नूहू अन्हु व इन्नहुम ल-काज़िबून।
    (बल्कि उन पर वो ज़ाहिर हो गया जो वो पहले छुपाते थे, और अगर वो लौटाए भी जाएं तो फिर वही करेंगे जिससे उन्हें रोका गया था और बेशक वो झूठे हैं।)

  29. व क़ालू इन हिया इल्ला हयातुनद दुन्या व मा नहनु बि-मबअूसीन।
    (और उन्होंने कहा: हमारी ज़िन्दगी तो बस यही दुनिया की ज़िन्दगी है और हम उठाए नहीं जाएंगे।)

  30. व लौ तरा इज़ वुक़िफू अला रब्बिहिम, क़ाला अ-लैसा हाज़ा बिल-हक़्क़, क़ालू बला व रब्बिना, क़ाला फ-ज़ूक़ुल अज़ाबा बिमा कुन्तुम तकफुरून।
    (और अगर आप देखें जब वो अपने रब के सामने खड़े किए जाएंगे, वो फरमाएगा: क्या ये हक़ नहीं है? वो कहेंगे: क्यों नहीं, हमारे रब की कसम! वो फरमाएगा: तो अज़ाब चखो उस कुफ्र की वजह से जो तुम करते थे।)

  31. क़द खसिरल लज़ीना कज़्ज़बू बि-लिक़ाइल्लाह, हत्ता इज़ा जा-अतहुमुस साअतु बग्ततन क़ालू या हसरतना अला मा फर्रत्ना फीहा व हुम यहमिलूना औज़ारहुम अला जुहूरिहिम, अला सा-अ मा यज़िरून।
    (बेशक वो लोग घाटे में रहे जिन्होंने अल्लाह की मुलाकात को झुठलाया, यहाँ तक कि जब कयामत उन पर अचानक आ जाएगी तो कहेंगे: हाय अफ़सोस उस पर जो हमने इसमें (दुनिया में) कोताही की, और वो अपने बोझ अपनी पीठों पर उठाए होंगे, खबरदार! बुरा है जो वो बोझ उठा रहे हैं।)

  32. व मल हयातूद दुन्या इल्ला लइबुंव व लहव, व लद-दारुल आख़िरतु खैरुल लिल्लज़ीना यत्तक़ून, अफला तअ्क़िलून।
    (और दुनिया की ज़िन्दगी तो बस खेल और तमाशा है, और आखिरत का घर उन लोगों के लिए बेहतर है जो परहेज़गारी करते हैं, तो क्या तुम अक्ल नहीं रखते?)

  33. क़द नअ्लमु इन्नहू ल-यहज़ुनुकल लज़ी यकूलूना फ-इन्नहुम ला युकज़्ज़िबूनका व लाकिन्नज़ ज़ालिमीना बि-आयातिल्लाहि यजहदून।
    (हमें मालूम है कि आपको वो बात गमगीन करती है जो वो कहते हैं, तो बेशक वो आपको नहीं झुठलाते लेकिन ज़ालिम अल्लाह की आयतों का इनकार करते हैं।)

  34. व लक़द कुज़्ज़िबत रुसुलुम मिन क़ब्लिका फ-सबरू अला मा कुज़्ज़िबू व ऊज़ू हत्ता अताहुम नसरुना, व ला मुबद्दिला लि-कलिमातिल्लाह, व लक़द जा-अका मिन नब-इल मुरसलीन।
    (और आपसे पहले भी रसूल झुठलाए गए तो उन्होंने सब्र किया उस पर जो वो झुठलाए गए और सताए गए, यहाँ तक कि उनके पास हमारी मदद आ गई, और अल्लाह की बातों को कोई बदलने वाला नहीं, और आपके पास रसूलों की कुछ खबरें आ चुकी हैं।)

  35. व इन काना कबुरा अलौका इअराज़ुहुम फ-इनिस्ततअ्ता अन तब्तगिय नफक़न फिल अर्ज़ि औ सुल्लमन फिस समा-इ फ-ताति-यहुम बि-आयह, व लौ शाअल्लाहु ल-जम-अहुम अलल हुदा फला तकूनन्न मिनल जाहिलीन।
    (और अगर आप पर उनका मुँह फेरना भारी गुज़रता है तो अगर आप ताकत रखते हैं कि ज़मीन में कोई सुरंग तलाश करें या आसमान में कोई सीढ़ी, फिर उनके पास कोई निशानी ले आएं (तो ऐसा करें), और अगर अल्लाह चाहता तो उन्हें हिदायत पर जमा कर देता, तो आप नादानों में से न हों।)

  36. इन्नमा यस्तजीबुल लज़ीना यस्मऊन, वल मौता यबअसुहुमुल्लाहु सुम्मा इलैहि तुरजऊन।
    (बात वही कबूल करते हैं जो सुनते हैं, और मुर्दों को अल्लाह (कयामत में) उठाएगा फिर वो उसी की तरफ लौटाए जाएंगे।)

  37. व क़ालू लौला नुज़्ज़िला अलैहि आयतुम मिर रब्बिह, कुल इन्नल्लाहा क़ादिरुन अला अंय युनज़्ज़िला आयतंव व लाकिन्ना अकसरहुम ला यअ्लमून।
    (और वो कहते हैं कि उस पर उसके रब की तरफ से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई? कह दीजिए: बेशक अल्लाह कादिर है कि कोई निशानी उतारे लेकिन उनमें से अक्सर नहीं जानते।)

  38. व मा मिन दाब्बतिन फिल अर्ज़ि व ला ताइरिय यतीरु बि-जनाहैहि इल्ला उममुन अमसालुकुम, मा फर्रत्ना फिल किताबि मिन शैइन सुम्मा इला रब्बिहिम युहशरून।
    (और ज़मीन में चलने वाला कोई जानवर और अपने दो परों से उड़ने वाला कोई परिंदा ऐसा नहीं मगर वो तुम्हारी तरह उम्मतें (गिरोह) हैं, हमने किताब में कोई चीज़ नहीं छोड़ी, फिर वो अपने रब की तरफ जमा किए जाएंगे।)

  39. वल्लज़ीना कज़्ज़बू बि-आयातिना सुम्मुंव व बुक्मुन फिज़ ज़ुलुमात, मंय यशा-इल्लाहु युज़लिल्हु व मंय यशा यज-अल्हु अला सिरातिम मुस्तक़ीम।
    (और जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया वो बहरे और गूंगे हैं, अंधेरों में हैं। अल्लाह जिसे चाहे गुमराह कर दे और जिसे चाहे सीधे रास्ते पर लगा दे।)

  40. क़ुल अ-र-अय्तकुम इन अताकुम अज़ाबुल्लाहि औ अतत्कुमुस साअतु अ-गैरल्लाहि तदऊना इन कुन्तुम सादिक़ीन।
    (कह दीजिए: अपना हाल तो बताओ अगर तुम पर अल्लाह का अज़ाब आ जाए या तुम पर कयामत आ जाए, क्या तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे अगर तुम सच्चे हो?)

  41. बल इय्याहु तदऊना फ-यकशिफु मा तदऊना इलैहि इन शा-अ व तन्सौना मा तुशरिकून।
    (बल्कि तुम उसी को पुकारोगे, फिर वो दूर कर देगा उसे जिसके लिए तुम पुकारोगे अगर वो चाहे, और तुम उन्हें भूल जाओगे जिन्हें शरीक ठहराते हो।)

  42. व लक़द अर्सल्ना इला उममिम मिन क़ब्लिका फ-अखज़नाहुम बिल बासा-इ वज़ ज़र्रा-इ ल-अल्लहुम यतज़र्रऊन।
    (और हमने आपसे पहले उम्मतों की तरफ (रसूल) भेजे, फिर हमने उन्हें तंगी और तकलीफ में पकड़ा ताकि वो गिड़गिड़ाएं।)

  43. फ-लौला इज़ जा-अहुम बासुना तज़र्रऊ व लाकिन क़सत कुलूबुहुम व ज़य्यना लहुमुश शैतानु मा कानू यअ्मलून।
    (तो जब उनके पास हमारा अज़ाब आया तो वो क्यों नहीं गिड़गिड़ाए? लेकिन उनके दिल सख्त हो गए और शैतान ने उनके लिए वो काम खुश-नुमा बना दिए जो वो करते थे।)

  44. फ-लम्मा नसून मा ज़ुक्किरू बिही फतहना अलैहिम अबवाबा कुल्लि शैइ, हत्ता इज़ा फरिहू बिमा ऊतू अखज़नाहुम बग्ततन फ-इज़ा हुम मुब्लिसून।
    (फिर जब वो उसे भूल गए जो उन्हें नसीहत की गई थी, तो हमने उन पर हर चीज़ के दरवाज़े खोल दिए, यहाँ तक कि जब वो उस पर इतरा गए जो उन्हें दिया गया था, तो हमने उन्हें अचानक पकड़ लिया, तो वो उसी वक़्त मायूस हो गए।)

  45. फ-कुति-अ दाबिरुल कौमिल लज़ीना ज़लमू, वल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
    (तो ज़ालिम कौम की जड़ काट दी गई, और सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जो तमाम जहानों का रब है।)

  46. क़ुल अ-र-अय्तुम इन अखज़ल्लाहु सम-अकुम व अबसारकुम व खतमा अला कुलूबिकुम मन इलाहुन गैरल्लाहि यअ्तीकुम बिह, उन्ज़ुर कैफा नुसर्रिफुल आयाति सुम्मा हुम यस्दिफून।
    (कह दीजिए: देखो तो अगर अल्लाह तुम्हारे कान और तुम्हारी आँखें ले ले और तुम्हारे दिलों पर मुहर लगा दे, तो अल्लाह के सिवा कौन माबूद है जो तुम्हें ये ला दे? देखो हम कैसे आयतें फेर-फेर कर बयान करते हैं फिर भी वो मुँह फेरते हैं।)

  47. क़ुल अ-र-अय्तकुम इन अताकुम अज़ाबुल्लाहि बग्ततन औ जहरतन हल युहलकु इल्लल कौमुज़ ज़ालिमून।
    (कह दीजिए: देखो तो अगर तुम पर अल्लाह का अज़ाब अचानक या खुलकर आ जाए, तो क्या ज़ालिम कौम के सिवा कोई और हलाक किया जाएगा?)

  48. व मा नुरसिलुल मुरसलीना इल्ला मुबश्शिरीना व मुन्ज़िरीन, फमन आमना व अस्लहा फला खौफुन अलैहिम व ला हुम यहज़नून।
    (और हम रसूलों को नहीं भेजते मगर खुशखबरी देने वाले और डराने वाले बनाकर, तो जो ईमान लाया और सुधर गया तो उन पर न कोई डर है और न वो गमगीन होंगे।)

  49. वल्लज़ीना कज़्ज़बू बि-आयातिना यमस्सुहुमुल अज़ाबु बिमा कानू यफसुकून।
    (और जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया उन्हें अज़ाब पहुँचेगा उस वजह से कि वो नाफरमानी करते थे।)

  50. क़ुल ला अकूलु लकुम इन्दी खज़ाइनुल्लाहि व ला अअ्लमुल गैबा व ला अकूलु लकुम इन्नी मलक, इन अत्तबिउ इल्ला मा यूहा इलय्य, कुल हल यस्तविल अअमा वल बसीर, अफला ततफक्करून।
    (कह दीजिए: मैं तुमसे नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के खज़ाने हैं और न मैं गैब जानता हूँ और न मैं तुमसे कहता हूँ कि मैं फरिश्ता हूँ, मैं तो सिर्फ उसकी पैरवी करता हूँ जो मेरी तरफ वही (Wahi) की जाती है। कह दीजिए: क्या अंधा और देखने वाला बराबर हो सकते हैं? तो क्या तुम गौर नहीं करते?)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह अनआम मक्की है या मदनी?
A. सूरह अनआम एक मक्की सूरह है। यह हिजरत से पहले मक्का में नाज़िल हुई थी।
Q. सूरह अनआम का खास मौज़ू (Topic) क्या है?
A.

इस सूरह का मुख्य विषय तौहीद (Oneness of Allah) है। इसमें अल्लाह की कुदरत की निशानियां, शिर्क का रद्द और आखिरत का ज़िक्र तफसील से है।

Q. क्या सूरह अनआम पढ़ने से हाजत पूरी होती है?
A.

बुजुर्गों के तजुर्बे के मुताबिक, इस सूरह की तिलावत करके अल्लाह से दुआ मांगने से मुश्किलें आसान होती हैं और हाजतें पूरी होती हैं।


नतीजा (Conclusion)

सूरह अनआम हमें अल्लाह की पहचान कराती है और शिर्क की गंदगी से पाक करती है। इसकी आयतें हमें गौर-ओ-फिक्र करने की दावत देती हैं। हमें चाहिए कि हम इसे समझकर पढ़ें और अपनी अकीदे (Faith) को मज़बूत करें।

अल्लाह हमें कुरान को समझकर पढ़ने की तौफीक दे। आमीन।

    Share:
    Back to Blog