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Iffat Zia
· Quran · 4 min read

Surah Al-Lail in Hindi: सूरह लैल की फजीलत और तर्जुमा

Surah Al-Lail in Hindi: जानिए सूरह लैल की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। यह सूरह रात की कसम के साथ शुरू होता है और अच्छे व बुरे दोनों रास्तों की बात करता है।

Surah Al-Lail in Hindi: सूरह लैल की फजीलत और तर्जुमा

Table of Contents

सूरह अल-लैल (Surah Al-Lail) कुरान मजीद की 92वीं सूरह है। “लैल” का मतलब है “रात” (The Night)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 21 आयतें हैं।

इस सूरह में अल्लाह तआला रात की कसम खाते हुए यह फरमाता है कि हर इंसान के लिए दोनों रास्ते (अच्छा और बुरा) खुले हैं। जो रास्ता वह लेगा उसी के हिसाब से उसका अंजाम होगा। इसके साथ ही यह सूरह इंसान की दो अलग-अलग क़िस्मों का ज़िक्र करती है - एक जो अपनी बुरी ख्वाहिशों से बचता है और एक जो उनके पीछे भागता है।

इस आर्टिकल में हम Surah Al-Lail in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।

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सूरह अल-लैल की फजीलत (Benefits of Surah Al-Lail)

  1. दोनों रास्तों की समझ: यह सूरह हमें सिखाती है कि अल्लाह ने हर इंसान को अच्छाई और बुराई दोनों को समझने की अक़्ल दी है। अब हर एक को अपने लिए फ़ैसला करना है कि उसे कौन सा रास्ता चुनना है।

  2. बुरी ख्वाहिशों से बचाव: यह सूरह उन लोगों की तारीफ़ करती है जो अपनी बुरी ख्वाहिशों (Nafs) से दूर रहते हैं और अल्लाह का डर रखते हैं।

  3. गरीबों की मदद करना: इस सूरह में उन लोगों की तारीफ की गई है जो अपना माल दूसरों की भलाई के लिए ख़र्च करते हैं और ग़रीबों की मदद करते हैं।

  4. आखिरत की याद: यह सूरह हमें याद दिलाती है कि दुनिया की जिंदगी आखिरी नहीं है, बल्कि आखिरत ही हमारा असली ठिकाना है।


Surah Al-Lail in Hindi (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. वल-लैलि इज़ा यग़श़ा।
    (कसम है रात की जब वह ढक लेती है।)

  2. वन-नहारि इज़ा तजल्ला।
    (और कसम है दिन की जब वह चमक उठता है।)

  3. वमा ख़लक़ज़-ज़करा वल-उन्सा।
    (और कसम है उसके जिसने मर्द और औरत को पैदा किया।)

  4. इन्ना सअ्-यकुम ल-शत्ता।
    (बेशक तुम्हारे रास्ते बिल्कुल अलग-अलग हैं।)

  5. फ़-अम्मा मन अअ्ता वत्तक़ा।
    (तो जो देता है और अल्लाह का डर रखता है।)

  6. व सद्दक़ बिल-हुस्ना।
    (और अच्छी बातों को मानता है।)

  7. फ़-सनुयस्सिरुहू लिल-युस्रा।
    (तो हम उसे आसान रास्ता दिखाएंगे।)

  8. व अम्मा मन बखिला वस्तग़्ना।
    (और जो कंजूस है और अमीर होने का दिखावा करता है।)

  9. व कज़्ज़बा बिल-हुस्ना।
    (और अच्छी बातों को झुठलाता है।)

  10. फ़-सनुयस्सिरुहू लिल-उस्रा।
    (तो हम उसे मुश्किल रास्ता दिखाएंगे।)

  11. व मा युग़्नी अन्हु मालुहू इज़ा तरद्दा।
    (और उसका माल उसे फ़ायदा नहीं देगा जब वह मर जाए।)

  12. इन्ना अलैना लल-हुदा।
    (बेशक सही रास्ता दिखाना हमारे ऊपर है।)

  13. व इन्ना लना लल-आख़िरता वल-ऊला।
    (और बेशक आखिरत और दुनिया दोनों हमारी हैं।)

  14. फ़-अन्ज़र्तुकुम नारन तलज़्ज़ा।
    (तो मैंने तुम्हें भड़कती हुई आग से डराया।)

  15. ला यस्लाहा इल्लल-अश्क़ा।
    (जिसमें वही दाख़िल होगा जो बड़ा बदबख़्त है।)

  16. अल्लज़ी कज़्ज़बा व तवल्ला।
    (जो झुठलाता था और मुँह फेरता था।)

  17. व स-युजन्नबुहल-अत्क़ा।
    (और उससे बचा दिया जाएगा सबसे ज़्यादा अल्लाह का डर रखने वाले को।)

  18. अल्लज़ी युअ्ती मालहू यतज़क्का।
    (जो अपना माल देता है और पवित्र रहना चाहता है।)

  19. व मा लि-अहदिन इन्दहू मिन निअ्मतिन तुज्ज़ा।
    (और किसी को उसके पास कोई एहसान नहीं जिसका बदला देना हो।)

  20. इल्लाब्तिग़ा-अ वज्हि रब्बिहिल-आ्ला।
    (सिवाय इस लिए कि अपने रब की खुशी चाहता है।)

  21. व ल-सौफ़ा यर्ज़ा।
    (और जल्द ही वह रब उससे खुश हो जाएगा।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह अल-लैल का मतलब क्या है?
A.

“लैल” का मतलब है “रात”। इस सूरह की शुरुआत में अल्लाह ने रात और दिन की कसम खाई है और अपने बंदों के लिए अच्छा और बुरा दोनों रास्ते खोल दिए हैं।

Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
A.

इस सूरह का असल पैगाम यह है कि हर इंसान को अच्छाई और बुराई में से अपने लिए चुनने की आज़ादी दी गई है। जो अपना माल दूसरों की भलाई के लिए ख़र्च करता है और अल्लाह का डर रखता है उसके लिए अल्लाह आसान रास्ता कर देगा, और जो कंजूस है और नेकी को झुठलाता है उसे मुश्किल रास्ता मिलेगा।

Q. 'अत्क़ा' का क्या मतलब है?
A.

“अत्क़ा” का मतलब है सबसे ज़्यादा अल्लाह का डर रखने वाला, यानी जो अल्लाह से सबसे ज़्यादा डरता है और उसकी बातें मानता है।

Q. इस सूरह में गरीबों की मदद करने की कितनी अहमियत है?
A.

इस सूरह में गरीबों की मदद करने को बहुत अहमियत दी गई है। जो लोग अपना माल दूसरों की भलाई के लिए ख़र्च करते हैं, सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए, उनके लिए अल्लाह ने आसान रास्ते का वादा किया है।


नतीजा (Conclusion)

सूरह अल-लैल हमें यह सीख देती है कि हर इंसान को अपने लिए फ़ैसला करने की आज़ादी है। लेकिन हमें समझदारी से अपना रास्ता चुनना चाहिए। अल्लाह ने हमें सब कुछ दे रखा है - अक़्ल, समझ और सही रास्ते की पहचान। अब हमें यह देखना है कि क्या हम अपनी बुरी ख्वाहिशों के पीछे भागते हैं या अल्लाह का डर रखकर नेकी का रास्ता अपनाते हैं।

दुनिया में जो माल ख़र्च किया जाता है सिर्फ़ अल्लाह की खुशी के लिए, वही असली माल है। बाकी सब कुछ तो ज़रूर चला जाएगा।

अल्लाह हमें तक़्वा (अल्लाह का डर) रखने वाला बनाए और हमें अपने माल से दूसरों की मदद करने की तौफीक दे। आमीन।

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