Surah Al-Imran in Hindi: सूरह आले इमरान की फजीलत और आयतें
Surah Al-Imran in Hindi: जानिए सूरह आले इमरान की फजीलत, पहली 50 आयतें और आखिरी आयतों का हिंदी तर्जुमा। यह सूरह दौलत में बरकत और हिदायत का जरिया है।

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सूरह आले इमरान (Surah Al-Imran) कुरान मजीद की तीसरी सूरह है। “आले इमरान” का मतलब है “इमरान का खानदान”। यह सूरह मदीना में नाज़िल हुई और इसमें 200 आयतें हैं।
इस सूरह में तौहीद, नबूवत, और कयामत के साथ-साथ हज़रत मरियम (अ.) और हज़रत ईसा (अ.) की पैदाइश का वाकया तफसील से बयान किया गया है। इसमें बहुत सी “रब्बना” से शुरू होने वाली दुआएं हैं।
इस आर्टिकल में हम Surah Al-Imran in Hindi, इसकी फजीलत और पहली 50 आयतों का तर्जुमा जानेंगे।
सूरह आले इमरान की फजीलत (Benefits of Surah Al-Imran)
- कयामत के दिन सिफारिश: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “कुरान पढ़ा करो, क्योंकि यह कयामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफारिश करेगा। दो रोशन सूरतों, सूरह बकरा और सूरह आले इमरान को पढ़ा करो, क्योंकि ये कयामत के दिन बादल या साये की तरह आकर अपने पढ़ने वालों के लिए दलील देंगी।” (सहीह मुस्लिम)
- रिज़्क़ में बरकत: जो शख्स इस सूरह को पढ़ता है, अल्लाह उसके रिज़्क़ में बरकत अता फरमाता है और उसे गरीबी से महफूज़ रखता है।
- इस्मे आज़म: हदीस में आता है कि अल्लाह का इस्मे आज़म (सबसे बड़ा नाम) सूरह बकरा, सूरह आले इमरान और सूरह ता-हा में है।
Surah Al-Imran Ayat 1-50 in Hindi
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अलिफ़-लाम-मीम।
(अलिफ़-लाम-मीम।)अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम।
(अल्लाह, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं, वो हमेशा ज़िंदा और सब कुछ संभालने वाला है।)नज़्ज़ला अलैक़ल किताब बिल हक़्क़ि मुसद्दिक़ल लिमा बैना यदैहि व अन्ज़लत तौरात वल इंजील।
(उसने आप पर हक़ के साथ किताब नाज़िल की, जो अपने से पहली (किताबों) की तस्दीक करती है, और उसने तौरात और इंजील नाज़िल की।)मिन क़ब्लु हुदल लिन-नासि व अन्ज़लल फुरक़ान। इन्नल लज़ीना कफरू बि-आयातिल्लाहि लहुम अज़ाबुन शदीद, वल्लाहु अज़ीज़ुन ज़ुनतिक़ाम।
(इससे पहले, लोगों की हिदायत के लिए, और उसने फुरकान (हक़ और बातिल में फर्क करने वाली किताब) नाज़िल की। बेशक जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों का इंकार किया, उनके लिए सख्त अज़ाब है, और अल्लाह ज़बरदस्त बदला लेने वाला है।)इन्नल्लाहा ला यखफा अलैहि शय-उन फिल अर्ज़ि वला फिस-समा।
(बेशक अल्लाह पर ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ छिपी नहीं है।)हुवल लज़ी युसव्विरुकुम फिल अरहामि कैफा यशा, ला इलाहा इल्ला हुवल अज़ीज़ुल हकीम।
(वही है जो रहमों (मां के पेट) में जैसी चाहता है तुम्हारी सूरतें बनाता है। उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वो ज़बरदस्त हिकमत वाला है।)हुवल लज़ी अनज़ला अलैक़ल किताबा मिन्हु आयातुम मुहकमातुन हुन्ना उम्मुल-किताबि व उखरु मुतशाबिहात, फ-अम्मल लज़ीना फी कुलूबिहिम ज़ैगुन फ-यत्तबिऊना मा तशाबहा मिन्हुब-तिगाअल फितनति वब-तिगाअ तावीलिह, वमा यालमु तावीलहू इल्लल्लाह, वर-रासिखूना फिल इल्मि यकूलूना आमन्ना बिही कुल्लुम मिन हिंदी रब्बिना, वमा यज़्ज़क्करु इल्ला उलुल अल्बाब।
(वही है जिसने आप पर किताब नाज़िल की, जिसमें कुछ आयतें मुहकमात (साफ़ मतलब वाली) हैं जो किताब की असल हैं, और दूसरी मुतशाबिहात (जिनके मतलब में गहराई है) हैं। तो जिनके दिलों में टेढ़ापन है वो फितना फैलाने और अपनी मर्जी का मतलब निकालने के लिए मुतशाबिहात के पीछे पड़े रहते हैं, हालांकि उनका असली मतलब अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। और जो इल्म में पक्के हैं वो कहते हैं कि हम इस पर ईमान लाए, सब हमारे रब की तरफ से है; और नसीहत वही हासिल करते हैं जो अक्ल वाले हैं।)रब्बना ला तुज़िग कुलूबना बाद इज़ हदैतना व हब लना मिल लदुनका रहमतन, इन्नका अंतल वह्हाब।
((वो दुआ करते हैं) ऐ हमारे रब! हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर और हमें अपने पास से रहमत अता फरमा; बेशक तू ही बहुत देने वाला है।)रब्बना इन्नका जामिउन नासि लि-यौमिल ला रैबा फीह, इन्नल्लाहा ला युखलिफुल मीआद।
(ऐ हमारे रब! बेशक तू सब लोगों को एक दिन जमा करने वाला है जिसमें कोई शक नहीं; बेशक अल्लाह वादा खिलाफ नहीं करता।)इन्नल लज़ीना कफरू लन तुगनिया अन्हुम अमवालुहुम वला औलादुहुम मिनल्लाहि शैया, व उलाइका हुम वकूदुन नार।
(बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया, उनके माल और उनकी औलाद अल्लाह के मुकाबले में उनके कुछ काम न आएंगे; और वही लोग आग का ईंधन हैं।)कदाबि आलि फिरऔना वल्लज़ीना मिन कबलिहिम, कज़्ज़बू बि-आयातिना फ-अखज़हुमुल्लाहु बि-ज़ुनूबिहिम, वल्लाहु शदीदुल इकाब।
(जैसे फिरौन वालों और उनसे पहले लोगों का हाल हुआ; उन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया तो अल्लाह ने उनके गुनाहों की वजह से उन्हें पकड़ लिया; और अल्लाह सख्त अज़ाब देने वाला है।)कुल लिल्लज़ीना कफरू स-तुगलबूना व तुहशरून इला जहन्नम, व बिसल मिहाद।
(काफिरों से कह दीजिए कि तुम अनकरीब मगलूब होगे और जहन्नम की तरफ जमा किए जाओगे; और वो बहुत बुरा ठिकाना है।)कद काना लकुम आयतुन फी फिअतैनिल तकता, फिअतुन तुकातिलु फी सबीलिल्लाहि व उखरा काफिरतुय यरौनहुम मिस्लैहिम रायल अईन, वल्लाहु युअय्यिदु बि-नस्रिही मैं यशा, इन्ना फी ज़ालिका ल-इब्रतल लि-उलिल अबसार।
(तुम्हारे लिए उन दो गिरोहों में एक निशानी थी जो आपस में भिड़ गए; एक गिरोह अल्लाह की राह में लड़ रहा था और दूसरा काफिर था जो उन्हें अपनी आंखों से अपने से दोगुना देख रहा था; और अल्लाह अपनी मदद से जिसे चाहता है ताईद करता है; बेशक इसमें देखने वालों के लिए बड़ी इब्रत है।)ज़ुय्यिना लिन्नासि हुब्बुश शहवाति मिनन निसाइ वल बनीना वल कनातिरील मुकंतरति मिनज़ ज़हबि वल फिद्दति वल खाइलिल मुसव्वमति वल अनआमि वल हर्स, ज़ालिका मताउल हयातिद दुनिया, वल्लाहु इन्दहू हुस्नुल मआब।
(लोगों के लिए ख्वाहिशों की मोहब्बत को खुशनुमा बना दिया गया है, जैसे औरतें, बेटे, सोने-चांदी के ढेर, निशान लगे घोड़े, चौपाए और खेती; ये सब दुनिया की ज़िंदगी का सामान है; और अल्लाह के पास ही बेहतरीन ठिकाना है।)कुल अ-उनब्बिकुम बिखैरिम मिन ज़ालिकुम, लिल्लज़ीनत तकौ इन्द रब्बिहिम जन्नातुन तजरी मिन तहतिहल अनहारु खालिदीना फीहा व अज़वाजुम मुतह्हरतुन व रिज़वानुम मिनल्लाह, वल्लाहु बसीरुम बिल इबाद।
(कह दीजिए, क्या मैं तुम्हें इससे बेहतर चीज़ बताऊं? जो लोग परहेज़गार हैं उनके लिए उनके रब के पास जन्नतें हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं, वो उनमें हमेशा रहेंगे और पाकीज़ा बीवियां और अल्लाह की रज़ामंदी है; और अल्लाह बंदों को खूब देखने वाला है।)अल्लज़ीना यकूलूना रब्बना इन्नना आमन्ना फगफिर लना ज़ुनूबना व किना अज़ाबन नार।
(जो कहते हैं: ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए, तो हमारे गुनाह बख्श दे और हमें आग के अज़ाब से बचा।)अस-साबिरीना वस-सादिक़ीना वल-क़ानितीना वल-मुनफ़िक़ीना वल-मुस्तगफ़िरीना बिल-अस्हार।
(वो सब्र करने वाले, सच बोलने वाले, फरमाबरदारी करने वाले, खर्च करने वाले और पिछले पहर (रात के आखिरी हिस्से में) माफी मांगने वाले हैं।)शहिदल्लाहु अन्नहू ला इलाहा इल्ला हुवा वल मलाइकतु व उलुल इल्मि काइमम बिल किस्त, ला इलाहा इल्ला हुवल अज़ीज़ुल हकीम।
(अल्लाह ने गवाही दी कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं, और फरिश्तों और इल्म वालों ने भी (गवाही दी) जो इंसाफ पर कायम हैं; उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वो ज़बरदस्त हिकमत वाला है।)इन्नद दीना इन्दल्लाहिल इस्लाम, व मखतलफल लज़ीना ऊतुल किताबा इल्ला मिम बादि मा जाअहुमुल इल्मु बगयम बैनहुम, व मैं यकफुर बि-आयातिल्लाहि फ-इन्नल्लाहा सरीउल हिसाब।
(बेशक अल्लाह के नज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम है; और अहले किताब ने इल्म आ जाने के बाद आपस की ज़िद की वजह से इख्तिलाफ किया; और जो अल्लाह की आयतों का इंकार करे तो बेशक अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला है।)फ-इन हाज्जूका फ-कुल असलम-तु वज-हिया लिल्लाहि व मनित्तबअनी, व कुल लिल्लज़ीना ऊतुल किताबा वल उम्मिय्यीना अ-असलमतुम, फ-इन असलमू फ-कदिह तदौ, व इन तवल्लौ फ-इन्नमा अलैकल बलाग, वल्लाहु बसीरुम बिल इबाद।
(फिर अगर वो आपसे झगड़ें तो कह दीजिए कि मैंने अपना चेहरा अल्लाह के लिए झुका दिया और जिसने मेरी पैरवी की (उसने भी); और अहले किताब और अनपढ़ों से कह दीजिए: क्या तुम भी इस्लाम लाए? अगर वो इस्लाम ले आएं तो हिदायत पा गए; और अगर मुंह फेर लें तो आप पर सिर्फ पहुंचा देना है; और अल्लाह बंदों को खूब देखने वाला है।)इन्नल लज़ीना यकफुरूना बि-आयातिल्लाहि व यकतुलूनन नबिय्यीना बिगैरि हक्किन व यकतुलूनल लज़ीना यामुरूना बिल किस्ति मिनन नासि फ-बश्शिरहुम बि-अज़ाबिन अलीम।
(बेशक जो लोग अल्लाह की आयतों का इंकार करते हैं और नबियों को नाहक कत्ल करते हैं और उन लोगों को कत्ल करते हैं जो इंसाफ का हुक्म देते हैं, तो उन्हें दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दीजिए।)उलाइकल लज़ीना हबितत आमालुहुम फिद दुनिया वल आखिरति वमा लहुम मिन नासिरीन।
(यही वो लोग हैं जिनके आमाल दुनिया और आखिरत में बर्बाद हो गए और उनका कोई मददगार नहीं।)अलम तरा इलल लज़ीना ऊतू नसीबम मिनल किताबि युदऔना इला किताबिल्लाहि लि-यहकुमा बैनहुम सुम्मा यतवल्ला फरीकुम मिन्हुम व हुम मुरिज़ून।
(क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा जिन्हें किताब का एक हिस्सा दिया गया, उन्हें अल्लाह की किताब की तरफ बुलाया जाता है ताकि वो उनके दरमियान फैसला करे, फिर उनमें से एक फरीक मुंह फेर लेता है और वो बेरुखी करने वाले हैं।)ज़ालिका बि-अन्नहुम कालू लन तमस्सनन नारु इल्ला अय्यामम मादूदात, व गर्रहुम फी दीनिहिम मा कानू यफ्टरून।
(ये इसलिए कि वो कहते हैं कि हमें आग हरगिज़ नहीं छुएगी मगर गिनती के चंद दिन; और उन्हें उनके दीन के बारे में उनके अपने घड़े हुए झूठ ने धोखे में डाल रखा है।)फ-कैफा इज़ा जमानहुम लि-यौमिल ला रैबा फीहि व वुफ्फियत कुल्लु नफसिम मा कसबत व हुम ला युज़लमून।
(तो क्या हाल होगा जब हम उन्हें उस दिन जमा करेंगे जिसमें कोई शक नहीं और हर जान को उसकी कमाई पूरी-पूरी दी जाएगी और उन पर जुल्म नहीं होगा।)कुलिल्लाहुम्मा मालिकल मुल्कि तूतिल मुल्का मन तशाउ व तनज़िउल मुल्का मिम्मन तशाउ व तुइज़्ज़ु मन तशाउ व तुज़िल्लु मन तशाउ, बि-यदिकाल खैर, इन्नका अला कुल्लि शयइन कदीर।
(कह दीजिए: ऐ अल्लाह! मुल्क के मालिक! तू जिसे चाहे मुल्क दे और जिससे चाहे मुल्क छीन ले, और जिसे चाहे इज़्ज़त दे और जिसे चाहे ज़िल्लत दे; तेरे ही हाथ में भलाई है; बेशक तू हर चीज़ पर कादिर है।)तूलिजुल लैला फिन नहारि व तूलिजुन नहारा फिल लैलि व तुखरीजुल हय्या मिनल मय्यिति व तुखरीजुल मय्यिता मिनल हय्यि व तरज़ुकु मन तशाउ बिगैरि हिसाब।
(तू रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है, और तू ज़िंदा को मुर्दा से निकालता है और मुर्दा को ज़िंदा से निकालता है, और जिसे चाहता है बेहिसाब रिज़्क देता है।)ला यत्तखिज़िल मुमिनूनल काफिरीना औलियाअ मिन दूनिल मुमिनीन, व मैं यफअल ज़ालिका फ-लैसा मिनल्लाहि फी शयइन इल्ला अन तत्तकू मिन्हुम तुकाह, व युहज़्ज़िरुकुमुल्लाहु नफसह, व इलल्लाहिल मसीर।
(मोमिन काफिरों को मोमिनों के सिवा अपना दोस्त न बनाएं; और जो ऐसा करेगा उसका अल्लाह से कोई ताल्लुक नहीं, मगर ये कि तुम उनसे बचाव करो; और अल्लाह तुम्हें अपनी ज़ात से डराता है; और अल्लाह ही की तरफ लौटना है।)कुल इन तुखफू मा फी सुदूरिकुम औ तुब्दूहू यालमहुल्लाह, व यालमु मा फिस समावाति वमा फिल अर्ज़, वल्लाहु अला कुल्लि शयइन कदीर।
(कह दीजिए: अगर तुम अपने सीनों की बात छुपाओ या उसे ज़ाहिर करो, अल्लाह उसे जानता है; और वो जानता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है; और अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है।)यौमा तजिदु कुल्लु नफसिम मा अमिलत मिन खैरिम मुहज़रन वमा अमिलत मिन सूइन तवद्दु लौ अन्ना बैनहा व बैनहू अमदम बईदा, व युहज़्ज़िरुकुमुल्लाहु नफसह, वल्लाहु रऊफुम बिल इबाद।
(जिस दिन हर जान अपनी की हुई नेकी को मौजूद पाएगी और जो उसने बुराई की होगी (उसे भी), वो आरज़ू करेगी कि काश उसके और उस (बुराई) के दरमियान बहुत लंबी दूरी होती; और अल्लाह तुम्हें अपनी ज़ात से डराता है; और अल्लाह बंदों पर बहुत मेहरबान है।)कुल इन कुन्तुम तुहिब्बूनल्लाहा फत्तबिऊनी युहबिबकुमुल्लाहु व यगफिर लकुम ज़ुनूबकुम, वल्लाहु गफूरुर रहीम।
(कह दीजिए: अगर तुम अल्लाह से मोहब्बत करते हो तो मेरी पैरवी करो, अल्लाह तुमसे मोहब्बत करेगा और तुम्हारे गुनाह बख्श देगा; और अल्लाह बख्शने वाला मेहरबान है।)कुल अतीउल्लाहा वर रसूल, फ-इन तवल्लौ फ-इन्नल्लाहा ला युहिब्बुल काफिरीन।
(कह दीजिए: अल्लाह और रसूल की तात करो; फिर अगर वो मुंह फेर लें तो बेशक अल्लाह काफिरों को पसंद नहीं करता।)इन्नल्लाहास्तफा आदमा व नूहन व आला इब्राहीमा व आला इमराना अलल आलमीन।
(बेशक अल्लाह ने आदम और नूह और आले इब्राहिम और आले इमरान को तमाम जहान वालों पर चुन लिया।)ज़ुर्रिय्यतम बादुहा मिम बाद, वल्लाहु समीउन अलीम।
(ये एक ही नस्ल हैं एक दूसरे की; और अल्लाह सुनने वाला जानने वाला है।)इज़ कालतिम रअतु इमराना रब्बि इन्नी नज़रतु लका मा फी बतनी मुहर्ररन फ-तकब्बल मिन्नी, इन्नका अंतस समीउल अलीम।
(जब इमरान की बीवी ने कहा: ऐ मेरे रब! मैंने तेरे लिए मन्नत मानी कि जो मेरे पेट में है वो आज़ाद होगा (तेरी खिदमत के लिए), तो मुझसे कबूल फरमा; बेशक तू ही सुनने वाला जानने वाला है।)फ-लम्मा वदअतहा कालत रब्बि इन्नी वदअतुहा उनसा वल्लाहु आलमू बिमा वदअत व लैसाज़ ज़करु कल उनसा व इन्नी सम्मैतुहा मरयमा व इन्नी उईज़ुहा बिका व ज़ुर्रिय्यतहा मिनश शैतानिर रजीम।
(फिर जब उसने उसे जना तो कहा: ऐ मेरे रब! मैंने तो बेटी जनी है - और अल्लाह खूब जानता है जो उसने जना - और बेटा बेटी जैसा नहीं होता; और मैंने उसका नाम मरियम रखा और मैं उसे और उसकी औलाद को शैतान मरदूद से तेरी पनाह में देती हूं।)फ-तकब्बलहा रब्बुहा बि-कबूलिन हसनिन व अंबतहा नबातन हसनन व कफ्फलहा ज़करिय्या, कुल्लमा दखला अलैहा ज़करिय्यल मिहराबा वजदा इन्दहा रिज़का, काला या मरयमु अन्ना लकि हाज़ा, कालत हुवा मिन इन्दिल्लाह, इन्नल्लाहा यरज़ुकु मन तशाउ बिगैरि हिसाब।
(तो उसके रब ने उसे अच्छी तरह कबूल किया और उसे अच्छी तरह परवान चढ़ाया और ज़करिया को उसका कफील (सरपरस्त) बनाया; जब भी ज़करिया उसके पास मेहराब (इबादतगाह) में जाते तो उसके पास रिज़्क पाते; कहा: ऐ मरियम! ये तेरे पास कहां से आया? वो बोलीं: ये अल्लाह के पास से है; बेशक अल्लाह जिसे चाहता है बेहिसाब रिज़्क देता है।)हुनालिका दआ ज़करिय्या रब्बाह, काला रब्बि हब ली मिल लदुनका ज़ुर्रिय्यतन तय्यिबह, इन्नका समीउद दुआ।
(वहां ज़करिया ने अपने रब को पुकारा; कहा: ऐ मेरे रब! मुझे अपने पास से पाकीज़ा औलाद अता कर; बेशक तू ही दुआ सुनने वाला है।)फ-नादथुल मलाइकतु व हुवा काइमुय युसल्ली फिल मिहराबि अन्नल्लाहा युबश्शिरुका बि-यहया मुसद्दिकम बि-कलिमतुम मिनल्लाहि व सय्यिदन व हसूरन व नबिय्यम मिनस सालिहीन।
(तो फरिश्तों ने उन्हें आवाज़ दी जब वो मेहराब में खड़े नमाज़ पढ़ रहे थे कि अल्लाह आपको यह्या की खुशखबरी देता है जो अल्लाह के एक कलमे (ईसा) की तस्दीक करने वाला होगा और सरदार और हमेशा औरत से बचने वाला और सालिहीन में से एक नबी होगा।)काला रब्बि अन्ना यकूनु ली गुलामुन व कद बलगनियल किबरु वम-रअती आकिर, काला कज़ालिकल्लाहु यफअलु मा यशा।
(कहा: ऐ मेरे रब! मेरे यहां लड़का कैसे होगा हालांकि मुझे बुढ़ापा पहुंच चुका है और मेरी बीवी बांझ है? फरमाया: इसी तरह अल्लाह जो चाहता है करता है।)काला रब्बिज़ अल ली आयह, काला आयतुका अल्ला तुकल्लिमन नासा सलासता अय्यामिन इल्ला रमज़ा, वज़कुर रब्बका कसीरन व सब्बिह बिल अशिय्यि वल इबकार।
(कहा: ऐ मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी मुकर्रर कर दे; फरमाया: तुम्हारी निशानी ये है कि तुम लोगों से तीन दिन तक बात न कर सकोगे मगर इशारे से; और अपने रब को कसरत से याद करो और शाम और सुबह तस्बीह करो।)व इज़ कालतिल मलाइकतु या मरयमु इन्नल्लाहास्तफाकि व तह्हराकि वस्तफाकि अला निसाइल आलमीन।
(और जब फरिश्तों ने कहा: ऐ मरियम! बेशक अल्लाह ने तुम्हें चुन लिया और तुम्हें पाक किया और तुम्हें तमाम जहान की औरतों पर चुन लिया।)या मरयमुकनुती लि-रब्बिकी वस्जुदी वरकई मअर राकिईन।
(ऐ मरियम! अपने रब की फरमाबरदारी कर और सजदा कर और रुकू करने वालों के साथ रुकू कर।)ज़ालिका मिन अंबाइल गैबि नूहीहि इलैक, वमा कुन्ता लदैहिम इज़ युलकूना अकलामहुम अय्युहुम यकफुलु मरयमा वमा कुन्ता लदैहिम इज़ यखतसिमून।
(ये गैब की खबरें हैं जो हम आपकी तरफ वही करते हैं; और आप उनके पास नहीं थे जब वो अपने कलम डाल रहे थे कि उनमें से कौन मरियम की किफालत (परवरिश) करे और आप उनके पास नहीं थे जब वो झगड़ रहे थे।)इज़ कालतिल मलाइकतु या मरयमु इन्नल्लाहा युबश्शिरुकी बि-कलिमतुम मिन्हुस मुहू मसीहु ईसबनु मरयमा वजीहन फिद दुनिया वल आखिरति व मिनल मुकर्रबीन।
(जब फरिश्तों ने कहा: ऐ मरियम! बेशक अल्लाह तुम्हें अपने पास से एक कलमे की खुशखबरी देता है जिसका नाम मसीह ईसा इब्ने मरियम होगा, वो दुनिया और आखिरत में बा-आबरू और मुकर्रबीन (अल्लाह के करीबी) में से होगा।)व युकल्लिमुन नासा फिल महदि व कहलन व मिनस सालिहीन।
(और वो लोगों से पालने में और अधेड़ उम्र में बात करेगा और सालिहीन में से होगा।)कालत रब्बि अन्ना यकूनु ली वलदुन वलम यम्सस्नी बशर, काला कज़ालिकिल्लाहु यखलुकु मा यशा, इज़ा कज़ा अमरन फ-इन्नमा यकूलु लहू कुन फ-यकून।
(वो बोलीं: ऐ मेरे रब! मेरे यहां बच्चा कैसे होगा हालांकि मुझे किसी बशर ने नहीं छुआ? फरमाया: इसी तरह अल्लाह जो चाहता है पैदा करता है; जब वो किसी काम का फैसला करता है तो उसे सिर्फ ये कहता है “हो जा” तो वो हो जाता है।)व युअल्लिमुहुल किताबा वल हिकमता वत तौरात वल इंजील।
(और वो उसे किताब और हिकमत और तौरात और इंजील सिखाएगा।)व रसूलन इला बनी इसराइला अन्नी कद जीतुकुम बि-आयतित मिर रब्बिकुम अन्नी अखलुकु लकुम मिनत तीनि कहैअतित तैरि फ-अनफुखु फीहि फ-यकूनु तैरन बि-इज़निल्लाहि, व उब्रिउल अकमहा वल अबरसा व उहयिल मौता बि-इज़निल्लाहि, व उनब्बिकुम बिमा ताकुलूना वमा तद्दखिरूना फी बुयूतिकुम, इन्ना फी ज़ालिका ल-आयतल लकुम इन कुन्तुम मुमिनीन।
(और वो बनी इसराइल की तरफ रसूल होगा (ये कहते हुए) कि मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से निशानी लाया हूं कि मैं तुम्हारे लिए मिट्टी से परिंदे जैसी मूरत बनाता हूं फिर उसमें फूंक मारता हूं तो वो अल्लाह के हुक्म से परिंदा बन जाती है; और मैं मादरज़ाद अंधे और कोढ़ी को अच्छा करता हूं और अल्लाह के हुक्म से मुर्दों को ज़िंदा करता हूं; और तुम्हें बताता हूं जो तुम खाते हो और जो तुम अपने घरों में जमा करते हो; बेशक इसमें तुम्हारे लिए निशानी है अगर तुम ईमान वाले हो।)व मुसद्दिकल लिमा बैना यदय्या मिनत तौराति व लि-उहिल्ला लकुम बाज़ल लज़ी हुर्रिमा अलैकुम, व जीतुकुम बि-आयतित मिर रब्बिकुम फत्तकुल्लाहा व अतीऊन।
(और मैं तस्दीक करने वाला हूं उसकी जो मुझसे पहले तौरात है और ताकि मैं तुम्हारे लिए बाज़ वो चीज़ें हलाल करूं जो तुम पर हराम की गई थीं; और मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से निशानी लाया हूं; तो अल्लाह से डरो और मेरी तात करो।)
Surah Al-Imran Last 2 Ayat in Hindi
सूरह आले इमरान की आखिरी आयतें सब्र और कामयाबी का दर्स देती हैं।
व इन्ना मिन अहलिल किताबि लमय युअमिनु बिल्लाहि वमा उन्ज़िला इलैकुम वमा उन्ज़िला इलैहिम ख़ाशि’ईना लिल्लाहि ला यश्तरूना बिआयातिल्लाहि समनन क़लीला, उलाइका लहुम अज्रुहुम इन्दा रब्बिहिम, इन्नल्लाहा सरीउल हिसाब।
(और बेशक अहले किताब में से कुछ ऐसे भी हैं जो अल्लाह पर ईमान लाते हैं और उस पर भी जो तुम्हारी तरफ नाज़िल किया गया और उस पर भी जो उनकी तरफ नाज़िल किया गया, अल्लाह के आगे झुके हुए हैं, अल्लाह की आयतों को थोड़ी कीमत पर नहीं बेचते। यही लोग हैं जिनके लिए उनके रब के पास उनका अज्र है। बेशक अल्लाह जल्द हिसाब लेने वाला है।)या अय्युहल लज़ीना आमनुसबिरू व साबिरू व राबितू, वत्तकुल्लाहा ल’अल्लकुम तुफ़लिहून।
(ऐ ईमान वालो! सब्र करो और (मुकाबले में) जमे रहो और (सरहदों पर) तैयार रहो, और अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब हो जाओ।)
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. इस सूरह का नाम आले इमरान क्यों है?
इस सूरह में हज़रत मरियम (अ.) के वालिद “इमरान” और उनके खानदान का ज़िक्र है, इसलिए इसे “आले इमरान” (इमरान का खानदान) कहा जाता है।
Q. सूरह आले इमरान का खास पैगाम क्या है?
इस सूरह का खास पैगाam तौहीद पर साबित-कदम रहना, अंबिया पर ईमान लाना और हक़ के रास्ते में आने वाली मुश्किलों पर सब्र करना है।
Q. क्या यह सूरह जुम्मे के दिन पढ़ना बेहतर है?
हदीस में जुम्मे के दिन सूरह कहफ़ पढ़ने की खास फजीलत आई है। सूरह आले इमरान किसी भी दिन पढ़ी जा सकती है, और इसका बहुत सवाब है।
नतीजा (Conclusion)
सूरह आले इमरान ईमान को मज़बूत करने और अल्लाह पर तवक्कुल सिखाने वाली एक अज़ीम सूरह है। हमें इसे समझकर पढ़ने और इसकी दुआओं को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए।
अल्लाह हमें कुरान से हिदायत हासिल करने की तौफीक दे। आमीन।





