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Iffat Zia
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Surah Al-Balad in Hindi: सूरह बलद की फजीलत और तर्जुमा

Surah Al-Balad in Hindi: जानिए सूरह बलद की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। इस सूरह में अल्लाह ने इंसान की मशक्कत और दो रास्तों का ज़िक्र किया है।

Surah Al-Balad in Hindi: सूरह बलद की फजीलत और तर्जुमा

Table of Contents

सूरह अल-बलद (Surah Al-Balad) कुरान मजीद की 90वीं सूरह है। “बलद” का मतलब है “शहर” (The City), और यहाँ इससे मुराद मक्का शहर है। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 20 आयतें हैं।

इस सूरह में अल्लाह तआला ने मक्का शहर की कसम खाई है और इंसान की पैदाइश के मकसद को बयान किया है। अल्लाह फरमाता है कि इंसान को मशक्कत (Hardship) में पैदा किया गया है। ज़िंदगी आसान नहीं है, बल्कि एक इम्तिहान है। इसके साथ ही अल्लाह ने कामयाबी का रास्ता भी बताया है, जो थोड़ा मुश्किल है लेकिन जन्नत की तरफ ले जाता है - और वह है गरीबों, यतीमों और ज़रूरतमंदों की मदद करना।

इस आर्टिकल में हम Surah Al-Balad in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।

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सूरह बलद की फजीलत (Benefits of Surah Al-Balad)

  1. ज़िंदगी की हकीकत: यह सूरह हमें समझाती है कि दुनिया में इंसान को तकलीफ और मेहनत का सामना करना ही पड़ेगा। यह दुनिया आराम की जगह नहीं, बल्कि इम्तिहान की जगह है।

  2. दो रास्ते (Najdayn): अल्लाह ने इंसान को दो रास्ते दिखाए हैं - एक अच्छाई का और एक बुराई का। हमें चुनना है कि हम किस पर चलते हैं।

  3. असली नेकी: इस सूरह में बताया गया है कि सिर्फ बातें करना नेकी नहीं है, बल्कि असली नेकी यह है कि हम “घाटी” (Aqabah) को पार करें - यानी गुलामों को आज़ाद कराएं, भूखों को खाना खिलाएं और यतीमों का ख्याल रखें।

  4. सब्र और रहम: कामयाबी पाने वाले वो लोग हैं जो खुद भी ईमान लाते हैं और दूसरों को भी सब्र और रहम (Compassion) की ताकीद करते हैं।


Surah Al-Balad in Hindi (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. ला उक़्सिमु बि-हाज़ल-बलद।
    (मैं कसम खाता हूँ इस शहर (मक्का) की।)

  2. व अन्ता हिल्लुन बि-हाज़ल-बलद।
    (और (ऐ नबी!) आप इस शहर में रहने वाले हैं।)

  3. व वालिदिन व मा वलद।
    (और कसम है बाप (आदम अ.स. या इब्राहिम अ.स.) की और जो औलाद उसने जनी।)

  4. लक़द ख़लक़्नल-इन्साना फ़ी कबद।
    (बेशक हमने इंसान को मशक्कत (तकलीफ/मेहनत) में पैदा किया है।)

  5. अ-यह्सबु अल्लन यक़्दिरा अलैहि अहद।
    (क्या वह गुमान करता है कि उस पर कोई काबू नहीं पा सकेगा?)

  6. यक़ूलु अहलक्तु मालन लुबदा।
    (वह कहता है: “मैंने ढेर सारा माल बर्बाद कर दिया।”)

  7. अ-यह्सबु अल्लम यरा-हू अहद।
    (क्या वह समझता है कि उसे किसी ने नहीं देखा?)

  8. अलम नज्अल्-लहू अइनैन।
    (क्या हमने उसे दो आँखें नहीं दीं?)

  9. व लिसानन व शफ़तैन।
    (और एक ज़बान और दो होंठ?)

  10. व हदैनाहुन-नज्दैन।
    (और हमने उसे दो रास्ते (अच्छाई और बुराई के) दिखा दिए।)

  11. फ़लक़-तह़मल-अक़बह।
    (मगर उसने उस घाटी (मुश्किल रास्ते) को पार करने की हिम्मत नहीं की।)

  12. व मा अद्राका मल-अक़बह।
    (और तुम्हें क्या मालूम कि वह घाटी क्या है?)

  13. फ़क्कु रक़बह।
    (किसी गर्दन (गुलाम) को आज़ाद कराना।)

  14. अव इत्आमुन फ़ी यौमिन ज़ी मस्ग़बह।
    (या भूख वाले दिन खाना खिलाना।)

  15. यतीमन ज़ा मक़्रबह।
    (किसी रिश्तेदार यतीम को।)

  16. अव मिस्कीनन् ज़ा मत्रबह।
    (या किसी ऐसे गरीब को जो मिट्टी में मिला हुआ हो (बहुत लाचार हो)।)

  17. सुम्मा काना मिनल्लज़ीना आमनू व तवासौ बिस्सब्रि व तवासौ बिल-मरह़मह।
    (फिर वह उन लोगों में शामिल हो जाए जो ईमान लाए और एक-दूसरे को सब्र की ताकीद की और एक-दूसरे को रहम की ताकीद की।)

  18. उलाइका अस्हाबुल-मैमनह।
    (यही लोग दाहिने हाथ वाले (खुशनसीब) हैं।)

  19. वल्लज़ीना कफ़रू बि-आयातिना हुम अस्हाबुल-मश्अमह।
    (और जिन्होंने हमारी आयतों का इनकार किया, वो बाएं हाथ वाले (बदनसीब) हैं।)

  20. अलैहिम नारुम-मुअ्सदह।
    (उन पर आग होगी जो चारों तरफ से बंद होगी।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह बलद का मतलब क्या है?
A.

“बलद” का मतलब “शहर” होता है। यहाँ अल्लाह ने मक्का शहर की कसम खाई है, जो बहुत मुकद्दस (पवित्र) जगह है।

Q. 'इंसान को मशक्कत में पैदा किया' (Fi Kabad) का क्या मतलब है?
A.

इसका मतलब है कि इंसान की ज़िंदगी फूलों की सेज नहीं है। उसे दुनिया में मेहनत, तकलीफ और आज़माइशों का सामना करना पड़ता है। यह दुनिया आराम की जगह नहीं है, असली आराम जन्नत में है।

Q. 'अक़बह' (घाटी) क्या है?
A.

“अक़बह” एक मुश्किल पहाड़ी रास्ता या घाटी है। यहाँ इसका मतलब वह नेक काम हैं जो नफ़्स (मन) पर भारी पड़ते हैं, जैसे अपना माल खर्च करके गुलाम आज़ाद करना, भूखों को खाना खिलाना और गरीबों की मदद करना। जो इस मुश्किल रास्ते को पार करता है, वही कामयाब है।

Q. इस सूरह का मुख्य संदेश क्या है?
A.

इस सूरह का मुख्य संदेश यह है कि अल्लाह ने हमें सब कुछ दिया है (आँखें, ज़बान, समझ)। अब हमें चाहिए कि हम आसान और बुरे रास्ते को छोड़कर, नेकी का मुश्किल रास्ता चुनें - यानी ईमान लाएं, सब्र करें और मानवता की सेवा करें।


नतीजा (Conclusion)

सूरह बलद हमें ज़िंदगी की सच्चाई बताती है। हम यहाँ सिर्फ खाने-पीने और ऐश करने नहीं आए हैं, बल्कि मेहनत और इम्तिहान के लिए आए हैं।

अल्लाह ने हमें दो रास्ते दिखाए हैं। एक रास्ता आसान लगता है लेकिन तबाही की तरफ जाता है। दूसरा रास्ता “घाटी” (Aqabah) जैसा मुश्किल लगता है - जिसमें अपना माल खर्च करना पड़ता है, गरीबों का दर्द समझना पड़ता है और सब्र करना पड़ता है - लेकिन यही रास्ता जन्नत की तरफ जाता है।

हमें चाहिए कि हम अपनी दौलत और ताकत पर घमंड न करें, बल्कि उसे अल्लाह के रास्ते में और ज़रूरतमंदों की मदद में लगाएं।

अल्लाह हमें ‘अक़बह’ को पार करने की हिम्मत दे और हमें दाहिने हाथ वालों (Ashabul Maimanah) में शामिल करे। आमीन।

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