Surah Abasa in Hindi: सूरह अबस की फजीलत और तर्जुमा
Surah Abasa in Hindi: जानिए सूरह अबस की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। इस सूरह में अल्लाह ने सिखाया है कि हिदायत के तलबगार की कद्र करनी चाहिए, चाहे वह गरीब या नेत्रहीन ही क्यों न हो।

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सूरह अबस (Surah Abasa) कुरान मजीद की 80वीं सूरह है। “अबस” का मतलब है “उसने तेवरी चढ़ाई” (He Frowned)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 42 आयतें हैं।
इस सूरह के नाज़िल होने की वजह बहुत खास है। एक बार हमारे प्यारे नबी (स.अ.व.) मक्का के बड़े सरदारों को इस्लाम की दावत दे रहे थे। उसी वक्त एक नेत्रहीन (अंधे) सहाबी, हज़रत अब्दुल्लाह बिन उम्म-ए-मक्तूम (र.अ.) आए और दीन की कोई बात पूछने लगे। नबी (स.अ.व.) को यह रुकावट थोड़ी नागवार गुज़री और उन्होंने अपना चेहरा फेर लिया। इस पर अल्लाह ने यह सूरह नाज़िल की और प्यार से अपने नबी को समझाया कि जो शख्स हिदायत का तलबगार है, वह उन लापरवाह सरदारों से कहीं ज़्यादा अहम है।
इस आर्टिकल में हम Surah Abasa in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।
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सूरह अबस की फजीलत (Benefits of Surah Abasa)
इंसान की बराबरी: यह सूरह बताती है कि अल्लाह के नज़दीक इज़्ज़त का मयार (Standard) दौलत या ताकत नहीं, बल्कि ‘तलब’ और ‘तक़्वा’ (परहेज़गारी) है।
हिदायत की कद्र: हमें सिखाया गया है कि जो दीन सीखना चाहता है, उसे अहमियत देनी चाहिए, चाहे वह समाज में कमज़ोर ही क्यों न समझा जाता हो।
अल्लाह की नेमतें: इसमें इंसान को याद दिलाया गया है कि वह एक मामूली बूंद से बना है और अल्लाह ने उसके लिए ज़मीन से तरह-तरह के अनाज और फल उगाए हैं।
कयामत की अफरा-तफरी: आखिर में कयामत का नक्शा खींचा गया है जब इंसान अपने सगे भाई, माँ-बाप और बीवी-बच्चों से भी भागेगा।
Surah Abasa in Hindi (Transliteration & Translation)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अबसा व तवल्ला।
(उसने (नबी ने) तेवरी चढ़ाई (माथे पर बल डाला) और मुँह फेर लिया।)अन जा-अहुल-अअ्मा।
(कि उसके पास वह अंधा आया।)व मा युद्रीका ल-अल्लहू यज़्ज़क्का।
(और आपको क्या मालूम शायद वह सुधर जाता (पाक हो जाता)?)औ यज़्ज़क्करु फ़-तन्फ़-अहुज़-ज़िक्रा।
(या नसीहत सुनता तो नसीहत उसे फायदा देती।)अम्मा मनिस्तग़्ना।
(जो परवाह नहीं कर रहा (बे-नियाज़ है)।)फ़-अन्ता लहू तसड्डा।
(आप उसके पीछे पड़े हैं (उसे सुना रहे हैं)।)व मा अलैका अल्ला यज़्ज़क्का।
(हालांकि अगर वह न सुधरे तो आप पर कोई ज़िम्मेदारी नहीं।)व अम्मा मन जा-अका यस्-आ।
(और जो आपके पास दौड़ता हुआ आया।)व हुवा यख़्शा।
(और वह (अल्लाह से) डरता है।)फ़-अन्ता अन्हु तलह्-हा।
(तो आप उससे बे-रुखी बरतते हैं।)कल्ला इन्नहा तज़किरह।
(हरगिज़ नहीं! यह (कुरान) तो एक नसीहत है।)फ़-मन शा-अ ज़करह।
(तो जो चाहे इसे याद रखे।)फी सुहुफ़िम-मुकर्र-मह।
(यह इज्ज़त वाले सहीफों में है।)मरफ़ू-अतिम-मुतह्-हरह।
(जो बुलंद और पाक हैं।)बि-ऐदी सफ़रह।
(लिखने वालों (फरिश्तों) के हाथों में।)किरामिम-बररह।
(जो बुजुर्ग और नेक हैं।)कुतिलल-इन्सानु मा अकफ़रह।
(इंसान मारा जाए (बर्बाद हो), वह कितना ना-शुकरा है!)मिन अय्यि शय-इन ख़लक़ह।
(अल्लाह ने उसे किस चीज़ से पैदा किया?)मिन नुत्फ़तिन ख़लक़हू फ़-क़द्दरह।
(एक बूंद से उसे पैदा किया, फिर उसका अंदाज़ा मुकर्रर किया।)सुम्मस-सबीला यस्सरह।
(फिर उसके लिए रास्ता आसान किया।)सुम्मा अमातहू फ़-अक़बरह।
(फिर उसे मौत दी और कब्र में पहुँचाया।)सुम्मा इज़ा शा-अ अन्शरह।
(फिर जब चाहेगा उसे (दोबारा) उठा खड़ा करेगा।)कल्ला लम्मा यक़्ज़ि मा अमरह।
(हरगिज़ नहीं! उसने अभी तक वह पूरा नहीं किया जिसका उसे हुक्म दिया गया था।)फ़ल-यन्ज़ुरिल-इन्सानु इला त-आमिह।
(तो इंसान को अपने खाने की तरफ देखना चाहिए।)अन्ना सबब्नल-मा-अ सब्बा।
(कि हमने खूब पानी बरसाया।)सुम्मा शक़क़्नल-अर्ज़ा शक़्क़ा।
(फिर ज़मीन को अच्छी तरह फाड़ा।)फ़-अम्बत्ना फीहा हब्बा।
(फिर उसमें अनाज उगाया।)व इनबंव-व क़ज़्बा।
(और अंगूर और तरकारी (साग-सब्जी)।)व ज़ैतूनंव-व नख़्ला।
(और जैतून और खजूर।)व हदा-इक़ गुल्बा।
(और घने बाग़।)व फ़ाकिहतंव-व अब्बा।
(और फल और चारा।)मता-अल-लकुम व लि-अन्-आमिकुम।
(तुम्हारे और तुम्हारे मवेशियों के फायदे के लिए।)फ़-इज़ा जा-अतिस-साख़्ख़ह।
(फिर जब वह कान फाड़ देने वाली आवाज़ (कयामत) आएगी।)यौमा यफ़िर्रुल-मर-उ मिन अख़ीह।
(जिस दिन आदमी अपने भाई से भागेगा।)व उम्मिही व अबीह।
(और अपनी माँ और अपने बाप से।)व साहिबतिही व बनीह।
(और अपनी बीवी और अपने बेटों से।)लि-कुल्लिम-रि-इम-मिन्हुम यौमइज़िन शानुंय-युग़्नीह।
(उस दिन उनमें से हर शख्स को ऐसी फिक्र होगी जो उसे (दूसरों से) बे-परवाह कर देगी।)वुजूहुंय-यौमइज़िम-मुस्फ़िरह।
(उस दिन बहुत से चेहरे चमक रहे होंगे।)ज़ाहिकतुम-मुस्तब्शिरह।
(हंसते हुए, खुशखबरी पाते हुए।)व वुजूहुंय-यौमइज़िन अलैहा ग़बरह।
(और बहुत से चेहरों पर उस दिन धूल पड़ी होगी।)तरहक़ुहा क़तरह।
(उन पर कालिख (स्याही) छाई होगी।)उलाइका हुमुल-कफ़रतुल-फ़जरह।
(यही वो लोग हैं जो काफिर और बदकार हैं।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह अबस का मतलब क्या है?
“अबस” का मतलब है “उसने तेवरी चढ़ाई” या “उसने माथे पर बल डाला”। यह सूरह की पहली आयत का पहला लफ्ज़ है।
Q. यह सूरह किस वाकये पर नाज़िल हुई?
यह सूरह उस वक्त नाज़िल हुई जब नबी (स.अ.व.) कुरैश के सरदारों को दावत दे रहे थे और एक नेत्रहीन सहाबी अब्दुल्लाह बिन उम्म-ए-मक्तूम (र.अ.) ने आकर कुछ पूछना चाहा। नबी (स.अ.व.) ने थोड़ा नापसंद किया, जिस पर अल्लाह ने यह आयतें नाज़िल कीं।
Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
इस सूरह का असल पैगाम यह है कि इस्लाम में अमीर-गरीब का कोई फर्क नहीं है। जो शख्स दीन सीखने की तड़प रखता है, वही अल्लाह के नज़दीक कीमती है। साथ ही, इसमें कयामत की सख्ती का ज़िक्र है जब हर कोई अपनी जान बचाने की फिक्र में होगा।
नतीजा (Conclusion)
सूरह अबस हमें सिखाती है कि हमें लोगों के ज़ाहिरी रुतबे से मुतास्सिर (Impress) नहीं होना चाहिए। अल्लाह दिलों को देखता है।
इसके अलावा, यह सूरह हमें अल्लाह की नेमतों (खाना, पानी, फल) पर गौर करने की दावत देती है और कयामत के उस दिन से डराती है जब कोई रिश्ता काम नहीं आएगा।
अल्लाह हमें हिदायत की कद्र करने और कयामत की तैयारी करने की तौफीक दे। आमीन।





