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Iffat Zia
· Akhlaq · 5 min read

Shohar Biwi Ka Rishta: इस्लाम में पति-पत्नी के हुकूक और मोहब्बत

Shohar Biwi Ka Rishta: जानिए इस्लाम में पति-पत्नी के रिश्ते की अहमियत, उनके हुकूक और एक खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के राज़।

Shohar Biwi Ka Rishta: इस्लाम में पति-पत्नी के हुकूक और मोहब्बत

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शौहर और बीवी (Husband and Wife) का रिश्ता दुनिया के सबसे खूबसूरत और मज़बूत रिश्तों में से एक है। इस्लाम ने इस रिश्ते को “मवद्दत” (मोहब्बत) और “रहमत” (रहम) का नाम दिया है। यह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलाप और एक नई नस्ल की शुरुआत है।

अक्सर जानकारी न होने की वजह से इस प्यारे रिश्ते में दरारें आ जाती हैं। अगर शौहर और बीवी दोनों अपने-अपने हुकूक (अधिकार) और फ़र्ज़ (ज़िम्मेदारियां) समझ लें, तो घर जन्नत बन सकता है।

इस आर्टिकल में हम Shohar Biwi Ka Rishta, उनके हुकूक और खुशहाल ज़िंदगी गुज़ारने के इस्लामी उसूल जानेंगे।

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इस्लाम में शौहर-बीवी का मक़ाम

कुरान मजीद में अल्लाह तआला फरमाता है:

“और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स से जोड़े बनाए ताकि तुम उनसे सुकून हासिल करो और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत डाल दी।” (सूरह अर-रूम: 21)

यह आयत बताती है कि शादी का असल मकसद सुकून (Peace) है। शौहर बीवी का लिबास है और बीवी शौहर का लिबास है (एक-दूसरे के ऐब छुपाने वाले और ज़ीनत बनने वाले)।

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शौहर के हुकूक (Rights of Husband)

इस्लाम ने घर का ज़िम्मेदार (Qawwam) शौहर को बनाया है, इसलिए उसके कुछ खास हुकूक हैं:

  1. इताअत (Obedience): बीवी पर लाज़िम है कि वो जायज़ कामों में शौहर की बात माने।
  2. इज़्ज़त और एहतराम: शौहर के मान-सम्मान का ख्याल रखे और उसकी गैर-मौजूदगी में उसके घर और माल की हिफाज़त करे।
  3. शुक्रगुज़ारी: शौहर जो कमा कर लाए उस पर राज़ी रहे और ना-शुकरी न करे।
  4. इजाज़त: घर से बाहर जाने या किसी को घर में बुलाने के लिए शौहर की रज़ामंदी ज़रूरी है।

बीवी के हुकूक (Rights of Wife)

शौहर पर भी बीवी के बहुत से हुकूक हैं, जिन्हें पूरा करना इबादत है:

  1. नानो-नफ़्क़ा (Maintenance): बीवी के रहने, खाने-पीने और कपड़ों का खर्च उठाना शौहर पर फ़र्ज़ है।
  2. हुस्न-ए-सुलूक (Good Behavior): नबी (स.अ.व.) ने फरमाया: “तुम में सबसे बेहतर वो है जो अपने घर वालों (बीवी) के लिए सबसे बेहतर है।” (तिर्मिज़ी)
  3. सब्र और नरमी: अगर बीवी से कोई गलती हो जाए तो मार-पीट या गाली-गलौज के बजाय नरमी से समझाए।
  4. वक़्त देना: अपनी मसरूफियत में से बीवी के लिए वक़्त निकालना और उससे अच्छी बातें करना सुन्नत है।

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शौहर-बीवी की मोहब्बत (Love and Understanding)

इस्लाम में शौहर और बीवी के दरमियान मोहब्बत को बहुत पसंद किया गया है। नबी (स.अ.व.) अपनी अज़वाज-ए-मुतहरात (बीवियों) से बहुत मोहब्बत करते थे और उनके साथ हंसी-मज़ाक भी किया करते थे।

एक खुशहाल घर के लिए ज़रूरी है कि दोनों एक-दूसरे के जज़्बात को समझें। शौहर को चाहिए कि घर के कामों में बीवी का हाथ बटाए, जैसा कि नबी (स.अ.व.) किया करते थे। और बीवी को चाहिए कि शौहर की परेशानियों को समझे और उसका हौसला बढ़ाए।


आज के दौर में शौहर-बीवी के मसाइल (Modern Day Challenges)

आजकल मोबाइल और सोशल मीडिया ने शौहर-बीवी के रिश्ते में दूरियां पैदा कर दी हैं।

  1. मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल: अक्सर शौहर या बीवी एक-दूसरे को वक़्त देने के बजाय मोबाइल में लगे रहते हैं, जिससे शक और नाराजगी पैदा होती है। जब साथ हों, तो मोबाइल को दूर रखें।
  2. पर्दा और सोशल मीडिया: अपनी निजी ज़िंदगी या तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करना नज़र लगने और फितने का सबब बनता है। अपनी खुशियों को नज़र से बचाएं।
  3. सब्र की कमी: आजकल छोटी-छोटी बातों पर झगड़े और तलाक की नौबत आ जाती है। हमें सब्र और बर्दाश्त से काम लेना चाहिए और गुस्से को पीना सीखना चाहिए।

खुशहाल ज़िंदगी के 3 सुनहरे उसूल

  1. माफ करना सीखें: कोई भी इंसान कामिल (Perfect) नहीं होता। एक-दूसरे की छोटी-मोटी गलतियों को नज़रअंदाज़ करें।
  2. बातचीत (Communication): खामोशी से दूरियां बढ़ती हैं। अपने मसले आपस में बैठकर सुलझाएं, तीसरे को बीच में न लाएं।
  3. अल्लाह का डर: जब दोनों के दिलों में अल्लाह का डर होगा, तो वो एक-दूसरे पर ज़ुल्म नहीं करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या बीवी पर शौहर के माँ-बाप की खिदमत फ़र्ज़ है?
A.

इस्लामी शरीयत के मुताबिक बीवी पर शौहर के माँ-बाप की खिदमत फ़र्ज़ नहीं है, यह उसकी अख्लाकी ज़िम्मेदारी (Moral Duty) है। अगर वो अपनी खुशी से करती है तो यह उसके लिए बहुत बड़े सवाब का काम है और इससे शौहर का दिल खुश होता है।

Q. अगर शौहर मार-पीट करे तो बीवी क्या करे?
A.

इस्लाम में बीवी पर हाथ उठाना या ज़ुल्म करना सख्त मना है। अगर शौहर ज़ालिम है, तो बीवी को हक़ है कि वो अपने बड़ों के ज़रिए उसे समझाए या शरई तौर पर अपना बचाव करे।

Q. शौहर को खुश करने का आसान तरीका क्या है?
A.

शौहर को खुश करने के लिए उसकी पसंद का ख्याल रखना, जब वो घर आए तो मुस्कुरा कर मिलना और उसकी बात मानना काफी है।


नतीजा (Conclusion)

शौहर और बीवी का रिश्ता गाड़ी के दो पहियों की तरह है। अगर एक डगमगाए तो दूसरे को संभालना पड़ता है। दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है, इसलिए एक-दूसरे का सहारा बनें ताकि दुनिया भी संवर जाए और आखिरत भी।

अल्लाह हर जोड़े के दरमियान मोहब्बत और इत्तेफाक पैदा फरमाए और हमारे घरों को अमन का गहवारा बनाए। आमीन।

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