· Iffat Zia · Akhlaq · 3 min read
Shaddad Ki Jannat Ka Waqia - शद्दाद की जन्नत और उसका इबरतनाक अंजाम
Shaddad Ki Jannat: पढ़िए उस बादशाह का इबरतनाक वाकया जिसने दुनिया में जन्नत बनाई। जानिए शद्दाद कौन था, उसकी जन्नत कहाँ है और उसका क्या अंजाम हुआ?

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इस्लामी तारीख में ऐसे कई वाकयात मिलते हैं जो हमें अल्लाह की कुदरत और तकब्बुर (घमंड) के बुरे अंजाम से आगाह करते हैं। ऐसा ही एक मशहूर वाकया शद्दाद की जन्नत (Shaddad Ki Jannat) का है।
शद्दाद एक ऐसा बादशाह था जिसने अल्लाह की जन्नत के मुकाबले में दुनिया में ही अपनी जन्नत बना डाली। लेकिन क्या वह उसमें दाखिल हो पाया? आइए इस इबरतनाक वाकये को तफसील से जानते हैं।
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शद्दाद कौन था? (Who was Shaddad?)
शद्दाद, कौम-ए-आद का बादशाह था। यह कौम यमन के इलाके में ‘इरम’ नाम की बस्ती में रहती थी। अल्लाह ने इस कौम की हिदायत के लिए हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) को भेजा था।
शद्दाद का एक भाई था जिसका नाम शदीद था। दोनों ने मिलकर दुनिया के बड़े हिस्से पर हुकूमत की। शदीद की मौत के बाद शद्दाद अकेला बादशाह बन गया और उसकी ताकत और दौलत का नशा इतना बढ़ा कि उसने खुदाई का दावा कर दिया।
दुनिया में जन्नत बनाने का फैसला
जब हज़रत हूद (अ.) ने उसे अल्लाह पर ईमान लाने और आखिरत की जन्नत का यकीन करने की दावत दी, तो उसने तकब्बुर में आकर कहा, “मुझे तेरे रब की जन्नत की ज़रूरत नहीं, मैं ऐसी जन्नत दुनिया में ही बना सकता हूँ।“
शद्दाद की जन्नत कैसी थी?
शद्दाद ने अपनी पूरी सल्तनत को हुक्म दिया कि सोना, चांदी, हीरे, जवाहरात जमा किए जाएं।
- उसने एक बहुत बड़ा शहर बनाने का हुक्म दिया।
- शहर की दीवारें और महल सोने-चांदी की ईंटों से बनाए गए।
- खम्भों को कीमती पत्थरों से सजाया गया।
- शहर के बीच में नहरें बनवाई गईं और हर महल तक पानी पहुंचाया गया।
- ज़मीन पर रेशम के कालीन बिछाए गए और हर तरफ खुशबू का इंतज़ाम किया गया।
रिवायतों में आता है कि इस जन्नत को बनाने में कई साल लगे और शद्दाद की उम्र भी बहुत लंबी थी (लगभग 900 साल)।
शद्दाद का अंजाम
जब जन्नत बनकर तैयार हो गई, तो शद्दाद अपनी पूरी फ़ौज और शान-ओ-शौकत के साथ उसका दीदार करने निकला।
जब वह शहर के दरवाज़े पर पहुंचा और अंदर दाखिल होने के लिए घोड़े से एक पैर रकाब में और दूसरा पैर जन्नत की चौखट पर रखा ही था कि उसे एक अजनबी शख्स नज़र आया।
शद्दाद ने पूछा, “तू कौन है?” उस शख्स ने जवाब दिया, “मैं मलकुल मौत (मौत का फरिश्ता) हूँ।” शद्दाद ने घबराकर कहा, “मुझे इतनी मोहलत दे दो कि मैं अपनी बनाई हुई जन्नत को एक नज़र देख लूँ।” फरिश्ते ने जवाब दिया, “मुझे इसकी इजाज़त नहीं।”
लिहाज़ा, शद्दाद का एक पैर घोड़े पर और दूसरा जन्नत की दहलीज़ पर ही था कि उसकी रूह कब्ज़ कर ली गई।
जन्नत का क्या हुआ?
शद्दाद की मौत के बाद अल्लाह के हुक्म से हज़रत जिब्रील (अ.) ने एक भयानक चीख मारी, जिससे वह पूरा शहर और उसमें मौजूद तमाम लोग ज़मीन में धंस गए और उसका नाम-ओ-निशान मिट गया।
इस वाकये से सबक
- तकब्बुर का अंजाम: घमंड और गुरूर इंसान को तबाह कर देता है।
- अल्लाह की कुदरत: कोई इंसान अल्लाह की ताकत का मुकाबला नहीं कर सकता।
- दुनिया फानी है: दुनिया की दौलत और शान-ओ-शौकत यहीं रह जानी है। असल कामयाबी आखिरत की कामयाबी है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. शद्दाद कौन था?
Q. शद्दाद की जन्नत कहाँ थी?
Q. क्या शद्दाद की जन्नत आज भी मौजूद है?
नहीं, अल्लाह ने उसे और उसकी जन्नत को ज़मीन में धंसा दिया था। उसका कोई नाम-ओ-निशान बाकी नहीं है।
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