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Shab-e-Qadr Ki Dua: शब-ए-कद्र की फजीलत, निशानी और इबादत
Shab-e-Qadr Ki Dua: शब-ए-कद्र (लैलतुल कद्र) की रात 1000 महीनों से बेहतर है। जानिए शब-ए-कद्र की दुआ, फजीलत, निशानियां और इबादत करने का सही तरीका।

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शब-ए-कद्र (Shab-e-Qadr) या लैलतुल कद्र (Laylatul Qadr) रमज़ान के महीने की वो मुबारक रात है जिसकी फजीलत कुरान में 1000 महीनों (तकरीबन 83 साल) से बेहतर बताई गई है।
अल्लाह कुरान में फरमाता है: “बेशक हमने इसे (कुरान को) शब-ए-कद्र में नाज़िल किया… शब-ए-कद्र हज़ार महीनों से बेहतर है।” (सूरह कद्र)
इस आर्टिकल में हम Shab-e-Qadr Ki Dua, इसकी फजीलत, निशानियां और इबादत का तरीका जानेंगे।
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शब-ए-कद्र की फजीलत (Virtues of Laylatul Qadr)
- गुनाहों की माफ़ी: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “जो शख्स शब-ए-कद्र में ईमान और सवाब की नीयत से इबादत के लिए खड़ा हुआ, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।” (बुखारी)
- हज़ार महीनों से बेहतर: इस एक रात की इबादत 83 साल 4 महीने की इबादत से ज़्यादा अफज़ल है।
- फैसलों की रात: इस रात अगले साल होने वाले तमाम वाकियात (मौत, हयात, रिज़्क़) के फैसले फरिश्तों के हवाले किए जाते हैं।
- फरिश्तों का नुज़ूल: इस रात जिब्रईल (अ.स.) और फरिश्ते अल्लाह के हुक्म से हर काम के लिए ज़मीन पर उतरते हैं।
शब-ए-कद्र कब होती है? (When is Shab-e-Qadr?)
नबी (ﷺ) ने फरमाया: “शब-ए-कद्र को रमज़ान के आखिरी अशरे (आखिरी 10 दिन) की ताक (Odd) रातों में तलाश करो।”
ये रातें हैं:
- 21वीं रात
- 23वीं रात
- 25वीं रात
- 27वीं रात
- 29वीं रात
अक्सर लोग सिर्फ 27वीं रात को ही शब-ए-कद्र समझते हैं, जबकि यह इन 5 रातों में से कोई भी हो सकती है। इसलिए समझदारी इसी में है कि आखिरी अशरे की हर ताक रात में इबादत की जाए।
शब-ए-कद्र की दुआ (Shab-e-Qadr Dua)
हज़रत आयशा (र.अ.) ने नबी (ﷺ) से पूछा: “या रसूलअल्लाह! अगर मुझे शब-ए-कद्र मिल जाए तो मैं क्या दुआ मांगूँ?” आप (ﷺ) ने फरमाया, यह दुआ पढ़ो:
“اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي”
“अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफवा फ-अफु अन्नी”
(ऐ अल्लाह! तू बेशक माफ़ करने वाला है और माफ़ी को पसंद करता है, बस मुझे भी माफ़ फरमा दे।)
शब-ए-कद्र की निशानियां (Signs of Laylatul Qadr)
हदीस में इस रात की कुछ निशानियां बताई गई हैं:
- मौसम: यह रात न बहुत गर्म होती है और न बहुत ठंडी, बल्कि मौसम खुशगवार (Moderate) होता है।
- सुकून: इस रात में एक खास सुकून और शांति होती है।
- सूरज: अगली सुबह जब सूरज निकलता है, तो उसकी किरणें (Rays) तेज़ नहीं होतीं, वह एक थाल की तरह हमवार और बिना शोआओं के होता है।
शब-ए-कद्र में इबादत कैसे करें?
- नमाज़: ईशा और फज्र की नमाज़ जमात से पढ़ें। और रात में नफ़िल नमाज़ (तहज्जुद, सलात-उत-तौबा, सलात-उल-हाजत) पढ़ें।
- कुरान की तिलावत: कसरत से कुरान पढ़ें, खासकर सूरह कद्र और सूरह इखलास।
- दुआ और इस्तिगफार: अपने गुनाहों की माफ़ी मांगें और ऊपर बताई गई दुआ कसरत से पढ़ें।
- ज़िक्र: सुभानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर और ला इलाहा इल्लल्लाह का विर्द करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या शब-ए-कद्र सिर्फ 27वीं रात को होती है?
नहीं, यह रमज़ान की आखिरी 10 रातों में से किसी भी ताक (Odd) रात (21, 23, 25, 27, 29) में हो सकती है। 27वीं रात की उम्मीद ज़्यादा होती है, लेकिन यकीन नहीं।
Q. अगर किसी को शब-ए-कद्र की निशानी न दिखे तो क्या उसे सवाब मिलेगा?
जी हाँ, निशानी दिखना ज़रूरी नहीं है। अगर आपने ईमान और सवाब की नीयत से उन रातों में इबादत की, तो आपको शब-ए-कद्र का सवाब ज़रूर मिलेगा, चाहे आपको पता चले या न चले।
Q. क्या हैज़ (Periods) की हालत में औरतें शब-ए-कद्र की इबादत कर सकती हैं?
हैज़ की हालत में नमाज़ और कुरान (देखकर या छूकर) पढ़ना मना है। लेकिन औरतें ज़िक्र, दुआ, इस्तिगफार और दरूद शरीफ पढ़ सकती हैं और शब-ए-कद्र की दुआ मांग सकती हैं। उन्हें भी सवाब मिलेगा।
नतीजा (Conclusion)
शब-ए-कद्र अल्लाह का एक बहुत बड़ा तोहफा है। इसे गफलत में न गुज़ारें। अगर पूरी रात जागना मुश्किल हो, तो कम से कम कुछ हिस्सा इबादत में ज़रूर गुज़ारें और अल्लाह से अपने और पूरी उम्मत के लिए माफ़ी मांगें।
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