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Salat ut Tauba Ka Tarika: तौबा की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका और दुआ

Salat ut Tauba Ka Tarika: क्या आपसे कोई गुनाह हो गया है? जानिए सलात-उत-तौबा (तौबा की नमाज़) पढ़ने का सही तरीका, नियत, वक़्त और दुआ।

Salat ut Tauba Ka Tarika: तौबा की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका और दुआ

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इंसान खता का पुतला है। हम से जाने-अनजाने में गुनाह हो ही जाते हैं। लेकिन अल्लाह तआला बहुत मेहरबान और माफ़ करने वाला (Ghafoor-ur-Raheem) है। उसने हमें गुनाहों की माफ़ी के लिए सलात-उत-तौबा (Salat-ut-Tauba) का तोहफा दिया है।

अक्सर लोग पूछते हैं कि Salat ut Tauba Ka Tarika क्या है? क्या इसके लिए कोई खास वक़्त या दुआ है?

इस आर्टिकल में हम तौबा की नमाज़ पढ़ने का सुन्नत तरीका, नियत और दुआ जानेंगे।

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सलात-उत-तौबा क्या है? (What is Salat-ut-Tauba?)

सलात-उत-तौबा (तौबा की नमाज़) एक नफ़िल नमाज़ है जो गुनाह हो जाने पर अल्लाह से माफ़ी मांगने के लिए पढ़ी जाती है।

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “जब किसी बंदे से कोई गुनाह हो जाए, फिर वो अच्छी तरह वुज़ू करे और खड़ा होकर दो रकात नमाज़ पढ़े, फिर अल्लाह से माफ़ी मांगे, तो अल्लाह उसे ज़रूर माफ़ कर देता है।” (सुनन अबू दाऊद)

तौबा की नमाज़ का वक़्त (Time for Prayer)

सलात-उत-तौबा किसी भी वक़्त पढ़ी जा सकती है। जैसे ही गुनाह का एहसास हो, फौरन पढ़ लेना बेहतर है। सिर्फ मकरूह औकात (सूरज निकलने, डूबने और ठीक दोपहर के वक़्त) में नमाज़ न पढ़ें।

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सलात-उत-तौबा की नियत (Niyat)

नियत दिल के इरादे का नाम है। आप दिल में यह सोचें: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ सलात-उत-तौबा की, नफ़िल, वास्ते अल्लाह तआला के, अपने गुनाहों की माफ़ी के लिए, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ।“

Salat ut Tauba Ka Tarika (Step-by-Step)

यह नमाज़ आम नफ़िल नमाज़ की तरह ही पढ़ी जाती है:

  1. तकबीर-ए-तहरीमा: ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ बांध लें।
  2. सना: ‘सुभानकल्लाहुम्मा…’ पढ़ें। पढ़े: सना हिंदी में
  3. किरात: सूरह फातिहा और कोई भी सूरह पढ़ें (जैसे सूरह इखलास)।
  4. रुकू और सज्दा: आम नमाज़ की तरह रुकू और दो सज्दे करें।
  5. दूसरी रकात: दूसरी रकात भी इसी तरह पूरी करें।
  6. सलाम: अत्तहियात, दरूद शरीफ और दुआ पढ़कर सलाम फेर दें।

तौबा की शर्तें (Conditions of Tauba)

सिर्फ जुबान से “तौबा-तौबा” कहना काफी नहीं है। सच्ची तौबा के लिए 3 (और अगर मामला बंदों के हक़ का हो तो 4) शर्तें हैं:

  1. गुनाह को फौरन छोड़ देना: जिस गुनाह की तौबा कर रहे हैं, उसे तुरंत रोक दें।
  2. शर्मिंदगी (Regret): दिल से पछतावा हो कि मैंने अपने रब की नाफरमानी क्यों की।
  3. आइंदा न करने का पक्का इरादा: दिल में ठान लें कि अब दोबारा यह गुनाह नहीं करूँगा।
  4. हक़ अदा करना: अगर किसी का दिल दुखाया है या किसी का माल लिया है, तो उससे माफ़ी मांगें या उसका माल वापस करें। (यह हुकूक-उल-इबाद के लिए ज़रूरी है)।

नमाज़ के बाद क्या करें? (Dua for Tauba)

सलाम फेरने के बाद अल्लाह के सामने खूब रो-गिड़गिड़ा कर अपने गुनाह की माफ़ी मांगें। आप यह दुआ (सैय्यदुल इस्तिगफार) पढ़ सकते हैं या अपनी जुबान में माफ़ी मांग सकते हैं:

“अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह” (मैं अल्लाह से अपने तमाम गुनाहों की बख्शिश मांगता हूँ जो मेरा रब है और उसी की तरफ रुजू करता हूँ।)

इसके अलावा सैय्यदुल इस्तिगफार (Sayyidul Istighfar) पढ़ना भी बहुत अफ़ज़ल है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या सलात-उत-तौबा के लिए कोई खास सूरह ज़रूरी है?
A.

नहीं, आप कुरान की कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं जो आपको याद हो। सूरह काफिरून और सूरह इखलास पढ़ना बेहतर है।

Q. क्या हर गुनाह के बाद यह नमाज़ पढ़ना ज़रूरी है?
A.

ज़रूरी (फ़र्ज़) नहीं है, लेकिन मुस्तहब (बहुत अच्छा) है। इससे अल्लाह जल्दी राज़ी होता है और दिल को सुकून मिलता है।

Q. क्या बिना नमाज़ पढ़े सिर्फ दुआ से तौबा हो सकती है?
A.

जी हाँ, अगर सच्चे दिल से तौबा की जाए तो बिना नमाज़ के भी तौबा कबूल हो जाती है। लेकिन नमाज़ पढ़कर दुआ मांगना ज्यादा तासीर रखता है।

Q. अगर तौबा के बाद दोबारा वही गुनाह हो जाए तो क्या करें?
A.

इंसान कमज़ोर है। अगर दोबारा गुनाह हो जाए, तो मायूस न हों। फौरन दोबारा तौबा करें। अल्लाह बार-बार माफ़ करने वाला है, जब तक कि मौत का वक़्त न आ जाए।

Q. क्या सलात-उत-तौबा जमात के साथ पढ़ सकते हैं?
A.

नहीं, यह नफ़िल नमाज़ है और इसे अकेले (तन्हाई में) पढ़ना ही बेहतर है ताकि आप अल्लाह के सामने खुलकर रो सकें और अपने गुनाहों का इकरार कर सकें।


नतीजा (Conclusion)

सलात-उत-तौबा अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खटखटाने का नाम है। जब भी कोई गलती हो, मायूस न हों, वुज़ू करें और दो रकात पढ़कर अपने रब को मना लें। बेशक वो बड़ा माफ़ करने वाला है।

अल्लाह हम सबको गुनाहों से बचने और सच्ची तौबा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

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