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Safar Me Namaz Ka Tarika: क़स्र नमाज़ के नियम और शर्तें
Safar Me Namaz Ka Tarika: सफ़र में नमाज़ कैसे पढ़ें? जानिए क़स्र नमाज़ (Qasr Namaz) क्या है, कितनी दूर सफ़र पर लागू होती है और इसके ज़रूरी मसाइल।

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अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर बहुत आसानी रखी है। जब इंसान सफ़र (Travel) में होता है, तो उसे पूरी नमाज़ पढ़ने के बजाय कम करके पढ़ने की इजाज़त (बल्कि हुक्म) है। इसे क़स्र नमाज़ (Qasr Namaz) कहते हैं।
इस आर्टिकल में हम Safar Me Namaz Ka Tarika और क़स्र के मसाइल आसान हिंदी में जानेंगे।
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क़स्र नमाज़ (Qasr Namaz) क्या है?
क़स्र का मतलब है ‘कम करना’। सफ़र में 4 रकात वाली फ़र्ज़ नमाज़ को 2 रकात पढ़ना “क़स्र” कहलाता है। यह अल्लाह की तरफ से एक तोहफा और छूट है, इसे कुबूल करना चाहिए।
- ज़ुहर: 4 की जगह 2 रकात फ़र्ज़।
- असर: 4 की जगह 2 रकात फ़र्ज़।
- ईशा: 4 की जगह 2 रकात फ़र्ज़।
- फज्र और मगरिब: इनमें कोई कमी नहीं होगी। फज्र की 2 और मगरिब की 3 रकात पूरी पढ़नी होंगी।
- वित्र: ईशा के वित्र (3 रकात) पूरे पढ़ने होंगे।
सफ़र (Musafir) किसे कहते हैं?
इस्लाम में हर मुसाफिर पर क़स्र लागू नहीं होता। इसके लिए कुछ शर्तें हैं:
- दूरी (Distance): कम से कम 77.25 किलोमीटर (लगभग 48 मील) या उससे ज़्यादा दूर जाने का इरादा हो। (कुछ उलमा 92 km भी मानते हैं, लेकिन एहतियात 78 km में है)।
- इरादा: अपने शहर की आबादी (हदूद) से बाहर निकलने के बाद ही क़स्र शुरू होगी।
- मुद्दत (Duration): जिस जगह जा रहे हैं, वहां 15 दिन से कम रुकने का इरादा हो। अगर 15 दिन या उससे ज़्यादा रुकने का इरादा है, तो पूरी नमाज़ पढ़नी होगी।
Safar Me Namaz Ka Tarika
तरीका बिल्कुल आम नमाज़ जैसा है, बस रकात कम होंगी:
- नियत: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ फ़र्ज़ (क़स्र), वक़्त ज़ुहर/असर/ईशा…”
- बाकी नमाज़ वैसे ही पढ़ें जैसे 2 रकात फज्र पढ़ते हैं (सना, सूरह फातिहा, सूरह, रुकू, सज्दा, और दूसरी रकात के बाद सलाम)।
सुन्नत और नफ़िल का हुक्म
- चलते सफ़र में: अगर सफ़र जारी है (ट्रेन/बस में हैं या जल्दी है), तो सुन्नतें और नफ़िल छोड़ देना माफ़ है। सिर्फ फ़र्ज़ पढ़ें। (फज्र की सुन्नतें पढ़ने की ताकीद है)।
- रुके हुए हैं: अगर मंज़िल पर पहुँच गए हैं या इत्मीनान है, तो सुन्नतें पढ़ना बेहतर है, लेकिन छोड़ भी सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. अगर मुसाफिर इमाम के पीछे नमाज़ पढ़े तो?
अगर मुसाफिर किसी मुकीम (Local) इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ रहा है, तो उसे इमाम के साथ पूरी 4 रकात पढ़नी होंगी। तब क़स्र नहीं करेगा।
Q. अगर सफ़र में नमाज़ कज़ा हो जाए तो घर आकर कैसे पढ़ें?
अगर सफ़र की नमाज़ सफ़र में छूट गई, तो घर आकर भी उसे क़स्र (2 रकात) ही पढ़ेंगे। और अगर घर की नमाज़ छूट गई थी, तो सफ़र में उसे पूरी (4 रकात) पढ़ेंगे।
Q. क्या ट्रेन या बस में बैठकर नमाज़ हो जाती है?
फ़र्ज़ नमाज़ के लिए खड़ा होना और किबला रुख होना ज़रूरी है। अगर ट्रेन में जगह है तो खड़े होकर पढ़ें। अगर बिल्कुल मजबूरी है (भीड़, चक्कर आना), तो बैठकर पढ़ सकते हैं, लेकिन बाद में दोहरा लेना बेहतर है (एहतियातन)।
नतीजा:
सफ़र में नमाज़ माफ़ नहीं है, बल्कि आसान कर दी गई है। अल्लाह की इस सहूलत का फायदा उठाएं और सफ़र में भी नमाज़ की पाबंदी करें।
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