· Iffat Zia · Akhlaq · 4 min read
Sadaqah Ki Fazilat: इस्लाम में सदका और खैरात की अहमियत
Sadaqah Ki Fazilat: जानिए इस्लाम में सदका और खैरात की क्या अहमियत है? इसके फायदे, देने का तरीका और कुरान-ओ-हदीस की रौशनी में इसकी फजीलत।

Table of Contents
सदका (Sadaqah) और खैरात (Charity) इस्लाम के बहुत अहम सुतून हैं। जब कोई मुसलमान अल्लाह की रज़ा के लिए अपने माल में से गरीबों और ज़रूरतमंदों पर खर्च करता है, तो उसे सदका कहते हैं। यह न सिर्फ दूसरों की मदद है, बल्कि खुद अपने लिए दुनिया और आखिरत में सुकून का ज़रिया भी है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Sadaqah Ki Fazilat क्या है, इसे किसे देना चाहिए और इसके क्या फायदे हैं।
ये भी पढ़े: Zakat Kya Hai Aur Kaise Ada Kare | ज़कात की पूरी जानकारी
सदका क्या है? (What is Sadaqah?)
सदका अरबी शब्द “सिदक” (Sidq) से बना है जिसका मतलब है “सच्चाई”। जब हम अपना माल अल्लाह की राह में देते हैं, तो यह हमारे ईमान की सच्चाई का सबूत होता है। सदका सिर्फ पैसे देना नहीं है, बल्कि किसी की मदद करना, मुस्कुराना, या रास्ते से तकलीफदेह चीज़ हटाना भी सदका है।
सदका किसे देना चाहिए?
वैसे तो हर ज़रूरतमंद को सदका दिया जा सकता है, लेकिन कुरान में कुछ खास लोगों का ज़िक्र है:
- गरीब और मिस्कीन: जिनके पास खाने-पीने को न हो।
- रिश्तेदार: जो ज़रूरतमंद हों (इनको देने से दोहरा सवाब मिलता है - सदका और सिलह-रहमी का)।
- यतीम और बेवा: जिनका कोई सहारा न हो।
- सफेद-पोश: वो लोग जो गरीब होने के बावजूद शर्म की वजह से किसी से मांगते नहीं।
ये भी पढ़े: Islam Me Amanat Ki Ahmiyat | अमानतदारी क्या है
सदका देने का सही तरीका
सदका देने का सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि दाएं हाथ से दें तो बाएं हाथ को खबर न हो। यानी इसे छुपाकर देना चाहिए ताकि लेने वाले की इज़्ज़त बनी रहे और देने वाले के दिल में रियाकारी (दिखावा) न आए। अल्लाह तआला फरमाता है: “अगर तुम सदका खुल्लम-खुल्ला दो तो यह भी अच्छा है, लेकिन अगर छुपाकर फकीरों को दो तो यह तुम्हारे लिए ज्यादा बेहतर है।” (सूरह बकरा: 271)
कुरान में सदका की फजीलत
अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है: “जो लोग अपना माल अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, उनकी मिसाल उस दाने जैसी है जिससे सात बालें उगें और हर बाल में सौ दाने हों। और अल्लाह जिसके लिए चाहता है (सवाब) बढ़ा देता है।” (सूरह बकरा: 261)
इससे पता चलता है कि अल्लाह की राह में खर्च किया गया माल कम नहीं होता, बल्कि कई गुना बढ़कर वापस मिलता है।
सदका के फायदे (Benefits of Sadaqah)
- बलाओं को टालता है: हदीस में है कि “सदका 70 किस्म की बलाओं को टालता है।”
- बीमारियों का इलाज: अपने बीमारों का इलाज सदके के ज़रिए करो।
- माल में बरकत: सदका देने से माल कम नहीं होता, बल्कि उसमें बरकत होती है।
- अल्लाह का गुस्सा ठंडा होता है: छुपाकर सदका देना अल्लाह के गुस्से को ठंडा करता है।
- कब्र की गर्मी से बचाव: सदका मोमिन के लिए कब्र की गर्मी को ठंडा कर देगा।
ये भी पढ़े: Sachcha Momin Kaun Hai? | सच्चे मोमिन की निशानियाँ
सदका की किस्में (Types of Sadaqah)
सदका सिर्फ पैसों का नहीं होता। नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया:
- अपने भाई से मुस्कुराकर मिलना सदका है।
- नेकी का हुक्म देना और बुराई से रोकना सदका है।
- रास्ते से पत्थर, कांटा या हड्डी हटाना सदका है।
- भटके हुए को रास्ता दिखाना सदका है।
- अपने डोल से दूसरे के डोल में पानी डालना सदका है।
सदका-ए-जारिया (Sadaqah Jariyah)
यह वो सदका है जिसका सवाब मरने के बाद भी मिलता रहता है। जैसे:
- मस्जिद बनवाना।
- पानी का नल लगवाना।
- पेड़ लगाना।
- दीनी इल्म फैलाना या कुरान वक्फ करना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या सदका सिर्फ रमज़ान में देना चाहिए?
नहीं, सदका साल के किसी भी दिन और किसी भी वक्त दिया जा सकता है। रमज़ान में इसका सवाब 70 गुना बढ़ जाता है, लेकिन बाकी दिनों में भी इसकी बहुत फजीलत है।
Q. क्या गैर-मुस्लिम को सदका दे सकते हैं?
हाँ, नफिल सदका (जो ज़कात न हो) गैर-मुस्लिम गरीबों और ज़रूरतमंदों को भी दिया जा सकता है। इस्लाम इंसानियत की खिदमत सिखाता है।
Q. क्या पुराने कपड़े देना सदका है?
हाँ, अगर वो कपड़े पहनने के काबिल हैं तो उन्हें किसी ज़रूरतमंद को देना भी सदका है। लेकिन फटे-पुराने बेकार कपड़े देना अच्छा नहीं है। अल्लाह फरमाता है: “तुम नेकी को नहीं पा सकते जब तक वो खर्च न करो जो तुम्हें महबूब है।“
नतीजा (Conclusion)
सदका अल्लाह की रहमत को हासिल करने का बेहतरीन ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम अपनी हैसियत के मुताबिक, चाहे कम ही क्यों न हो, पाबंदी से सदका करें। यह हमारी दुनियावी मुसीबतों को भी दूर करेगा और आखिरत में भी काम आएगा।
अल्लाह हमें दिल खोलकर अपनी राह में खर्च करने की तौफीक दे। आमीन।





