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Sachcha Momin Kaun Hai: सच्चे मोमिन की 7 बड़ी निशानियाँ

Sachcha Momin Kaun Hai: जानिए कुरान और हदीस की रौशनी में सच्चे मोमिन की पहचान क्या है? क्या आप में ये 7 निशानियाँ मौजूद हैं?

Sachcha Momin Kaun Hai: सच्चे मोमिन की 7 बड़ी निशानियाँ

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सच्चा मोमिन (True Believer) वही है जो अल्लाह पाक को दिल से याद करे और हर हाल में उसका शुक्र अदा करे। सिर्फ नाम का मुसलमान होना काफी नहीं है, बल्कि हमारे किरदार और अमल से साबित होना चाहिए कि हम मोमिन हैं।

अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है: “मोमिन तो वो हैं कि जब अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है तो उनके दिल दहल जाते हैं।” (सूरह अनफाल: 2)

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Sachcha Momin Kaun Hai और उसकी क्या निशानियाँ हैं।

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1. शिर्क से परहेज़ (Avoidance of Shirk)

सच्चे मोमिन की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह शिर्क (Shirk) से कोसों दूर रहता है। वह जानता है कि अल्लाह शिर्क के अलावा हर गुनाह माफ कर सकता है, लेकिन शिर्क को नहीं। वह अपनी हर ज़रूरत के लिए सिर्फ अल्लाह को पुकारता है।

2. अच्छे अखलाक (Good Character)

सच्चा मोमिन सिर्फ नमाज़-रोज़े तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके अखलाक (Character) भी बेहतरीन होते हैं।

  • वह किसी को तकलीफ नहीं देता।
  • उसकी बातों में मिठास होती है।
  • वह अपने वादों को पूरा करता है।
  • बड़ों की इज़्ज़त और छोटों से शफकत करता है।

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “तुम में सबसे कामिल मोमिन वो है जिसके अखलाक सबसे अच्छे हैं।” (तिर्मिज़ी)

3. हर हाल में शुक्र अदा करना (Gratitude)

सच्चा मोमिन कभी अल्लाह से शिकायत नहीं करता। चाहे अमीरी हो या गरीबी, सेहत हो या बीमारी, वह हर हाल में “अल्हम्दुलिल्लाह” कहता है। वह दूसरों की दौलत देखकर जलता नहीं और न ही अपनी नेमतों पर घमंड करता है।

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4. माफ करने वाला (Forgiveness)

सच्चा मोमिन बदला लेने वाला नहीं, बल्कि माफ करने वाला होता है। अगर कोई उसके साथ बुराई भी करे, तो वह सबर करता है और मामला अल्लाह पर छोड़ देता है। अल्लाह को वो बंदे बहुत पसंद हैं जो गुस्से को पी जाते हैं और लोगों को माफ कर देते हैं।

5. नमाज़ की पाबंदी (Regular Prayers)

एक मोमिन अपनी नमाज़ (Salah) कभी जानबूझकर नहीं छोड़ता। वह जानता है कि नमाज़ मोमिन और काफिर के बीच का फर्क है। वह नमाज़ को बोझ नहीं, बल्कि सुकून का ज़रिया समझता है।

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6. हलाल और हराम की फिक्र

सच्चा मोमिन अपनी कमाई और खाने-पीने में हलाल और हराम का सख्त ख्याल रखता है। वह थोड़ी हलाल कमाई पर राज़ी रहता है लेकिन हराम के ढेर की तरफ नहीं देखता। उसे पता है कि हराम निवाला दुआओं की कबूलियत को रोक देता है।

7. आखिरत का डर

सच्चे मोमिन की नज़र हमेशा आखिरत (Hereafter) पर होती है। वह कोई भी काम करने से पहले सोचता है कि इसका अंजाम कयामत के दिन क्या होगा। यही डर उसे गुनाहों से रोकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या सिर्फ कलमा पढ़ने से इंसान पक्का मोमिन बन जाता है?
A.

कलमा पढ़कर इंसान इस्लाम में दाखिल होता है, लेकिन “कामिल मोमिन” बनने के लिए ईमान के साथ-साथ नेक अमल और अच्छे अखलाक की ज़रूरत होती है।

Q. अगर किसी से गुनाह हो जाए तो क्या वो मोमिन नहीं रहता?
A.

इंसान खता का पुतला है। अगर गुनाह हो जाए और वो सच्चे दिल से तौबा कर ले, तो वो मोमिन ही रहता है। अल्लाह तौबा करने वालों को पसंद करता है।


नतीजा (Conclusion)

अल्लाह हम सबको सच्चा मोमिन बनाए और सिर्फ नाम का मुसलमान न रखे। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी कुरान और सुन्नत के मुताबिक गुज़ारें।

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