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Rizq Aur Karobar Me Barkat Ki Dua: दुआ, वज़ीफ़ा और रुकावट की वजहें

Rizq Aur Karobar Me Barkat Ki Dua: रिज़्क़ और कारोबार में बरकत की दुआ और वज़ीफ़ा जानें। साथ ही जानिए वो गलतियां जो घर और बिज़नेस से बरकत खत्म कर देती हैं।

Rizq Aur Karobar Me Barkat Ki Dua: दुआ, वज़ीफ़ा और रुकावट की वजहें

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क्या आप रिज़्क़ (Rizq) की तंगी से परेशान हैं? क्या बहुत मेहनत करने के बाद भी घर में बरकत नहीं होती? याद रखें, रिज़्क़ देने वाला सिर्फ अल्लाह है। वह “अर-रज्जाक” (बहुत रिज़्क़ देने वाला) है।

अल्लाह कुरान में फरमाता है: “और ज़मीन पर चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं जिसका रिज़्क़ अल्लाह के ज़िम्मे न हो।” (सूरह हुद: 6)

इस आर्टिकल में हम Rizq Aur Karobar Me Barkat Ki Dua, वज़ीफ़ा और उन गलतियों के बारे में जानेंगे जो रिज़्क़ में रुकावट बनती हैं।

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रिज़्क़ में बरकत की मसनून दुआएं

हदीस में रिज़्क़ और बरकत के लिए कई दुआएं बताई गई हैं। यहाँ दो बहुत ही खास दुआएं दी गई हैं:

1. फज्र की नमाज़ के बाद की दुआ

उम्मुल मोमिनीन हज़रत उम्मे सलमा (र.अ.) से रिवायत है कि नबी करीम (ﷺ) फज्र की नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ते थे:

“اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا”

“अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका इल्मन ना-फिअन्, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलन मुत-क़ब्बलन”

(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफा देने वाले इल्म, पाकीज़ा (हलाल) रिज़्क़ और कबूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।)

2. कर्ज़ और तंगी दूर करने की दुआ

अगर आप पर कर्ज़ है या रिज़्क़ की बहुत तंगी है, तो यह दुआ कसरत से पढ़ें:

“اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ، وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ”

“अल्लाहुम्मा-कफिनी बि-हलालिका अन हरामिका व अग-निनी बि-फज़लिका अम्मन सिवाक”

(ऐ अल्लाह! तू मुझे अपने हलाल के ज़रिए हराम से बचा ले और अपने फज़ल से अपने सिवा हर किसी से बे-नियाज़ (गाफिल) कर दे।)

कारोबार और दुकान में बरकत के लिए (For Business Growth)

अगर आप ताजिर (Businessman) हैं या आपकी दुकान है, तो ये खास अमल करें:

1. दुकान या ऑफिस खोलते वक़्त की दुआ

जब भी आप अपनी दुकान या ऑफिस खोलें, तो सबसे पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ें और फिर यह दुआ पढ़ें:

“اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِ هَذِهِ السُّوقِ، وَخَيْرِ مَا فِيهَا”

“अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका मिन खैरि हाज़िहिस-सूक़ि व खैरि मा फीहा”

(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इस बाज़ार की भलाई और जो कुछ इसमें है, उसकी भलाई मांगता हूँ।)

2. कारोबार में बरकत का वज़ीफ़ा

अगर ग्राहक कम आते हों या बिक्री (Sale) कम हो रही हो, तो यह अमल करें:

  1. सूरह नसर (इज़ा जा-अ नसरुल्लाह): हर नमाज़ के बाद 3 बार पढ़ें।
  2. या रज्जाक (Ya Razzaqu): दुकान पर बैठते ही कसरत से अल्लाह का यह नाम पढ़ें।
  3. दरूद शरीफ: काम शुरू करने से पहले 1 बार दरूद शरीफ पढ़ने से काम में आसानी और बरकत होती है।

3. बरकत के 3 सुनहरे उसूल

  1. सच बोलना: झूठ बोलकर सामान बेचने से बरकत खत्म हो जाती है।
  2. नाप-तौल में कमी न करना: अल्लाह ने कुरान में नाप-तौल में कमी करने वालों के लिए सख्त अज़ाब की बात कही है।
  3. सदका करना: सुबह दुकान खोलते ही कुछ न कुछ सदका करें।

रिज़्क़ बढ़ाने के 4 रूहानी अमल (Wazifa for Rizq)

सिर्फ दुआ काफी नहीं, हमें वो काम भी करने चाहिए जिनसे अल्लाह खुश होकर रिज़्क़ बढ़ाता है:

  1. सूरह वाकिया (Surah Waqiah): हदीस में है कि जो शख्स हर रात सूरह वाकिया पढ़ेगा, उसे कभी फाका (भुखमरी) नहीं होगा। इसे “सूरह-ए-रिज़्क़” भी कहा जाता है।
  2. इस्तिगफार (Istighfar): कसरत से अस्तगफिरुल्लाह पढ़ने से अल्लाह आसमान से बारिश बरसाता है और माल व औलाद में बरकत देता है।
  3. तक़्वा (अल्लाह का डर): जो अल्लाह से डरता है (गुनाहों से बचता है), अल्लाह उसे ऐसी जगह से रिज़्क़ देता है जहाँ से उसे गुमान भी नहीं होता।
  4. रिश्तेदारों से अच्छा सुलूक: हदीस में है कि जो चाहता है कि उसके रिज़्क़ में कुशादगी हो और उम्र लम्बी हो, वह अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छा सुलूक (Silah-rahmi) करे।

रिज़्क़ में रुकावट की 5 बड़ी वजहें (Reasons for Lack of Barakah)

अक्सर हम शिकायत करते हैं कि “पैसा आता तो है मगर टिकता नहीं”। इसकी कुछ ठोस वजहें हैं:

1. सूद (Interest) का लेन-देन

अल्लाह कुरान में फरमाता है: “अल्लाह सूद को मिटाता है और सदकात को बढ़ाता है।” (सूरह बकरा)। जिस घर में सूद (ब्याज) का पैसा आता है, वहां कभी सुकून और बरकत नहीं हो सकती।

2. नमाज़ छोड़ना

नमाज़ रिज़्क़ की कुंजी है। जो शख्स अपने रब को भूल जाता है, अल्लाह उसकी रोज़ी तंग कर देता है। फज्र के वक़्त सोना रिज़्क़ के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है।

3. झूठ और धोखा

कारोबार या नौकरी में झूठ बोलना, धोखा देना या मिलावट करना। इससे पैसा तो आ सकता है, लेकिन वो बीमारी और परेशानियों में निकल जाएगा।

4. रिश्तेदारों से ताल्लुक तोड़ना

हदीस में है कि जो रिश्तेदारों से ताल्लुक तोड़ता है, उसका रिज़्क़ तंग कर दिया जाता है।

5. शुक्र न करना

अल्लाह फरमाता है: “अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूंगा।” (सूरह इब्राहिम)। ना-शुक्री करने से नेमतें छिन जाती हैं।

घर में बरकत लाने के आसान तरीके

  1. घर में सलाम करना: जब घर में दाखिल हों तो सलाम करें, इससे घर में बरकत आती है।
  2. सच्ची तौबा: अपने गुनाहों की माफ़ी मांगें।
  3. हलाल कमाई: चाहे कम हो, लेकिन हलाल पर राज़ी रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या कोई ऐसा वज़ीफ़ा है जिससे रातों-रात अमीर बन जाएं?
A.

इस्लाम में कोई जादू की छड़ी नहीं है। अल्लाह ने मेहनत और दुआ दोनों का हुक्म दिया है। हलाल तरीके से मेहनत करें और अल्लाह से बरकत की दुआ मांगें।

Q. रिज़्क़ के लिए कौन सा नाम पढ़ना चाहिए?
A.

अल्लाह का नाम “या रज्जाक” (Ya Razzaqu) रिज़्क़ के लिए बहुत मुजर्रब है। फज्र से पहले या बाद में इसे पढ़ने से बहुत फायदा होता है।

Q. क्या सदका देने से माल कम होता है?
A.

नहीं, हदीस में है कि सदका देने से माल कम नहीं होता, बल्कि अल्लाह उसमें और बरकत डालता है और बलाओं को टालता है।

Q. क्या दुकान पर आयतुल कुर्सी लगाना सही है?
A.

हाँ, बरकत और हिफाज़त के लिए दुकान में आयतुल कुर्सी या कुरान की आयतें लगाना जायज़ है, लेकिन असल मकसद उन्हें पढ़ना और अमल करना होना चाहिए, सिर्फ सजावट नहीं।

Q. अगर नज़र लग गई हो तो क्या करें?
A.

अगर आपको लगता है कि कारोबार को नज़र लगी है, तो सूरह फलक और सूरह नास पढ़कर दुकान के पानी पर दम करें और उसे छिड़क दें।

Q. क्या जादू-टोने से रिज़्क़ बंध सकता है?
A.

हाँ, कभी-कभी हसद (जलन) या जादू की वजह से भी रुकावट आती है। इसके लिए सुबह-शाम मुअव्वज़तैन (सूरह फलक और सूरह नास) पढ़ें।

Q. क्या मेहमान के आने से खर्चा बढ़ता है?
A.

बिल्कुल नहीं! मेहमान अपना रिज़्क़ साथ लेकर आता है और मेज़बान के गुनाह अपने साथ ले जाता है। मेहमान बरकत का जरिया है।


नतीजा (Conclusion)

रिज़्क़ की कुंजी अल्लाह के हाथ में है। हलाल कमाएं, नमाज़ की पाबंदी करें, और अल्लाह से मांगते रहें। याद रखें, जो अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) करता है, अल्लाह उसके लिए काफी हो जाता है।

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