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Iffat Zia
· Ramzan · 3 min read

Ramzan Ka Jaldi Aana: क्या यह कयामत की निशानी है?

Ramzan Aur Qayamat Ki Nishani: वक्त का तेज़ी से गुज़रना और रमज़ान का जल्दी आना कयामत की निशानियों में से है। जानिए हदीस की रौशनी में।

Ramzan Ka Jaldi Aana: क्या यह कयामत की निशानी है?

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अक्सर हम सुनते हैं और महसूस भी करते हैं कि “अरे! अभी तो रमज़ान गया था, फिर आ गया!” या “वक़्त कितनी तेज़ी से गुज़र रहा है, पता ही नहीं चलता।”

क्या आपने कभी सोचा है कि वक़्त का इतनी तेज़ी से गुज़रना (Time Passing Quickly) महज़ एक एहसास है या इसके पीछे कोई बड़ी सच्चाई छुपी है?

इस्लाम में वक़्त की बरकत का खत्म होना कयामत की निशानियों (Signs of Qayamat) में से एक बताया गया है।

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वक़्त का तेज़ी से गुज़रना: हदीस की रौशनी में

नबी करीम (ﷺ) ने 1400 साल पहले ही बता दिया था कि आखिरी ज़माने में वक़्त बहुत तेज़ी से गुज़रेगा।

हदीस 1: हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: “कयामत उस वक़्त तक कायम नहीं होगी जब तक कि ज़माना (वक़्त) करीब न हो जाए (यानी सिकुड़ न जाए)। साल महीने की तरह, महीना हफ्ते की तरह, हफ्ता दिन की तरह, दिन घंटे की तरह और घंटा आग की चिंगारी (या माचिस की तीली) जलने की तरह गुज़र जाएगा।” (तिर्मिज़ी)

आज हम अपनी आँखों से देख रहे हैं कि सुबह होती है और कब शाम हो जाती है, पता ही नहीं चलता। यह हदीस आज के दौर पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

हदीस 2: एक और हदीस में है: “कयामत की निशानियों में से यह है कि इल्म उठा लिया जाएगा, जहालत (अज्ञानता) आम हो जाएगी, शराब पी जाएगी और ज़माना (वक़्त) करीब हो जाएगा।” (बुखारी)

वक़्त की बरकत क्यों खत्म हो गई?

उलेमा कहते हैं कि वक़्त से बरकत उठ जाने की कई वजहें हैं:

  1. गुनाहों की कसरत: जब ज़मीन पर गुनाह बढ़ जाते हैं, तो अल्लाह अपनी बरकतें उठा लेता है।
  2. दुनिया की मोहब्बत: हम दुनिया कमाने में इतने मसरूफ हो गए हैं कि सुकून खत्म हो गया है।
  3. इंटरनेट और सोशल मीडिया: आज हमारा घंटों वक़्त मोबाइल स्क्रीन पर गुज़र जाता है और हमें एहसास भी नहीं होता।
  4. नींद में वक़्त गुज़ारना: रमज़ान में अक्सर लोग रोज़ा रखकर दिन भर सोते रहते हैं ताकि “वक़्त कट जाए”। याद रखें, सोने से वक़्त तो कट जाएगा लेकिन आप रमज़ान की अनमोल घड़ियों और सवाब से महरूम रह जाएंगे।

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हमें क्या करना चाहिए?

रमज़ान का जल्दी आना हमें यह याद दिलाता है कि हमारी ज़िन्दगी की मुद्दत कम होती जा रही है। यह वक़्त गफलत में गुज़ारने का नहीं, बल्कि तौबा (Astaghfar) करने और आखिरत की तैयारी करने का है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या वक़्त का तेज़ी से गुज़रना कयामत की बड़ी निशानी है?
A.

नहीं, यह कयामत की छोटी निशानियों (Minor Signs) में से है। बड़ी निशानियां (जैसे दज्जाल, सूरज का पश्चिम से निकलना) अभी जाहिर होनी बाकी हैं।

Q. वक़्त में बरकत कैसे लाएं?
A.

गुनाहों से बचें, नमाज़ की पाबंदी करें, सुबह के वक़्त काम करें (क्योंकि सुबह में बरकत है) और मोबाइल का इस्तेमाल कम करें।

Q. क्या यह सिर्फ़ एहसास है या सच में वक़्त कम हो गया है?
A.

हदीस के मुताबिक़ यह हकीकत है। वक़्त से बरकत उठा ली गई है, जिससे दिन और साल जल्दी गुज़र रहे हैं।


नतीजा (Conclusion)

अल्लाह ने हमें एक और रमज़ान नसीब किया है, यह उसका करम है। कोशिश करें कि इस रमज़ान को अपनी ज़िन्दगी का बेहतरीन रमज़ान बनाएं।

अल्लाह हमें वक़्त की कद्र करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

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