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Iffat Zia
· Quran · 5 min read

Quran Sharif Padhne Ka Sahi Tarika: कुरान पढ़ने के आदाब और फायदे

Quran Padhne Ka Tarika: कुरान शरीफ पढ़ने का सही तरीका क्या है? जानिए तिलावत के आदाब, वुज़ू के मसाइल और कुरान पढ़ने की फजीलत।

Quran Sharif Padhne Ka Sahi Tarika: कुरान पढ़ने के आदाब और फायदे

Table of Contents

कुरान मजीद (Quran Majeed) अल्लाह की वो मुकद्दस किताब है जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत (Guidance) है। इसे पढ़ना, समझना और इस पर अमल करना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है।

अक्सर लोग कुरान शरीफ पढ़ते तो हैं, लेकिन Quran Padhne Ka Sahi Tarika और इसके आदाब (Etiquettes) का ख्याल नहीं रखते। कुरान कोई आम किताब नहीं है, यह रब्बुल आलमीन का कलाम है, इसलिए इसे पढ़ते वक़्त खास एहतराम ज़रूरी है।

इस आर्टिकल में हम कुरान पढ़ने का सही तरीका, इसके आदाब और इसकी फजीलत (Benefits) के बारे में तफ़सील से जानेंगे।

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कुरान शरीफ पढ़ने का सही तरीका और आदाब

कुरान की तिलावत शुरू करने से पहले इन बातों का ख्याल रखना ज़रूरी है:

1. पाकी और वुज़ू (Cleanliness & Wudu)

कुरान को छूने के लिए बा-वुज़ू (Wudu) होना ज़रूरी है। अल्लाह फरमाता है: “इसे (कुरान को) पाक लोगों के सिवा कोई हाथ न लगाए।” (सूरह वाकिया: 79) कपड़े और जगह भी पाक-साफ होनी चाहिए।

2. किबला रुख बैठना

बेहतर है कि आप किबला (Kaaba) की तरफ मुंह करके बैठें। यह तिलावत के आदाब में से है।

3. शुरुआत कैसे करें?

तिलावत शुरू करने से पहले “तअ’व्वुज़” (अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम) और “तस्मिया” (बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम) ज़रूर पढ़ें।

4. ठहर-ठहर कर पढ़ना (Tarteel)

कुरान को जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय तरतील (ठहर-ठहर कर और साफ लफ्ज़ों में) पढ़ना चाहिए। अल्लाह का हुक्म है: “और कुरान को ठहर-ठहर कर (साफ) पढ़ो।” (सूरह मुज़म्मिल: 4)

5. खामोशी और ध्यान

जब कुरान पढ़ा जाए तो पूरा ध्यान उसी तरफ होना चाहिए। मोबाइल, बातें या शोर-शराबे से दूर रहें।

तजवीद की अहमियत (Importance of Tajweed)

तजवीद (Tajweed) का मतलब है कुरान के हर हर्फ (letter) को उसके सही मखरज (articulation point) से अदा करना और उसकी सिफात (qualities) का ख्याल रखना। यह सिर्फ कुरान को खूबसूरत आवाज़ में पढ़ना नहीं, बल्कि उसे वैसे ही पढ़ना है जैसे वह नाज़िल हुआ।

  1. सही तिलावत: तजवीद के बिना कुरान की सही तिलावत मुमकिन नहीं। अल्लाह का हुक्म है: “और कुरान को ठहर-ठहर कर (साफ) पढ़ो।” (सूरह मुज़म्मिल: 4)। उलेमा कहते हैं कि ‘तरतील’ का मतलब तजवीद के साथ पढ़ना है।
  2. मतलब का बदलना: अगर हर्फों को सही तरीके से अदा न किया जाए, तो कभी-कभी मतलब पूरी तरह बदल जाता है, जो कि एक बहुत बड़ा गुनाह है। मिसाल के तौर पर, ‘क़ल्ब’ (قَلْب) का मतलब ‘दिल’ है, जबकि ‘कलाब’ (كَلْب) का मतलब ‘कुत्ता’ है।
  3. सीखना ज़रूरी है: हर मुसलमान पर इतना तजवीद सीखना फ़र्ज़ है जिससे वह कुरान सही-सही पढ़ सके। इसके लिए किसी माहिर कारी (teacher) से सीखना चाहिए।

कुरान रखने के आदाब (Etiquette of Handling the Quran)

कुरान अल्लाह का कलाम है, इसलिए इसका अदब करना ईमान का हिस्सा है।

  1. ऊँची जगह पर रखना: कुरान को हमेशा किसी ऊँची और साफ़ जगह पर रखें, जैसे किसी शेल्फ में या रेहल (Book Stand) पर। इसे ज़मीन पर रखना बेअदबी है।
  2. ऊपर कोई किताब न रखें: कुरान के ऊपर कोई दूसरी किताब या कोई और चीज़ नहीं रखनी चाहिए।
  3. बिना वुज़ू न छूना: जैसा कि ऊपर बताया गया, बिना वुज़ू के कुरान को हाथ लगाना जायज़ नहीं है।
  4. पैर न फैलाएं: कुरान की तरफ पैर करके या पीठ करके बैठना अदब के खिलाफ है।

कुरान पढ़ने की फजीलत और फायदे (Benefits)

कुरान पढ़ने के बेशुमार फायदे हैं, जिनमें से कुछ ये हैं:

1. हर हर्फ पर 10 नेकियां

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “जो शख्स कुरान का एक हर्फ पढ़ता है, उसे एक नेकी मिलती है और एक नेकी का सवाब दस गुना मिलता है। मैं यह नहीं कहता कि ‘अलिफ-लाम-मीम’ एक हर्फ है, बल्कि ‘अलिफ’ एक हर्फ है, ‘लाम’ एक हर्फ है और ‘मीम’ एक हर्फ है।” (तिर्मिज़ी)

2. दिल का सुकून

अल्लाह फरमाता है: “अला बि-ज़िक्रिल्लाहि तत्म-इन्नुल कुलूब” (खबरदार! अल्लाह के ज़िक्र से ही दिलों को सुकून मिलता है।) (सूरह रद: 28)

3. कयामत के दिन सिफारिश

नबी (ﷺ) ने फरमाया: “कुरान पढ़ा करो, क्योंकि यह कयामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफारिशी बनकर आएगा।” (सहीह मुस्लिम)

4. घर में बरकत

जिस घर में कुरान पढ़ा जाता है, वहां से शैतान भाग जाते हैं और रहमत के फरिश्ते आते हैं। घर में खैर-ओ-बरकत होती है।

5. अटक-अटक कर पढ़ने वाले के लिए दोगुना सवाब

जो लोग कुरान रवानी से नहीं पढ़ पाते और अटक-अटक कर पढ़ते हैं, उनके लिए हदीस में दोगुना सवाब की बशारत है (एक पढ़ने का और एक कोशिश करने का)।

कुरान पढ़ने के दौरान किन बातों से बचें?

  1. तेज़ आवाज़: अगर पास में कोई नमाज़ पढ़ रहा हो या आराम कर रहा हो, तो ज़ोर से तिलावत न करें।
  2. बातें करना: तिलावत के दौरान दुनियावी बातें न करें। अगर ज़रूरी बात करनी हो, तो कुरान बंद करके बात करें।
  3. पीठ करना: कुरान की तरफ पीठ करके या पांव फैलाकर न बैठें, यह बेअदबी है।

सजदा-ए-तिलावत (Sajda Tilawat)

कुरान मजीद में कुल 15 सजदे हैं। जब आप तिलावत करते हुए सजदे वाली आयत पर पहुँचें, तो सजदा करना वाजिब है।

अक्सर हम तिलावत में मगन होते हैं और याद नहीं रहता कि कितने सजदे किए या कौन सा छूट गया।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या बिना वुज़ू के कुरान पढ़ सकते हैं?
A.

ज़बानी (बिना छुए) कुरान पढ़ने के लिए वुज़ू ज़रूरी नहीं है, लेकिन मुसहफ (किताब) को छूने के लिए वुज़ू होना ज़रूरी है। मोबाइल स्क्रीन पर बिना वुज़ू पढ़ सकते हैं, लेकिन बेहतर है कि वुज़ू हो।

Q. कुरान पढ़ने का सबसे अच्छा वक़्त कौन सा है?
A.

कुरान पढ़ने का सबसे बेहतरीन वक़्त फज्र का है। कुरान में है: “बेशक फज्र के वक़्त कुरान पढ़ना (फरिश्तों की) हाज़िरी का वक़्त होता है।”

Q. अगर कुरान पढ़ना नहीं आता तो क्या करें?
A.

सीखने की कोशिश करें। अल्लाह कोशिश करने वालों को पसंद करता है। जब तक सीख रहे हैं, तब तक कुरान सुनने का भी बहुत सवाब है।

Q. कितने दिन में कुरान खत्म करना चाहिए?
A.

कम से कम 3 दिन में कुरान खत्म करना चाहिए। इससे कम वक़्त में खत्म करने से इंसान उसे समझ नहीं पाता। आमतौर पर लोग रमज़ान में एक बार ज़रूर खत्म करते हैं।


नतीजा (Conclusion)

कुरान अल्लाह की रस्सी है, जो इसे थाम लेगा वो कामयाब हो जाएगा। हमें चाहिए कि हम रोज़ाना कुरान पढ़ने का मामूल (Routine) बनाएं, चाहे थोड़ा ही क्यों न हो, और इसे सही तरीके और अदब के साथ पढ़ें।

अल्लाह हमें कुरान पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की तौफीक दे। आमीन।

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