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पाक दामन औरत पर तोहमत: इस्लाम में सजा और गुनाह (Quran & Hadith)
किसी पाक दामन औरत पर जिना का इल्जाम लगाने की सजा क्या है? जानिए कुरान और हदीस से इस कबीरा गुनाह की गंभीरता और तौबा का तरीका।

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इस्लाम एक ऐसा दीन है जो इंसान की जान, माल और इज़्ज़त की हिफाज़त करता है। इस्लाम में किसी की इज़्ज़त उछालना, किसी पर झूठा इल्जाम लगाना या तोहमत (Slander) लगाना कबीरा गुनाहों में से है।
खासतौर पर किसी पाक दामन औरत (Chaste Woman) पर बदकारी या ज़िना का इल्जाम लगाना इतना बड़ा गुनाह है कि कुरान में इसके लिए सख्त सजा मुकर्रर की गई है। आज के दौर में सोशल मीडिया और गपशप (Gossip) के ज़रिए हम अनजाने में यह गुनाह कर बैठते हैं।
तोहमत क्या है? (What is Tohmat)
तोहमत का मतलब है किसी बेगुनाह शख्स पर ऐसा इल्जाम लगाना जो उसने किया ही न हो। नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया:
“गीबत यह है कि तुम अपने भाई का ज़िक्र इस तरह करो जो उसे नापसंद हो।” सहाबा ने पूछा: “अगर वो बात उसमें मौजूद हो तो?” आप (ﷺ) ने फरमाया: “अगर वो बात उसमें है तो तुमने गीबत की, और अगर वो बात उसमें नहीं है तो तुमने उस पर तोहमत (Buhtan) लगाई।” (सहीह मुस्लिम)
कुरान में तोहमत लगाने की सजा
अल्लाह तआला ने कुरान मजीद में उन लोगों के लिए सख्त सजा का ऐलान किया है जो पाक दामन औरतों पर झूठा इल्जाम लगाते हैं। इसे शरीयत में “हद्द-ए-कज़फ़” कहते हैं।
सूरह अन-नूर में अल्लाह फरमाता है:
“और जो लोग पाक दामन औरतों पर (ज़िना का) इल्जाम लगाएं, फिर चार गवाह न लाएं, तो उन्हें अस्सी (80) कोड़े मारो और उनकी गवाही कभी कुबूल न करो, और यही लोग फासिक (नाफरमान) हैं।” (सूरह अन-नूर: 4)
इस आयत से तीन सजाएं साबित होती हैं:
- 80 कोड़े: जिस्मानी सजा।
- गवाही रद्द: उनकी बात का कभी एतबार नहीं किया जाएगा (सामाजिक सजा)।
- फासिक: अल्लाह की नज़र में वो नाफरमान हैं (रूहानी सजा)।
इसके अलावा, सूरह अन-नूर की आयत 23 में फरमाया गया:
“बेशक जो लोग पाक दामन, भोली-भाली मोमिन औरतों पर तोहमत लगाते हैं, उन पर दुनिया और आखिरत में लानत की गई है और उनके लिए बड़ा अज़ाब है।“
हदीस: 7 हलाक करने वाले गुनाह
हमारे प्यारे नबी (ﷺ) ने पाक दामन औरत पर तोहमत लगाने को “हलाक करने वाले गुनाहों” में शुमार किया है।
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी (ﷺ) ने फरमाया:
“सात हलाक करने वाले गुनाहों से बचो।” सहाबा ने पूछा: “या रसूलुल्लाह! वो क्या हैं?”
आप (ﷺ) ने फरमाया:
- अल्लाह के साथ शिर्क करना।
- जादू करना।
- नाहक किसी को कत्ल करना।
- सूद (ब्याज) खाना।
- यतीम का माल खाना।
- मैदान-ए-जंग से भागना।
- भोली-भाली पाक दामन मोमिन औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाना। (सहीह बुखारी & मुस्लिम)
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बिना सबूत इल्जाम लगाना
इस्लाम में किसी पर बदकारी का इल्जाम लगाने के लिए 4 चश्मदीद गवाहों (Eyewitnesses) का होना ज़रूरी है जिन्होंने अपनी आँखों से गलत काम होते देखा हो। अगर कोई सिर्फ शक की बुनियाद पर या सुनी-सुनाई बात पर इल्जाम लगाता है और 4 गवाह पेश नहीं कर पाता, तो उल्टा उसी शख्स को 80 कोड़े मारे जाएंगे।
आजकल हम मज़ाक में या लड़ाई में किसी के चरित्र (Character) पर उंगली उठा देते हैं। याद रखें, अल्लाह के नज़दीक यह बहुत भारी गुनाह है।
“तुम इसे मामूली बात समझते हो, हालांकि अल्लाह के नज़दीक यह बहुत बड़ी बात है।” (सूरह अन-नूर: 15)
दूसरों के ऐब छुपाना
इस्लाम हमें दूसरों के ऐब तलाशने और उन्हें उछालने से रोकता है। नबी (ﷺ) ने फरमाया:
“जो शख्स किसी मुसलमान के ऐब पर पर्दा डालेगा, अल्लाह कयामत के दिन उसके ऐबों पर पर्दा डालेगा।” (इब्न माजा)
अगर आप किसी में कोई बुराई देखें भी, तो उसे अकेले में समझाएं, न कि लोगों के सामने उसे ज़लील करें।
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तौबा का तरीका
अगर किसी ने यह गुनाह किया है, तो उसे क्या करना चाहिए?
- अल्लाह से माफी: सच्चे दिल से तौबा करें और आइंदा ऐसा न करने का अहद करें।
- उस शख्स से माफी: जिस पर तोहमत लगाई है, उससे माफी मांगना ज़रूरी है क्योंकि यह हकूक-उल-इबाद (बंदों का हक) है।
- सफाई पेश करना: जिन लोगों के सामने इल्जाम लगाया था, उनके सामने अपनी बात वापस लें और उस शख्स की बेगुनाही बयान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. अगर मुझे यकीन हो लेकिन गवाह न हों, तो क्या करूँ?
अगर आपके पास 4 गवाह नहीं हैं, तो इस्लाम आपको खामोश रहने का हुक्म देता है। आप उस शख्स को अकेले में नसीहत कर सकते हैं, लेकिन लोगों के सामने इल्जाम नहीं लगा सकते। अगर लगाएंगे तो आप ही गुनहगार होंगे।
Q. क्या पति अपनी पत्नी पर इल्जाम लगा सकता है?
अगर पति अपनी पत्नी को गलत काम करते देखे और उसके पास गवाह न हों, तो उसके लिए शरीयत में “लिआन” (Li’an) का तरीका है। इसमें दोनों को कसम खानी पड़ती है और फिर उनका निकाह खत्म कर दिया जाता है। लेकिन आम लोगों की तरह पति भी बिना सबूत बात नहीं कर सकता।
Q. सोशल मीडिया पर किसी के बारे में पोस्ट शेयर करना कैसा है?
बिना तस्दीक (Verification) के किसी की बुराई या इल्जाम वाली पोस्ट शेयर करना भी तोहमत में शामिल है। हदीस में है: “आदमी के झूठा होने के लिए इतना ही काफी है कि वो हर सुनी-सुनाई बात आगे फैला दे।”
नतीजा (Conclusion)
किसी की इज़्ज़त आबरू पर हमला करना, कत्ल करने जैसा संगीन जुर्म है। एक मुसलमान की ज़बान और हाथ से दूसरे मुसलमान महफूज़ रहने चाहिए। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़बान की हिफाज़त करें और किसी पाक दामन औरत या मर्द पर कीचड़ उछालने से बचें। अल्लाह हमें इस कबीरा गुनाह से बचाए। आमीन।





