Namaz Chorne Ka Gunah in Hindi - नमाज़ छोड़ने का अज़ाब और नुकसान
Namaz Chorne Ka Gunah (नमाज़ छोड़ने का गुनाह): जानिए जानबूझकर नमाज़ छोड़ने का क्या अज़ाब है? कब्र और आखिरत में बे-नमाज़ी का क्या हाल होगा? कुरान और हदीस की रौशनी में।

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नमाज़ (Salah) इस्लाम का सबसे अहम रुकन है। कलमा पढ़ने के बाद एक मुसलमान पर सबसे पहली ज़िम्मेदारी नमाज़ कायम करना है। लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज हम मामूली दुनियावी कामों के लिए नमाज़ छोड़ देते हैं।
क्या आप जानते हैं कि Namaz Chorne Ka Gunah कितना बड़ा है? कुरान और हदीस में बे-नमाज़ी के लिए सख्त अज़ाब की वईद (चेतावनी) आई है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि जानबूझकर नमाज़ छोड़ने का क्या अंजाम होता है, कब्र में क्या अज़ाब होगा और आखिरत में क्या हाल होगा।
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नमाज़ छोड़ना: कुफ्र और ईमान के बीच फासला
नमाज़ छोड़ना कोई मामूली गलती नहीं है। हदीस में इसे कुफ्र (इनकार) के करीब बताया गया है।
हज़रत जाबिर (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “बंदे और कुफ्र व शिर्क के दरमियान फर्क सिर्फ नमाज़ का छोड़ना है।” (सहीह मुस्लिम)
इसका मतलब यह है कि जो नमाज़ छोड़ता है, वह कुफ्र के रास्ते पर चल पड़ता है।
बे-नमाज़ी का दुनिया में अंजाम
जो शख्स नमाज़ नहीं पढ़ता, उसकी दुनियावी ज़िन्दगी से भी सुकून और बरकत छीन ली जाती है:
- उम्र से बरकत खत्म: उसकी उम्र में बरकत नहीं रहती।
- चेहरे का नूर: उसके चेहरे से नेक लोगों वाला नूर खत्म हो जाता है।
- दुआ कबूल नहीं: उसकी दुआएं आसमान तक नहीं पहुँचतीं।
- रिज़्क में तंगी: उसके रिज़्क (रोज़ी) से बरकत उठा ली जाती है।
कब्र में नमाज़ छोड़ने का अज़ाब
मरने के बाद सबसे पहली मंज़िल कब्र है। बे-नमाज़ी के लिए कब्र एक डरावनी जगह बन जाएगी।
- कब्र का भींचना: कब्र उसे इतनी जोर से भींचेगी (दबाएगी) कि उसकी पसलियां एक-दूसरे में घुस जाएंगी।
- आग: उसकी कब्र में आग भड़का दी जाएगी।
- गंजा सांप: हदीस में आता है कि बे-नमाज़ी पर एक गंजा सांप मुसल्लत किया जाएगा, जिसकी आंखें आग की होंगी। वह उसे कयामत तक डसता रहेगा।
आखिरत (कयामत) में अज़ाब
कयामत के दिन सबसे पहले नमाज़ का ही हिसाब होगा। नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “कयामत के दिन बंदे के आमाल में सबसे पहले नमाज़ का हिसाब होगा। अगर नमाज़ ठीक निकली तो वह कामयाब हो गया, और अगर नमाज़ खराब निकली तो वह नाकाम और घाटे में रहा।” (तिर्मिज़ी)
जहन्नम में एक वादी है जिसका नाम ‘गय्या’ (Ghayya) है। कुरान में इरशाद है: “फिर उनके बाद ऐसे ना-खलफ (बुरे) लोग आए जिन्होंने नमाज़ को बर्बाद किया और अपनी ख्वाहिशों के पीछे पड़ गए, तो अनकरीब वो ‘गय्या’ (जहन्नम की खौफनाक वादी) में जा गिरेंगे।” (सूरह मरियम: 59)
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नमाज़ में सुस्ती करना (मुनाफिक की निशानी)
कुछ लोग नमाज़ तो पढ़ते हैं लेकिन बहुत सुस्ती से, या सिर्फ दिखावे के लिए, या वक़्त गुज़रने के बाद। कुरान में ऐसे लोगों के लिए भी ‘वैल’ (हलाकत) है।
“तो हलाकत (तबाही) है उन नमाज़ियों के लिए, जो अपनी नमाज़ से गाफिल (लापरवाह) हैं।” (सूरह माऊन: 4-5)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. अगर नमाज़ छूट जाए तो क्या करें?
अगर भूल से या नींद की वजह से नमाज़ छूट जाए, तो जैसे ही याद आए या सोकर उठें, फौरन उस नमाज़ की कज़ा पढ़ लें। जानबूझकर छोड़ी हुई नमाज़ के लिए सच्ची तौबा करें और कज़ा पढ़ें।
Q. क्या बे-नमाज़ी की दुआ कबूल होती है?
बे-नमाज़ी अल्लाह की नाफरमानी कर रहा होता है, इसलिए उसकी दुआओं की कबूलियत में रुकावट आ सकती है।
Q. क्या सिर्फ जुमा पढ़ने से काम चल जाएगा?
नहीं, इस्लाम में 5 वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ है। सिर्फ जुमा पढ़ना काफी नहीं है।
अल्लाह हम सबको पक्का नमाज़ी बनाए और नमाज़ की पाबंदी करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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