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Mozo Par Masah: मोज़ों पर मसह करने का सही तरीका और शर्तें

Mozo Par Masah: जानिए मोज़ों पर मसह करने का सही तरीका, इसकी शर्तें और किन चीज़ों से मसह टूट जाता है। सर्दी में वज़ू की आसानी के लिए बेहतरीन जानकारी।

Mozo Par Masah: मोज़ों पर मसह करने का सही तरीका और शर्तें

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इस्लाम एक फितरती दीन है और इसमें हर परेशानी के लिए आसानी मौजूद है। सर्दियों के मौसम में या बीमारी की हालत में बार-बार पैर धोना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इस्लाम ने मोज़ों पर मसह (Wiping over socks) करने की इजाज़त दी है।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Mozo Par Masah करने का सही तरीका क्या है, इसकी शर्तें क्या हैं और यह किन चीज़ों से टूट जाता है।

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मोज़ों पर मसह की शर्तें (Conditions)

हर तरह के मोज़ों पर मसह जायज़ नहीं है। इसके लिए कुछ शर्तें हैं:

  1. चमड़े के मोज़े (Leather Socks): मसह सिर्फ उन मोज़ों पर जायज़ है जो चमड़े (Leather) के हों, या इतने मोटे हों कि बिना जूते के उन पर चलकर 3-4 मील तक जाया जा सके और वो फटें नहीं। (आजकल के पतले सूती या नायलॉन के मोज़ों पर मसह जायज़ नहीं है)।
  2. टखने छिपे हों: मोज़े ऐसे हों जो टखनों (Ankles) को पूरी तरह छिपा लें।
  3. पैर से चिपके रहें: मोज़े इतने टाइट हों कि बिना बांधे अपनी जगह पर रुके रहें।
  4. पानी न छनता हो: मोज़े ऐसे हों कि अगर उन पर पानी डाला जाए तो वो पैर तक न पहुँचे।
  5. वज़ू करके पहनना: मोज़े पहनने से पहले पूरा वज़ू (पैर धोकर) करना ज़रूरी है। अगर बे-वज़ू मोज़े पहने तो मसह नहीं कर सकते।

नोट: जिस पर गुस्ल (Ghusl) फ़र्ज़ हो, वह मोज़ों पर मसह नहीं कर सकता। उसे मोज़े उतारकर नहाना होगा।

मसह की मुद्दत (Duration)

मसह करने की एक तय समय सीमा है:

  • मुक़ीम (अपने शहर में रहने वाला): 1 दिन और 1 रात (24 घंटे)।
  • मुसाफिर (Safar में): 3 दिन और 3 रात (72 घंटे)।

यह वक्त उस समय से शुरू होगा जब वज़ू टूटने के बाद पहली बार मसह किया जाए।

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मसह करने का तरीका (Method)

मसह करने का तरीका बहुत आसान है:

  1. अपने दोनों हाथों को पानी से गीला करें।
  2. दाहिने हाथ की तीन उंगलियों को दाहिने पैर के पंजों (Toes) के ऊपर रखें।
  3. उंगलियों को टखनों (Ankles) की तरफ खींचते हुए लाएं।
  4. इसी तरह बाएं हाथ से बाएं पैर पर मसह करें।
  5. मसह सिर्फ पैर के ऊपरी हिस्से पर होता है, तलवों (नीचे) या एड़ियों पर नहीं।

मसह किन चीज़ों से टूटता है?

  1. जिन चीज़ों से वज़ू टूटता है, उनसे मसह भी टूट जाता है।
  2. मोज़े उतार देने से मसह खत्म हो जाता है (अब दोबारा वज़ू के लिए पैर धोने होंगे)।
  3. मसह की मुद्दत (24 या 72 घंटे) पूरी हो जाने पर।
  4. अगर मोज़ा इतना फट जाए कि पैर की तीन छोटी उंगलियों के बराबर हिस्सा दिख जाए।
  5. गुस्ल फ़र्ज़ हो जाने पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या आम सूती (Cotton) मोज़ों पर मसह कर सकते हैं?
A.

नहीं, आम पतले सूती या नायलॉन के मोज़ों पर मसह जायज़ नहीं है क्योंकि उनमें पानी छन जाता है और वो बिना जूतों के चलने पर फट सकते हैं। मसह के लिए चमड़े के या बहुत मोटे मोज़े (जो पानी न सोखें) होने चाहिए।

Q. अगर मसह की मुद्दत खत्म हो जाए तो क्या करें?
A.

अगर मुद्दत खत्म हो जाए, तो मोज़े उतारकर पैर धोने होंगे और दोबारा वज़ू करके मोज़े पहनने होंगे।

Q. क्या औरतें भी मोज़ों पर मसह कर सकती हैं?
A.

जी हाँ, औरतें भी उन्हीं शर्तों के साथ मोज़ों पर मसह कर सकती हैं जो मर्दों के लिए हैं।


नतीजा (Conclusion)

अल्लाह ने अपने बंदों के लिए आसानी पैदा की है। अगर आप शर्तों को पूरा करते हैं, तो सर्दियों में ठंडे पानी से पैर धोने की मशक्कत से बचकर मसह कर सकते हैं। यह सुन्नत भी है और आसानी भी।

अल्लाह हमें दीन की सही समझ अता फरमाए। आमीन।

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