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Jumma Ke Din Ye 5 Galtiyan Na Kare: जुम्मा की फजीलत और आदाब
Jumma Ke Din Ye Galtiyan Na Kare: क्या आप जुम्मा के दिन ये 5 गलतियां करते हैं? जानिए जुम्मा की फजीलत, सही तरीका और हदीस की रौशनी में आदाब।

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जुम्मा (Jumma) का दिन मुसलमानों के लिए बहुत ही बरकत और फजीलत वाला दिन है। इसे “सय्यदुल अय्याम” (दिनों का सरदार) और “छोटी ईद” भी कहा जाता है।
अक्सर हम अनजाने में जुम्मा के दिन कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनसे हमारी नेकियों में कमी आ सकती है या हम गुनाहगार हो सकते हैं।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Jumma Ke Din Ye Galtiyan (जुम्मा के दिन की गलतियां) कौन सी हैं जिनसे हमें बचना चाहिए, और जुम्मा की सुन्नतें क्या हैं।
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जुम्मा के दिन ये 5 गलतियां भूल कर भी न करें
1. फज्र की नमाज़ छोड़ देना (Skipping Fajr Prayer)
बहुत से लोग जुम्मा की तैयारी के चक्कर में या छुट्टी के मूड में फज्र की नमाज़ छोड़ देते हैं और सीधे जुम्मा पढ़ने जाते हैं। यह बहुत बड़ी गलती है। याद रखें, जुम्मा की नमाज़ फ़र्ज़ है, लेकिन फज्र की नमाज़ भी उतनी ही फ़र्ज़ है। सिर्फ जुम्मा पढ़ना और बाकी नमाज़ें छोड़ना एक सच्चे मोमिन की निशानी नहीं है।
2. खुतबा के दौरान बात करना (Talking during Khutbah)
यह सबसे आम गलती है। जब इमाम खुतबा (Khutbah) दे रहा हो, तो बात करना सख्त मना है। यहाँ तक कि अगर कोई बात कर रहा हो, तो उसे जुबान से “चुप रहो” कहना भी मना है (सिर्फ इशारे से रोकें)।
नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “जिसने जुम्मा के दिन (खुतबा के दौरान) कंकरी को हाथ लगाया (यानी कोई भी फालतू काम किया), उसने लश्व (बेकार) काम किया।” (सहीह मुस्लिम)
3. लोगों की गर्दनें फांदकर आगे जाना
कुछ लोग देर से आते हैं और अगली सफ (Row) में बैठने के लिए बैठे हुए लोगों की गर्दनें फांदकर आगे जाते हैं। यह बहुत ही बुरा अमल है और इससे दूसरों को तकलीफ होती है। हदीस में इसे सख्त नापसंद किया गया है। जहाँ जगह मिले, वहीं बैठ जाना चाहिए।
4. अज़ान के बाद भी कारोबार या बातों में लगे रहना
अल्लाह कुरान में फरमाता है: “ऐ ईमान वालों! जब जुम्मा के दिन नमाज़ के लिए पुकारा जाए (अज़ान हो), तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ दौड़ पड़ो और खरीद-फरोख्त (Business) छोड़ दो।” (सूरह जुमुआ: 9)
अज़ान होते ही सारे काम छोड़कर मस्जिद की तरफ जाना चाहिए।
5. सफाई और खुशबू का ख्याल न रखना
जुम्मा के दिन गंदे कपड़ों में या बदबूदार मुँह के साथ मस्जिद जाना मुनासिब नहीं है। इससे फरिश्तों और नमाज़ियों को तकलीफ होती है। नहा-धोकर, साफ़ कपड़े पहनकर और खुशबू लगाकर जाना सुन्नत है।
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जुम्मा के दिन की सुन्नतें (Sunnahs of Friday)
जुम्मा के दिन इन सुन्नतों पर अमल करना चाहिए:
- ग़ुस्ल करना: जुम्मा के दिन ग़ुस्ल करना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है।
- नाखून काटना: सफाई का ख्याल रखना।
- मिस्वाक करना: मुँह की सफाई करना।
- सुरमा लगाना: आँखों में सुरमा लगाना।
- सूरह कहफ पढ़ना: जो शख्स जुम्मा को सूरह कहफ पढ़ता है, उसके लिए दो जुम्मों के दरमियान नूर रोशन रहता है।
- दरूद शरीफ की कसरत: इस दिन नबी (ﷺ) पर कसरत से दरूद भेजना चाहिए।
जुम्मा छोड़ने का गुनाह
जो शख्स बिना किसी सख्त मजबूरी के लगातार 3 जुम्मा छोड़ देता है, अल्लाह उसके दिल पर मुहर लगा देता है (यानी उसे हिदायत मिलना मुश्किल हो जाता है)। इसलिए जुम्मा की नमाज़ हरगिज़ न छोड़ें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या जुम्मा की नमाज़ औरतों पर फ़र्ज़ है?
नहीं, जुम्मा की नमाज़ औरतों पर फ़र्ज़ नहीं है। वो अपने घर में ज़ुहर की नमाज़ पढ़ेंगी। लेकिन अगर वो मस्जिद जाकर जुम्मा पढ़ें, तो अदा हो जाएगा (बशर्ते मस्जिद में औरतों का इंतज़ाम हो)।
Q. अगर जुम्मा की नमाज़ छूट जाए तो क्या करें?
अगर जुम्मा की नमाज़ छूट जाए, तो उसकी कज़ा जुम्मा नहीं होती। आपको उस दिन की ज़ुहर की नमाज़ (4 रकात फ़र्ज़) पढ़नी होगी।
Q. क्या सफर में जुम्मा पढ़ना ज़रूरी है?
मुसाफिर (Traveler) पर जुम्मा फ़र्ज़ नहीं है। वो ज़ुहर की नमाज़ पढ़ सकता है। लेकिन अगर वो रुक कर जुम्मा पढ़ ले, तो बहुत सवाब है।
नतीजा (Conclusion):
जुम्मा का दिन हमारे लिए एक साप्ताहिक (Weekly) ईद की तरह है। हमें चाहिए कि हम इस दिन की अजमत को समझें, गलतियों से बचें और सुन्नतों पर अमल करें। अल्लाह हमें जुम्मा के आदाब का ख्याल रखने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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