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Iffat Zia
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Janaze Ki Namaz Ka Tarika in Hindi - जनाज़े की नमाज़ की दुआ, नियत और तरीका

Janaze Ki Namaz Ka Tarika (जनाज़े की नमाज़): जानिए नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ने का सही तरीका, नियत और दुआएं (बालिग और नाबालिग के लिए) हिंदी और अरबी में।

Janaze Ki Namaz Ka Tarika in Hindi - जनाज़े की नमाज़ की दुआ, नियत और तरीका

Table of Contents

नमाज़-ए-जनाज़ा (Janaze Ki Namaz) एक ऐसी नमाज़ है जो किसी मुसलमान के इंतकाल (मौत) के बाद उसके लिए दुआ-ए-मगफिरत के तौर पर पढ़ी जाती है। यह “फर्ज़-ए-किफाया” है, यानी अगर मोहल्ले के कुछ लोगों ने भी इसे पढ़ लिया, तो सबकी तरफ से अदा हो जाएगी, लेकिन अगर किसी ने नहीं पढ़ा, तो सब गुनहगार होंगे।

अक्सर लोग जनाज़े में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें Janaze Ki Namaz Ka Tarika और दुआएं याद नहीं होतीं। इस आर्टिकल में हम जनाज़े की नमाज़ की नियत, तरीका और दुआएं (बालिग और नाबालिग के लिए) आसान हिंदी में जानेंगे।

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Janaze Ki Namaz Ki Niyat (नियत)

नमाज़ शुरू करने से पहले दिल में नियत करना ज़रूरी है। आप जुबान से भी कह सकते हैं:

“नियत की मैंने नमाज़-ए-जनाज़ा की, 4 तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, दुआ इस मय्यत के लिए, पीछे इस इमाम के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ।”

(इसके बाद इमाम के साथ ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ बांध लें।)


Janaze Ki Namaz Ka Tarika (Step-by-Step)

जनाज़े की नमाज़ में रुकू और सज्दा नहीं होता। इसमें सिर्फ खड़े होकर 4 तकबीरें कही जाती हैं।

1. पहली तकबीर (First Takbeer)

इमाम ‘अल्लाहु अकबर’ कहेगा। आप भी कानों तक हाथ उठाकर ‘अल्लाहु अकबर’ कहें और हाथ बांध लें। इसके बाद सना (Sana) पढ़ें:

सुब्हानकल्लाहुम्मा व बि-हमदिका, व तबारकस्मुका, व तआला जद्दुका, व जल्ला सनाउका, व ला इलाहा गैरुक।

(नोट: जनाज़े की सना में “व जल्ला सनाउका” बढ़ाया जाता है, जो आम नमाज़ में नहीं पढ़ते।)

2. दूसरी तकबीर (Second Takbeer)

इमाम दूसरी बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहेगा। इस बार हाथ नहीं उठाने हैं, सिर्फ ‘अल्लाहु अकबर’ कहना है। इसके बाद दरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ें (वही जो नमाज़ में पढ़ते हैं):

अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मदिन… (आखिर तक)

3. तीसरी तकबीर (Third Takbeer)

इमाम तीसरी बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहेगा। हाथ नहीं उठाने। अब मय्यत के लिए दुआ पढ़नी है। यह दुआ मय्यत के बालिग (Adult) या नाबालिग (Minor) होने के हिसाब से अलग होती है।

(A) बालिग मर्द या औरत की दुआ

अगर मरने वाला बालिग (Adult) है, तो यह दुआ पढ़ें:

अल्लाहुम्मगफिर लि-हय्यिना व मय्यितिना, व शाहिदिना व गाइबिना, व सगीरिना व कबीरिना, व ज़करिना व उनसाना। अल्लाहुम्मा मन अहयैतहु मिन्ना फ-अहयिही अलल-इस्लाम, व मन तवफ्फैतहु मिन्ना फ-तवफ्फहु अलल-ईमान।

(तर्जुमा: ऐ अल्लाह! बख्श दे हमारे ज़िन्दों को और मुर्दों को, हाज़िर को और गायब को, छोटों को और बड़ों को, मर्दों को और औरतों को। ऐ अल्लाह! हममें से जिसे तू ज़िन्दा रखे उसे इस्लाम पर ज़िन्दा रख, और जिसे मौत दे उसे ईमान पर मौत दे।)

(B) नाबालिग लड़के की दुआ

अगर जनाज़ा किसी बच्चे (नाबालिग लड़के) का हो:

अल्लाहुम्मज-अल्हु लना फरतंव-वज-अल्हु लना अजरंव-व-जुखरंव-वज-अल्हु लना शाफिअंव-व-मुशफ्फआ।

(C) नाबालिग लड़की की दुआ

अगर जनाज़ा किसी बच्ची (नाबालिग लड़की) का हो:

अल्लाहुम्मज-अल्हा लना फरतंव-वज-अल्हा लना अजरंव-व-जुखरंव-वज-अल्हा लना शाफिअतंव-व-मुशफ्फआ।

4. चौथी तकबीर (Fourth Takbeer)

इमाम चौथी बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहेगा। हाथ नहीं उठाने और कुछ पढ़ना भी नहीं है। इसके बाद इमाम सलाम फेरेगा, आप भी दोनों तरफ सलाम फेर दें।


कब्र पर मिट्टी देने की दुआ (Burial Duas)

जब मय्यत को दफनाया जाता है, तो कब्र पर तीन बार मिट्टी डालना सुन्नत है। हर बार मिट्टी डालते वक़्त यह पढ़ें:

  1. पहली बार: मिन्हा खलकनाकुम (इसी (मिट्टी) से हमने तुम्हें पैदा किया)
  2. दूसरी बार: व फीहा नुईदुकुम (और इसी में हम तुम्हें लौटाएंगे)
  3. तीसरी बार: व मिन्हा नुख्रिजुकुम तारतन उखरा (और इसी से हम तुम्हें दोबारा निकालेंगे)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या जनाज़े की नमाज़ के लिए वुज़ू ज़रूरी है?
A.

जी हाँ, जनाज़े की नमाज़ के लिए भी वुज़ू होना ज़रूरी है, जैसे आम नमाज़ के लिए होता है।

Q. अगर जनाज़े की दुआ याद न हो तो क्या पढ़ें?
A.

अगर दुआ याद न हो, तो आप दिल में मय्यत की मगफिरत के लिए दुआ कर सकते हैं या “अल्लाहुम्मगफिर लिल मुअमिनीना वल मुअमिनात” पढ़ सकते हैं।

Q. क्या जनाज़े की नमाज़ में जूते उतारना ज़रूरी है?
A.

अगर जूते पाक हैं तो पहनकर पढ़ सकते हैं। अगर यकीन न हो, तो जूते उतारकर उनके ऊपर खड़े होकर नमाज़ पढ़ना बेहतर है।

Q. अगर इमाम की तकबीर छूट जाए तो क्या करें?
A.

अगर आप देर से पहुँचे, तो इमाम की अगली तकबीर का इंतज़ार करें और फिर शामिल हो जाएं। छूटी हुई तकबीरें इमाम के सलाम फेरने के बाद पूरी कर लें।


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