Ilm Ki Ahmiyat: इस्लाम में इल्म (Knowledge) की फजीलत और अहमियत
Ilm Ki Ahmiyat: कुरान और हदीस की रौशनी में इल्म की अहमियत जानें। जानिए क्यों इस्लाम में इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है और इसके क्या फायदे हैं।

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इल्म (Knowledge) इस्लाम की बुनियाद है। अल्लाह ने इंसान को तमाम मखलूक में सबसे बेहतर (अशरफुल मखलूकात) इल्म की वजह से ही बनाया है।
इस आर्टिकल में हम Ilm Ki Ahmiyat, कुरान और हदीस में इसकी फजीलत, और इल्म हासिल करने के फायदों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
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पहली वही: इल्म की शुरुआत (The First Revelation)
इस्लाम की शुरुआत ही इल्म से हुई। जब नबी करीम (ﷺ) पर गारे हिरा (Cave Hira) में पहली वही नाज़िल हुई, तो वो नमाज़ या रोज़े का हुक्म नहीं था, बल्कि “पढ़ने” का हुक्म था।
अल्लाह ने फरमाया: “इक़रा बिस्मि रब्बिकल लज़ी ख़लक़” (पढ़ अपने रब के नाम से जिसने पैदा किया)
जब जिब्रईल (अ.स.) ने आप (ﷺ) से कहा “इक़रा” (पढ़िए), तो आप (ﷺ) ने फरमाया “मा अना बि-कारी” (मैं पढ़ा हुआ नहीं हूँ)। फिर जिब्रईल (अ.स.) ने उन्हें भींचा और पढ़ने को कहा। इससे पता चलता है कि दीन में पढ़ने और सीखने की कितनी अहमियत है।
कुरान में इल्म की फजीलत
कुरान मजीद में कई जगहों पर इल्म और उलमा (जानने वालों) की तारीफ की गई है।
1. आलिम और जाहिल बराबर नहीं
अल्लाह कुरान में फरमाता है: “क़ुल हल यस्तविल लज़ीना यअ’लमूना वल लज़ीना ला यअ’लमून” (कह दीजिये: क्या वो लोग जो जानते हैं (इल्म वाले) और वो लोग जो नहीं जानते (जाहिल), बराबर हो सकते हैं?) (सूरह ज़ुमर: 9)
यानी अल्लाह की नज़र में इल्म वाले का दर्जा बहुत ऊँचा है।
2. इल्म से दरजात बुलंद होते हैं
अल्लाह फरमाता है: “यरफइल्लाहुल लज़ीना आमनू मिनकुम वल लज़ीना ऊतुल इल्मा दरजात” (अल्लाह तुम में से ईमान वालों के और जिनको इल्म दिया गया है, उनके दरजात बुलंद करेगा।) (सूरह मुजादिला: 11)
हदीस में इल्म की अहमियत
रसूल अल्लाह (ﷺ) ने इल्म हासिल करने को हर मुसलमान पर लाज़िम करार दिया है।
इल्म हासिल करना फ़र्ज़ है: आप (ﷺ) ने फरमाया: “तलबुल इल्मि फरीज़तुन अला कुल्लि मुस्लिम” (इल्म हासिल करना हर मुसलमान (मर्द और औरत) पर फ़र्ज़ है।) (इब्ने माजा)
जन्नत का रास्ता: हदीस में है: “जो शख्स इल्म हासिल करने के रास्ते पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है।” (सहीह मुस्लिम)
सदका-ए-जारिया: इल्म फैलाना एक बेहतरीन सदका है। मरने के बाद भी इसका सवाब मिलता रहता है।
इल्म में बरकत की दुआ (Dua for Knowledge)
अल्लाह ने अपने नबी (ﷺ) को भी इल्म में बढ़ोत्तरी की दुआ सिखाई। हमें भी यह दुआ कसरत (ज़्यादा) से मांगनी चाहिए:
“رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا”
“रब्बि ज़िदनी इल्मा”
(ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा (बढ़ोत्तरी) फरमा।)
इल्म से मुराद क्या है? (What is Knowledge?)
इल्म से मुराद सिर्फ दीनी इल्म (Quran & Hadith) ही नहीं, बल्कि वो तमाम दुनियावी इल्म (Science, Technology, Medicine) भी हैं जो इंसानियत के फायदे के लिए हों और अल्लाह की पहचान कराएं।
जब एक डॉक्टर या साइंटिस्ट अल्लाह की कुदरत पर गौर करता है, तो उसका ईमान और मज़बूत होता है। इसलिए हमें दीनी और दुनियावी दोनों इल्म हासिल करने चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या औरतों के लिए इल्म हासिल करना ज़रूरी है?
जी हाँ, हदीस के मुताबिक इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है, चाहे वो मर्द हो या औरत। इस्लाम ने औरतों की तालीम पर बहुत ज़ोर दिया है।
Q. इल्म हासिल करने की कोई उम्र होती है?
नहीं, इल्म हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती। कहावत है: “माँ की गोद से लेकर कब्र तक इल्म हासिल करो।”
Q. अगर हाफिज़ा कमज़ोर हो तो क्या करें?
गुनाहों से बचें, क्योंकि गुनाह इल्म के नूर को बुझा देते हैं। और कसरत से “रब्बि ज़िदनी इल्मा” की दुआ करें।
नतीजा (Conclusion)
इल्म एक नूर है जो इंसान को अंधेरों से निकालकर उजाले की तरफ ले जाता है। हमें चाहिए कि हम खुद भी इल्म हासिल करें और अपनी आने वाली नस्लों को भी तालीम के ज़ेवर से संवारें।
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