Ghusl Ka Tarika in Hindi: ग़ुस्ल के फराइज़, सुन्नतें और गलतियां
Ghusl Ka Tarika: ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है? ग़ुस्ल के 3 फराइज़, सुन्नत तरीका और अक्सर की जाने वाली गलतियां। जानिए पाकी हासिल करने का मुकम्मल गाइड।

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ग़ुस्ल (Ghusl) यानी नहाना इस्लाम में पाकी हासिल करने का सबसे अहम जरिया है। ग़ुस्ल का मतलब है पूरे जिस्म को इस तरह धोना कि बाल बराबर भी जगह सूखी न रहे।
कुछ हालतें ऐसी होती हैं जिनमें ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ हो जाता है, वरना नमाज़, कुरान पढ़ना और मस्जिद में दाखिल होना जायज़ नहीं होता। अगर ग़ुस्ल सही तरीके से न किया जाए तो इंसान नापाक ही रहता है।
इस आर्टिकल में हम Ghusl Ka Tarika, इसके 3 फराइज़, सुन्नतें और अक्सर होने वाली गलतियों को तफसील से जानेंगे।
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ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है? (When is Ghusl Fard?)
इन सूरतों में ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ है:
- जनाबत (Janabat): हमबिस्तरी (Intercourse) करने से या मनी (Sperm) निकलने से (चाहे सोते में एह्तेलाम हो या जागते में)।
- हैज़ (Menstruation): औरतों को माहवारी (Periods) खत्म होने के बाद।
- निफास (Postpartum Bleeding): बच्चे की पैदाइश के बाद आने वाला खून बंद होने पर।
- मौत: मय्यत को ग़ुस्ल देना भी फ़र्ज़-ए-किफाया है।
ग़ुस्ल के 3 फराइज़ (Ghusl Ke 3 Faraiz)
ग़ुस्ल में 3 चीज़ें फ़र्ज़ हैं। अगर इनमें से एक भी चीज़ छूट जाए, तो आप चाहे कितना भी साबुन लगा लें या घंटों नहा लें, आप पाक नहीं होंगे।
1. कुल्ली करना (Gargling)
सिर्फ मुँह में पानी भरकर थूक देने से फ़र्ज़ अदा नहीं होता। मुँह भरकर इस तरह कुल्ली करें कि पानी हलक (Throat) की जड़ तक पहुँच जाए और मुँह का कोई भी हिस्सा, दाँत, मसूड़े या ज़बान सूखी न रहे। (अगर रोज़ा हो तो पानी हलक तक न ले जाएं)।
2. नाक में पानी डालना (Rinsing the Nose)
पानी को नाक के नथुनों में साँस के ज़रिए ऊपर नरम हड्डी तक खींचना ज़रूरी है। नाक के अंदर का कोई भी बाल या हिस्सा सूखा नहीं रहना चाहिए। अगर नाक में कोई गंदगी (मैल) जमी हो, तो उसे साफ़ करना भी ज़रूरी है।
3. पूरे बदन पर पानी बहाना (Washing the Entire Body)
सिर के बालों से लेकर पैरों के तलवों तक, जिस्म के हर हिस्से पर पानी इस तरह बहाएं कि एक बाल बराबर जगह भी सूखी न रहे। अगर जिस्म का कोई भी हिस्सा सूखा रह गया, तो ग़ुस्ल नहीं होगा।
ग़ुस्ल का सुन्नत तरीका (Sunnah Method of Ghusl)
- नियत: दिल में पाकी हासिल करने की नियत करें।
- हाथ धोना: दोनों हाथों को कलाई तक तीन बार धोएं।
- इस्तन्जा: शर्मगाह (Private Parts) को धोएं और अगर जिस्म पर कहीं नजासत (गंदगी) लगी हो तो उसे साफ़ करें।
- वज़ू: नमाज़ जैसा वज़ू करें। (अगर पैरों में पानी जमा हो रहा हो तो पैर आखिर में धोएं)।
- पानी बहाना: पहले सर पर तीन बार पानी डालें।
- दाहिना कंधा: फिर दाहिने (Right) कंधे पर तीन बार पानी डालें।
- बायां कंधा: फिर बाएं (Left) कंधे पर तीन बार पानी डालें।
- पूरा जिस्म: फिर पूरे जिस्म पर पानी बहाएं और हाथों से मलें ताकि कोई जगह सूखी न रहे।
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ग़ुस्ल की सुन्नतें और मकरूहात
सुन्नतें:
- बिस्मिल्लाह कहना।
- तरतीब से धोना।
- दाहिने (Right) तरफ से शुरू करना।
- तीन-तीन बार पानी डालना।
मकरूहात (नापसंदीदा बातें):
- पानी बहुत ज़्यादा बहाना (फुज़ूलखर्ची)।
- ग़ुस्ल करते वक़्त बातें करना।
- बिना कपड़ों के किबला की तरफ मुँह या पीठ करना।
- खड़े होकर पेशाब करना।
अक्सर यहाँ होती है गलती (Common Mistakes in Ghusl)
बहुत से लोग अनजाने में ये गलतियां करते हैं जिससे उनका ग़ुस्ल नहीं होता:
- नेल पॉलिश (Nail Polish): अगर नाखूनों पर नेल पॉलिश लगी है, तो पानी नीचे तक नहीं पहुँचता। इसलिए नेल पॉलिश हटाना ज़रूरी है। (मेहंदी का रंग जायज़ है)।
- टाइट अंगूठी (Tight Ring): अगर अंगूठी इतनी टाइट है कि पानी उसके नीचे नहीं जा रहा, तो उसे हिलाकर पानी पहुँचाना फ़र्ज़ है।
- कान की बालियां: औरतों को चाहिए कि कान के सुराख (Hole) में पानी पहुँचाने के लिए बालियों को हिलाएं।
- नाभि (Navel): नाभि में उंगली डालकर पानी पहुँचाना चाहिए, क्योंकि अक्सर वहां पानी खुद नहीं पहुँचता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या ग़ुस्ल के बाद वज़ू करना ज़रूरी है?
नहीं, ग़ुस्ल में वज़ू हो जाता है। आप ग़ुस्ल के बाद सीधे नमाज़ पढ़ सकते हैं, जब तक कि वज़ू टूटने वाली कोई चीज़ न हो।
Q. अगर दांत में खाना फंसा हो तो क्या ग़ुस्ल होगा?
अगर खाना इतना सख्त फंसा है कि पानी नीचे नहीं पहुँचा, तो ग़ुस्ल नहीं होगा। उसे निकालकर कुल्ली करना ज़रूरी है।
Q. क्या शावर (Shower) के नीचे नहाने से ग़ुस्ल हो जाता है?
जी हाँ, अगर आपने कुल्ली कर ली, नाक में पानी डाल लिया और शावर के नीचे पूरा बदन भीग गया, तो ग़ुस्ल हो जाएगा। बाल्टी और मग होना ज़रूरी नहीं है।
Q. अगर ग़ुस्ल का कोई फ़र्ज़ भूल जाएं तो क्या करें?
अगर आपको बाद में याद आए कि कोई हिस्सा सूखा रह गया है, तो पूरा ग़ुस्ल दोहराने की ज़रूरत नहीं। सिर्फ उस हिस्से को धो लें और अगर कुल्ली या नाक में पानी डालना भूले थे तो वो कर लें।
Q. क्या औरतों को ग़ुस्ल के लिए अपने बाल खोलना ज़रूरी है?
नहीं, अगर बाल गुंथे हुए (braided) हैं तो उन्हें खोलना ज़रूरी नहीं है। बस बालों की जड़ों में अच्छी तरह पानी पहुँचाना फ़र्ज़ है ताकि कोई जड़ सूखी न रहे। अगर पानी जड़ों तक बिना खोले पहुँच सकता है तो यह काफी है।
नतीजा (Conclusion)
दोस्तों, पाकी (Taharat) आधा ईमान है। अगर हमारा ग़ुस्ल ही सही नहीं होगा, तो नमाज़ और कुरान की तिलावत कैसे कुबूल होगी? इसलिए इन 3 फ़र्ज़ों का हमेशा ख्याल रखें।
अल्लाह हमें दीन की सही समझ अता फरमाए। आमीन।
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