Dil Ka Sukoon: दिल का चैन और ज़हनी सुकून पाने के तरीके
Dil Ka Sukoon: जानिए आज के तनाव भरे दौर में दिल का सुकून, ज़हनी राहत और खुशहाल ज़िंदगी पाने के बेहतरीन कुरआनी व सुन्नत तरीके।

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आज की दुनिया में हमारे पास वो सब कुछ मौजूद है जिसका इंसान कभी ख्वाब देखा करता था—आलीशान घर, नर्म गद्देदार बिस्तर, एसी की ठंडक, तरह-तरह के लजीज खाने और उंगलियों के इशारे पर चलने वाला स्मार्टफोन। लेकिन इस सब के बावजूद अगर किसी एक चीज़ की सबसे ज्यादा कमी है, तो वो है ‘दिल का सुकून’ (Mental Peace & Inner Tranquility)।
आज हर दूसरा इंसान अंदरूनी बेचैनी, घबराहट (Anxiety), डिप्रेशन और बेनाम उदासी की आग में जल रहा है। रात को नींद की गोलियां खाकर भी आंखें छत को ताकती रहती हैं। इंसान सोचता है कि सब कुछ होने के बाद भी सीने के अंदर यह खालीपन और घुटन क्यों है? आखिर दिल को वो राहत और चैन क्यों नहीं मिल पा रहा जो ज़िंदगी को खुशनुमा बना दे?
इस्लाम हमें बताता है कि इंसान सिर्फ हाड़-मांस का पुतला नहीं है; इंसान के सीने में एक रूह (Soul) और दिल (Qalb) भी है। जिस तरह जिस्म को खाने-पीने की ज़रूरत होती है, ठीक उसी तरह दिल और रूह की भी अपनी एक खुराक होती है। जब हम जिस्म को तो दुनिया की सारी नेमतें खिलाते हैं लेकिन रूह को भूखा छोड़ देते हैं, तो दिल तड़पने लगता है और इंसान बेचैन हो जाता है।
आइए इस आर्टिकल में तफसील से जानते हैं कि आज के दौर में दिल की बेचैनी की असली वजहें क्या हैं और कुरआन व सुन्नत की रोशनी में दिल का सुकून हासिल करने के पक्के और आसान तरीके कौन से हैं।
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1. दिल का सुकून क्या है? (Understanding Real Inner Peace)
बहुत से लोग ‘मौज-मस्ती’ (Pleasure) और ‘दिल के सुकून’ (Peace) को एक ही चीज़ समझ लेते हैं, जबकि दोनों में ज़मीन-आसमान का फर्क है:
- मौज-मस्ती (Lazzat): यह एक आरज़ी (अस्थायी) एहसास है। जैसे बाहर जाकर पसंदीदा खाना खा लेना, कोई नई गाड़ी खरीद लेना या सोशल मीडिया पर वीडियो देख लेना। यह खुशी कुछ मिनट या घंटों में उड़न छू हो जाती है और इंसान वापस उसी खालीपन में लौट आता है।
- दिल का सुकून (Sukoon-e-Qalb): यह रूह का वो गहरा इत्मीनान है जो बाहर के हालात पर निर्भर नहीं करता। हालात चाहे मुश्किल हों, जेब में पैसे कम हों या ज़िंदगी में आज़माइशें चल रही हों, फिर भी इंसान का दिल अंदर से पुरसुकून, मुतमइन और अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहता है।
हदीस शरीफ में प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने इरशाद फरमाया:
لَيْسَ الْغِنَى عَنْ كَثْرَةِ الْعَرَضِ، وَلَكِنَّ الْغِنَى غِنَى النَّفْسِ
हिन्दी उच्चारण: “लैसल-गिना अन कसरतुल-अ’रज़ि, व लाकिन्नल-गिना गिनन-नफ़्स।”
हिन्दी तर्जुमा: “अमीरी साजो-सामान और दौलत की ज़्यादती का नाम नहीं है, बल्कि असल अमीरी तो दिल का मुतमइन (संतुष्ट) होना है।”
— (सहीह बुखारी: 6446)
जब तक इंसान का दिल शांत नहीं होता, पूरी दुनिया की दौलत भी उसे चैन की नींद नहीं दिला सकती।
2. आज के दौर में दिल की बेचैनी की 5 बड़ी वजहें
अगर आप अपने दिल को सुकून पहुंचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले उन वजहों को पहचानना जरूरी है जो हमारे अंदरूनी अमन को दीमक की तरह चाट रही हैं:
1. अल्लाह की याद और नमाज़ से दूरी
इंसानी दिल को अल्लाह तआला ने अपनी इबादत और पहचान के लिए बनाया है। जब इंसान नमाज़ छोड़ देता है, अल्लाह के कलाम से नाता तोड़ लेता है और सिर्फ दुनिया कमाने की दौड़ में अंधा हो जाता है, तो दिल का ताल्लुक अपने मालिक से कट जाता है। कुरआन करीम की सूरह ताहा (आयत: 124) में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है: “और जो मेरे ज़िक्र से मुंह मोड़ेगा, उसकी ज़िंदगी तंग (बेचैन) कर दी जाएगी।”
2. सोशल मीडिया और दूसरों से अंधी तुलना (Comparison)
आजकल मोबाइल पर दूसरों की बनावटी, फिल्टर लगी और चमक-दमक भरी ज़िंदगी देखकर इंसान अपने पास मौजूद नेमतों को भूल जाता है। इंसान सोचता है कि “फलां शख्स इतना खुश है, वो इतनी महंगी जगह घूम रहा है, मैं ही पीछे रह गया।” दूसरों से तुलना करते ही इंसान के दिल में नाशुक्री, हीन भावना और जलन पैदा हो जाती है जो सुकून को जलाकर राख कर देती है।
3. डिजिटल ओवरलोड और हर बात का अंदेशा (Information Overload)
फैमिली व्हाट्सएप ग्रुप्स, न्यूज चैनलों और रील्स पर दिन-रात बीमारी, कयामत, तरह-तरह के डाइट स्कैम और डरावनी खबरों का सैलाब आता रहता है। बिना जांचे-परखे हर बात को सच मान लेना और गैर-ज़रूरी ज्ञान का बोझ अपने दिमाग पर लाद लेना इंसान को हर वक्त वहमी और तनावग्रस्त बना देता है।
4. भविष्य (Future) की गैर-ज़रूरी फिक्र और तवक्कुल की कमी
“कल मेरा क्या होगा? नौकरी रहेगी या नहीं? बच्चों का क्या बनेगा?” इंसान आने वाले कल की ऐसी अनगिनत चिंताओं का बोझ आज ही अपने कंधों पर उठा लेता है जो अभी आई ही नहीं हैं। जब इंसान का अल्लाह के ‘रज़्ज़ाक’ और ‘कारसाज़’ होने पर यकीन कमजोर पड़ता है, तो दिल में डर और घबराहट घर कर लेती है।
5. दूसरों के लिए दिल में नफरत, गुस्सा और गिले-शिकवे पालना
जब हम किसी की पुरानी गलती को माफ नहीं करते, दिल में किसी के लिए नफरत या बदले की आग सुलगाए रखते हैं, तो असल नुकसान उस दूसरे इंसान का नहीं, बल्कि खुद हमारे अपने दिल का होता है। कड़वाहट और जलन से भरा हुआ दिल कभी भी सुकून की सांस नहीं ले सकता।
3. कुरआन मजीद की नज़र में दिल के सुकून का राज़
अल्लाह तआला ने इस कायनात को बनाया है और वही जानता है कि इंसानी दिल की धड़कनों को किस चीज़ से आराम मिलता है। कुरआन मजीद की सूरह अर-रअद में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने दिल के सुकून का सबसे बड़ा फॉर्मूला बयान फरमाया है:
الَّذِينَ آمَنُوا وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ اللَّهِ ۗ أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ
हिन्दी उच्चारण: “अल्लज़ी-न आमनू व तत्मइन्नु कुलूबुहुम बि-ज़िक्रिल्लाह, अला बि-ज़िक्रिल्लाहि तत्मइन्नुल कुलूब।”
हिन्दी तर्जुमा: “जो लोग ईमान लाए उनके दिलों को अल्लाह के ज़िक्र से सुकून हासिल होता है। याद रखो! अल्लाह के ज़िक्र से ही दिलों को सच्चा सुकून और इत्मीनान नसीब होता है।”
— (सूरह अर-रअद: 28)
इस आयत पर गौर कीजिए। अल्लाह ने यह नहीं कहा कि दिल का सुकून पैसों में है, बड़ी गाड़ियों में है या ऊंचे पदों में है। अल्लाह ने दो-टूक लफ़्ज़ों में फरमाया: ‘अल्लाह के ज़िक्र में ही दिलों का सुकून है।’
ज़िक्र का मतलब सिर्फ जुबान से तस्बीह फेरना नहीं है, बल्कि हर वक्त दिल में अल्लाह की मौजूदगी का एहसास रखना, उसकी नेमतों को याद करना और हर मुश्किल में उसी की तरफ रुजू करना है।
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4. दिल का सुकून पाने के 6 असरदार सुन्नत व रूहानी तरीके
अगर आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में तनाव और घबराहट से आज़ाद होकर सच्चा सुकून महसूस करना चाहते हैं, तो नबी करीम ﷺ की सुन्नत से ये 6 आसान आदतें अपना लें:
🌿 दिल का सुकून पाने वाले 6 सुन्नत अमल (एक नज़र में):
- पंजवक्ता नमाज़: नमाज़ को ‘बोझ’ नहीं, बल्कि ‘सुकून का वक़्त’ बनाना
- तहज्जुद और दुआ: रात की तन्हाई में रो-रोकर अपने रब से दिल का हाल कहना
- अस्तगफार व दुरुद: कसरत से अस्तगफार और दुरुद शरीफ पढ़कर दिल का बोझ हल्का करना
- कनाअत और शुक्रगुज़ारी: दुनियावी चीज़ों में हमेशा अपने से कमज़ोर को देखना
- माफ करने की आदत: लोगों की गलतियों को भुलाकर दिल को रंजिशों से आज़ाद करना
- हमदर्दी और खिदमत: दूसरों के काम आना और मुस्कुराकर मिलना
1. नमाज़ को ‘बोझ’ नहीं, ‘सुकून का वक़्त’ समझें
जब हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को कोई परेशानी या ग़म पेश आता, तो आप ﷺ फौरन नमाज़ की तरफ दौड़ते थे। आप ﷺ अपने मोअज़्ज़िन हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु से फरमाते थे: “ऐ बिलाल! अज़ान दो और नमाज़ के ज़रिए हमें सुकून पहुंचाओ।”
नमाज़ सिर्फ एक रस्म या उठक-बैठक नहीं है; यह अपने रब के सामने हाज़िरी है। जब आप सच्चे दिल से सजदे में सिर रखते हैं, तो ज़मीन पर सिर रखकर आप अर्श वाले के सबसे करीब होते हैं। अपनी सारी परेशानियां सजदे में अल्लाह के हवाले कर दीजिए, दिल का बोझ हल्का हो जाएगा।
2. तन्हाई में तहज्जुद और अल्लाह से बातें करना
दिनभर की भागदौड़ में दिल थक जाता है। रात के आखिरी पहर में, जब पूरी दुनिया सो रही हो, उठकर वुज़ू करें और दो रकअत तहज्जुद पढ़ें। मुसल्ले पर बैठकर अपने रब से ऐसे बातें करें जैसे एक बच्चा अपनी मां से अपना दुखड़ा रोता है। अपने आंसुओं को बहने दें। वो रब जो अंधेरी रात में काले पत्थर पर चलने वाली चींटी के कदमों की आहट भी सुनता है, वो आपके दिल की सिसकियों को कैसे नहीं सुनेगा?
3. कसरत से अस्तगफार और दुरुद शरीफ का विर्द
गुनाह इंसान के दिल पर कालिख की तरह जम जाते हैं, जिससे दिल बेचैन और भारी हो जाता है। तौबा और अस्तगफार उस कालिख को धोकर दिल को आईने की तरह चमका देते हैं।
हदीस में आता है कि जो शख्स कसरत से “अस्तगफिरुल्लाह” पढ़ता है, अल्लाह तआला उसके हर ग़म को दूर कर देता है, हर तंगी से निकलने का रास्ता बना देता है और उसे ऐसी जगह से रिज़्क देता है जहां से उसका गुमान भी नहीं होता। इसी तरह नबी करीम ﷺ पर दुरुद शरीफ पढ़ने से इंसान की सारी फिक्रें अल्लाह अपने ज़िम्मे ले लेता है।
4. कनाअत (Contentment) और शुक्रगुज़ारी अपनाना
अक्सर हमारी बेचैनी की वजह यह होती है कि हम उन 90 चीज़ों को छोड़कर उन 10 चीज़ों के पीछे रोते हैं जो हमारे पास नहीं हैं।
सहीह मुस्लिम की हदीस में नबी करीम ﷺ ने एक बेहतरीन मनोवैज्ञानिक नुस्खा सिखाया:
انْظُرُوا إِلَى مَنْ أَسْفَلَ مِنْكُمْ وَلَا تَنْظُرُوا إِلَى مَنْ هُوَ فَوْقَكُمْ
हिन्दी उच्चारण: “उन्जुरू इला मन असफ-ल मिन्कुम व ला तन्जुरू इला मन हु-व फौककुम।”
हिन्दी तर्जुमा: “दुनिया के मामलों में हमेशा उन लोगों को देखो जो तुमसे कमज़ोर (गरीब) हैं, उन्हें मत देखो जो तुमसे ऊपर (दौलतमंद) हैं; ऐसा करने से तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को कमतर नहीं समझोगे।”
— (सहीह मुस्लिम: 2963)
जब आप अस्पताल में किसी बीमार को देखेंगे, तो अपनी तंदुरुस्ती पर शुक्र करेंगे। जब किसी बेघर को देखेंगे, तो अपनी छत पर शुक्र करेंगे। शुक्रगुज़ारी दिलों में सुकून का समंदर बहा देती है।
5. माफ करने की आदत (दिल को आज़ाद करें)
अगर आप किसी से बदला लेने की आग अपने अंदर जलाए रखेंगे, तो सबसे पहले आपका अपना सुकून जलेगा। इंसान गलतियों का पुतला है। दूसरों की ज्यादतियों को अल्लाह की खातिर माफ कर दीजिए। जिस तरह आप चाहते हैं कि अल्लाह आपके गुनाहों को माफ कर दे, उसी तरह आप भी बंदों को माफ करना सीखें। माफी से दिल का भारीपन खत्म होता है और रूह आज़ाद हो जाती है।
6. दूसरों के काम आना और मुस्कुराकर मिलना
जब इंसान सिर्फ अपनी ज़ात, अपने फायदे और अपनी ख्वाहिशों के दायरे में कैद रहता है, तो उसका दिल तंग हो जाता है। जब आप किसी भूखे को खाना खिलाते हैं, किसी यतीम के सिर पर हाथ रखते हैं या किसी परेशान हाल इंसान की बात तसल्ली से सुनते हैं, तो अल्लाह आपके दिल को एक ऐसी रूहानी ठंडक अता फरमाता है जो दुनिया की किसी दौलत से नहीं खरीदी जा सकती।
5. दिल की बेचैनी दूर करने की 3 मस्नून दुआएं
जब भी दिल घबराए, सीने में घुटन महसूस हो या किसी बात का शदीद खौफ तारी हो, तो इन 3 दुआओं को अपनी ज़ुबान पर जारी कर लें:
दुआ 1: ग़म, फिक्र और कर्ज़ के बोझ से निजात की दुआ
यह नबी करीम ﷺ की सबसे जामे और मशहूर दुआ है जिसे आप ﷺ सुबह और शाम पढ़ा करते थे:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
हिन्दी उच्चारण: “अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल हम्मि वल हज़नि, वल अ’ज्ज़ि वल क-सलि, वल जुब्नि वल बुख़्लि, व दलइद्-दैनी व ग़लबतिर्-रिजाल।”
हिन्दी तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूं फिक्र और ग़म से, बेबसी और सुस्ती से, बुज़दिली और कंजूसी से, कर्ज़ के भारी बोझ से और लोगों के ज़ुल्म व दबाव से।”
— (सहीह बुखारी: 2893)
दुआ 2: हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम की आयते-करीमा
जब हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट में घोर अंधेरों और बेबसी के आलम में फंसे थे, तो उन्होंने यह दुआ मांगी थी। हदीस में है कि जो मुसलमान किसी भी मुसीबत में यह दुआ मांगता है, अल्लाह उसकी पुकार जरूर कबूल फरमाता है:
لَّا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
हिन्दी उच्चारण: “ला इला-ह इल्ला अन्ता सुब्हा-नका इन्नी कुन्तु मिनज़-ज़ालिमीन।”
हिन्दी तर्जुमा: “तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ही ज़्यादती करने वालों में से था।”
— (सूरह अल-अंबिया: 87)
दुआ 3: रहमत और बिगड़े काम संवारने की नबवी दुआ
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، وَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ
हिन्दी उच्चारण: “या हय्यु या कय्यूम, बि-रहमतिका अस्तागीस, अस्लिह ली शअनी कुल्लहू, व ला तकिल्नी इला नफ़्सी तरफ़-त ऐन।”
हिन्दी तर्जुमा: “ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले और सारी कायनात को थामने वाले! मैं तेरी रहमत के वसीले से मदद मांगता हूं, मेरे सारे हालात संवार दे, और मुझे पलक झपकने जितनी देर के लिए भी मेरे अपने नफ़्स के हवाले न कर।”
— (सुनन नसई: 10405)
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6. रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सुकून के लिए काम की नसीहतें
- स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल को कमरे से बाहर रख दें। रात को देर तक रील्स देखना नींद के हार्मोन को खत्म कर देता है और सुबह इंसान भारी सिर और चिड़चिड़ापन लेकर उठता है।
- ‘इमोशनल ईटिंग’ से बचें: जब इंसान तनाव में होता है, तो अक्सर भूख न होने पर भी मीठा या जंक फूड ठूंसने लगता है। इससे पेट भी खराब होता है और ज़हनी बोझ भी बढ़ता है। जब भी तनाव हो, ठंडा पानी पिएं, वुज़ू करें और दो रकअत नमाज़ पढ़ें।
- हर सुनी-सुनाई बात से परेशान न हों: व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर आने वाली हर बीमारी, डाइट टिप्स या कयामती भविष्यवाणियों पर आंख मूंदकर यकीन न करें। अपनी ज़िंदगी को सरल और सादा रखें।
- सुबह का आगाज अल्लाह के नाम से करें: सुबह फज्र की नमाज़ के बाद कुरआन करीम की थोड़ी सी तिलावत और सुबह के अज़कार ज़रूर पढ़ें। जो दिन अल्लाह की याद से शुरू होता है, उस दिन का अंत सुकून पर होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. जब दिल बहुत ज्यादा बेचैन हो तो सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जब दिल में घबराहट या शदीद बेचैनी हो, तो सबसे पहले ठंडे पानी से ताजा वुज़ू करें। वुज़ू करने से गुस्से और तनाव की आग बुझती है। इसके बाद मुसल्ले पर बैठकर 100 बार “अस्तगफिरुल्लाह” और 11 बार “ला हवला व ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह” पढ़ें। दिल को तुरंत ठंडक महसूस होगी।
Q. क्या नमाज़ पढ़ने के बाद भी इंसान डिप्रेशन या बेचैनी का शिकार हो सकता है?
हां, यह मुमकिन है। कई बार इंसान नमाज़ तो पढ़ता है लेकिन उसका ध्यान कहीं और होता है या दिमाग में कोई जिस्मानी बीमारी (हार्मोनल असंतुलन) या पुराना सदमा होता है। ऐसे में नमाज़ में दिल लगाना सीखें (खुशू-खुज़ू) और साथ ही ज़रूरत पड़ने पर किसी अच्छे डॉक्टर या थेरेपिस्ट से मशवरा भी करें। दवा और दुआ दोनों सुन्नत हैं।
Q. दिल के सुकून के लिए कुरआन करीम की कौन सी सूरह पढ़नी चाहिए?
दिल के सुकून और हिफाजत के लिए सूरह अर-रहमान, सूरह अल-इन्शिराह (अलम नशरह) और सूरह यासीन की तिलावत बेहद मुफीद है। सूरह इन्शिराह अल्लाह के कलाम का वो तोहफा है जो सीने की तंगी को खोल देता है और गमों को दूर करता है।
Q. क्या दूसरों से अपनी तुलना करने से दिल का सुकून खत्म हो जाता है?
जी हां, बिल्कुल। सोशल मीडिया पर दूसरों की चमक-दमक देखकर अपने जीवनसाथी, कमाई या घर को कोसना नाशुक्री का सबसे बड़ा सबब है। जब इंसान अपने से नीचे वाले को देखता है तो दिल में शुक्र पैदा होता है, और जब ऊपर वाले को देखता है तो जलन और बेचैनी पैदा होती है।
Q. अगर रात में बेचैनी की वजह से नींद न आए तो क्या पढ़ें?
बिस्तर पर लेटकर सूरह फातिहा, आयतुल कुर्सी और आखिरी तीन सूरह (इख्लास, फलक, नास) पढ़कर अपने हाथों पर फूंक मारकर पूरे जिस्म पर फेर लें। इसके बाद दिल ही दिल में “सुब्हानल्लाह” (33 बार), “अल्हम्दुलिल्लाह” (33 बार) और “अल्लाहु अकबर” (34 बार) पढ़ें। यह तस्बीह थकान को मिटाकर पुरसुकून नींद लाती है।
Q. क्या किसी का दुख-दर्द सुनने से भी दिल को सुकून मिलता है?
हां, नबी करीम ﷺ ने फरमाया कि जो शख्स अपने भाई की तकलीफ दूर करता है, अल्लाह दुनिया और आखिरत में उसकी तकलीफों को दूर कर देता है। जब आप अपने स्वार्थ से बाहर निकलकर किसी परेशान हाल इंसान की बात सुनते हैं और उसका सहारा बनते हैं, तो अल्लाह आपके अपने दिल को सुकून और रहमत से भर देता है।
नतीजा (Conclusion)
दिल का सुकून कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप बाज़ार से खरीद सकें या दौलत के ढेर लगाकर हासिल कर सकें। यह अल्लाह तआला का एक खास रूहानी तोहफा है जो सिर्फ उन्हीं दिलों में उतरता है जो अल्लाह की याद से आबाद होते हैं और उसकी रज़ा पर राज़ी रहते हैं।
अगर आज आपकी ज़िंदगी में बेचैनी, खालीपन और तनाव ने डेरा डाल रखा है, तो दुनिया की चमक-दमक के पीछे भागना छोड़ दीजिए। अपने मुसल्ले पर लौट आइए, अपने रब के सामने झुक जाइए, अपनी अना और गिले-शिकवों को मिटा दीजिए और सुन्नते-नबवी को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लीजिए। जब आप अल्लाह से अपना ताल्लुक जोड़ लेंगे, तो दुनिया की कोई भी परेशानी आपके दिल का चैन नहीं छीन सकेगी।
दिल को छू लेने वाली दुआ:
“ऐ अल्लाह! हमारे दिलों को हर तरह की बेचैनी, ग़म, डिप्रेशन और बुरी नज़र से महफ़ूज़ फरमा। हमारे सीनों को ईमान और सुकून के नूर से खोल दे। हमें हर हाल में तेरा शुक्र अदा करने और तेरी रज़ा पर राज़ी रहने वाला दिल अता फरमा। हमारे घरों को अमन और सुकून का गहवारा बना दे। आमीन या रब्बल आलमीन!”
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