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Iffat Zia
· Akhlaq · 4 min read

Bachon Ki Tarbiyat Kaise Kare - औलाद की परवरिश के 5 सुनहरे उसूल

Bachon Ki Tarbiyat: बच्चों की अच्छी तरबियत कैसे करें? जानिए इस्लाम में परवरिश के आसान तरीके, मोबाइल की लत छुड़ाने के उपाय और नेक औलाद के लिए दुआएं।

Bachon Ki Tarbiyat Kaise Kare - औलाद की परवरिश के 5 सुनहरे उसूल

Table of Contents

बच्चों की तरबियत (Bachon Ki Tarbiyat) इस्लाम में एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। औलाद अल्लाह की नेमत भी है और अमानत भी। अगर इनकी सही परवरिश न की जाए, तो यह दुनिया और आख़िरत दोनों में माँ-बाप के लिए इम्तिहान बन सकती है।

अक्सर माँ-बाप यह सवाल करते हैं कि Bachon Ki Tarbiyat Kaise Kare? आज के दौर में जब मोबाइल और इंटरनेट का असर बढ़ गया है, बच्चों को नेक और फरमाबरदार बनाना एक मुश्किल काम (Challenge) बन गया है।

इस आर्टिकल में हम इस्लाम की रौशनी में बच्चों की परवरिश के सुनहरे उसूल, माँ-बाप का किरदार और ज़रूरी दुआएं जानेंगे।

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1. बच्चों से मोहब्बत और नरमी

तरबियत का सबसे पहला उसूल मोहब्बत है। नबी करीम (ﷺ) बच्चों से बेहद मोहब्बत करते थे। आप (ﷺ) ने फरमाया: “जो हमारे छोटों पर रहम नहीं करता और बड़ों की इज़्ज़त नहीं करता, वो हम में से नहीं।”

  • बच्चों को गले लगाएं और उनका माथा चूमना सुन्नत है।
  • उनकी बात ध्यान से सुनें।
  • बेवजह डांटने या मारने से बचें, इससे बच्चे जिद्दी हो जाते हैं।

2. माँ-बाप का किरदार (Role Model)

बच्चे नसीहत से कम और नकल (Copy) करके ज़्यादा सीखते हैं।

  • अगर आप चाहते हैं कि बच्चा नमाज़ी बने, तो पहले खुद नमाज़ पढ़ें।
  • अगर आप चाहते हैं कि बच्चा झूठ न बोले, तो उसके सामने कभी झूठ न बोलें।
  • माँ की गोद बच्चे का पहला मदरसा है। माँ को चाहिए कि बच्चों को बचपन से ही अल्लाह और रसूल (ﷺ) की बातें सुनाए।

3. गुस्सा और सख्ती से बचें

बच्चों की गलतियों पर फौरन गुस्सा न करें।

  • अगर गलती छोटी है, तो प्यार से समझाएं।
  • अगर गलती बड़ी है, तो अकेले में समझाएं, सबके सामने ज़लील न करें।
  • मारना आख़िरी रास्ता है, वो भी तब जब बच्चा समझदार हो और बार-बार समझाने पर भी न माने (जैसे 10 साल की उम्र में नमाज़ न पढ़ने पर)। लेकिन चेहरे पर मारना सख्त मना है।

4. मोबाइल की लत कैसे छुड़ाएं?

आजकल मोबाइल बच्चों की तरबियत में सबसे बड़ी रुकावट है।

  • बच्चों को बहलाने के लिए मोबाइल न दें।
  • खुद भी बच्चों के सामने मोबाइल का कम इस्तेमाल करें।
  • उन्हें बाहर खेलने (Outdoor Games) की आदत डालें।
  • मोबाइल का टाइम फिक्स करें और निगरानी रखें कि वो क्या देख रहे हैं।

5. दीनी तालीम और नमाज़

  • बच्चों को बचपन से ही कुरान पढ़ना सिखाएं।
  • नमाज़ की आदत डालें (7 साल की उम्र से)।
  • हलाल और हराम का फर्क समझाएं।
  • नबी (ﷺ) और सहाबा के वाकयात सुनाएं।

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औलाद के लिए मसनून दुआएं

माँ-बाप की दुआ औलाद के हक़ में बहुत जल्दी कबूल होती है। अपने बच्चों के लिए ये कुरानी दुआएं कसरत से मांगें:

1. नेक औलाद की दुआ

رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
रब्बि हब ली मिनस-सालिहीन
(ऐ मेरे रब! मुझे नेक औलाद अता फरमा।) - सूरह साफ्फात: 100

2. नमाज़ी बनाने की दुआ

رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ
रब्बिज-अल्नी मुकीमस-सलाति व मिन ज़ुर्रिय्यती, रब्बना व तकब्बल दुआ
(ऐ मेरे रब! मुझे और मेरी औलाद को नमाज़ कायम करने वाला बना, ऐ हमारे रब! मेरी दुआ कबूल फरमा।) - सूरह इब्राहीम: 40

3. आँखों की ठंडक के लिए दुआ

رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना कुर्र-त अअ्-युनिवं-वज-अल्ना लिल-मुत्तकीना इमामा
(ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और औलाद से आँखों की ठंडक अता फरमा और हमें परहेज़गारों का इमाम बना।) - सूरह फुरकान: 74

4. शैतान और नज़र से हिफाज़त की दुआ

नबी (ﷺ) हज़रत हसन और हुसैन (रज़ि.) के लिए यह दुआ पढ़ते थे: أُعِيذُكُمَا بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لاَمَّةٍ
उईज़ुकुमा बि-कलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन कुल्लि शैतानिन व हाम्-मतिन व मिन कुल्लि अइनिन लाम-मतिन
(मैं तुम दोनों को अल्लाह के पूरे कलिमात की पनाह में देता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर बुरी नज़र से।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. बच्चे जिद्दी हो जाएं तो क्या करें?
A.

बच्चों की ज़िद के पीछे की वजह समझें। हर ज़िद पूरी न करें, लेकिन प्यार से मना करें। उनके लिए हिदायत की दुआ करें और घर का माहौल शांत रखें।

Q. बच्चों को नमाज़ का आदी कैसे बनाएं?
A.

7 साल की उम्र से उन्हें अपने साथ नमाज़ के लिए खड़ा करें। प्यार से बुलाएं, इनाम दें और नमाज़ के फायदे बताएं। सख्ती न करें।

Q. क्या बच्चों को मारना जायज़ है?
A.

तरबियत के लिए हल्की सज़ा की इजाज़त है, लेकिन चेहरे पर मारना या इतना मारना जिससे निशान पड़ जाए, इस्लाम में सख्त मना है। प्यार से समझाना ज़्यादा बेहतर है।


अल्लाह हम सबको अपनी औलाद की सही इस्लामी तरबियत करने की तौफीक अता फरमाए और हमारी औलाद को हमारे लिए सदका-ए-जारिया बनाए। आमीन।

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